रमेश 23 साल का जवान लड़का था। गाँव में उसका भाई और भाभी रहते थे। भाभी की शादी के बाद उनका शरीर और भी भरा-भरा हो गया था। उनकी भारी-भारी छातियाँ और चौड़ी कमर देखकर रमेश का मन अक्सर बेकाबू हो जाता था। रमेश को सेक्स की कहानियाँ पढ़ने और हस्तमैथुन करने की आदत थी।
एक दिन भाभी गाँव आईं। रमेश को देखते ही उनकी आँखों में चमक आ गई। वे रमेश से आँखें मिलाकर मुस्कुरातीं और कभी-कभी जानबूझकर उनके पास आकर बातें करतीं। रमेश की निगाहें उनकी छातियों पर अटक जातीं।
एक शाम रमेश अकेले बाथरूम में घुस गया। भाभी की ब्रा और पैंटी सूख रही थी। उसने उन्हें सूँघा और तुरंत उसका लंड खड़ा हो गया। वह दीवार से टिककर मुठ मारने लगा। तभी बाहर से भाभी ने दस्तक दी।
रमेश जल्दी से कपड़े पहनकर बाहर निकला, लेकिन उसका लंड अभी भी तना हुआ था। भाभी ने उसे पसीने से तर देखा और मुस्कुराते हुए पूछा, “क्या कर रहे थे अंदर?”
रमेश कुछ बोल न सका। भाभी आगे बढ़ीं और उनका शरीर रमेश से टकरा गया। रमेश का सख्त लंड भाभी की जाँघ से रगड़ खाया। भाभी की भारी छातियाँ रमेश की छाती से दब गईं। दोनों को बिजली-सी लगी। भाभी ने रमेश की जाँघ पर हाथ फेरा और फुसफुसाई, “बहुत गरम हो गया है ना?”
अगले दिन भाई और माता-पिता मंदिर गए। रमेश छत पर अकेला था। वह सेक्स की किताब पढ़ते हुए मुठ मार रहा था। अचानक भाभी छत पर आ गईं। रमेश के लंड से झड़ते हुए वीर्य को देखकर वे रुक गईं। रमेश घबरा गया, लेकिन भाभी मुस्कुराईं। वे पास आईं और बोलीं, “छुपाने की क्या जरूरत? मुझे भी तो दिखाओ।”
भाभी ने रमेश का लंड हाथ में लिया और तुरंत मुँह में डाल लिया। वे लालच से लंड चूसने लगीं। रमेश का लंड उनके गले तक पहुँच रहा था। “ग्लक-ग्लक” की आवाजें छत पर गूँज रही थीं। रमेश ने भाभी के बाल पकड़कर उनके मुँह में तेजी से लंड घुसाना शुरू कर दिया। भाभी की आँखों से आँसू निकल आए, लेकिन वे और जोर से चूसती रहीं।
कुछ देर बाद भाभी ने रमेश को चूम लिया। उनकी जीभें एक-दूसरे से उलझ गईं। रमेश ने भाभी की साड़ी उतारी, ब्लाउज के हुक खोले और ब्रा फेंक दी। भाभी की भारी छातियाँ झूलने लगीं। रमेश ने उन्हें दोनों हाथों से दबाया और चूसने लगा।
उनके निप्पल लाल हो गए। रमेश ने उन पर दाँतों के निशान छोड़ दिए। भाभी सिसकने लगीं, “रमेश… मेरी चूत को चोद दो… अपना लंड अंदर डाल दो।”
रमेश ने भाभी को बिस्तर पर लिटाया। उन्होंने भाभी की जाँघें फैलाईं और उनकी गीली चूत चाटने लगा। जीभ अंदर तक घुसा दी। भाभी का शरीर काँप रहा था। वे रमेश के सिर को अपनी जाँघों में दबा रही थीं। रमेश ने भाभी की चूत को अच्छे से चूसा और फिर अपना मोटा लंड उनकी चूत के मुँह पर रखा।
एक जोरदार धक्का मारा। भाभी चीख उठीं। रमेश का पूरा लंड उनकी चूत में घुस गया। भाभी का शरीर अकड़ गया। रमेश ने धीरे-धीरे गति बढ़ाई। भाभी भी नीचे से उठ-उठकर रमेश का साथ देने लगीं। रमेश भाभी को “रंडी” कहकर पुकारता और उनकी छातियों पर थप्पड़ मारता। भाभी की चूत से “छप-छप” की आवाजें आ रही थीं।
पंद्रह मिनट तक जोरदार चुदाई चली। भाभी के नाखून रमेश की पीठ में गड़ गए। दोनों एक साथ झड़ गए। रमेश ने भाभी की चूत के अंदर ही अपना सारा वीर्य छोड़ दिया। भाभी की साँस फूल रही थी।
