होली पर साली की मस्त चुदाई

(Holi Par Sali Ki Mast Chudai)

मेरा नाम राजा है। मैं 32 साल का हूं, एक प्राइवेट कंपनी में जॉब करता हूं। मेरी वाइफ नेहा 28 साल की है, घर संभालती है। हमारी शादी को तीन साल हो चुके हैं, और हमारा वैवाहिक जीवन काफी हॉट और संतुष्ट है।

नेहा का फिगर कमाल का है – 34-26-36, गोरी त्वचा, लंबे बाल, और वो हमेशा साड़ी में इतनी सेक्सी लगती है कि मेरा लंड तुरंत खड़ा हो जाता है। होली का दिन था, तो हमने घर पर ही रंग-गुलाल लगाया। नेहा ने सफेद सलवार सूट पहना था, जो जल्दी ही रंगों से सराबोर हो गया।

दोपहर के करीब 2 बजे हमने होली खेलना शुरू किया। मैंने नेहा को गले लगाया और उसके गालों पर गुलाबी रंग लगाया। वो हंसते हुए मेरी कमीज पर पानी की फुहार मारने लगी। ‘अरे राजा, भागो मत!’ वो चिल्लाई।

लेकिन मैंने उसे पकड़ लिया और जोर से चूम लिया। हमारे होंठ मिले, जीभें लड़ने लगीं। रंगों की महक के साथ नेहा का बदन गर्म हो गया। मैंने उसके सूट का दुपट्टा सरका दिया। उसके ब्लाउज़ के नीचे ब्रा की लाइन दिख रही थी, और चूचियां तनी हुईं। ‘नेहा, आज तो तू आग लगा रही है,’ मैंने कहा।

वो शरमाई, लेकिन आंखों में चमक थी। हम लिविंग रूम में ही गिर पड़े। मैंने नेहा का सूट उतार दिया। नीचे सिर्फ ब्रा और पैंटी। उसकी चूचियां बाहर आने को बेताब।

मैंने ब्रा खोली और एक चूची मुंह में ले ली। चूसने लगा, निप्पल को जीभ से घुमाया। नेहा सिसकारी भरने लगी, ‘आह… राजा… चूसो जोर से।’ उसका हाथ मेरी पैंट में घुस गया। मेरा लंड सख्त हो चुका था – 6 इंच का मोटा। वो सहलाने लगी।

मैंने नेहा की पैंटी नीचे सरका दी। उसकी चूत साफ-सुथरी, गीली।

मैंने चोदना शुरू किया। धीरे-धीरे, फिर तेज़। नेहा की चूचियां उछल रही थीं। ‘हां… चोदो… तेज़ करो,’ वो कराह रही थी। हमारा पसीना रंगों से मिल गया। 15 मिनट चुदाई चली। नेहा झड़ गई। मैं भी झड़ने वाला था। ‘अंदर ही डाल रहा हूं,’ मैंने कहा। स्पर्म छोड़ दिया। हम हांफते हुए लेटे रहे। नेहा ने कहा, ‘वाह, क्या चुदाई थी।

लेकिन शाम को साली आ रही है, रिया।’

रिया, नेहा की छोटी बहन। 22 साल की, कुँवारी। कॉलेज स्टूडेंट। रिया का फिगर नेहा से भी हॉट है – 32-24-34, स्लिम लेकिन कर्वी। गोरी, लंबे बाल, बड़ी-बड़ी आंखें। वो हमेशा शरमाती रहती है, लेकिन मैंने कई बार नोटिस किया कि वो मुझे घूरती है।

नेहा ने बताया कि रिया का बॉयफ्रेंड से ब्रेकअप हो गया, तो वो होली पर हमारे घर आ रही है। नेहा ने शरारत से कहा, ‘रिया को भी होली खेलवाएंगे। शायद उसकी सील तोड़ने का मौका मिल जाए।’ मैं हंस पड़ा। नेहा जानती है मेरी कमजोरी। वो खुद रिया को चिढ़ाती रहती है।

शाम 5 बजे रिया आई। लाल साड़ी में। ‘जीजा जी, दीदी!’ वो मुस्कुराई। नेहा ने गले लगाया। ‘आ होली खेल।’ हम तीनों लिविंग में। रंग लगाने लगे। रिया शरमाती रही। मैंने उसके हाथ पर रंग लगाया। उसकी त्वचा मुलायम। नेहा ने रिया की कमर पकड़ी। ‘रिया, आज मज़े कर।’ रिया हंसी। लेकिन धीरे-धीरे माहौल गर्म हुआ। नेहा ने भांग का ठंडा सर्व किया। रिया ने पी लिया। आंखें चमकने लगीं।

‘चलो डांस करें,’ नेहा बोली। म्यूजिक ऑन। रिया ने कमर मटकाई। साड़ी लहराई। मैं पीछे से देख रहा था। उसकी गांड गोल। मेरा लंड फिर खड़ा। नेहा ने मुझे इशारा किया। मैंने रिया को पकड़ा। ‘जीजा जी!’ वो चिल्लाई, लेकिन हंसी।

रंग लगाया उसके चेहरे पर। फिर गाल चूमा। रिया सिहर गई। ‘ये क्या?’ नेहा हंस रही थी। ‘होली है, सब माफ।’

