मेरा नाम आकाश सिंह है। उम्र 24 साल। गोरखपुर का रहने वाला, लेकिन दिल्ली में पढ़ाई कर रहा हूँ।
जिम में रोज़ वर्कआउट करता हूँ, शरीर तगड़ा और आकर्षक है। आज पहली बार अपनी एक सच्ची सेक्स स्टोरी लिख रहा हूँ, जो मेरे जीवन का सबसे यादगार पल था।
एक साल पहले की बात है। मैं छुट्टियों में घर आया था। एक दिन भाभी के साथ उनके रिश्तेदारों के घर जाना पड़ा। वहाँ मेरी नज़र पड़ी दीक्षा पर।
दीक्षा भाभी की चचेरी बहन थी। उम्र 20 साल, कद 5’6″, गोरी चमड़ी, आँखें बड़ी-बड़ी, होंठ गुलाबी। उसका फिगर 35-29-38 था। देखते ही दिल पर वार कर दिया।
पहले दिन से ही हमारी अच्छी बनती गई। खाने में साथ बैठना, लंबी बातें करना, शाम को बाइक पर घूमना।
बाइक पर वो मेरी पीठ से सटकर बैठती, उसके स्तन मेरी पीठ से रगड़ खाते। हर बार इरेक्ट हो जाता। वो भी शरारत से हँसती।
जब वो लखनऊ वापस गई तो हम फोन पर बातें करने लगे। धीरे-धीरे बातें सेक्सुअल होने लगीं।
एक रात मैंने व्हाट्सएप पर लिखा, “दीक्षा, मैं तुमसे प्यार करता हूँ।” उसने तुरंत रिप्लाई किया, “मैं भी।” उसी रात से हमारी सेक्स्टिंग शुरू हो गई। वो नंगे फोटो भेजती, मैं भी।
फिर मैंने लखनऊ आने का प्लान बनाया। होटल बुक किया। वो होस्टल से निकलकर आई। हम मॉल गए, घूमे, खाना खाया।
शाम को सिनेमा हॉल गए। हॉल लगभग खाली था।
मैंने उसका हाथ पकड़ा। फिर धीरे से उसके स्तनों पर हाथ रखा। वो साँस रोककर बैठ गई। मैंने उसके टॉप के अंदर हाथ डाला, ब्रा ऊपर उठाई और निप्पल चूसने लगा।
वो कराहने लगी। फिर मैंने अपनी जिपर खोली, उसका हाथ पकड़कर अपने 7 इंच के लंड पर रख दिया। वो पहले डरी, फिर धीरे-धीरे मूठ मारने लगी।
मैंने उसकी लेगिंग के अंदर हाथ डाला। उसकी कुंवारी चूत गीली थी। दो उँगलियाँ अंदर डालीं। वो जोर-जोर से साँस लेने लगी।
मैंने क्लिटोरिस रगड़ा। 10 मिनट में वो झड़ गई। उसके शरीर में झटके आए।
हम जल्दी होटल लौटे। कमरे में प्रवेश करते ही हम एक-दूसरे पर टूट पड़े। गहरे किस। मैंने उसका टॉप उतारा, ब्रा खोली।
उसके स्तन बाहर निकले। मैंने उन्हें चूसा, काटा, चूसा। वो चीखने लगी। फिर मैंने उसकी नाभि चाटी, जीभ से रगड़ा।
उसकी पैंट उतारी। पैंटी गीली थी। मैंने उसे बिस्तर पर लिटाया। उसके मोटे, गोरे, मुलायम नितंबों को चूमा।
फिर जीभ से उसकी गांड चाटी। वो शरमा गई। मैंने उसकी चूत चाटी, जीभ अंदर डाली। फिर गांड के छेद में भी जीभ डाली। वो पागल हो गई।
“आकाश, मुझे चोदो। अब और नहीं सहा जाता।” उसने कहा।
मैंने लुब्रिकेंट लगाया। उसके ऊपर चढ़ गया। उसके होंठों पर किस करते हुए अपना लंड उसकी चूत पर रखा।
एक जोरदार झटका मारा। हाइमेन टूटा। वो चीख पड़ी। आँसू निकल आए। मैं रुका नहीं। धीरे-धीरे अंदर-बाहर करने लगा।
दर्द धीरे-धीरे कम हुआ। वो भी कमर उठाने लगी। “और जोर से… और गहरा…” वो बोलने लगी।
हमने कई पोजीशन आजमाईं। पहले मिशनरी में। फिर वो मेरे ऊपर चढ़ी। उसके स्तन मेरे मुँह में।
फिर डॉगी स्टाइल में। मैंने एक उँगली उसकी गांड में भी डाल दी। वो और जोर से चीखने लगी।
“मैं तुम्हें प्यार करती हूँ आकाश… और जोर से चोदो मुझे…” वो चीख रही थी।
15-20 मिनट बाद वो स्क्वर्ट करने लगी। बिस्तर गीला हो गया। मैंने अपना लंड बाहर निकाला और उसकी पीठ पर झड़ गया।
गर्म-गर्म वीर्य उसके नंगे शरीर पर फैल गया।
जब हम उठे तो बिस्तर पर खून के धब्बे थे। मैंने बताया, “ये तुम्हारी सील टूटने का निशान है।” वो शरमा गई।
फिर हम शॉवर में गए। एक-दूसरे को नहलाया। खाना खाया। थोड़ी देर आराम किया।
मैंने उसे बताया कि अगली कहानी में गुदा मैथुन की भी डिटेल दूंगा।
हमने चार दिन साथ बिताए। हर रात नई पोजीशन, नया मजा। दीक्षा अब मेरी बन चुकी थी।