मोहन नाम के 25 साल के युवक की यह कहानी भोपाल से रायपुर की ट्रेन यात्रा की है। वह अपनी पढ़ाई पूरी करके घर लौट रहा था। नागपुर स्टेशन पर उसकी मुलाकात सुहाना आंटी से हुई जो 30-32 साल की गोरी रंगत वाली महिला थीं। उनका फिगर 34-32-36 था और वे अकेले यात्रा कर रही थीं।
मोहन ने ट्रेन के समय के बारे में बताया और फिर दोनों की बातचीत शुरू हो गई। सुहाना आंटी रायपुर जा रही थीं अपनी बहन से मिलने। मोहन ने भी बताया कि वह रायपुर का ही रहने वाला है और पढ़ाई पूरी करके घर लौट रहा है।
ट्रेन में भीड़ बहुत थी। मोहन ने सुहाना आंटी को बैठने की जगह दी और खुद खड़े रहे। कुछ देर बाद जब जगह खाली हुई तो सुहाना आंटी ने उन्हें पास बैठने को कहा। रात का सफर था और सभी यात्री सो चुके थे।
सुहाना आंटी थकान के कारण सो गईं और उनका सिर मोहन के कंधे पर टिक गया। मोहन उनके स्तनों को देख रहे थे जो ब्लाउज से दिख रहे थे। अचानक सुहाना आंटी का हाथ उनकी जांघ पर आ गया और फिर धीरे-धीरे उनकी जिप के पास पहुंच गया।
मोहन का लंड खड़ा हो गया था। सुहाना आंटी ने उनके लंड को सहलाना शुरू कर दिया। मोहन बेचैन हो गए और उन्होंने सुहाना आंटी के कान में बाथरूम चलने का सुझाव दिया।
सुहाना आंटी तैयार हो गईं। पहले वे बाथरूम गईं और फिर मोहन गए। ट्रेन में सभी सो रहे थे। बाथरूम में पहुंचकर सुहाना आंटी ने मोहन का लंड बाहर निकाला और चूसने लगीं।
मोहन पागल हो रहे थे। उन्होंने सुहाना आंटी के स्तनों को दबाया और फिर उनकी साड़ी ऊपर उठाकर पैंटी उतार दी। सुहाना आंटी को घोड़ी बनाकर उन्होंने उनकी चूत में लंड घुसा दिया।
सुहाना आंटी भी जोर-जोर से चीख रही थीं और मोहन का साथ दे रही थीं। उन्होंने दो बार झड़कर मोहन के लंड को गीला कर दिया। मोहन ने भी सुहाना आंटी की चूत में अपना माल छोड़ दिया।
दोनों ने कपड़े ठीक किए और बारी-बारी से बाथरूम से बाहर आए। ट्रेन का सफर अब और भी रोमांचक हो गया था। सुहाना आंटी और मोहन दोनों थककर अपनी सीट पर बैठ गए।
सुहाना आंटी का हाथ अब भी मोहन की जांघ पर था। वे दोनों मुस्कुरा रहे थे। ट्रेन आगे बढ़ रही थी और दोनों को यह सफर यादगार बन गया था।
मोहन ने सुहाना आंटी से पूछा कि क्या वे फिर मिलेंगी। सुहाना आंटी ने हां में जवाब दिया। उन्होंने बताया कि वे अक्सर रायपुर आती जाती रहती हैं।
ट्रेन नागपुर से रायपुर की ओर बढ़ रही थी। दोनों की आंखों में चमक थी। सुहाना आंटी ने मोहन के कान में कहा कि वे रायपुर पहुंचकर और भी मजा करेंगे।
मोहन का लंड फिर से खड़ा हो गया था। सुहाना आंटी ने उन्हें आश्वस्त किया कि रायपुर पहुंचकर वे दोनों और भी अच्छा समय बिताएंगे।
ट्रेन की रफ्तार बढ़ रही थी। सुहाना आंटी और मोहन दोनों सोच रहे थे कि आगे क्या होगा। दोनों की सांसें तेज हो रही थीं।
सुहाना आंटी ने मोहन के लंड को फिर से छुआ। मोहन ने उनकी साड़ी के अंदर हाथ डाला और उनकी चूत को सहलाया। सुहाना आंटी की चूत फिर से गीली हो रही थी।
