बारिश में भाभी की चूत फाड़ दी

(Barish Main Bhabhi Ki Chut Fad Di)

यह कहानी एक ऐसी रात से शुरू होती है जब शहर के ऊपर घने बादल छाए हुए थे। हवा में नमी और ठंडक फैली हुई थी। स्नेहा अपने पति विकाश के साथ अपने छोटे से अपार्टमेंट में बैठी थी।

विकाश एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर था और स्नेहा एक हाउसवाइफ। दोनों की शादी को तीन साल हो चुके थे। स्नेहा की उम्र 28 साल थी और विकाश 30 साल का था।

स्नेहा की शक्ल बेहद आकर्षक थी। उसकी गोरी त्वचा, बड़े-बड़े स्तन, पतली कमर और गोल-गोल नितंब उसे बेहद सेक्सी बनाते थे। उसके बाल काले और घने थे जो अक्सर खुले छोड़ दिए जाते थे। विकाश भी कद में लंबा और कसरती शरीर वाला था। उसकी मांसपेशियाँ साफ दिखती थीं।

उस रात बारिश शुरू होने से पहले ही स्नेहा कुछ अजीब सी महसूस कर रही थी। उसके शरीर में एक अजीब सी गर्मी फैल रही थी। वह विकाश को देखकर मुस्कुराई और उसके पास बैठ गई। विकाश टीवी देख रहा था लेकिन स्नेहा की नजदीकी से उसका ध्यान भटक गया।

“आज बारिश होने वाली लग रही है,” स्नेहा ने कहा।

“हाँ, बादल तो बहुत घने हैं,” विकाश ने जवाब दिया और स्नेहा की जांघ पर हाथ रख दिया।

बारिश शुरू हो गई। पहले हल्की-हल्की बूंदें गिरीं फिर तेज हो गईं। पानी की आवाज़ खिड़कियों पर पड़ रही थी।

स्नेहा ने विकाश की तरफ देखा और उसके होंठों पर अपना मुंह लगा दिया। दोनों गहरी चूमने लगे। विकाश की जीभ स्नेहा के मुंह के अंदर घुस गई और वह उसकी लार चूसने लगा।

स्नेहा ने विकाश की टी-शर्ट उतार दी। उसके छाती पर हाथ फेरने लगी। विकाश ने स्नेहा की नाइटड्रेस का फीता खोला। उसके बड़े स्तन बाहर निकल आए। विकाश ने एक स्तन को मुंह में लिया और चूसने लगा। स्नेहा की सांसें तेज हो गईं।

“विकाश… और जोर से चूसो,” स्नेहा ने कहा।

विकाश ने स्नेहा के दोनों स्तनों को हाथों में लिया और जोर-जोर से दबाने लगा। उसके निप्पल सख्त हो चुके थे। विकाश उन्हें अपनी उंगलियों से दबा रहा था। स्नेहा की चूत में गीला पानी निकलने लगा था।

विकाश ने स्नेहा की नाइटड्रेस पूरी तरह उतार दी। अब स्नेहा पूरी तरह नंगी थी। उसकी चिकनी त्वचा, गोल स्तन, और बालदार चूत विकाश को और उत्तेजित कर रही थी। विकाश ने भी अपनी पैंट और अंडरवियर उतार दिया। उसका लंड खड़ा हो चुका था।

स्नेहा ने विकाश के लंड को हाथ में लिया और सहलाने लगी। उसकी उंगलियाँ लंड की नोक पर घूम रही थीं।

विकाश की सांसें तेज हो गईं। स्नेहा ने लंड को मुंह में लिया और लंड चूसने लगी। उसकी जीभ लंड की नोक पर घूम रही थी। विकाश के मुंह से कराह निकल रही थी।

“स्नेहा… बहुत अच्छा लग रहा है,” विकाश ने कहा।

स्नेहा ने लंड को और गहराई तक मुंह में लिया। उसकी लार लंड पर बह रही थी। वह लंड को चूस रही थी और साथ ही अंडकोष को हाथ से सहला रही थी। विकाश का लंड और सख्त हो गया था।

विकाश ने स्नेहा को बिस्तर पर लिटा दिया। उसने स्नेहा की जांघें खोलीं और उसके चूत के पास मुंह ले गया।

स्नेहा की चूत पूरी तरह गीली हो चुकी थी। विकाश ने उसकी चूत के होठों को चाटना शुरू किया। उसकी जीभ स्नेहा की चूत के अंदर घुस रही थी।

“आह… विकाश… चाटो… और गहराई से,” स्नेहा ने कहा।

विकाश ने स्नेहा की चूत चाटी और उसके क्लिटोरिस को चूसने लगा। स्नेहा का शरीर काँप रहा था। उसकी चूत से लगातार पानी निकल रहा था। विकाश ने अपनी उंगली स्नेहा की चूत में डाली और अंदर-बाहर करने लगा।

“हाँ… और उंगली डालो… मेरी चूत फाड़ दो,” स्नेहा ने कहा।

विकाश ने दो उंगलियाँ स्नेहा की चूत में डालीं और तेजी से अंदर-बाहर करने लगा। स्नेहा की चूत की दीवारें विकाश की उंगलियों को कस रही थीं। स्नेहा का शरीर पसीने से तर हो चुका था।

विकाश ने स्नेहा की जांघें और खोलीं। उसने अपना लंड स्नेहा की चूत के पास लाया और धीरे से अंदर डालने लगा। स्नेहा की चूत विकाश के लंड को निगल रही थी।

“आह… विकाश… लंड डालो… मेरी चूत फाड़ दो,” स्नेहा ने कहा।

विकाश ने अपना लंड पूरी तरह स्नेहा की चूत में डाल दिया। स्नेहा की चूत विकाश के लंड को कस रही थी।

