मेरा नाम मोहन है। मैं पंजाब का रहने वाला एक प्लेबॉय हूं। मेरी उम्र 28 साल है और मैं अपनी जिंदगी को पूरी शिद्दत से जीता हूं। मेरी खासियत यह है कि मेरा लंड सात इंच लंबा और मोटा है जो औरतों को दीवाना बना देता है।
मैं फ्रीलांस सर्विस देता हूं। मतलब जो औरतें अपने पति से संतुष्ट नहीं होतीं या जिन्हें सेक्स की तलब हो जाती है, वे मुझसे संपर्क करती हैं। मैं उनकी इच्छाओं को पूरा करता हूं और बदले में अच्छी खासी फीस लेता हूं।
एक दिन मेरे ईमेल पर एक मैसेज आया। नाम था कविता। वह एक हाउसवाइफ थी। उसके पति मुंबई में पोस्टेड थे और वह अपनी सास के साथ अकेली रहती थी।
मैसेज में उसने लिखा था कि वह बहुत अकेली महसूस करती है और उसे एक ऐसे पुरुष की जरूरत है जो उसे संतुष्ट कर सके। मैंने तुरंत रिप्लाई किया और अपना नंबर दिया। रात के दस बजे उसका फोन आया।
“हैलो, मोहन जी?” उसकी आवाज मीठी और थोड़ी घबराई हुई थी।
“हां, कविता जी। बोलिए, क्या बात है?” मैंने कहा।
“मैं… मैं आपकी सर्विस के बारे में जानना चाहती हूं। मेरा पति मुंबई में है। मैं यहां अपनी सास के साथ रहती हूं। लेकिन मुझे… मुझे एक औरत की जरूरतें पूरी करने वाली सर्विस चाहिए।” वह धीरे-धीरे बोली।
“कोई बात नहीं, कविता जी। मैं सब संभाल लूंगा। आपकी सास घर पर हैं?” मैंने पूछा।
“हां, लेकिन तीन दिन के लिए वे बाहर जा रही हैं। उसके बाद मैं पूरी तरह फ्री रहूंगी। आप आ सकते हैं?” उसने कहा।
“बिल्कुल। लेकिन मेरी फीस 10,000 रुपये प्रति दिन है। तीन दिन के लिए 25,000। पैसे पहले।” मैंने साफ कहा।
“ठीक है। मैं मान जाती हूं। मेरा पता है…” उसने अपना पूरा एड्रेस दिया।
अगले दिन सुबह मैं उसके घर पहुंचा। एक बड़ा सा बंगला था। मैंने बेल बजाई। दरवाजा खुला और सामने कविता खड़ी थी। वह लगभग छह फुट लंबी थी। फिगर 34-30-36 का परफेक्ट।
गोरी चिट्टी त्वचा, लंबे बाल, और बड़ी-बड़ी आंखें। वह साधारण सलवार सूट में थी लेकिन उसकी बॉडी की आकर्षण छिप नहीं पा रहा था।
“आइए अंदर, मोहन जी।” वह मुस्कुराई और मुझे अंदर ले गई।
हम सोफे पर बैठे। उसने पानी का गिलास दिया। “क्या लेंगे? चाय या कोल्ड ड्रिंक?” उसने पूछा।
“चाय ही ठीक है। लेकिन आप इतनी खूबसूरत हैं कि चाय भूल जाएं तो भी चले।” मैंने फ्लर्ट किया।
वह हंस पड़ी। “आप तो माहिर लगते हैं।” फिर वह किचन में चाय बनाने चली गई। चाय लेकर लौटी तो बोली, “चलिए, बेडरूम में चलें। मैं थोड़ा तैयार होती हूं।”
मैं बेडरूम में गया। कमरा बड़ा था, एसी चल रहा था। कुछ देर बाद दरवाजा खुला। कविता एक सेक्सी ब्लैक साड़ी में आई। साड़ी उसके कर्व्स को हाईलाइट कर रही थी। वह दरवाजा लॉक कर दी। मैं उठा और उसके पीछे से गले लगा लिया।
