मिसेज़ बरखा 41 साल की एक बेहद सेक्स-प्रेमी औरत थीं। दिल्ली के एक बड़े घर में पति के विदेशी दौरे के कारण अक्सर अकेली रहती थीं।
उनके साथ कॉलेज जा रही बेटी सोफिया और नौकर बिल्लू रहते थे। बरखा को हमेशा से तीन लंड एक साथ चाहिए होते थे।
उन्होंने कभी भी सेक्स के बारे में शर्म महसूस नहीं की।
सोफिया भी धीरे-धीरे अपनी माँ जैसी हो चुकी थी। वो भी खुलकर लंड और चूत की बातें करती थी।
बरखा ने ठान लिया कि सोफिया को बाहर के लड़कों के साथ नहीं जाने देंगे। सारा मजा घर के अंदर ही रखेंगे।
एक शाम बरखा ने सोफिया का फोन देखा। फोन में बड़े-बड़े लंडों की तस्वीरें और माँ-बेटी वाली इंसेस्ट चैट्स भरी पड़ी थीं। बरखा मुस्कुराईं।
उन्होंने सोचा—अब समय आ गया है। बेटी को नौकर बिल्लू के मोटे लंड से चुदवाया जाए। सब कुछ परिवार के अंदर ही रहे।
बरखा ने पहले से ही बिल्लू के आठ इंच मोटे लंड से खेल रखा था। हाथ से मालिश, नंगी होकर मालिश करवाना, अपनी चूत और गांड चटवाना—लेकिन कभी उसे अपनी चूत में नहीं लिया था।
उस रात बरखा ने बिल्लू को बुलाया। वो नंगा होकर कमरे में आया। बरखा घुटनों के बल बैठ गईं और उसके लंड को मुँह में ले लिया।
जीभ से चूसने लगीं। बिल्लू की साँसें तेज़ हो गईं।
बरखा ने सोफिया को भी बुला लिया। सोफिया ने दरवाज़ा खोला तो माँ नंगी घुटनों पर बैठी अपने नौकर का लंड चूस रही थीं।
सोफिया स्तब्ध रह गई। लेकिन उसकी चूत गीली हो गई।
बरखा ने बेटी को पास बुलाया। उसकी ड्रेस उतार दी। सोफिया अब पूरी तरह नंगी थी। बरखा ने उसका हाथ पकड़कर बिल्लू के लंड पर रखा।
“पकड़ ले बेटा, ये तेरा पहला लंड है।”
सोफिया ने झिझकते हुए लंड पकड़ा। बरखा ने उसका सिर आगे बढ़ाया। सोफिया ने अनिच्छा से लंड के सिरे को होंठों से छुआ। फिर धीरे-धीरे मुँह में ले लिया।
बरखा ने बेटी की गरम चूत पर उँगलियाँ फिराईं। सोफिया की चूत इतनी गीली थी कि उँगलियाँ फिसल रही थीं। बरखा समझ गईं—बेटी को अभी लंड चाहिए।
बरखा ने बेटी को बिस्तर पर लिटा दिया। बिल्लू को ऊपर चढ़ा दिया। एक ही जोरदार झटके में बिल्लू ने सोफिया की कुंवारी चूत फाड़ दी। सोफिया चीख पड़ी। बरखा ने तुरंत तकिया उसके मुँह पर दबा दिया।
“चुप बेटा, सह ले। दर्द थोड़ी देर में खुशी बन जाएगा।”
बिल्लू जोर-जोर से चोदने लगा। सोफिया की चूत से खून निकल रहा था। वो दर्द से कराह रही थी। लेकिन धीरे-धीरे उसकी चीखें moans में बदल गईं।
बिल्लू बोल रहा था, “आपी, मैं रोज़ तेरी चूत के बारे में सोचकर हिलाता था। अब तेरी चूत रोज़ मेरी होगी। तेरी गांड भी चाटूँगा। तेरी माँ की चूत भी चोदूँगा।”
सोफिया पहले गालियाँ दे रही थी। फिर अचानक बोली, “और जोर से चोदो… और गहरा… मेरा लंड… मेरा लंड…”
दोनों एक साथ झड़ गए। बिल्लू ने सोफिया की चूत में झड़ते हुए गरम-गरम वीर्य भर दिया। बरखा और सोफिया दोनों उसके लंड को चाटने लगीं।
लंड फिर से खड़ा हो गया। सोफिया ने उसे पकड़ लिया। वो अपनी माँ की चूत में उँगलियाँ डालने लगी।
“अब मैं अपनी माँ को चुदवाऊँगी।”
सोफिया ने बिल्लू को अपनी माँ के ऊपर चढ़ा दिया। खुद माँ के चेहरे पर बैठ गई। बरखा की चूत में बिल्लू का लंड घुस गया। बरखा खुशी से चीख उठीं।
सोफिया माँ के मुँह पर बैठी अपनी चूत रगड़ रही थी। बिल्लू माँ को जोर-जोर से चोद रहा था।
बरखा कुत्ते जैसी मुद्रा में हो गईं। बिल्लू उनकी चूत चोद रहा था। फिर अचानक उसने लंड निकालकर सीधा गांड में घुसा दिया।
बरखा चीखीं, “साली हरामजादे… गांड फाड़ दी… लेकिन अब ठीक से चोद… गांड फाड़ डाल।”
बिल्लू ने उनकी गांड भी जोर-जोर से मारी। तीनों थककर गिर पड़े।
उस रात के बाद हर रोज़ सुबह, दोपहर और रात को बिल्लू माँ और बेटी दोनों को चोदता।
बरखा सोफिया के कॉलेज के दोस्तों को घर बुलातीं। सोफिया को उनसे चुदवातीं। सोफिया अपने बॉयफ्रेंड्स को लाती। बरखा उनसे चुदवातीं।
घर में अब सिर्फ चूत-चोदने का माहौल था। हर कोई नंगा घूमता। हर कोई हर किसी को चोदता।
बरखा अक्सर सोफिया से पूछतीं, “बेटा, आज किससे चुदवाना है?”
