जून 2024 की एक गर्म रात थी। नैनीताल की पहाड़ी बंगले में पूरा परिवार छुट्टियाँ मना रहा था। मैं अमन, उम्र 27, तीन साल से नेहा से शादीशुदा। मेरी साली सिया उम्र 19, बिल्कुल कुंवारी, गोरी चमड़ी, पतली कमर, गोल-गोल गांड और छोटी-छोटी तनी हुई छातियाँ।
रात के साढ़े ग्यारह बजे नेहा को सिरदर्द हो गया और वह जल्दी सो गई। मैं छत पर निकल आया। वहाँ पहले से सिया खड़ी थी, उसने छोटी नीली नाइटी पहनी हुई थी। चाँदनी में उसकी जाँघें चमक रही थीं।
सिया ने मुझे देखकर मुस्कुराते हुए कहा, “जीजा जी, आप भी नींद नहीं आ रही?”
मैं उसके पास गया। उसकी आँखों में चमक थी। बिना कुछ बोले मैंने उसका मुँह अपने मुँह से ढक लिया। उसकी होंठ नरम और गर्म थे। जीभ से जीभ लड़ाई शुरू हो गई। मेरे हाथ उसके छोटे स्तनों पर गए। नाइटी के ऊपर से ही मैंने उसके निप्पल चूसने लगे। सिया की साँस तेज हो गई।
“जीजा… कोई देख लेगा…”
“कोई नहीं है।”
मैंने नाइटी ऊपर खिसकाई। उसके नंगे स्तन बाहर आ गए। मैंने एक निप्पल मुँह में लिया और जोर से चूसा। दूसरा हाथ उसके पैंटी में घुसा। उसकी चूत बिल्कुल साफ और गीली थी। उँगली डाली तो अंदर तक कसी हुई लगी।
“सिया, तू अभी तक कुंवारी है?”
“हाँ जीजा…”
मैंने उसकी चूत में दो उँगलियाँ डाल दीं। हymen छूने लगा। सिया काँप रही थी। मैंने अपनी पैंट उतारी। मेरा सात इंच का लंड खड़ा हो चुका था। जेब से तेल की शीशी निकाली और अपने लंड पर और उसकी चूत पर लगाया।
“दर्द होगा सिया…”
“धीरे से करना…”
मैंने उसे छत के फर्श पर लिटाया। मिशनरी पोजीशन में उसके दोनों पैर अपने कंधों पर रखे। लंड का सिरा उसकी चूत के मुंह पर रखा। धीरे-धीरे दबाव डाला।
“आह… जीजा…”
लंड का सिरा अंदर घुसा। हymen फटा। थोड़ा खून निकला। सिया दर्द से चीख पड़ी। मैंने उसका मुँह चूम लिया और पूरा लंड अंदर ठेल दिया।
“सिया… तेरी चूत कितनी तंग है…”
“जीजा… पूरा अंदर डालो…”
मैंने जोर-जोर से धक्के मारने शुरू किए। सिया की चूत से चिकनाहट की आवाजें आ रही थीं। उसकी छोटी-छोटी छातियाँ उछल रही थीं। दस मिनट बाद सिया का शरीर काँपने लगा।
“जीजा… कुछ हो रहा है…”
उसकी चूत से पानी की फुहार निकली। वो पहली बार झड़ चुकी थी।
“अब 69 पोजीशन में…”
सिया घुटनों के बल बैठ गई। मैंने पीछे से लंड डाला। इस बार और गहराई तक पहुँच रहा था। एक हाथ से उसकी गांड थपथपा रहा था, दूसरा हाथ उसके बालों में फँसा हुआ था।
“सिया… तेरी गांड भी मारूँ?”
“हाँ जीजा… आज सब कुछ कर लो…”
मैंने उसकी चूत का रस अपनी उँगली पर लिया और उसके गुदे पर लगाया। तेल भी डाला। लंड का सिरा उसके गुदे पर रखा।
“दर्द होगा…”
“फिर भी करो…”
लंड का सिरा गुदे में घुसा। सिया चीख पड़ी। मैंने धीरे-धीरे आधा लंड अंदर डाला। फिर जोर का धक्का मारा। पूरा लंड उसके मलद्वार में घुस गया।
“आह… जीजा… फाड़ दिया…”
“अब तेरी गांड भी मेरी हो गई…”
मैंने जोर-जोर से गांड मारना शुरू किया। सिया का मुँह खुला था, जीभ बाहर निकली हुई थी। पंद्रह मिनट बाद मैंने जोर से झटका मारा और उसके गुदे में झड़ गया।
“अब मुँह में ले…”
सिया घुटनों के बल बैठ गई। मैंने उसका मुँह पकड़ा और लंड उसके गले तक ठेल दिया। सिया खाँसने लगी। मैंने उसके बाल पकड़कर मुँह चोदना शुरू किया।
“निगल ले सिया…”
मैंने उसके गले में झड़कर अपना वीर्य उतार दिया। सिया ने सब कुछ निगल लिया।
पहली रात तीनों छेदों का इस्तेमाल हो चुका था।
अगले दिन माता-पिता बाजार गए। नेहा सो रही थी। सिया और मैं लिविंग रूम के सोफे पर चुदाई करने लगे। बिना तेल के ही लंड अंदर घुस गया। सिया चीख-चीखकर चुद रही थी।
“जीजा… जोर से…”
रसोई में भी चुदाई हुई। सिया को काउंटर पर बैठाकर मैंने उसकी चूत चाटी। फिर खड़े होकर चोदा।
बाथरूम में शॉवर के नीचे भी हमने सेक्स किया। सिया की पीठ दीवार से लगी हुई थी, मेरे कंधों पर उसके पैर। पानी की बौछार के बीच हम चुद रहे थे।
बाकी तीन दिनों में हमने कुल बारह बार चुदाई की। छत पर, रेलिंग पर, फर्श पर। हर जगह।
“जीजा… मैं आपकी रंडी बन जाऊँगी…”
“दूसरी बीवी बना दूँगा…”
सिया ने वादा किया कि वह हमेशा मेरी रहेगी।
ट्रिप खत्म होने के बाद भी हमारी चुदाई जारी रही। होटलों में, कार में, सिनेमा हॉल में। एक फैमिली वेडिंग में गेस्ट रूम में झटपट चुदाई कर ली।
आज सिया बीस साल की हो चुकी है। हमारी अफेयर अभी भी चल रही है। नेहा को शक है लेकिन वह चुप है।
सिया अब भी कहती है, “जीजा… मेरी चूत, मेरी गांड, मेरा मुँह… सब आपका है।”
और मैं हर बार उसे चोदता हूँ जैसे पहली बार चोद रहा हूँ।