हाय, मेरा नाम मोहन है, मैं बदायूँ का रहने वाला हूँ। मैं 21 वर्ष का हूँ। मेरे घर के सामने एक माल जैसी आंटी जी रहती हैं। उनकी उम्र 46 वर्ष है। उनकी दो बेटियां हैं। एक का नाम अंजलि है, जो 23 वर्ष की है और दूसरी सुमन है, वह 21 वर्ष की है।
अंजलि और सुमन अलग अलग कॉलेज में पढ़ती हैं। मैं अलग कॉलेज में पढ़ता हूँ।
मैं हमेशा से ही आंटी को देखता रहता था। उनका नाम रमा था, लेकिन सब उन्हें आंटी ही कहते थे। उनकी बॉडी कमाल की थी – भरी हुई चूचियां, मोटी गांड और पतली कमर। वो साड़ी पहनकर घर के काम करतीं तो उनकी कमर की लचक देखकर मेरा लंड खड़ा हो जाता।
अंजलि और सुमन भी कम नहीं थीं। अंजलि थोड़ी गोरी और लंबी थी, उसके होंठ गुलाबी और आंखें बड़ी-बड़ी। सुमन थोड़ी सांवली लेकिन चुलबुली, उसकी गांड गोल और टाइट लगती। दोनों बहनें कॉलेज जातीं तो टाइट जींस पहनतीं, जिससे उनकी टांगें और कूल्हे साफ दिखते।
मैं वर्जिन था, कभी किसी लड़की को छुआ तक नहीं था। लेकिन रातों को मैं इन तीनों को सोचकर मुठ मारता। कल्पना करता कि आंटी की चूत में मेरा लंड डाल रहा हूँ, अंजलि मेरी गोदी में बैठी चूचियां चूस रही है और सुमन मेरी गांड चाट रही।
ये ख्याल आते ही मेरा वीर्य बाहर निकल जाता। लेकिन अब मैंने फैसला किया कि ये सिर्फ कल्पना नहीं रहेगी।
एक दिन शाम को बारिश हो रही थी। मैं कॉलेज से लौटा तो भीग गया। आंटी के घर का दरवाजा खुला था, वो अंदर से चिल्लाईं, “मोहन बेटा, अंदर आ जा, भीग जाएगा।” मैं अंदर गया। आंटी ने मुझे तौलिया दिया और चाय बनाने लगीं।
उनकी साड़ी भीग गई थी, ब्लाउज से उनके निप्पल्स साफ दिख रहे थे। मैंने नजरें हटाईं लेकिन लंड सख्त हो गया।
चाय पीते हुए बातों-बातों में पता चला कि आंटी का पति बाहर नौकरी करता है, महीनों से घर नहीं आया। अंजलि और सुमन अभी कॉलेज से लौटने वाली थीं। आंटी ने कहा, “बेटा, तू भी यहीं खाना खा ले।” मैं मान गया।
थोड़ी देर बाद अंजलि और सुमन आ गईं। दोनों भीगकर आईं, उनके कपड़े चिपक गए थे। अंजलि की टी-शर्ट से उसके स्तन उभरे हुए, सुमन की शर्ट से उसकी ब्रा की लाइन दिख रही।
खाने के दौरान सब हंसते-बोलते। मैंने सोचा आज मौका है। खाना खत्म होने पर आंटी ने कहा, “बेटा, रात हो गई, तू यहीं सो जा।” मैं खुश हो गया। रात को हम सब एक कमरे में सोने लगे – आंटी बीच में, बाईं तरफ अंजलि, दाईं तरफ सुमन और मैं आंटी के पैरों की तरफ। बत्ती बुझी तो अंधेरा छा गया।
मैं चुपके से आंटी की साड़ी के पल्लू को हटाया। उनकी चूचियां साफ महसूस हो रही। मैंने धीरे से उनका ब्लाउज खोला और एक चूची को मुंह में लिया। आंटी चौंकीं लेकिन चुप रहीं। शायद उन्हें भी मजा आ रहा था।
मैंने चूची चूसी, निप्पल को जीभ से घुमाया। आंटी की सांसें तेज हो गईं। “मोहन… क्या कर रहा है?” वो फुसफुसाईं। मैंने कहा, “आंटी, आप बहुत हॉट हो। मुझे रोको ना।”
आंटी ने हल्का सा विरोध किया लेकिन फिर हार मान ली। मैंने उनकी साड़ी ऊपर की और पैंटी को साइड किया। उनकी चूत गीली थी। मैंने उंगली डाली, वो सिसकारी लेने लगीं। तभी अंजलि जागी। “मम्मी, क्या हो रहा है?” आंटी शरमाईं लेकिन मैंने कहा, “अंजलि, आ ना, मजा ले।
