रात के एक बजे घर में सन्नाटा था। रमेश अपनी भाभी रेखा को घुटनों पर बैठाकर उसके बालों में उंगलियाँ गड़ाए हुए था। उसका लंड भाभी के गले तक घुसा हुआ था। रेखा की आँखों से आँसू बह रहे थे, लेकिन रमेश ने उसका सिर और ज़ोर से पकड़ लिया।
“चूस… और अंदर ले,” वह फुसफुसाया।
रेखा का गला भर गया। रमेश ने अचानक धक्का दिया और अपना गरम-गरम वीर्य सीधे उसके गले में उड़ेल दिया। भाभी का शरीर काँप उठा। वह साँस लेने की कोशिश कर रही थी, लेकिन रमेश ने दो मिनट तक उसका सिर नहीं छोड़ा। आखिरकार जब उसने सिर हटाया, रेखा खाँसते हुए फर्श पर गिर पड़ी।
“स्वाद कैसा लगा?” रमेश ने पूछा, मुस्कुराते हुए।
“कड़वा… दर्द हो रहा है,” रेखा ने रोते हुए जवाब दिया।
“अगर और बोली तो फिर मुँह में डाल दूँगा।”
रेखा चुप हो गई। रमेश ने उसे खड़ा किया और उसके कपड़े ठीक करने लगा। उसने भाभी की चड्डी अपनी जेब में रख ली और सिर्फ पेटीकोट पहनने को कहा। ब्लाउज बाँधते समय उसने अपना फिर से खड़ा लंड भाभी की गांड से रगड़ा।
रेखा ने पीछे मुड़कर उसे चूमा। “कल और करो…” वह फुसफुसाई और चुपके से अपने कमरे में चली गई।
सुबह नौ बजे रमेश नंगी हालत में उठा। जल्दी कपड़े पहने और बाथरूम की तरफ गया। दरार से झाँका तो छोटी भाभी मीना नहा रही थी। सिर्फ ब्रा और पेटीकोट में।
पानी उसके स्तनों पर बह रहा था। रमेश ने फोन निकालकर उसकी तस्वीरें खींच लीं। फिर वापस कमरे में आकर उन तस्वीरों को देखते हुए मुठ मारने लगा, लेकिन अंत में रुक गया। सारा वीर्य रेखा के लिए बचाना था।
बाहर निकलते ही रेखा इंतजार कर रही थी। दोनों दीवार के पीछे छिप गए। रेखा ने रमेश को जोर से चूमा। “तुम्हारा लंड अब मेरा पति है,” उसने कहा। रमेश ने उसकी चूत पर अपना उभार रगड़ा। रेखा सिसकारियाँ लेने लगी।
“शाम को मिलेंगे,” रमेश ने कहा।
“डर क्यों लग रहा है?” रेखा ने चिढ़ाया।
दोपहर में इलेक्ट्रॉनिक्स की दुकान पर भाई ने बताया कि उसे सात दिन का दौरा करना है। उसने रमेश को दुकान और घर सौंप दिया। छोटी भाभी मीना लाल साड़ी में खाना लेकर आई। रमेश ने कल्पना की कि उसकी चूत कितनी काली और मोटी होगी।
भाई ने मीना से कहा, “रात को तैयार रहना।” मीना मुस्कुरा दी।
रमेश ने सोचा—आज रात वह दोनों भाभियों को चोदेगा। एक को चुपके से देखेगा, दूसरी को जोर-जोर से चोदेगा।
रात दस बजे भाई ट्रेन पकड़कर चला गया। रमेश ने रेखा को संदेश भेजा—”आज रात पूरा चोदूँगा।”
रेखा ने जवाब दिया—”मीना भी तैयार है।”
रमेश की साँसें तेज़ हो गईं। उसने सोचा, आज दोनों भाभियों की चूतें एक साथ चाटेगा और चोदेगा।
घर में अंधेरा छा गया। रमेश ने पहले मीना के कमरे की तरफ रुख किया। दरवाज़े के पास खड़ा होकर उसने अंदर झाँका। मीना नंगी लेटी थी। उसके स्तन ऊपर-नीचे हो रहे थे। रमेश ने चुपके से अंदर घुसा और मीना के पास बैठ गया।
“भैया चले गए,” उसने फुसफुसाया।
मीना ने आँखें खोलीं। “तुम यहाँ?”
