मेरा नाम रानी है। आज मैं अपनी वो सच्ची कहानी सुना रही हूँ जो मेरी जिंदगी को हमेशा के लिए बदल गई। गर्मियों की छुट्टियों में मैं और मेरा छोटा भाई रवि अपनी दीदी सुनीता और जीजू अनिल के पास नागपुर गए थे।
दीदी नागपुर में एक छोटे से फ्लैट में रहती हैं जहाँ इलाका थोड़ा सुनसान है। जीजू अनिल दीदी को पीटते हैं और शराब पीकर आते हैं लेकिन दीदी उनसे बहुत प्यार करती हैं और उनकी हर बात मानती हैं। रवि मुझसे छह साल छोटा है। हम दोनों दो महीने वहाँ रुकने वाले थे।
नागपुर स्टेशन पर जैसे ही ट्रेन रुकी हम बाहर निकले तो जीजू अनिल हमें लेने आ चुके थे। जीजू ने पहले रवि को गले लगाया फिर मेरी तरफ मुड़े। मैं अब बड़ी हो चुकी थी। बचपन वाली बच्ची नहीं रही। मेरी बॉडी अब कामुक हो गई थी।
बड़े-बड़े स्तन उभरे हुए थे कमर पतली गांड भरी हुई। जीजू ने मेरे माथे पर चुंबन किया और मुझे जोर से गले लगा लिया। उनके सीने से मेरे स्तन दब गए और एक अजीब सी सिहरन मेरे पूरे शरीर में दौड़ गई। मैं शर्मा गई लेकिन कुछ बोली नहीं। फिर हम कार में बैठकर घर पहुँचे।
घर पहुँचते ही दीदी सुनीता ने हमें गले लगा लिया। वो बहुत खुश थीं कि हम दो महीने रुकेंगे। रवि नीचे खेलने चला गया। मैंने बैग रखा और किचन में चली गई जहाँ दीदी और जीजू बात कर रहे थे।
अचानक जीजू की आवाज़ आई “अरे सुनीता रानी तो बहुत मस्त माल हो गई है। साली आधी बीवी होती है। इसे देखकर तो लंड खड़ा हो गया मेरा।” मैं ये सुनकर गीली हो गई। मेरी चूत में खुजली होने लगी। मैं चुपचाप बाहर आ गई।
जीजू एक कपड़े की दुकान पर काम करते थे। दोपहर और शाम को घर आते। रात के खाने पर वो मुझ पर टकटकी लगाए देख रहे थे। बोले “होली आने वाली है रानी। मैं तुझे और रवि को रंग लगाऊंगा।” सब हँसे।
घर में सिर्फ एक बिस्तर था। दीदी बोलीं “रानी तू जीजू के साथ सो जा।” मैंने मना कर दिया। हम फर्श पर सोए लेकिन मच्छर काट रहे थे और बिस्तर से चरमचर की आवाज़ आ रही थी। मैं सो नहीं पाई।
अगले दिन जीजू की दुकान पर छह दिन की छुट्टी थी। मैंने खाना बनाया। जीजू ने बहुत तारीफ की “वाह रानी तेरा खाना तो कमाल का है। रोज़ बनाना।” दीदी हँसकर बोलीं “जिजा जी को साली पर पूरा हक होता है।
रात को रवि बोला “मैं फर्श पर अकेला सो जाऊंगा ताकि तीन बड़े लोग बिस्तर पर सो सकें।” दीदी ने छोटा सा डीप नेक स्लीवलेस गाउन पहना जो बहुत सेक्सी था। बोलीं “रानी अगर तू नहीं मानी तो मैं रवि के पास फर्श पर सो जाऊंगी।” मैं मान गई। मैंने भी ढीला गाउन पहना जिसके बटन आगे खुले थे।
सोने की व्यवस्था ऐसी हुई कि जीजू एक तरफ दीदी बीच में और मैं दूसरी तरफ। सुबह आँख खुली तो मेरा गाउन के बटन खुले हुए थे। ब्रा और पैंटी दिख रही थी। दीदी का गाउन नीचे सरक गया था।
उनके बड़े स्तन नंगे थे जो मेरे से थोड़े छोटे थे। उनकी चूत गीली थी और पेट पर वीर्य का निशान था। बिस्तर से सेक्स की बदबू आ रही थी। जीजू मेरी तरफ मुँह करके लेटे थे। मैं घबरा गई। जल्दी से गाउन ठीक किया और टॉयलेट फ्लश जोर से चलाया ताकि सब जाग जाएँ।
होली से एक दिन पहले किचन में दीदी ने पूछा “रानी तेरा कोई बॉयफ्रेंड है?” मैंने कहा “नहीं दीदी।” मैंने चिढ़ाया “कल रात तुम लोगो ने तो मज़ा किया। पेट पर वीर्य का चित्र बना दिया।” दीदी हँसी “अनिल हर रात करता है। मशीन से। तुझे भी लाऊँ?” मैंने मना किया।
मैंने पूछा “क्या रोज़ चुदाई करते हो?” दीदी बोलीं “हाँ बेटी। जीजू का लंड बहुत बड़ा मोटा है। तेरे स्तन तो मेरे से बड़े हैं।” उन्होंने मेरे स्तनों को चूसा और बोलीं “चाहती है चुदाई?” मैं शर्मा गई। सारा दिन चूत में खुजली रही गीली हो गई।
