नमस्ते, मेरा नाम आकाश है। मैं दिल्ली से हूँ और उम्र २४ साल है। मैं गरम किस्से की नियमित पाठक हूँ। आज मैं आपको अपनी एक पुरानी कहानी सुनाने जा रहा हूँ जो मेरे जीवन में बहुत खास रही। यह घटना तब हुई थी जब मैं २२ साल का था और १२वीं क्लास में पढ़ता था। उस समय मुझे सेक्स के बारे में बहुत कम जानकारी थी।
मेरे गाँव में एक ३२ साल की चाची रहती थीं जिनके दो बच्चे थे। वे बेहद सेक्सी लगती थीं। उनका फिगर मीडियम साइज का था, बाल नितंबों तक लंबे थे और कूल्हे बहुत आकर्षक थे। मैंने कई बार उन्हें नहाते देखा था। उनके स्तन थोड़े छोटे लेकिन कसे हुए थे, निप्पल खड़े रहते थे और योनि हल्के बालों वाली दिखती थी जो बहुत सेक्सी लगती थी।
एक दिन मैं उनके घर गया। वे बेडरूम में बच्चों के साथ गहरी नींद में सो रही थीं। घर में कोई और नहीं था। उनकी साड़ी ऊपर चढ़ गई थी जिससे उनकी चिकनी गोरी टाँगें दिख रही थीं। मैं काफी देर तक उन्हें देखता रहा फिर बिस्तर पर बैठ गया और उनकी टाँगों को सहलाने लगा।
मैंने उनकी साड़ी कमर तक उठा दी। पता चला कि वे पैंटी नहीं पहनी थीं। उनकी योनि साफ दिख रही थी और हल्के बाल थे। मैं काफी देर तक उनकी योनि को देखता रहा फिर अपना दाहिना हाथ उस पर रखकर धीरे-धीरे सहलाने लगा।
पाँच मिनट बाद वे जाग गईं। उन्होंने मुझे और खुद को देखा। मैंने बहाना बनाया कि बच्चे को सुला रही हूँ। उन्होंने कपड़े ठीक किए, करवट ली और फिर सो गईं।
उस रात मुझे नींद नहीं आई। मैं उनकी योनि के बारे में सोचता रहा और उन्हें चोदने की योजना बनाता रहा। एक साल बीत गया।
मैं फिर १२वीं क्लास में पहुँच गया। गर्मियों की छुट्टियों में मैं नानी के घर रुका जहाँ चाची भी रहती थीं। शाम को हम पार्क में खेलते थे। चाची भी साथ आती थीं। रात के खाने के बाद फिर पार्क जाते। स्केटिंग करते समय मैं अक्सर चाची के पास बैठ जाता।
वे लड़कियों के बारे में खुलकर बात करने लगीं और पूछतीं कि मुझे लड़कियों में क्या पसंद है।
मैंने बताया कि मुझे लड़कियों के स्तन पसंद हैं और उन्हें दबाना चाहता हूँ। उन्होंने पूछा कि सेक्स किया है या नहीं। मैंने कहा कि मैं कुंवारा हूँ।
एक दिन स्केटिंग के बाद मैं उनके पास बैठा। उन्होंने अपना हाथ मेरे हाथ पर रखकर सहलाना शुरू कर दिया। उन्होंने मेरा हाथ उठाकर अपने स्तनों पर रखा और दबाया। मैंने उनके कसे स्तन महसूस किए और खुद दबाने लगा।
उन्होंने कहा कि अगर और कुछ चाहिए तो रात को उनके कमरे में आना। मैं चाचा के बारे में चिंतित हुआ लेकिन उन्होंने बताया कि चाचा दो दिन के लिए बाहर गए हैं।
रात को सब सो जाने के बाद मैं उनके कमरे में गया। नाइट बल्ब जल रहा था। वे करवट लेकर लेटी थीं। मैंने उनकी गर्दन पर हाथ रखा और सहलाया। वे जाग रही थीं। उन्होंने करवट ली, मुझे गले लगाया और चूमने लगीं।
हम दोनों लंबे समय तक गहरे किस करते रहे। उन्होंने मेरा हाथ अपने स्तनों पर रखा और जोर से दबाया। मैंने ब्लाउज के ऊपर से उनके स्तन दबाए।
मुझे गर्मी महसूस हुई, मेरा लिंग खड़ा हो गया और पैंट में तनाव आ गया। मैंने उनका ब्लाउज और ब्रा उतार दी। उनके नंगे स्तन बाहर आ गए। मैंने उन्हें चूसना शुरू कर दिया। वे कराहने लगीं।
मैंने उनकी साड़ी, पेटीकोट और पैंटी भी उतार दी। वे पूरी तरह नंगी हो गईं। उनकी योनि अब साफ मुंडी हुई थी। मैंने अपनी उँगली उनकी योनि में डाली और अंदर-बाहर करने लगी। वे जोर से चीखीं “आह… काफी, रुक जा”।
उन्होंने मेरी पैंट और अंडरवीयर उतारी, मेरा लिंग हाथ में लिया और सहलाने लगीं। मुझे स्वर्ग जैसा महसूस हुआ। उन्होंने मेरा लिंग मुँह में लिया और गहरे तक चूसने लगीं, गले तक लेने की कोशिश करती रहीं।