“चुपचाप चोदने आया हूँ।”
मीना ने कोई विरोध नहीं किया। रमेश ने उसकी टाँगें खोलीं और उसकी चूत चाटने लगा। मीना का शरीर काँपने लगा। उसने रमेश के बाल पकड़ लिए।
“और अंदर…” मीना ने कहा।
रमेश ने अपना लंड निकाला और मीना की चूत में घुसा दिया। धीरे-धीरे धक्के मारने लगा। मीना की सिसकारियाँ बढ़ गईं।
“ज़ोर से…”
रमेश ने रफ्तार बढ़ा दी। मीना का शरीर लहराने लगा। उसने रमेश को कसकर पकड़ लिया।
“मेरा वीर्य अंदर डालो,” मीना ने कहा।
रमेश ने अंतिम धक्का मारा और मीना की चूत में झड़ गया। दोनों साँस लेते रहे।
रमेश ने मीना को चूमते हुए कहा, “अब रेखा की बारी।”
वह उठा और रेखा के कमरे में गया। रेखा पहले से ही नंगी लेटी थी। रमेश ने बिना कुछ बोले उसकी चूत में लंड डाल दिया। रेखा चीख पड़ी।
“आज पूरी रात चोदूँगा,” रमेश ने कहा।
रेखा ने अपनी टाँगें रमेश की कमर में लपेट लीं। दोनों जोर-जोर से चुदाई करने लगे।
घर में दोनों भाभियों की चीखें गूँज रही थीं। रमेश एक के बाद एक दोनों को चोदता रहा। सुबह चार बजे तक वह थककर गिर पड़ा।
दोनों भाभियाँ उसके दोनों तरफ लेटी थीं। रमेश ने सोचा—ये सात दिन स्वर्ग जैसे होंगे।
अगली सुबह रमेश ने दोनों भाभियों को नहाने के लिए कहा। दोनों नंगी बाथरूम में गईं। रमेश ने उन्हें नहाते हुए देखा। पानी उनके स्तनों पर बह रहा था। वह फिर से खड़ा हो गया।
“फिर से चोदो,” रेखा ने कहा।
रमेश ने दोनों को दीवार से टिका कर एक-एक करके चोदा। दोनों भाभियाँ चीख-चीख कर चुदाई करवाती रहीं।
दोपहर में रमेश ने दुकान खोली। दोनों भाभियाँ लाल-लाल साड़ियाँ पहनकर खाना लेकर आईं। रमेश ने उन्हें दुकान के अंदर ही चोदा।
“कोई आ जाएगा,” रेखा ने कहा।
“चोदने दो,” रमेश ने जवाब दिया।
दोनों भाभियों ने बारी-बारी से रमेश का लंड चूसा। रमेश ने दोनों के मुँह में झड़कर उन्हें चुप करा दिया।
शाम को घर लौटते समय रमेश ने सोचा—ये सात दिन खत्म होने के बाद भी दोनों भाभियाँ उसके साथ चुदवाती रहेंगी।
रात को फिर से तीनों ने एक साथ चुदाई की। रमेश ने दोनों भाभियों की गांड भी मारी। दोनों चीखती रहीं, लेकिन मज़ा लेती रहीं।
“अब हम दोनों तुम्हारी पत्नियाँ हैं,” रेखा ने कहा।
“हाँ,” मीना ने भी सहमति जताई।
रमेश ने दोनों को चूमते हुए कहा, “तुम दोनों मेरी रंडियाँ हो।”
दोनों भाभियाँ हँस पड़ीं।