मैंने कभी सोचा नहीं था कि मेरी जिंदगी में ऐसा कुछ होगा। मेरा नाम मोहन है, और मैं एक साधारण सा लड़का हूं, जो मुंबई के एक छोटे से अपार्टमेंट में रहता हूं। मेरी उम्र 25 साल है, और मैं एक आईटी कंपनी में काम करता हूं।
रोज की भागदौड़ भरी जिंदगी में कभी-कभी कुछ रोमांचक पल आ जाते हैं, जो सब कुछ बदल देते हैं। आज मैं आपको अपनी वो कहानी सुनाता हूं, जो मेरी जिंदगी का सबसे यादगार हिस्सा बन गई।
ये बात दो साल पहले की है। गर्मियों का मौसम था, और मुंबई की गर्मी तो जगजाहिर है। मैं अपने अपार्टमेंट में अकेला रहता था। मेरे पड़ोस में एक नई लड़की आई थी। उसका नाम नेहा था। नेहा करीब 22 साल की थी, बहुत ही खूबसूरत और आकर्षक।
उसके लंबे काले बाल, गोरी त्वचा, और परफेक्ट फिगर देखकर कोई भी लौंडा दीवाना हो जाए। वो कॉलेज में पढ़ती थी और अपने माता-पिता के साथ रहती थी। हमारे अपार्टमेंट में एक कॉमन वॉशिंग एरिया था, जहां सब लोग कपड़े धोते थे।
एक दिन शाम को, मैं अपने कमरे से निकला तो देखा कि नेहा वॉशिंग एरिया में खड़ी है। वो एक सफेद टॉवल में लिपटी हुई थी, शायद नहाने के बाद। उसके बाल गीले थे, और पानी की बूंदें उसके कंधों पर चमक रही थीं। मैंने सोचा कि वो शायद कपड़े लेने आई होगी। मैंने हैलो कहा, “हाय नेहा, कैसी हो?”
नेहा ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, “हाय मोहन भैया, मैं ठीक हूं। बस, नहाकर कपड़े लेने आई हूं। आज इतनी गर्मी है ना।”
मैंने हंसते हुए कहा, “हां यार, ये मुंबई की गर्मी तो कयामत है। तू सावधान रहना, टॉवल मत गिरा देना।”
नेहा ने शरमाते हुए कहा, “अरे भैया, आप भी ना। मैं तो बस जल्दी से कपड़े ले लूंगी।”
लेकिन तभी, अचानक नेहा का टॉवल ढीला हो गया। वो एकदम से फिसल गया और जमीन पर गिर पड़ा। नेहा पूरी तरह नंगी हो गई। उसके गोरे बदन पर पानी की बूंदें चमक रही थीं।
उसके स्तन गोल और सख्त थे, गुलाबी निप्पल्स तन चुके थे। नीचे उसकी चूत साफ-सुथरी थी, बिल्कुल शेव्ड। मैं हक्का-बक्का रह गया। मेरी नजरें उसकी बॉडी पर जम गईं।
नेहा चीख पड़ी, “अरे! क्या हुआ? ओह नो!” वो झुककर टॉवल उठाने लगी, लेकिन शर्म से लाल हो गई। उसके हाथ कांप रहे थे।
मैंने तुरंत अपनी शर्ट उतारी और उसे दे दी, “नेहा, ये ले। मत घबराओ। कोई नहीं देखा।”
नेहा ने शर्ट ले ली और उसे बॉडी पर लपेट लिया। उसकी आंखों में आंसू थे। “मोहन भैया, प्लीज किसी को मत बताना। मैं शर्मिंदा हो गई हूं।”
मैंने उसे सांत्वना दी, “अरे, चिंता मत कर। मैं हूं ना। चल, मैं तुझे तेरे कमरे तक छोड़ दूं।”
हम दोनों उसके कमरे की तरफ चले। रास्ते में नेहा चुपचाप चल रही थी। उसके मन में शायद सौ सवाल घूम रहे थे। कमरे पहुंचकर मैंने कहा, “अब तू आराम से कपड़े बदल ले। मैं बाहर इंतजार करता हूं।”
लेकिन नेहा ने मुझे अंदर आने को कहा, “भैया, अंदर आ जाओ। मम्मी-पापा घर पर नहीं हैं। मैं अकेली हूं।”
मैं अंदर गया। कमरा छोटा सा था, लेकिन साफ-सुथरा। नेहा ने शर्ट उतारी और अलमारी से एक साड़ी निकाली। वो अभी भी थोड़ी नंगी थी, लेकिन अब शर्म कम लग रही थी। “भैया, आप बैठो। मैं चाय बनाती हूं।”
मैंने मना किया, “नहीं नेहा, तू पहले फ्रेश हो जा।”
लेकिन नेहा ने जिद की, “नहीं, आप मेरे लिए इतना किया, कम से कम चाय तो पियो।”
चाय बनाते हुए नेहा ने बातें शुरू कीं। “भैया, आपकी गर्लफ्रेंड है क्या?”
मैंने हंसकर कहा, “नहीं यार, सिंगल हूं। तू बता, कोई बॉयफ्रेंड?”
नेहा ने शरमाई, “नहीं भैया, अभी कॉलेज में हूं। लेकिन कभी-कभी सोचती हूं कि प्यार कैसा होता होगा।”
चाय पीते हुए बातें बढ़ीं। नेहा ने बताया कि उसके माता-पिता सख्त हैं, वो ज्यादा बाहर नहीं जाती। मैंने अपनी जिंदगी के बारे में बताया।
धीरे-धीरे नेहा खुलने लगी। टॉवल वाली घटना पर वो हंसने लगी। “भैया, आपने मुझे नंगा देख लिया। अब क्या होगा?”
