ये बात तब की है जब मैंने अपनी गर्लफ्रेंड की सगी भाभी को चोद दिया क्योंकि उनको मैंने चुदते पकड़ लिया था।
विकास की नज़रों के सामने सुरुचि और सुखविंदर का पूरा सीन चल रहा था। दरवाज़े की दरार से देखते हुए उसे लगा जैसे उसकी सारी साँसें रुक गई हों। सुरुचि घुटनों के बल बैठी थी, उसके होंठ सुखविंदर के मोटे लंड को चूस रहे थे।
उसकी जीभ लंड की नोक पर घूम रही थी, लार की लकीरें उसके मोटे स्तनों तक टपक रही थीं। सुखविंदर उसके बालों में हाथ डालकर उसके सिर को आगे-पीछे कर रहा था।
“बहू, और ज़ोर से चूस… हाँ, ठीक इसी तरह,” सुखविंदर की आवाज़ काँप रही थी। सुरुचि की आँखें आँसुओं से भीग चुकी थीं, फिर भी वह उसके लंड को गले तक ले जा रही थी।
थोड़ी देर बाद सुखविंदर ने उसे उठाया। सुरुचि की पीठ दीवार से टिकी हुई थी। सुखविंदर उसके दोनों स्तनों को हाथों में भरकर दबा रहा था। उसके मुँह से निकल रही सिसकारियाँ पूरे कमरे में गूँज रही थीं।
“मेरी बहू की चूत कितनी गीली है… देखो,” सुखविंदर ने घुटनों के बल बैठकर सुरुचि की जांघें फैलाईं और उसकी चूत चाटने लगा। उसकी जीभ सुरुचि की फूल चुकी लेबिया पर फिसल रही थी। सुरुचि की उँगलियाँ उसके बालों में उलझ गईं।
“आह… चाटो… और गहरे,” सुरुचि की आवाज़ काँप रही थी। सुखविंदर ने उसकी चूत को चूसते हुए उसकी भग को दाँतों से हल्का सा काट लिया। सुरुचि का शरीर झटके से काँप उठा।
फिर सुखविंदर ने उसे गोद में उठा लिया। सुरुचि की टाँगें उसके कूल्हों के चारों ओर लिपटी हुई थीं। सुखविंदर का मोटा लंड एक ही झटके में सुरुचि की चूत में घुस गया। सुरुचि चीख पड़ी।
“आह… धीरे… बहुत मोटा है…”
सुखविंदर हँस पड़ा। “बहू, तेरी चूत तो मेरे लंड के लिए ही बनी है।” वह सुरुचि को ऊपर-नीचे करने लगा। हर धक्के के साथ सुरुचि के स्तन ऊपर-नीचे उछल रहे थे। सुखविंदर उनके निप्पलों को चूस रहा था। सुरुचि की नाखून उसकी पीठ में गड़ चुके थे।
बीस मिनट तक इसी तरह चोदने के बाद सुखविंदर ने सुरुचि को ज़मीन पर लिटा दिया। उसने सुरुचि की टाँगें अपने कंधों पर रख लीं और जोर-जोर से चोदने लगा। सुरुचि की चूत से चिकनाहट की आवाज़ें आ रही थीं।
“मेरी बहू… तेरी चूत में मेरा लंड कितना मज़ा दे रहा है… देख,” सुखविंदर ने सुरुचि के चेहरे पर थूक दिया। सुरुचि ने उसकी लार चाट ली।
आखिरकार सुखविंदर का शरीर काँप उठा। उसने सुरुचि की चूत में अपना सारा वीर्य छोड़ दिया। सुरुचि की आँखें बंद थीं। उसका शरीर पसीने से तर था। सुखविंदर ने लंड निकालकर सुरुचि के मुँह में डाल दिया। सुरुचि ने बिना हिचकिचाहट के उसे चाट लिया।
सुखविंदर चला गया। सुरुचि नंगी लेटी हुई थी। उसकी चूत से वीर्य बह रहा था।
विकास ने घंटी बजाई। सुरुचि चौंककर उठी। उसने जल्दी से एक चादर लपेटी और दरवाज़ा खोला।
“विकास… तुम इतनी जल्दी?”
विकास ने अंदर कदम रखा। “दरवाज़ा खुला था।”
सुरुचि की साँसें अभी भी तेज़ थीं। विकास ने देखा कि उसके होंठ सूजे हुए थे, गर्दन पर चूसने के निशान थे।
“कुछ… कुछ हुआ क्या?” विकास ने पूछा।
सुरुचि ने सिर हिलाया। “नहीं… बस थक गई हूँ।”
विकास मुस्कुराया। “मैंने सब देख लिया।”
सुरुचि का चेहरा सफेद पड़ गया। “क्या… क्या मतलब?”
“तुम और सुखविंदर… दोनों सेशन।”
सुरुचि के घुटने कमज़ोर पड़ गए। वह फर्श पर बैठ गई। “विकास… प्लीज़… Parul को मत बताना।”
विकास ने उसके बालों में हाथ फेरा। “मैं कुछ नहीं बताऊँगा… लेकिन शर्त है।”
सुरुचि ने आँखें उठाईं। “क्या शर्त?”
