मैं आकाश हूँ दिल्ली से। जॉब की वजह से हमेशा घूमता रहता हूँ। इस बार ऑफिस ने मुझे हिमाचल के मनाली भेजा था।
एक हफ्ते का ट्रिप था मीटिंग्स के लिए। मैं सुबह की फ्लाइट से चला और शाम तक मनाली पहुँच गया। होटल चेक इन करके थकान मिटाने के लिए बाहर घूमने निकला।
मनाली की सड़कें ठंडी हवा से भरी हुई थीं। सेब के बाग चारों तरफ फैले हुए। मैंने एक लोकल कैफे में कॉफी ऑर्डर की। वहाँ मेरी नजर एक लड़की पर पड़ी।
वो हिमाचली थी। गोरी चिट्टी, लंबे काले बाल, कसी हुई जींस और टाइट टॉप पहने हुए। उसकी आँखें बड़ी बड़ी और होंठ गुलाबी। नाम था प्रिया। वो कैफे में वेट्रेस थी।
“भाई साहब कॉफी?” उसने मुस्कुराते हुए पूछा।
“हाँ बहन जी ब्लैक कॉफी।” मैंने भी हँसते हुए कहा।
वो कॉफी लाई और पास ही टेबल पर बैठ गई। ब्रेक टाइम था उसका। हम बातें करने लगे। प्रिया ने बताया कि वो यहाँ लोकल फैमिली के साथ रहती है।
पापा किसान हैं सेब के बाग में। मम्मी घर संभालती हैं। एक छोटा भाई है स्कूल में। वो 22 साल की थी। कॉलेज ड्रॉप आउट हो गई थी शादी के प्रेशर से।
“तुम्हारी शादी कब हो रही है?” मैंने पूछा।
“अभी कुछ नहीं। घरवाले लड़का ढूँढ रहे हैं। लेकिन मुझे पसंद नहीं आता कोई।” वो शरमाई।
हमारी बातें चलती रहीं। मैंने अपना नंबर दिया। “कल मिलोगे?” उसने पूछा।
“हाँ क्यों नहीं।” मैं खुश हो गया।
अगले दिन मैंने उसे मैसेज किया। वो मिली सोलंग वैली के पास। हम घूमने लगे। हिमाचल की वादियाँ कितनी खूबसूरत। बर्फीली चोटियाँ।
वो मेरे करीब आने लगी। हाथ पकड़ लिया।
“आकाश भैया तुम अच्छे हो।” उसने कहा।
“प्रिया तू भी कमाल की है। तेरी ये आँखें देखकर तो दिल धड़क रहा है।” मैंने उसके गाल पर हाथ फेरा।
शाम हो गई। हम एक पार्क में बैठे। वो मेरे कंधे पर सिर रख दिया। मैंने उसके होंठ चूम लिए। वो शरमाई लेकिन रोका नहीं।
हमारा पहला किस हो गया। उसकी जीभ मेरी जीभ से लिपट गई। सॉफ्ट सॉफ्ट होंठ।
“आकाश यहाँ नहीं। चलो कहीं और।” वो बोली।
मैंने उसे मेरे होटल ले जाने का प्लान बनाया। लेकिन वो बोली घरवालों को शक हो जाएगा। तो हमने पास के जंगल में जाने का फैसला किया।
सोलंग के पास एक सुनसान जगह।
रात हो चुकी थी। चाँदनी रात। हम एक पेड़ के नीचे लेट गए। मैंने उसके कपड़े उतारने शुरू किए। पहले टॉप निकाला।
काले ब्रा में उसके बड़े बड़े बूब्स। 36D साइज के। गोल गोल। मैंने ब्रा खींची। निप्पल्स गुलाबी। सख्त हो चुके।
“आह आकाश धीरे।” वो सिसकी।
मैंने एक बूब मुँह में लिया। चूसने लगा। जीभ से घुमाया। दूसरे हाथ से दबाया। वो मदहोश हो गई। “उम्म आह्ह्ह।”
फिर जींस खोली। पैंटी गीली। चूत के बाल हल्के। मैंने पैंटी नीचे सरका दी। उसकी चूत गुलाबी। रसीली। मैंने उंगली डाली। गीली गीली। “प्रिया तेरी चूत कितनी टाइट है। कौन साला चोदा है अभी तक?”