सोफिया मुस्कुराकर जवाब देती, “आज बिल्लू से, फिर तेरे बॉयफ्रेंड से।”
बरखा हँसतीं, “ठीक है बेटा। आज रात दोनों माँ-बेटी एक साथ चुदेंगी।”
बिल्लू अब परिवार का हिस्सा बन चुका था। वो माँ और बेटी दोनों की चूत और गांड चाटता। दोनों को अपनी मोटी लंड से संतुष्ट करता।
एक शाम सोफिया ने बरखा से कहा, “माँ, आज मैं तेरी चूत चाटूँगी और बिल्लू तेरी गांड मारेगा।”
बरखा ने बेटी को गले लगाया, “बेटा, तू मेरी जान है। आज रात पूरा घर चीखेगा।”
रात को तीनों नंगे बिस्तर पर लेटे। बिल्लू सोफिया की चूत चाट रहा था। सोफिया माँ की चूत चाट रही थी। बरखा दोनों के सिर दबाए हुए थीं।
बिल्लू ने सोफिया को कुत्ते जैसी मुद्रा में किया। उसकी चूत में लंड घुसाया। सोफिया चीखी, “और जोर से… माँ देख रही है… मुझे और चोदो।”
बरखा बेटी के मुँह में अपनी चूत रगड़ रही थीं। सोफिया माँ की चूत चूस रही थी।
बिल्लू ने सोफिया की गांड में उँगली डाली। सोफिया ने और जोर से चीखा।
“माँ, मेरी गांड भी चोदवाओ ना… आज पूरी तरह चुद जाऊँ।”
बरखा ने बिल्लू से कहा, “बेटी की गांड भी फाड़ डाल। आज दोनों माँ-बेटी की गांडें फटेंगी।”
बिल्लू ने सोफिया की गांड में लंड घुसाया। सोफिया दर्द से कराह रही थी। लेकिन वो और गहरा चाहती थी।
“और गहरा… गांड फाड़ डाल… आज मैं पूरी तरह तेरी रंडी हूँ।”
बरखा बेटी के चेहरे पर बैठी थीं। सोफिया माँ की चूत चाट रही थी। बिल्लू बेटी की गांड मार रहा था।
तीनों एक साथ झड़ गए। बिल्लू ने सोफिया की गांड में झड़ते हुए गरम वीर्य भर दिया।
बरखा और सोफिया दोनों उसके लंड को चाटने लगीं।
उस रात के बाद माँ-बेटी और नौकर की दिनचर्या बदल गई। अब हर सुबह बिल्लू माँ और बेटी दोनों की चूत चाटता।
फिर दोनों को बारी-बारी से चोदता।
दोपहर को जब पति बाहर होते, तीनों नंगे घर में घूमते। बिल्लू माँ को किचन में चोदता। बेटी देखती। फिर बेटी को भी चोदता।
रात को तीनों एक ही बिस्तर पर सोते। बिल्लू दोनों की चूत और गांड मसलता। दोनों माँ-बेटी एक-दूसरे की चूत चाटतीं।
बरखा ने सोफिया के दोस्तों को भी घर बुलाना शुरू कर दिया।
सोफिया के दोस्त बड़े-बड़े लंड वाले लड़के होते। बरखा उन्हें नंगी होकर स्वागत करतीं।
“आओ बेटा, आज माँ-बेटी दोनों तुम्हें चूसेंगी।”
सोफिया के दोस्त हैरान रह जाते। लेकिन जब बरखा उनकी चूत चूसतीं, तो सब कुछ भूल जाते।
सोफिया अपने बॉयफ्रेंड्स को लाती। बरखा उनके लंड चूसतीं। फिर दोनों माँ-बेटी उनसे चुदवातीं।