विकास ने अपनी पैंट उतारी। उसका लंड पहले से खड़ा था। “अब से मैं भी तुम्हें चोदूँगा।”
सुरुचि ने आँखें बंद कीं। “ठीक है… लेकिन Parul को कभी पता नहीं चलना चाहिए।”
उसी रात विकास सुरुचि के बेडरूम में घुसा। सुरुचि नंगी सो रही थी। विकास ने उसकी जांघों के बीच हाथ डाला। सुरुचि की चूत अभी भी गीली थी। विकास ने दो उँगलियाँ अंदर डाल दीं। सुरुचि की आँखें खुल गईं।
“विकास…”
विकास ने उसे चुप कराने के लिए उसके मुँह पर हाथ रखा। “चुप… आज रात तू मेरी है।”
विकास ने सुरुचि की चूत चाटनी शुरू कर दी। सुरुचि की जांघें काँप रही थीं। विकास ने उसकी भग को चूस लिया। सुरुचि की उँगलियाँ चादर में उलझ गईं।
“आह… चाटो… और ज़ोर से…”
विकास ने सुरुचि को पलटा। उसने उसकी गांड चाटनी शुरू कर दी। सुरुचि की सिसकारियाँ बढ़ गईं। विकास ने अपनी जीभ उसकी गांड में घुसा दी। सुरुचि का शरीर झटके से काँप उठा।
फिर विकास ने सुरुचि को मिशनरी पोज़ीशन में लिटाया। उसका लंड सुरुचि की चूत में घुसा। सुरुचि चीख पड़ी।
“आह… बहुत मोटा… भर रहा है…”
विकास ने सुरुचि की टाँगें अपने कंधों पर रख लीं और जोर-जोर से चोदने लगा। सुरुचि के स्तन उसके चेहरे के सामने उछल रहे थे। विकास ने एक निप्पल को मुँह में लिया और चूसने लगा।
सुरुचि की चूत से चिकनाहट की आवाज़ें आ रही थीं। विकास ने सुरुचि के बाल खींचे और उसके मुँह में थूक दिया। सुरुचि ने उसे चाट लिया।
“मेरी बहू… तेरी चूत कितनी टाइट है…”
विकास ने सुरुचि को उल्टा किया। अब सुरुचि ऊपर थी। वह विकास के लंड पर बैठ गई। विकास ने सुरुचि की कमर पकड़कर उसे ऊपर-नीचे करना शुरू कर दिया। सुरुचि के स्तन विकास के चेहरे पर लटक रहे थे। विकास ने उन्हें दोनों हाथों से दबा लिया।
“आह… मेरा लंड तेरी चूत में कितना मज़ा दे रहा है…”
सुरुचि ने विकास के बालों में हाथ डाला। “तुम्हारा लंड… बहुत अच्छा लग रहा है…”
विकास ने सुरुचि को कुत्ते जैसी पोज़ीशन में कर दिया। उसने सुरुचि की गांड पर थप्पड़ मारा। सुरुचि की चूत से और ज़्यादा रस निकल आया। विकास ने अपना लंड सुरुचि की चूत में घुसा दिया।
“आह… और ज़ोर से… चोदो मुझे…”
विकास ने सुरुचि के बाल खींचे और जोर-जोर से चोदने लगा। सुरुचि की चीखें पूरे कमरे में गूँज रही थीं।
बीस मिनट तक चोदने के बाद विकास ने सुरुचि को खड़ा किया। उसने सुरुचि को मेज़ पर झुकाया। सुरुचि की गांड ऊपर उठी हुई थी। विकास ने अपना लंड सुरुचि की गांड में घुसा दिया।
सुरुचि चीख पड़ी। “आह… गांड… फट रही है…”
विकास ने सुरुचि की कमर पकड़कर जोर-जोर से चोदना शुरू कर दिया। सुरुचि की आँखों से आँसू निकल रहे थे। विकास ने सुरुचि के मुँह में उँगलियाँ डाल दीं। सुरुचि ने उन्हें चूस लिया।
विकास ने सुरुचि को घुमाया। अब सुरुचि मेज़ पर पीठ के बल लेटी थी। विकास ने उसकी टाँगें फैलाईं और फिर से उसकी चूत चोदने लगा। सुरुचि की उँगलियाँ विकास की पीठ में गड़ रही थीं।
“आह… और गहरा… भर दो मुझे…”
विकास ने सुरुचि के स्तनों को दोनों हाथों से दबाया। सुरुचि का शरीर काँप उठा। उसकी चूत ने विकास के लंड को निचोड़ लिया। सुरुचि का पहला ऑर्गेज़्म आ गया।
विकास ने सुरुचि को घुटनों के बल बैठाया। सुरुचि ने विकास के लंड को मुँह में लिया। विकास ने सुरुचि के बालों में हाथ डाला और उसके सिर को आगे-पीछे करना शुरू कर दिया। सुरुचि के गले में विकास का लंड घुस रहा था।
“हाँ… और गहरा… चूस…”
सुरुचि की आँखें आँसुओं से भीग चुकी थीं। फिर भी वह विकास के लंड को गले तक ले जा रही थी। विकास ने सुरुचि के मुँह में अपना वीर्य छोड़ दिया। सुरुचि ने सब कुछ निगल लिया।
विकास ने सुरुचि को फिर से मेज़ पर झुकाया। अब वह सुरुचि की गांड चोदने लगा। सुरुचि की चीखें अब रोने जैसी हो गई थीं।
“आह… दर्द… हो रहा है…”
विकास ने सुरुचि के बाल खींचे। “चुप… अब तू मेरी है।”
बीस मिनट तक गांड चोदने के बाद विकास ने सुरुचि के मुँह में फिर से वीर्य छोड़ा। सुरुचि ने सब कुछ निगल लिया।