“कविता, तुम कितनी हॉट हो।” मैंने उसके कंधों पर किस किया।
“आह… मोहन… धीरे।” वह सिहर उठी।
मैंने उसके कान चूसे, गर्दन पर किस किए। हाथों से उसके स्तनों को दबाया। ब्रा के ऊपर से ही उसके निप्पल्स सख्त हो गए। वह गर्म हो रही थी। मैंने उसे अपनी गोद में बिठा लिया। हमारे होंठ मिले। फ्रेंच किस शुरू हो गया। जीभें आपस में लिपटीं। वह सांसें तेज कर रही थी।
मैंने साड़ी खींची। ब्लाउज के बटन खोले। अब वह ब्रा और पैंटी में थी। मेरा हाथ उसकी चूत पर गया। पैंटी गीली हो चुकी थी। मैंने उंगली डाली। “आह… मोहन… कितना अच्छा लग रहा है।” वह बोली।
मैंने अपना कुर्ता उतारा। सिर्फ अंडरवियर में था। उसके पूरे शरीर पर किस किए। वह तड़प रही थी। फिर मैंने उसकी ब्रा खींची, पैंटी उतारी। नंगी कविता मेरे सामने। उसके स्तन बड़े और गोल। चूत साफ शेव्ड, गुलाबी। वह मेरे लंड को पकड़ लिया। “इसे तो देखो… कितना बड़ा।”
मैंने अपना अंडरवियर उतारा। मेरा सात इंच का लंड खड़ा था। कविता ने उसे देखा और आश्चर्य से बोली, “मेरे पति का तो आधा भी नहीं है। यह तो कमाल का है।”
मैंने उसे बेड पर उठाया। होंठों पर किस, फिर गर्दन, फिर स्तनों पर। निप्पल्स चूसे। “ओह माय गॉड… आह्ह…” वह चीखी।
मैं नीचे उतरा। पेट पर किस, नाभि चाटी। फिर चूत पर पहुंचा। चूत को किस किया। वह पूरी गर्म हो गई। क्लिटोरिस चाटा। दस मिनट तक कनलिंगस किया। उसकी चूत से रस बहने लगा। “मोहन… अब मैं झेल नहीं पा रही। तुम्हारा लंड चूसूंगी।”
वह घुटनों पर बैठी। मेरे लंड को मसाज किया। मुंह में लिया डीप थ्रोट ट्राई किया लेकिन पूरा न गया। “अच्छा प्रयास है, कविता। अगली बार ट्राई करना।” मैंने कहा।
“अब चोदो मुझे… प्लीज।” वह गिड़गिड़ाई।
मैंने उसके पैर कंधों पर रखे। लंड चूत पर रगड़ा। फिर जोर से धक्का मारा। पूरा अंदर। “आह्ह्ह… मर रही हूं… दर्द हो रहा है।” वह रो पड़ी।
“धीरे-धीरे होगा।” मैंने धीरे-धीरे पंपिंग शुरू की। वह भी गांड हिलाने लगी। दर्द कम हुआ, मजा आने लगा। मैंने स्पीड बढ़ाई। जोर-जोर से चोदा। “हां… चोदो मेरी चूत… इसे अपना गुलाम बना दो… मुझे अपनी रंडी बना दो।” वह चिल्लाई।
वह दो बार झड़ी। चूत का रस मेरे लंड पर लग गया। “कहां झड़ूं?” मैंने पूछा।
“अंदर ही… भरो मेरी चूत।” वह बोली।
मैंने आखिरी धक्के मारे। गर्म वीर्य चूत में डाला। वह मुझे जकड़ लिया।
फिर हम शावर में गए। साथ नहाए रात भर चुदाई चली। कई राउंड मेरा लंड सूज गया, लाल हो गया। वह पूरी वैल्यू ले रही थी।
अब वह नियमित कॉल करती है। सास घर पर हो तो होटल में मिलते हैं। एक्स्ट्रा पैसे देती है………………….