थोड़ी देर आराम करने के बाद रमेश ने भाभी को गोद में उठा लिया। वे खड़े-खड़े चोदने लगे। रमेश भाभी को ऊपर-नीचे उठाता और अपना लंड अंदर गहराई तक घुसाता। भाभी रमेश की गर्दन में मुँह छुपाकर चीख रही थीं। बीस मिनट बाद दोनों फिर झड़ गए।
अगले बीस दिनों तक रमेश और भाभी हर मौके पर सेक्स करते रहे। भाभी साड़ी उठाकर रमेश के सामने खड़ी हो जातीं और खुद रमेश का लंड अपनी चूत में घुसा लेतीं। रसोई में, कमरे में, छत पर, हर जगह उनकी चुदाई होती। भाभी रमेश के लंड की दीवानी हो गई थीं।
रमेश भाभी की भारी छातियों को चूसता, उनकी चूत चाटता और जोर-जोर से चोदता। भाभी हर बार नई-नई पोजीशन में चुदने को तैयार रहतीं। कभी रमेश भाभी को दीवार से टिकाकर चोदता, कभी भाभी रमेश के ऊपर चढ़कर घोड़ी बनकर चुदतीं।
एक दिन भाभी ने रमेश को बाथरूम में घसीटा। उन्होंने रमेश का लंड मुँह में लिया और चूसने लगीं। रमेश ने भाभी की साड़ी ऊपर उठाई और पीछे से उनका लंड भाभी की चूत में घुसा दिया। भाभी “आह… आह…” करती रहीं।
रमेश ने उनकी जाँघें पकड़कर तेजी से धक्के मारे। भाभी का शरीर काँप रहा था। रमेश ने भाभी की छातियाँ दबाईं और उनके निप्पल चूसे।
भाभी ने रमेश से कहा, “मेरी चूत अब सिर्फ तेरे लंड के लिए है। जब चाहे आकर चोद लेना।” रमेश ने भाभी को चूम लिया और फिर से उनकी चूत में लंड ठूंस दिया। दोनों पसीने से तर हो चुके थे। रमेश ने भाभी को उल्टा लिटाया और पीछे से जोर-जोर से चोदा। भाभी की चूत से लगातार पानी निकल रहा था।
रमेश भाभी की गांड भी सहलाता और कभी-कभी उँगली डालकर भाभी को और उत्तेजित करता। भाभी रमेश के बाल पकड़कर उन्हें अपनी छातियों पर दबातीं। रमेश उनकी छातियों को चूसता और काटता। भाभी की चीखें पूरे घर में गूँजतीं।
एक रात भाई के सो जाने के बाद भाभी रमेश के कमरे में आईं। उन्होंने रमेश को नंगा पाया और तुरंत उनके लंड पर बैठ गईं। रमेश की गोद में बैठकर भाभी ऊपर-नीचे होने लगीं।
रमेश भाभी की कमर पकड़कर उन्हें तेजी से उठाता-बैठाता। भाभी का शरीर पसीने से चमक रहा था। उनकी छातियाँ रमेश के मुँह के सामने लहरा रही थीं। रमेश ने उन्हें चूसा और काटा।
भाभी ने रमेश को चूमते हुए कहा, “तुम्हारा लंड मेरी चूत का मालिक है।” रमेश ने भाभी को पीछे लिटाया और उनकी जाँघें कंधों पर रखकर गहराई तक चोदा। भाभी की चूत रमेश के लंड को कसकर पकड़ रही थी। दोनों एक साथ झड़ गए। रमेश ने भाभी की चूत में फिर से अपना वीर्य भर दिया।
अगली सुबह भाभी ने रमेश को नहाते हुए देखा। उन्होंने रमेश के लंड को हाथ में लिया और फिर से चूसने लगीं। रमेश ने भाभी को उठाकर दीवार से टिकाया और उनकी चूत में लंड घुसा दिया।
भाभी की साड़ी अभी भी पहनी हुई थी, बस ऊपर उठी हुई थी। रमेश ने भाभी की छातियाँ बाहर निकालीं और चूसते हुए चोदा।
भाभी रमेश की पीठ पर नाखून गड़ातीं और “चोदो… और जोर से चोदो” कहकर चीखतीं। रमेश ने भाभी की गांड पर थप्पड़ मारा और तेजी से धक्के मारे। भाभी का शरीर काँप उठा और वे झड़ गईं। रमेश ने भी अंदर ही झड़कर भाभी की चूत भर दी।
इस तरह बीस दिनों तक रमेश और भाभी का सेक्स जारी रहा। हर दिन नई जगह, नई पोजीशन में वे चुदाई करते। भाभी रमेश के लंड की भूखी रहतीं और रमेश भाभी की भरी हुई बॉडी का पूरा मजा लेता।