दोनों बहुत उत्तेजित हो गए। उन्होंने अपनी लार मेरे लिंग और अपनी योनि पर लगाई, मेरा लिंग प्रवेश द्वार पर रखा और बोलीं “आओ राजा, अब धुन बजाओ”।
मैं समझ गया कि वे चुदवाना चाहती हैं। मैंने तुरंत धक्के मारने शुरू कर दिए। जैसे ही थोड़ा सा लिंग अंदर गया वे चीख पड़ीं “आह… ओह… रुक” लेकिन मैंने नहीं सुना और पूरा लिंग अंदर घुसा दिया।
वे मुझे कसकर गले लगाकर बैठ गईं, मेरे धक्कों को रोकने की कोशिश कीं, दर्द असहनीय बताया और रुकने की विनती कीं। मैं रुका, उनके स्तन दबाने लगा और होंठ चूसने लगा। थोड़ी देर बाद उन्होंने खुद कूल्हे ऊपर उठाने शुरू कर दिए।
समझ गया कि अब उन्हें मजा आने लगा है, मैंने फिर जोरदार और तेज धक्के मारने शुरू कर दिए। पाँच मिनट बाद दोनों एक साथ झड़ गए।
मैं उनके ऊपर लेटा उनके स्तन चूसती रहा। उन्होंने पूछा कि मजा आया या नहीं। मैंने हाँ में सिर हिलाया और उनसे चिपक गया। उन्होंने कहा कि जब चाहे चोद सकते हो। तब से मैंने उन्हें कई बार चोदा और बहुत मजा लिया।
उस रात के बाद हमारा रिश्ता नियमित हो गया। अगले दिन चाचा अभी भी बाहर थे। सुबह होते ही चाची ने मुझे इशारे से बुलाया। मैं उनके कमरे में गया। वे नहाने जा रही थीं। मैं भी उनके साथ बाथरूम में घुस गया। गर्म पानी की बौछार के नीचे हम दोनों नंगे खड़े हो गए। चाची ने मुझे पीछे से पकड़ लिया, मेरे कान में साँसें भरते हुए बोलीं कि आज पूरा दिन तेरा है।
मैंने उनकी पीठ पर साबुन लगाया, हाथ नीचे सरकाते हुए उनकी गांड सहलाई। चाची ने करवट ली, मेरे लिंग को हाथ में लेकर सहलाया। पानी की बौछार में हम फिर चूमने लगे। चाची ने घुटनों के बल बैठकर मेरा लिंग मुँह में लिया। गले तक लेने की कोशिश करती रहीं। मैंने उनके बाल पकड़कर सिर आगे-पीछे किया।
बाथरूम से निकलकर हम बेडरूम में आए। चाची ने मुझे बिस्तर पर लिटा दिया। वे मेरे ऊपर चढ़ गईं, मेरा लिंग हाथ में लेकर अपनी योनि में डाल लिया। ऊपर-नीचे होने लगीं। उनके स्तन मेरे चेहरे के सामने लहरा रहे थे। चाची जोर-जोर से चीख रही थीं।
हमने कई पोजीशन आजमाईं। मिशनरी में मैं उनके ऊपर लेटा, टाँगें फैलाकर जोर-जोर से चोद रहा था। चाची मेरे बाल खींच रही थीं। फिर डॉगी स्टाइल में चाची घुटनों के बल बैठ गईं, मैं पीछे से घुस गया। उनकी गांड के दोनों तरफ हाथ रखकर तेजी से धक्के मार रहा था।
अगले दिन चाचा ऑफिस गए। पूरा दिन हम नंगे घूमते रहे। चाची मुझे हर जगह चूमती रहीं। सोफे पर, बालकनी पर, छत पर हम सेक्स करते रहे। चाची ने कहा कि वे मेरे लिंग की दीवानी हो गई हैं। दिन में भी मेरे बारे में सोचती रहती हैं।
एक दिन चाची ने मुझे बताया कि चाचा के साथ सेक्स में उन्हें कभी संतुष्टि नहीं मिलती। चाचा जल्दी झड़ जाते हैं। मेरे साथ उन्हें पूरा आनंद मिलता है। वे मेरे लिंग को बार-बार चूसती हैं और कहती हैं कि तू मेरा असली पति है।
हमने कई बार रात को छत पर सेक्स किया। चाँदनी में चाची का शरीर चमकता। मैं उन्हें पीछे से पकड़कर चोदता। चाची का एक हाथ मेरे बालों में फँसा रहता।
कई बार चाची मुझे सुबह-सुबह बुलातीं। चाचा ऑफिस जाने के बाद हम नहाते समय सेक्स करते। पानी के नीचे भी जोश से चोदते। चाची की योनि हमेशा गीली रहती।
एक दिन चाची ने कहा कि वे मेरे बच्चे की माँ बनना चाहती हैं। मैंने कहा कि समय आने पर सोचेंगे। लेकिन अभी हमारा प्यार और सेक्स ही काफी है।
चाची ने कहा कि तू मेरा सब कुछ है। मैं तेरे बिना नहीं रह सकती। मैंने वादा किया कि मैं हमेशा उनके साथ रहूँगा।
इस तरह आकाश और उसकी चाची का गुप्त प्यार और सेक्स का सिलसिला जारी रहा। दोनों हर दिन नए-नए तरीकों से एक-दूसरे को संतुष्ट करते रहे।