नमस्कार दोस्तों, मैं आकाश हूँ। आज मैं अपनी पहली इंसेस्ट वाली सच्ची कहानी शेयर करने जा रहा हूँ। यह कहानी मेरी बड़ी बहन दीपाली के साथ हुई थी, जिन्हें मैं प्यार से दीदी कहता हूँ।
मैं कसम खाता हूँ कि यह पूरी तरह से सच्ची घटना है और यह अनजाने में ही शुरू हुई। यह सब सर्दियों के मौसम में हुआ जब ठंड इतनी तेज थी कि हम सब एक ही कमरे में सोते थे।
हमारे माता-पिता ऊपर की मंजिल पर सोते थे जबकि हम भाई-बहन नीचे वाले कमरे में। बिस्तर की कमी के कारण हम अक्सर एक ही बिस्तर पर सोते थे लेकिन मैं उस समय ज्यादा समझदार नहीं था।
सर्दी का पहला दिन था। बाहर बर्फबारी हो रही थी और घर के अंदर भी ठंडक घुस आई थी। रात को हमने जल्दी ही खाना खाया और सोने की तैयारी की। दीदी ने अपना सलवार सूट पहना था जो हल्का गुलाबी रंग का था।
मैंने अपनी पजामा और कुर्ता पहन लिया। कमरे में अंधेरा था, दरवाजा बंद था और कोई आवाज नहीं आ रही थी। हम दोनों एक ही बिस्तर पर लेट गए। दीदी मेरी बगल में थीं। मैं जल्दी सो गया लेकिन आधी रात को अचानक मेरी नींद खुल गई।
मैंने महसूस किया कि दीदी का हाथ मेरी पैंट के अंदर है। वह धीरे-धीरे मेरे लंड को सहला रही थीं। मैं चौंक गया लेकिन कुछ बोल नहीं पाया। मेरा दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। वह चुपचाप मेरे लंड को ऊपर-नीचे कर रही थीं।
धीरे-धीरे मेरा लंड सख्त होने लगा। मैं शॉक में था लेकिन उत्तेजना भी महसूस कर रहा था। अचानक दीदी डर गईं और हाथ हटा लिया। वह दूसरी तरफ मुड़ गईं और सोने लगीं।
मैं भी कुछ देर बाद सो गया। सुबह उठने पर सब कुछ नॉर्मल था। हमने चाय पी और स्कूल-कॉलेज के बारे में बात की। दीदी ने कुछ नहीं कहा और मैंने भी चुप रहना बेहतर समझा।
दूसरी रात मैं सो नहीं पा रहा था। मैं जागने की कोशिश कर रहा था ताकि देख सकूँ कि कल रात क्या हुआ था। लेकिन थकान के कारण मुझे नींद आ गई। फिर आधी रात को नींद खुली।
इस बार दीदी फिर से मेरे लंड को सहला रही थीं लेकिन ज्यादा जोर से। वह ऊपर-नीचे कर रही थीं और मेरा लंड पूरी तरह खड़ा हो गया। मैंने अपनी टांगें फैला लीं ताकि उन्हें आसानी हो। वह जानती थीं कि मैं जाग रहा हूँ लेकिन हम दोनों चुप थे।
अचानक मेरा वीर्य निकल गया और उनके हाथ पर गिर गया। दीदी ने चुपचाप हाथ निकाला, बाहर आंगन में रखे बाल्टी के पानी से धोया और वापस सो गईं। सुबह फिर सब नॉर्मल।
हमने नाश्ता किया और दीदी ने कहा, “आकाश, आज ठंड ज्यादा है, रात को अच्छे से कंबल ओढ़ना।” मैंने हामी भरी लेकिन मन ही मन उत्सुक था।
तीसरी रात हम जल्दी सोने चले गए। मैंने देखा कि दीदी पीठ फेरकर सो रही थीं और उनके नितंब मेरी तरफ थे। मैं मुड़ गया और धीरे से उनके नितंबों को छुआ। कपड़ों के ऊपर से ही सॉफ्ट महसूस हो रहा था।
दीदी ने कुछ हलचल की लेकिन विरोध नहीं किया। फिर वह सीधी लेट गईं। मैंने उनका हाथ पकड़ा और उनके स्तनों को कपड़ों के ऊपर से दबाया। यह पहली बार था जब मैं किसी लड़की के स्तनों को छू रहा था।
वे गोल और मुलायम थे। मेरा सांस लेना तेज हो गया। दीदी की सांस भी भारी हो रही थी। मैंने अपना हाथ नीचे सरकाया और उनके सलवार के ऊपर से योनि को रगड़ा। वहाँ जल्दी गीला हो गया क्योंकि दीदी ने अंदर कुछ नहीं पहना था।
मैंने सलवार की नाड़ा खोलने की कोशिश की लेकिन नाकाम रहा। दीदी ने एक आह भरी और नाड़ा का एक सिरा खींचकर ढीला कर दिया। मैंने हाथ अंदर डाल दिया और सीधे योनि को सहलाने लगा।
गर्माहट महसूस हो रही थी। मैंने उंगली डालने की कोशिश की लेकिन हर बार दीदी ने रोक दिया। फिर मैंने अपने हाथ पर लगे रस को चाटा। स्वाद नमकीन और गर्म था। अचानक दीदी फिर पीठ फेर ली।
मैंने धीरे से उनका सलवार घुटनों तक नीचे खींच लिया। उनके नितंब नंगे थे। मैंने उन्हें सहलाया और ऊपर का कपड़ा ऊपर किया। पीछे से स्तनों को निचोड़ने लगा। दीदी ने मेरी तरफ दबाव डाला और अपने नितंब मेरे खड़े लंड पर रगड़ने लगीं।
मैं कन्फ्यूज था लेकिन उत्तेजित। दीदी ने मेरा लंड पैंट से बाहर निकाला और अपनी योनि पर सटा दिया। पीछे से पोजीशन थी। मैंने धीरे से अंदर डालने की कोशिश की लेकिन फिसल गया।
दीदी ने दोबारा सेट किया और एक टांग मेरी तरफ उठा ली। फिर पीछे धक्का दिया। मैंने जोर से धक्का मारा और पूरा लंड अंदर चला गया। दीदी चीखीं दर्द से और तुरंत बाहर निकाल लिया। दो मिनट बाद मैंने फिर ट्राई किया।
इस बार जोर से अंदर डाला। दर्द हुआ लेकिन रखा रहा। मैंने धीरे-धीरे अंदर-बाहर करने लगा। फिर तेज। स्तनों को निचोड़ते हुए। हम दोनों पसीना-पसीना हो गए ठंड में भी। दस मिनट बाद मैंने उनके अंदर ही झाड़ दिया।
दीदी ने सलवार बाँध लिया। मैंने पैंट पहन ली और सो गए। उस रात से हमारी चुदाई रोजाना शुरू हो गई। छह महीने तक चली। दीदी गुप्त रूप से गर्भनिरोधक गोलियाँ लेती रहीं ताकि प्रेग्नेंट न हों।
मैं बाद में हॉस्टल चला गया पढ़ाई के लिए। दो साल में दीदी की शादी हो गई और वह चली गईं। अब सिर्फ यादें बाकी हैं।