अंजलि हैरान हुई लेकिन उत्सुकता से करीब आई। मैंने अंजलि का हाथ पकड़कर आंटी की चूची पर रखा। अंजलि ने सहलाना शुरू कर दिया।
सुमन भी जाग गई। “दीदी, क्या कर रही हो?” सुमन बोली। मैंने उसे भी बुलाया। अब तीनों मेरे इशारे पर थीं। मैंने आंटी की चूत में जीभ डाली। वो कराहने लगीं, “आह… बेटा… कितना अच्छा लग रहा।
अंजलि और सुमन अपनी मां को देखकर गर्म हो गईं। मैंने अंजलि की शर्ट उतारी, उसके स्तन बाहर आ गए – गोल और सख्त। मैंने चूसे, वो चीखी, “मोहन भैया, दर्द हो रहा… लेकिन अच्छा।”
सुमन ने खुद अपनी पैंट उतार दी। उसकी चूत बालों वाली लेकिन टाइट। मैंने सुमन की चूत को सहलाया, वो गीली हो गई। अब मैं नंगा हो गया। मेरा लंड 7 इंच का, सीधा खड़ा। आंटी ने पहली बार देखा, “वाह बेटा, कितना मोटा।
उन्होंने हाथ में लिया और सहलाने लगीं। अंजलि और सुमन ने भी छुआ। तीनों मिलकर मेरा लंड चाटने लगीं। आंटी ने सिर चूसा, अंजलि ने अंडकोष चाटे और सुमन ने तने को जीभ घुमाई। मैं स्वर्ग में था।
फिर मैंने आंटी को लिटाया और लंड उनकी चूत पर रगड़ा। “आंटी, मैं वर्जिन हूँ, पहली बार।” वो मुस्कुराईं, “बेटा, धीरे से डालना।” मैंने धक्का दिया, चूत में घुस गया। आंटी चीखीं, “आह… फट गई।” लेकिन फिर वो कमर हिलाने लगीं। मैंने जोर-जोर से चोदा।
उनकी चूचियां उछल रही। अंजलि और सुमन देख रही, अपनी चूत सहला रही।
आंटी के चोदते हुए मैंने अंजलि को बुलाया। “अंजलि, मेरी गोदी में बैठ।” वो ऊपर चढ़ गई, चूत मेरे मुंह पर। मैंने चाटी, वो रस टपकाने लगी। सुमन मेरे पैरों पर लंड सहला रही। आंटी का रस बह रहा, मैंने स्पीड बढ़ाई।
आंटी, मैं झड़ने वाला हूँ।” वो बोलीं, “अंदर ही डाल बेटा।” मैंने गरम वीर्य उनकी चूत में उंडेल दिया। आंटी भी झड़ीं, शरीर कांप गया।
अब अंजलि की बारी। वो वर्जिन थी। मैंने उसे लिटाया, लंड पर थूक लगाया। “भैया, डरो मत।” मैं धीरे से डाला। खून निकला, वो रोने लगी। लेकिन मैंने चूचियां चूसकर शांत किया। फिर जोर से चोदा। अंजलि की चूत टाइट, मजा आ गया।
आंटी और सुमन उसके निप्पल चूस रही। अंजलि चिल्लाई, “भैया… और जोर से… चोदो मुझे।” मैंने 10 मिनट पेला, फिर उसके अंदर उंडेल दिया।
सुमन बेचैन हो रही। “मेरा नंबर।” मैंने उसे डॉगी स्टाइल में लिया। गांड ऊपर की, चूत खुली। लंड घुसाया, वो चीखी लेकिन पीछे धक्का देने लगी। आंटी ने सुमन की चूचियां दबाईं, अंजलि मेरी पीठ सहलाई।
मैंने सुमन की गांड भी चाटी। फिर चूत में तेजी से ठोका। सुमन झड़ी, “मोहन… तू राजा है।” मैंने उसके अंदर छोड़ा।
अब तीनों थक गईं लेकिन मैं नहीं। मैंने उन्हें एक लाइन में लिटाया। आंटी, फिर अंजलि, फिर सुमन। एक-एक करके चोदा। पहले आंटी की चूत, फिर अंजलि की गांड (वो पहली बार), फिर सुमन की चूत। अंजलि की गांड टाइट थी, मैंने तेल लगाकर डाला।
वो दर्द से चिल्लाई लेकिन मजा लेने लगी। “भैया, गांड फाड़ दी।” मैंने रोटेट किया, सबकी चूत और गांड चोदी।
रात भर चुदाई चली। सुबह तक तीनों की चूतें लाल, वीर्य से भरी। आंटी बोलीं, “बेटा, तू हमारा मालिक। रोज आना।” अंजलि और सुमन मुस्कुराईं। मैं घर लौटा, लेकिन ये शुरुआत थी। कहानी अच्छी लगी हो तो कमेंट ज़रूर करें।