विकाश ने स्नेहा की चूत में तेजी से लंड अंदर-बाहर करना शुरू किया।

“हाँ… और जोर से… मेरी चूत फाड़ दो… विकाश,” स्नेहा चीख रही थी।

विकाश ने स्नेहा की चूत में जोर-जोर से लंड ठोकना शुरू किया। स्नेहा के स्तन ऊपर-नीचे हो रहे थे। विकाश ने स्नेहा के स्तनों को हाथों में लिया और दबाने लगा।

“स्नेहा… तेरी चूत बहुत टाइट है… बहुत मजा आ रहा है,” विकाश ने कहा।

“हाँ… मेरी चूत फाड़ दो… विकाश… और जोर से चोदो,” स्नेहा ने कहा।

विकाश ने स्नेहा को उल्टा कर दिया। अब स्नेहा कुत्ते की तरह चारों पैरों पर थी। विकाश ने स्नेहा की चूत में लंड डाला और पीछे से चोदने लगा।

“आह… विकाश… और गहराई से… मेरी चूत फाड़ दो,” स्नेहा ने कहा।

विकाश ने स्नेहा की कमर को पकड़ा और जोर-जोर से लंड ठोकना शुरू किया। स्नेहा की चूत से चिकनाहट की आवाज़ आ रही थी। विकाश का लंड स्नेहा की चूत में पूरी तरह घुस रहा था।

“हाँ… और जोर से… विकाश… मेरी चूत फाड़ दो,” स्नेहा चीख रही थी।

विकाश ने स्नेहा के बाल पकड़े और उसकी चूत में और जोर से लंड ठोकने लगा। स्नेहा का शरीर काँप रहा था। उसकी चूत विकाश के लंड को कस रही थी।

“स्नेहा… मैं झड़ने वाला हूँ,” विकाश ने कहा।

“हाँ… मेरी चूत में झड़ो… विकाश… मेरी चूत फाड़ दो,” स्नेहा ने कहा।

विकाश ने स्नेहा की चूत में जोर से लंड ठोका और अपना वीर्य स्नेहा की चूत में छोड़ दिया। स्नेहा की चूत विकाश के वीर्य से भर गई। विकाश का लंड स्नेहा की चूत से बाहर निकाला। स्नेहा की चूत से वीर्य बह रहा था।

दोनों थककर बिस्तर पर लेट गए। बारिश अभी भी हो रही थी। स्नेहा ने विकाश को चूमा और कहा, “विकाश… हर बारिश में मेरी यह इच्छा पूरी होती है।”

विकाश ने स्नेहा को गले लगाया और कहा, “हाँ… हर बारिश में हम ऐसा ही करेंगे।”

बारिश की आवाज़ सुनकर स्नेहा फिर से उत्तेजित हो गई। उसने विकाश के लंड को हाथ में लिया और सहलाने लगी। विकाश का लंड फिर से खड़ा हो गया।

“विकाश… फिर से चोदो… मेरी चूत फाड़ दो,” स्नेहा ने कहा।

विकाश ने स्नेहा को बिस्तर पर लिटा दिया। उसने स्नेहा की जांघें खोलीं और अपना लंड स्नेहा की चूत में डाल दिया।

“आह… विकाश… और जोर से… मेरी चूत फाड़ दो,” स्नेहा ने कहा।

विकाश ने स्नेहा की चूत में तेजी से लंड अंदर-बाहर करना शुरू किया। स्नेहा के स्तन विकाश के हाथों में थे। विकाश स्नेहा के स्तनों को दबा रहा था।

“हाँ… विकाश… और जोर से चोदो… मेरी चूत फाड़ दो,” स्नेहा चीख रही थी।

विकाश ने स्नेहा की चूत में और जोर से लंड ठोका। स्नेहा की चूत विकाश के लंड को कस रही थी। विकाश का लंड स्नेहा की चूत में पूरी तरह घुस रहा था।

“स्नेहा… तेरी चूत बहुत गर्म है… बहुत मजा आ रहा है,” विकाश ने कहा।

“हाँ… मेरी चूत फाड़ दो… विकाश… और जोर से चोदो,” स्नेहा ने कहा।

विकाश ने स्नेहा को उठाया और दीवार से टिका दिया। उसने स्नेहा की चूत में लंड डाला और खड़े-खड़े चोदने लगा।

“आह… विकाश… और गहराई से… मेरी चूत फाड़ दो,” स्नेहा ने कहा।

विकाश ने स्नेहा की जांघें उठाईं और उसकी चूत में जोर-जोर से लंड ठोकने लगा। स्नेहा का शरीर विकाश के शरीर से चिपका हुआ था।

“हाँ… विकाश… और जोर से… मेरी चूत फाड़ दो,” स्नेहा चीख रही थी।

विकाश ने स्नेहा की चूत में और जोर से लंड ठोका और अपना वीर्य स्नेहा की चूत में छोड़ दिया। स्नेहा की चूत विकाश के वीर्य से भर गई।

दोनों थककर फर्श पर लेट गए। बारिश अभी भी हो रही थी। स्नेहा ने विकाश को चूमा और कहा, “विकाश… हर बारिश में मेरी यह इच्छा पूरी होती है।”

विकाश ने स्नेहा को गले लगाया और कहा, “हाँ… हर बारिश में हम ऐसा ही करेंगे।”

बारिश की रात में स्नेहा और विकाश का यह यौन संबंध जारी रहा। स्नेहा की चूत विकाश के लंड से फटती रही और हर बारिश में स्नेहा की इच्छा पूरी होती रही