ट्रेन में अंधेरा था। दोनों ने फिर से बाथरूम जाने का फैसला किया। इस बार सुहाना आंटी ने मोहन को पीछे से चोदने को कहा।
मोहन ने सुहाना आंटी की गांड को थपथपाया और फिर उनका लंड उनकी गांड में घुसा दिया। सुहाना आंटी जोर-जोर से चीख रही थीं।
दोनों ने घंटों तक सेक्स किया। सुहाना आंटी तीन बार झड़ चुकी थीं। मोहन ने भी दो बार उनका माल निकाला।
ट्रेन रायपुर पहुंचने वाली थी। दोनों ने कपड़े ठीक किए और अपनी सीट पर बैठ गए। सुहाना आंटी ने मोहन को अपना फोन नंबर दिया।
रायपुर स्टेशन पर दोनों उतरे। सुहाना आंटी ने मोहन से वादा किया कि वे जल्दी मिलेंगे। मोहन ने भी वादा किया कि वे सुहाना आंटी को बुलाएंगे।
मोहन घर पहुंचा और सुहाना आंटी अपनी बहन के घर गईं। दोनों की यादें ट्रेन के सफर की थीं।
मोहन ने सुहाना आंटी को फोन किया। सुहाना आंटी ने उन्हें अपने घर बुलाया। मोहन सुहाना आंटी के घर पहुंचा।
सुहाना आंटी ने मोहन को नंगा करके बिस्तर पर लिटा दिया। उन्होंने मोहन के लंड को चूसना शुरू कर दिया। मोहन सुहाना आंटी के स्तनों को चूस रहे थे।
सुहाना आंटी ने मोहन को अपनी चूत में लंड डालने को कहा। मोहन ने सुहाना आंटी को चोदना शुरू कर दिया। सुहाना आंटी जोर-जोर से चीख रही थीं।
दोनों ने पूरी रात सेक्स किया। सुहाना आंटी ने मोहन को अपनी गांड भी चोदने दी। मोहन ने सुहाना आंटी की गांड में माल छोड़ा।
सुहाना आंटी ने मोहन से कहा कि वे अब उनकी रखैल बन गई हैं। मोहन ने सुहाना आंटी को अपनी पत्नी बनाने का वादा किया।
दोनों की जिंदगी अब सेक्स से भरी हो गई थी। सुहाना आंटी हर रोज मोहन को बुलातीं और दोनों सेक्स करते।
मोहन की जिंदगी अब स्वर्ग बन गई थी। सुहाना आंटी उनकी हर इच्छा पूरी करतीं। दोनों एक-दूसरे के बिना नहीं रह सकते थे।
ट्रेन के उस सफर ने दोनों की जिंदगी बदल दी थी। सुहाना आंटी और मोहन अब हमेशा साथ रहते।
मोहन ने सुहाना आंटी से शादी कर ली। दोनों की शादी हो गई और वे खुशी से रहने लगे।
सुहाना आंटी गर्भवती हो गईं। मोहन ने उनका ख्याल रखा। दोनों का बच्चा पैदा हुआ।
मोहन की जिंदगी अब पूरी तरह बदल गई थी। सुहाना आंटी उनकी पत्नी बन गई थीं और दोनों खुशी से रहते थे।
ट्रेन के उस सफर की यादें दोनों के मन में हमेशा रहतीं। सुहाना आंटी और मोहन दोनों उस दिन को याद करते।
मोहन ने सुहाना आंटी से पूछा कि क्या वे फिर ट्रेन में सेक्स करेंगे। सुहाना आंटी ने हां में जवाब दिया।
दोनों ने फिर से ट्रेन में सफर किया। इस बार भी उन्होंने बाथरूम में सेक्स किया।
सुहाना आंटी ने मोहन को बताया कि वे उनकी गुलाम बन गई हैं। मोहन ने सुहाना आंटी को अपनी रानी बताया।
दोनों की जिंदगी अब सेक्स और प्यार से भरी थी। सुहाना आंटी और मोहन दोनों खुश थे।
ट्रेन के उस सफर ने दोनों को हमेशा के लिए जोड़ दिया था। सुहाना आंटी और मोहन अब कभी अलग नहीं हुए।