रात हो गई। नेहा ने डिनर बनाया। भांग का असर सब पर था। रिया खुलने लगी। ‘जीजा जी, आप दोनों कितने खुश लगते हो।’ मैंने कहा, ‘तू भी खुश हो जा।’ नेहा ने आंख मारी। डिनर के बाद हम सोफे पर। नेहा ने रिया को अपनी गोद में बिठाया। ‘रिया, तेरी उम्र हो गई, बॉयफ्रेंड क्यों छोड़ दिया?’ रिया शरमाई। ‘वो बेवफा था।’ नेहा बोली, ‘जीजा जी जैसे अच्छे मर्द ढूंढ।’ मैं हंस पड़ा।

धीरे-धीरे नेहा ने टॉपिक मोड़ा। ‘रिया, तू कभी किसिंग तो की होगी?’ रिया ने सिर हिलाया। ‘नहीं दीदी।’ नेहा ने कहा, ‘तो आज ट्राय कर। होली है।’ रिया चौंकी। नेहा ने मुझे बुलाया। ‘राजा, रिया को सिखा।’ मैंने रिया का हाथ पकड़ा। वो कांप रही थी।

मैंने उसके होंठों पर रंग लगाया। फिर धीरे से चूमा। रिया के होंठ नरम। वो पहले रुकी, लेकिन फिर जवाब दिया। नेहा देख रही थी। ‘अच्छा है।’

किस गहरा हो गया। मेरी जीभ रिया के मुंह में। वो सीख रही थी। नेहा ने रिया का पल्लू सरका दिया। ब्लाउज़ दिखा। छोटी चूचियां। मैंने हाथ डाला। दबाया। रिया सिसकी, ‘जीजा जी… ये…’ नेहा बोली, ‘आराम से। एन्जॉय कर।’ हम बेडरूम में चले गए। लाइट डिम।

नेहा ने रिया का ब्लाउज़ खोला। ब्रा छोटी। चूचियां बाहर। गुलाबी निप्पल्स। मैंने एक को चूसा। रिया चीखी, ‘आह…’

नेहा ने रिया की साड़ी उतारी। पेटीकोट। चूत की उभार। ‘नेहा ने पूछा रिया, तू कुँवारी है न?’ रिया हां में सिर हिलाया। नेहा ने मेरी पैंट उतारी। लंड दिखा। रिया घूरने लगी। ‘जीजा जी का कितना बड़ा।’ नेहा ने रिया का हाथ लंड पर रखा। रिया कांपते हाथों से सहलाने लगी।

मैंने रिया की पेटीकोट खोली। चूत पर बाल हल्के। चूत गीली हो रही। मैंने उंगली छुई। रिया तड़पी। ‘जीजा जी… दर्द होगा।’

नेहा ने कहा, ‘पहली बार दर्द होता है, लेकिन मज़ा भी।’ मैंने रिया को लिटाया। चूत चाटने लगा। जीभ से क्लिट को छुआ। रिया कराहने लगी, ‘ओह… अच्छा लग रहा।’ नेहा ने रिया की चूचियां चूसी। रिया का रस बहने लगा। ‘दीदी… मैं…’ वो झड़ गई। पहली बार। अब मेरा टर्न। लंड चूत पर रगड़ा।

रिया बोली, ‘धीरे डालना।’ मैंने टिप डाली। टाइट। धीरे धक्का। रिया चीखी, ‘आह… फट गई।’

खून निकला। सील टूटी। नेहा ने चूमा रिया को। पूरा लंड धीरे-धीरे अंदर गया। रिया रो रही थी, लेकिन आंखें बंद। ‘मैंने पूछा अब ठीक?’ वो बोली, ‘हां… चलो।’ मैंने धीरे चोदना शुरू किया। रिया की चूत टाइट, गर्म। नेहा देख रही थी। ‘चोदो उसे अच्छे से।’ मैंने स्पीड बढ़ाई। रिया अब मज़े लेने लगी। ‘हां जीजा जी… गहरा डालो।’ चूचियां हिल रही थी।

10 मिनट बाद पोज़ बदला। रिया ऊपर। लंड पर बैठी। धीरे उछली, दर्द कम हो गया। ‘मज़ा आ रहा है।’ नेहा ने गांड पर थप्पड़ मारा। रिया तेज़ हुई। फिर मैंने पीछे से डाला। गांड पकड़ी। थप्पड़ मारे। रिया चिल्लाई, ‘हां… मारो।

नेहा ने रिया की चूत छुई। हम तीनों पसीने से तर। रिया फिर झड़ी।मैं झड़ने वाला था। ‘मैं बोला अंदर डाल रहा हू।’ रिया बोली, ‘हां जीजा जी… भरो।’ स्पर्म छोड़ा।

हम तीनों लेटे। रिया ने कहा, ‘थैंक यू। अब मैं भी एन्जॉय कर सकती हूं।’ नेहा हंसी।

होली का रंग रिया की चूत में उतर गया। रात भर हमने मस्ती की। नेहा और रिया ने साथ में मेरा लंड चूसा। फिर नेहा को चोदा, रिया देखती रही। सुबह तक थक गए। लेकिन ये होली हमेशा याद रहेगी।

फिर कभी टाइम मिला तो वो भी लिखूंगा के सारी रात कैसे मैंने चोदा उसे, और कैसे रिया की टाइट गांड को फाड़ डाला. आपको ये कहानी कैसी लगी जरूर बताये, कहानी पढ़ने के बाद अपने विचार नीचे कमैंट्स में जरूर लिखे ताकि हम आपके लिए रोज़ और बेहतर कामुक कहानियां पेश कर सके।