मैंने मजाक में कहा, “कुछ नहीं, मैं तो भूल गया। लेकिन तू बहुत खूबसूरत है नेहा।”
नेहा की आंखें चमक उठीं। “सच में भैया? आप मुझे पसंद करते हो?”
मैंने हां कहा, और तभी नेहा ने मेरा हाथ पकड़ लिया। “भैया, मैं आपको बहुत समय से पसंद करती हूं। आप इतने अच्छे हो।”
हवा में रोमांस घुल गया। नेहा ने मुझे अपनी तरफ खींचा और होंठ चूम लिए। उसके होंठ नरम थे, स्वाद मीठा। मैंने भी जवाब दिया। हम दोनों किस करते रहे। नेहा की सांसें तेज हो गईं। “भैया, मुझे छू लो।”
मैंने उसके स्तनों को छुआ। वो गर्म और मुलायम थे। नेहा सिसकारी भरने लगी। “आह भैया, कितना अच्छा लग रहा है।”
मैंने उसके निप्पल्स को चूसा। नेहा चीखी, “ओह येस! सख्त चूसो।”
धीरे-धीरे मैंने उसके कपड़े उतार दिए। नेहा पूरी नंगी लेट गई। उसकी चूत गीली हो चुकी थी। मैंने उंगली डाली, “नेहा, तू कितनी वेट हो गई।”
नेहा बोली, “भैया, मुझे चोदो। मैं वर्जिन हूं, लेकिन तुम्हारे लिए तैयार हूं।”
मैंने अपना लंड निकाला। वो 7 इंच का मोटा था, खड़ा हो चुका। नेहा ने उसे पकड़ा, “वाह भैया, कितना बड़ा है।”
उसने लंड चाटा। उसकी जीभ मेरे लंड पर घूमी। “मम्म, स्वादिष्ट।”
फिर मैंने नेहा को बेड पर लिटाया और लंड चूत पर रगड़ा। “तैयार है?”
नेहा बोली, “हां भैया, अंदर डालो।”
मैंने धक्का दिया। नेहा चीखी, “आह! दर्द हो रहा है।”
धीरे-धीरे मैं अंदर-बाहर करने लगा। नेहा का दर्द सुख में बदल गया। “फास्ट भैया, जोर से चोदो।”
हम दोनों पागलों की तरह चुदाई करने लगे। नेहा के स्तन उछल रहे थे। मैंने उसके होंठ चूसे, गर्दन चाटी। नेहा चिल्ला रही थी, “हां, येस! मैं झड़ने वाली हूं।”
मैंने भी स्पीड बढ़ाई। आखिरकार हम दोनों एक साथ झड़े। मेरा रस नेहा की चूत में भर गया।
इसके बाद हम दोनों नंगे लेटे रहे। नेहा बोली, “भैया, ये तो कमाल था। अब रोज ऐसा करना है।”
मैंने हंसकर कहा, “हां नेहा, तू मेरी हो गई।”
लेकिन ये तो शुरुआत थी। अगले दिनों हमारी मुलाकातें बढ़ीं। नेहा के माता-पिता जब बाहर जाते, तो वो मुझे बुला लेती। एक दिन नेहा ने कहा, “भैया, आज कुछ नया ट्राई करेंगे।”
मैंने पूछा, “क्या?”
नेहा बोली, “मुझे बैक से चोदो।”
हम बेड पर आए। नेहा घुटनों पर आ गई, गांड ऊपर की। मैंने उसके गांड के छेद पर लंड रगड़ा। “नेहा, ये पहली बार है ना?”
हां, “लेकिन डरो मत, स्लो करो।”
मैंने थूक लगाया और धीरे से अंदर डाला। नेहा दर्द से कराह उठी, “आह! बहुत टाइट है।”
धीरे-धीरे वो आदत पड़ गई। नेहा बोली, “अब फास्ट।”
मैंने जोर-जोर से ठोके। नेहा चीख रही थी, “ओह फक! कितना मजा आ रहा है।”
हमने कई पोजिशन्स ट्राई कीं। नेहा ने मुझे ब्लोजॉब दिया, मैंने उसकी चूत चाटी। हमारी चुदाई की रातें लंबी होतीं।
एक दिन नेहा की सहेली प्रिया आई। प्रिया भी हॉट थी। नेहा ने कहा, “भैया, प्रिया को भी शामिल करें?”
मैं हैरान, “क्या?”
प्रिया बोली, “हां मोहन, नेहा ने सब बताया। हम तीनों मिलकर मजा करेंगे।”
तो शुरू हो गया गैंगबैंग जैसा सीन। प्रिया ने मेरे लंड को चूसा, नेहा ने गेंदें चाटीं। फिर मैंने प्रिया को चोदा, नेहा को चाटा। दोनों लड़कियां चीख रही थीं। “मोहन, जोर से!”
“हां, चोदो हमें!”
मैंने दोनों को एक-एक करके संतुष्ट किया। रस दोनों पर छिड़क दिया।
इसके बाद हमारी जिंदगी सेक्स से भरी हो गई। नेहा और प्रिया मेरी गर्लफ्रेंड्स बन गईं। हम पार्क में, कार में, कहीं भी चुदाई करते।
लेकिन एक दिन नेहा के पापा को शक हो गया। उन्होंने पूछा, “नेहा, मोहन से क्या रिश्ता है?”
नेहा बोली, “पापा, वो मेरा दोस्त है।”
लेकिन पापा ने सख्ती की। फिर भी हम चुपके से मिलते रहे।