दोस्तों, आज मैं आपको एक ऐसी कहानी सुनाने जा रहा हूँ जो सचमुच घटित हुई है।
नाम है मोहन, उम्र २५ साल। वह एक छोटे से शहर में नौकरी करने आया था।
शहर में किराये के मकान ढूंढते-ढूंढते उसे एक सुंदर सा मकान मिल गया।
मकान की मालकिन थीं कविता, उम्र ३५ साल। पति विदेश में नौकरी करते थे। कविता अकेली रहती थीं।
जब मोहन पहली बार उनसे मिला तो उसकी नजर कविता की भारी-भरी छाती और चौड़ी कमर पर अटक गई।
कविता ने भी मोहन को देखा और मुस्कुरा दीं। दोनों की निगाहें मिलीं। मोहन को लगा कि इस औरत को सेक्स की जरूरत है।
मोहन ने मकान ले लिया। पहले कुछ दिन तो सामान्य रहे। लेकिन मोहन कविता को लुभाने की कोशिश में लगा रहा।
वह रोज सुबह कविता के सामने शर्टलेस घूमता, जिम में लगी मशीनों पर एक्सरसाइज करता। कविता अक्सर उसे देखती रहतीं।
एक शाम मोहन ने कविता को चाय पीने के लिए बुलाया। चाय पीते हुए मोहन ने कविता का हाथ थामा।
कविता ने हाथ नहीं छुड़ाया। मोहन ने आगे बढ़कर कविता के होंठों पर अपने होंठ रख दिए।
कविता ने भी जवाब दिया। दोनों गहरे किस करने लगे।
कविता की सांसें तेज हो गईं। मोहन ने उनकी टी-शर्ट ऊपर उठाई और ब्रा के अंदर हाथ डालकर उनके स्तन दबाने लगा।
कविता की चूचियां कड़ी हो गईं। मोहन ने ब्रा उतारी और कविता के स्तनों को चूसने लगा।
कविता के मुंह से सिसकारियां निकल रही थीं।
मोहन ने कविता की साड़ी खोल दी। उनकी पैंटी गीली हो चुकी थी।
मोहन ने पैंटी उतारी और कविता की चूत चाटने लगा। कविता के शरीर में झुरझुरी दौड़ गई।
मोहन ने अपनी जीभ से कविता की चूत के अंदर तक पहुंचाया। कविता चीख रही थी, “मोहन… और जोर से…”
मोहन ने अपनी पैंट उतारी। उसका लंड खड़ा हो चुका था। कविता ने लंड को हाथ में लिया और सहलाने लगीं।
मोहन ने कविता को सोफे पर लिटाया और अपना लंड उनकी चूत में घुसा दिया। कविता चीख पड़ी।
मोहन जोर-जोर से चोदने लगा। कविता के स्तन उछल रहे थे।
दोनों पूरे दो हफ्ते तक हर जगह सेक्स करते रहे। रसोई में, बाथरूम में, छत पर, यहां तक कि गैरेज में भी।
कविता ने मोहन से हर तरह का सेक्स सीखा।
एक रात मोहन ने कविता से कहा, “आज मैं तुम्हारी गांड मारूंगा।” कविता डर गईं। लेकिन मोहन ने उन्हें समझाया।
उसने पहले कविता की गांड में उंगली डाली, फिर दो उंगलियां। कविता की सांसें भारी हो गईं।
मोहन ने अपना लंड कविता की गांड में घुसाने की कोशिश की। कविता चीख रही थीं।
लेकिन मोहन ने धीरे-धीरे लंड अंदर डाला। कविता का दर्द धीरे-धीरे मजे में बदल गया। मोहन जोर-जोर से कविता की गांड मारने लगा।
कविता पहली बार एनल सेक्स का मजा ले रही थीं।
दो हफ्ते बाद मोहन की नौकरी दूसरे शहर में लग गई।
कविता ने रोते हुए विदा किया। लेकिन दोनों के बीच की यादें हमेशा जिंदा रहीं।