“कोई नहीं आकाश। मैं कुंवारी हूँ। पहली बार तुझे दूँगी।” वो बोली।
मैं खुश हो गया। अपना लंड निकाला। 8 इंच का मोटा। वो देखकर डर गई। “इतना बड़ा? दर्द होगा।”
“चिंता मत कर। मज़ा आएगा।” मैंने कहा।
मैंने उसे लिटाया। चूत पर जीभ रखी। चाटने लगा। क्लिट चूसा। वो उछलने लगी। “आह्ह्ह आकाश मार डालोगे। चूत चाटो और।”
10 मिनट चाटा। वो झड़ गई। चूत से पानी निकला। मैंने लंड चूत पर रगड़ा। फिर धक्का दिया। टाइट चूत। आधा लंड घुसा। वो चीखी। “दर्द हो रहा है। निकालो।”
“रुक जा।” मैंने किस किया। फिर पूरा धक्का। चूत फट गई। खून निकला। वो रोने लगी। मैं रुका।
5 मिनट बाद धीरे धीरे चोदने लगा। स्पीड बढ़ाई। चपचप आवाज। “प्रिया तेरी चूत स्वर्ग है।”
“हाँ आकाश चोदो अपनी रंडी को।” वो अब मज़े लेने लगी।
20 मिनट चोदा। डॉगी स्टाइल। बूब्स झूल रहे। गांड पर थप्पड़ मारा। फिर मिशनरी। आखिर में मुंह में झाड़ा। गर्म गर्म वीर्य। वो निगल गई।
“स्वादिष्ट।” बोली।
हम नंगे लेटे रहे। बातें कीं। वो बोली घर में भाई है लेकिन वो सो जाता है रात को। कल घर बुलाएगी।
अगले दिन मीटिंग खत्म करके मैं उसके घर पहुँचा। छोटा सा घर। पापा मम्मी खेत गए थे। भाई स्कूल। घर खाली। वो ने मुझे अंदर लिया।
“चाय पियोगे?” पूछा।
“हाँ लेकिन पहले तुझे।” मैंने उसे दीवार से सटा लिया। किस करने लगा। जीभ अंदर। हाथ बूब्स पर।
वो मेरे पैंट खोली। लंड बाहर। मुंह में लिया। ब्लोजॉब। जीभ से चाटा। गले तक लिया। “गांडू कितना मोटा है।”
मैंने उसे बेडरूम ले जाया। बेड पर पटक दिया। कपड़े फाड़े। नंगी। चूत पर मुंह। चाटा। फिर लंड डाला। जोरदार चुदाई। बेड हिल रहा। “चोदो आकाश। फाड़ दो चूत।”
“ले रंडी।” थप्पड़ मारा गांड पर।
एक घंटे चोदा। हर पोजिशन। काउगर्ल। रिवर्स। साइड। आखिर में गांड मारी। पहली बार गांड दी। टाइट। चीखी बहुत। लेकिन मज़ा आया। वीर्य गांड में भरा।
फिर नहाने गए। साथ शावर। वहाँ फिर चुदाई। साबुन लगाकर चोदा।
शाम तक 4 राउंड। वो थक गई। “आकाश तू मर्द है।”
मैं बोला “कल फिर आऊंगा।”
तीसरे दिन हम रोहतांग गए। बर्फबारी। एक गुफा में घुसे। ठंड से बचने को। वहाँ गर्मी बढ़ाई। कपड़े उतारे।
बर्फ पर लेटे चुदाई। ठंडा बाहर गर्म अंदर। चूत गर्म। लंड अंदर। “आह्ह ठंडा मज़ा।”
वहाँ 2 घंटे। ओरल, वेजाइनल, एनल। सब किया।
चौथे दिन उसके दोस्तों के साथ पार्टी। दोस्त लड़की थी रीता। भी हॉट। लेकिन प्रिया बोली सिर्फ तू। रात उसके दोस्त के घर।
ग्रुप नहीं लेकिन प्रिया ने रीता को देखा तो जलन हुई। रात भर चोदा।
“रीता से बात मत करना।” बोली।
“जलन क्यों? तू मेरी है।” चोदते हुए कहा।
पांचवें दिन वाइल्ड। जंगल में। पेड़ से बाँधा। BDSM स्टाइल। थप्पड़, चाबुक। वो चिल्लाई। “मारो मालिक।”
चुदाई। चूत लाल।
छठे दिन घर पर। मम्मी पापा आए लेकिन छुपे। किचन में चोदा। जोखिम भरा।
“शोर मत करना।” कहा।
“हाँ लेकिन चोदो।” धीरे चोदा।
सातवें दिन जाने से पहले। फुल डे। सुबह से रात। 10 राउंड। हर होल भरा। चूत, मुंह, गांड।
“आकाश मत जाओ।” रोई।
“आऊंगा फिर।”
वापस दिल्ली। लेकिन स्टोरी खत्म नहीं। महीने बाद फिर गया। अब शादी का प्लान।