रात को रवि सो गया। दीदी बोलीं “जीजू होली की पूर्व संध्या पर शराब पीकर आए हैं।” जीजू लड़खड़ाते हुए आए और गिर पड़े। दीदी ने उनके जूते मोजे उतारे। स्तन लटक रहे थे। शर्ट उतारी बेल्ट खोली पैंट उतारने को बोलीं “रानी पैंट उतार दे।
पैंट उतरी तो अंडरवियर में बड़ा सा उभार दिखा। मैं घूरने लगी। जीजू का बदन मांसल था। दीदी ने देख लिया बोलीं “ये वो साँप है जो मुझे रोज़ काटता है। दिखाऊँ?” उन्होंने अंडरवियर नीचे किया। मोटा लंबा लंड बाहर आया। दीदी ने सहलाया। “छू ले रानी। पकड़।”
मैंने पकड़ा। गर्म मोटा सख्त लंबा लंड। शरीर में करंट दौड़ा। जीजू निद्रा में कराहे। मैं छोड़कर सोने का नाटक किया। दीदी बोलीं “ठंड लग रही है? साँप ने काट लिया।” मैं सो नहीं पाई। लंड का ख्याल आता रहा।
सुबह जीजू नंगे लेटे थे दीदी चली गई थी। मेरा गाउन खुला। वो नींद में मेरे स्तनों को मसलने लगे। जोर से दबाया लाल हो गए। मुझे मज़ा आया लेकिन पाप लगा। दीदी आई तो भाग गई।
होली के दिन मैं जीजू की नज़रें टाल रही थी। दीदी मुस्कुरा रही थीं। रवि गुब्बारों पिचकारी से खेला। दीदी ने मुझे टाइट रेड हनीमून टॉप दिया। निप्पल्स दिख रहे थे स्तन बहुत उभरे। छोटी स्कर्ट। बोलीं “तेरे स्तन मेरे से बड़े हैं।
अच्छी लग रही है।” जीजू बोले “बहुत सेक्सी लग रही है रानी। हनीमून याद आ गया। सुनीता आज करवा दे।” रवि रंग से सना आया। बाल्टी बनाई। जीजू बोले “बाहर मत जा नहा ले।” मैं रवि को बाथरूम ले गई। उसके लंड को देखा जीजू से छोटा था।
साबुन लगाते हुए उसका लंड मेरे मुँह से लगा। जीजू पीछे से बोले “लंड पर भी साबुन लगाओ सहला।” रवि की बाल्टी का रंग मुझ पर उड़ेल दिया। कपड़े चिपक गए स्तन उभरे गांड दिखी। बालकनी पर होली खेली।
जीजू दीदी ने मुझे रंग लगाया। जीजू ने कमर पकड़ी टॉप में हाथ डाल स्तनों को जोर से मारा। मैं चीखी। जांघें गर्दन हर जगह रंग लगाया। स्तनों पर नाखून के निशान पड़े। मैं कमरे में टॉयलेट लॉक हो गई रोने लगी।
दीदी आईं “क्या हुआ?” मैं बोली “स्तनों पर दाग।” दीदी बोलीं “रंग धो दूँ?” बाथरूम का दरवाजा खुला। एक दूसरे के कपड़े उतारे। दीदी ब्रा पैंटी में। जीजू आए नंगे हो गए। दरवाजा लॉक किया। मैं चिल्लाई “नहीं।” दीदी बोलीं “शर्म हटा।
जीजू ने पीछे से ब्रा पैंटी फाड़ दी। स्तन पकड़े। दीदी ने हाथ पकड़े। साबुन लगाया टांगों जांघों पर। जीजू ने शरीर सहलाया। दीदी ने चूत में उंगली डाली तेज़ इन आउट। फिर गांड में।
जीजू ने गले लगाया स्तन मसले निप्पल चूसे चूत में उंगली। मैंने उनका नसों वाला सख्त लंड पकड़ा सहलाया “बहुत बड़ा है।” दीदी ने मुझे पैर फैलाकर बैठाया। गांड चूत में उंगली डाली। मैं लंड चूसने लगी गहराई तक।
जीजू ने मुँह में धक्के मारे। मुझे लिटाया दीदी ने हाथ पकड़े। जीजू ने पूरा मोटा लंड चूत में एक धक्के में डाला। मैं चीखी “चूत फट गई निकालो” आँसू बहने लगे। दीदी ने स्तन निप्पल चूने। जीजू ने जोरदार धक्के दिए पैर चौड़े किए। मैं रोई “मम्मी।”
डॉगी स्टाइल में घुमाया। दीदी ने लंड गांड साबुन किया। मैं बोली “गांड मत” लेकिन जीजू ने जोर से डाला। १०-१५ धक्के मारे गहराई में वीर्य छोड़ा। जलन हुई। दीदी ने धोया बिस्तर पर लिटाया। चार घंटे सोई। दर्द गया।
दीदी बोलीं “मज़ा आया?” मैं मुस्कुराई “शर्म गई। गुप्त रूप से चुदाई में शामिल करो।” अब मैं जीजू की दूसरी बीवी बनी। तिकड़ी ने हर तरह का सेक्स किया। दीदी लंड को मेरी चूत पर लगातीं। एक दूसरे को चुदते देखते। मैं लंड पर चढ़ती। दो महीने में चूत गांड बहुत चुदाई हुई।
घर लौटी तो लंड की लालसा……………………….