डांस प्रैक्टिस के बहाने मिली कुंवारी चूत

(Dance Practice Ke Bahane Mili Kuwari Chut)

नमस्कार दोस्तो!

उस दिन कॉलेज की डांस कॉम्पिटिशन के लिए हम दोनों को कपल डांस करना था। मैं हरियाणा का 5’5″ लड़का था और वो मेरी वर्जिन दोस्त 5’3″ गोरी-चिट्टी लड़की थी। उसकी छोटी-छोटी छातियाँ थीं लेकिन गोल-गोल बड़ा मोटा गांड था।

प्रैक्टिस के लिए वो मेरे किराए के फ्लैट पर आई, काली जींस और सफेद क्रॉप टॉप पहने हुए, नीचे स्पोर्ट्स ब्रा।

“मोहब्बत बरसा देना तू सावन आया है” गाना बजाया। डांस करते हुए मेरा लंड उसकी गांड पर दबने लगा।

मैंने उसे अपने पैरों पर खड़ा किया तो उसकी छातियाँ मेरी छाती से लगीं और मेरा खड़ा लंड सीधे उसकी चूत पर दब गया। दोनों की साँसें तेज हो गईं।

मैंने उसे घुमाया, अब मेरा लंड उसकी गांड की दरार में फँस गया। हाथ उसके पेट पर फिर नीचे फिसलते हुए उसकी जींस के अंदर चले गए।

हम दोनों ने जोर से चूमना शुरू कर दिया। मैंने उसे टेबल पर उठा लिया, टाँगें फैलाईं और चूमता रहा।

क्रॉप टॉप और ब्रा उतार दी। उसके छोटे निप्पल चूसने और काटने लगा। मीठा दर्द हुआ तो वो सिसकारियाँ लेने लगी।

बेड पर ले जाकर जींस और काली पैंटी उतार दी। उसकी पहली बार चूत देखकर मुँह लगाया। जीभ नीचे से ऊपर तक घुमाई, चूत चाटी, क्लिट रगड़ी।

फ्रिज से आइस क्यूब लाया, उसके पेट, छाती, होठों पर रगड़ा फिर चूत पर। ठंड और गर्मी के मिश्रण से वो चीखते हुए झड़ गई।

मैंने अपना लंड उसके मुँह के सामने किया। पहले चूमती रही फिर चूसने लगी। लेटाकर उसके चूत पर लंड रगड़ा और एक जोरदार झटका मारा। “सील पैक” चूत थी, वो चीख पड़ी। मैंने उसके होठों पर मुँह रखकर चीख दबाई और एक और धक्का देकर पूरा लंड अंदर घुसा दिया।

मिशनरी पोजीशन में चोदने लगा। दर्द के बाद वो भी मज़ा लेने लगी और कूल्हे उठाकर साथ देने लगी।

69 स्टाइल में करवट दी। उसकी मोटी गांड थपथपाई, लाल-लाल हो गई। “थप-थप” की आवाज पूरे कमरे में गूँज रही थी।

फिर वो ऊपर चढ़कर काउगर्ल पोजीशन में चोदने लगी। मैं उसके स्तन दबा रहा था। बीस मिनट बाद दोनों एक साथ झड़ गए।

उस दिन तीन बार सेक्स किया। कॉलेज खत्म होने तक यही सिलसिला चला।

कॉलेज में डांस कॉम्पिटिशन का ऐलान हुआ था। जोड़ी बनानी थी और मुझे मेरी सबसे अच्छी दोस्त मिली।

हम दोनों ने पहले कभी सेक्स नहीं किया था। वो न सिर्फ वर्जिन थी बल्कि कभी बॉयफ्रेंड भी नहीं रहा। प्रैक्टिस के लिए उसने मेरे फ्लैट आने का सुझाव दिया।

अगले दिन दोपहर बाद वो आई। काली टाइट जींस और सफेद क्रॉप टॉप में। टॉप इतना छोटा था कि नाभि साफ दिख रही थी।

अंदर स्पोर्ट्स ब्रा थी। 5’3″ कद, दूधिया गोरा रंग, छोटी-छोटी मगर गोल छातियाँ और सबसे आकर्षक चीज उसकी बड़ी-बड़ी मोटी गांड।

“गाना लगा,” उसने कहा। मैंने “मोहब्बत बरसा देना तू सावन आया है” ऑन किया।

दोनों पास-पास खड़े होकर डांस करने लगे। पहले स्टेप्स सीख रहे थे, फिर धीरे-धीरे पास आ गए। मेरा लंड खड़ा हो चुका था और वो सीधे उसकी नरम गांड से टकरा रहा था।

“मेरे पैरों पर खड़ी हो जा,” मैंने कहा। वो मेरे जूतों पर चढ़ गई। अब उसकी छोटी छातियाँ मेरी छाती से सटी हुई थीं।

मेरा लंड सीधे उसकी चूत के पास दब रहा था। दोनों की साँसें गर्म हो गई थीं।

मैंने उसे घुमाया। अब मेरा लंड उसकी गांड की दरार में फँस गया। हाथ उसके पेट पर रखे, फिर ऊपर फसलकर क्रॉप टॉप के अंदर चले गए। ब्रा के ऊपर से उसकी छातियाँ दबाईं। वो सिसकारी ले रही थी।

“क्या कर रहे हो?” फुसफुसाई। “चुप,” मैंने गर्दन पर किस किया। एक हाथ जींस के अंदर डाला। पैंटी के ऊपर से उसकी चूत छू ली।

हम दोनों का कंट्रोल टूट चुका था। आमने-सामने होकर जोर से चूमने लगे। जीभें एक-दूसरे के मुँह में घुस रही थीं।

मैंने उसे गोद में उठा लिया और टेबल पर बैठा दिया। टाँगें फैलाईं, उसके बीच में खड़ा हो गया। चूमता रहा – होंठ, गला, कान।

क्रॉप टॉप ऊपर खींचा और उतार दिया। स्पोर्ट्स ब्रा खोल दी। छोटे-छोटे गुलाबी निप्पल बाहर आए।

एक को मुँह में लिया, चूसा, काटा। दूसरा हाथ से दबाया और निचोड़ा। वो दर्द से कराह रही थी लेकिन मज़ा भी ले रही थी।

“दर्द हो रहा है,” बोली। “मीठा दर्द,” मैंने कहा और जोर से काट लिया।

उसे गोद में उठाकर बेड पर ले आया। जींस का बटन खोला, जिपर नीचे खींचा। काली पैंटी के साथ जींस भी उतार दी।

अब वो पूरी तरह नंगी थी। पहली बार किसी लड़की की चूत सामने थी – गुलाबी, तंग, बिल्कुल साफ।

घुटनों के बल बैठ गया। चूत के पास मुँह लगाया। पहले आसपास किस किए, फिर जीभ बाहर निकाली और नीचे से ऊपर तक एक लंबा चाटा मारा।

वो काँप गई। क्लिट को उंगली से रगड़ा और जीभ से चाटता रहा।

फ्रिज से आइस क्यूब लाया। उसके पेट पर रखा, फिर निप्पल पर घुमाया। ठंड लगने से निप्पल खड़े हो गए। होठों पर रगड़ा, फिर चूत के पास ले आया।

आइस क्यूब से चूत रगड़ते हुए जीभ से चाट रहा था। ठंड और गर्मी का कॉम्बिनेशन इतना तीखा था कि वो चीखते हुए झड़ गई। पहला ऑर्गेज्म।

“अब तू मेरा चूस,” मैंने अपना लंड उसके होंठों के पास किया। पहले डर रही थी। फिर होंठों से छुआ, किस किया।

फिर मुँह खोला और सिरा अंदर लिया। धीरे-धीरे पूरा मुँह में लेने लगी। मैं उसके बालों में हाथ डालकर धीरे-धीरे आगे-पीछे कर रहा था।

उसे पीठ के बल लिटाया। लंड उसकी चूत पर रगड़ा। गीली थी। सिरा अंदर डाला। “आह!” वो चीख पड़ी। बहुत टाइट थी।

एक जोर का झटका मारा तो आधा लंड अंदर घुस गया। दर्द से आँसू निकल आए।

“दर्द हो रहा है,” रो पड़ी। मैंने उसके होंठों पर मुँह रख दिया और एक और जोरदार धक्का मारा। पूरा लंड अंदर घुस गया। “सील पैक” चूत थी।

धीरे-धीरे निकालता और घुसाता रहा। दर्द कम होने लगा। अब वो भी कूल्हे उठाकर साथ देने लगी। मिशनरी में चोदता रहा – गहरा, धीमा, फिर तेज।

उसे घुमाकर घुटनों के बल कर दिया। गांड ऊपर, चेहरा तकिये में। लंड पीछे से अंदर डाला।

अब और गहराई तक जा रहा था। एक हाथ से उसकी मोटी गांड थपथपाने लगा। थप-थप की आवाजें कमरे में गूँज रही थीं। गांड लाल हो गई।

“और जोर से मार,” वो पहली बार बोल रही थी।

अंत में वो ऊपर चढ़ गई। मेरा लंड पकड़कर अपनी चूत में उतारा। ऊपर-नीचे होने लगी। मैं उसके स्तन निचोड़ रहा था।

बीस मिनट बाद दोनों एक साथ झड़ गए। उसकी चूत ने मेरा लंड निचोड़ा और मैं अंदर ही झड़ गया।

पहली बार खत्म होने के बाद दस मिनट आराम किया।

फिर दूसरी बार शुरू किया – इस बार वो खुद मुँह में लेकर खड़ा कर रही थी। तीसरी बार शॉवर में किया। पानी के नीचे खड़े होकर पीछे से चोदा।

कॉलेज के आखिरी दिन तक ये सिलसिला चला। हर हफ्ते दो-तीन बार सेक्स। कभी फ्लैट पर, कभी कॉलेज के पीछे पार्किंग में कार में।

कॉलेज खत्म होने के दिन आखिरी बार सेक्स किया।

सुबह से शाम तक नंगे पड़े रहे। बार-बार चोदा। आखिर में दोनों थककर सो गए।

अगले दिन वो अपने गाँव चली गई। नंबर-ईमेल सब बदल दिए। दोबारा कभी मुलाकात नहीं हुई।

आज भी जब “मोहब्बत बरसा देना”

सुनता हूँ तो उस दिन की याद आती है – उसकी दूधिया गांड, चीखती हुई पहली बार, आइस क्यूब से चूत चाटना, और तीन बार की थकान भरी सेक्स।