फ्रेंड्स, मैं मधुलेखा अपनी एक और सच्ची कहानी लेकर आप सबके सामने हाजिर हूँ.
इस बार अपनी नासमझी में मैं कैसे एक डिलीवरी ब्वॉय के साथ चुद गई, कैसे मैंने क्विक सेक्स इन द मोर्निंग का मजा लिया, उस दास्तान को आप सबको सुनाना चाहती हूँ,
मैं मधुलेखा हूं, 32 साल की, फिगर 36-28-38।
राज मेरा पति, 35 का, बिजनेस करता है।
घर पर मैं और मेरा पति राज हम दोनों ही रहते हैं क्योंकि मेरा आठ साल का बेटा हॉस्टल में रहता है.
सुबह के करीब साढ़े सात बजे का समय था। राज अभी भी सो रहा था, क्योंकि कल रात वो थककर चूर हो गया था।
हमारी शादी को दस साल हो चुके हैं, लेकिन अभी भी हमारी सेक्स लाइफ अच्छी है। पर आज सुबह कुछ अलग ही होने वाला था।
मैंने रात को ऑनलाइन कुछ सामान ऑर्डर किया था – एक नया ब्लाउज और कुछ आंतरिक कपड़े।
डिलीवरी का समय सुबह आठ बजे का था, लेकिन वो थोड़ा पहले आ गया।
मैंने किचन में चाय बना ली थी और खुद के लिए ब्रेड टोस्ट कर रही थी।
मेरी बॉडी पर सिर्फ एक पतली साड़ी लिपटी हुई थी, क्योंकि घर पर अकेले होने का फायदा उठा रही थी।
साड़ी का ब्लाउज भी ढीला था, जो मेरे 36D के बूब्स को अच्छे से कवर नहीं कर पा रहा था।
बाल खुले हुए थे, और मैंने मेकअप भी नहीं किया था।
अचानक डोरबेल बजी। मैंने सोचा डिलीवरी बॉय होगा।
जाते हुए मैंने आईने में खुद को देखा – चेहरा थोड़ा सुलग रहा था, होंठ गुलाबी, और आंखों में एक अजीब सी चमक।
मैंने दरवाजा खोला। सामने एक जवान लड़का खड़ा था, शायद 22-23 साल का।
उसकी यूनिफॉर्म टाइट थी, जो उसके मस्कुलर बॉडी को दिखा रही थी।
चेहरा साफ-सुथरा, बाल छोटे, और आंखों में शरारत भरी हुई। “मैडम, आपका पैकेट,” उसने कहा और पैकेट थमा दिया।
मैंने साइन करने के लिए पेन लिया, लेकिन मेरी साड़ी का पल्लू थोड़ा सरक गया।
मेरे बूब्स का एक हिस्सा दिख गया। लड़के की नजरें वहीं टिक गईं।
मैंने जल्दी से पल्लू ठीक किया, लेकिन उसके चेहरे पर मुस्कान आ गई। “कुछ और चाहिए मैडम?” उसने पूछा, आवाज में एक गहराई थी।
मैंने हिचकिचाते हुए कहा, “नहीं, बस इतना ही।”
लेकिन वो अंदर की तरफ झांका।
“सब ठीक है ना मैडम? घर पर कोई नहीं?” मैंने बताया कि पति सो रहा है।
तभी अचानक बारिश शुरू हो गई। बाहर तेज बारिश हो रही थी।
“अरे, ये तो रुक जाए तो ही जाऊंगा,” उसने कहा।
मैंने मन ही मन सोचा, थोड़ा इंतजार कर ले।
मैंने उसे अंदर आने को कहा।
वो अंदर आया और मैंने उसे चाय ऑफर की।
हम किचन में बैठ गए।
उसका नाम रवि था, जैसा उसने बताया। वो डिलीवरी कंपनी में नया था।
बातों-बातों में वो मेरी तरफ झुकने लगा।
उसकी आंखें मेरी साड़ी पर टिकी हुई थीं।
मेरी चूत में एक अजीब सी हलचल हो रही थी।
राज के साथ कल रात अच्छा सेक्स हुआ था, लेकिन ये नया एक्साइटमेंट कुछ और था।
“मैडम, आप बहुत हॉट लग रही हैं,” रवि ने अचानक कहा।
मैं शरमा गई, लेकिन बोली, “क्या बकवास कर रहे हो?”
वो हंस पड़ा और बोला, “सच कह रहा हूं। आपकी बॉडी कमाल की है।”
उसने अपना हाथ मेरी जांघ पर रख दिया। मैं चौंक गई, लेकिन हटाया नहीं।
मेरी सांसें तेज हो गईं।
“रवि, ये क्या कर रहे हो?” मैंने धीमी आवाज में कहा।
वो और करीब आ गया। उसके होंठ मेरे कान के पास थे।
“मैडम, बस थोड़ा सा मजा ले लीजिए। कोई नहीं जानेगा।” उसकी सांस गर्म थी।
मैंने राज की तरफ देखा – वो अभी भी सो रहा था। मेरी चूत गीली हो रही थी। मैंने हल्का सा सिर हिलाया। रवि ने तुरंत मेरे होंठ चूम लिए। उसका चुंबन जुनूनी था। जीभ अंदर डालकर मेरी जीभ से खेलने लगा।
मैंने उसके कंधों को पकड़ लिया। उसका हाथ मेरी साड़ी के अंदर घुस गया। ब्लाउज के ऊपर से बूब्स दबाने लगा। “आह… रवि…” मैं सिसकारी। वो ब्लाउज का हुक खोल दिया। मेरे बूब्स बाहर आ गए। निप्पल्स सख्त हो चुके थे। रवि ने एक निप्पल मुंह में ले लिया और चूसने लगा। जोर-जोर से चूस रहा था। दूसरा हाथ से मसल रहा था।
मैंने उसके पैंट पर हाथ रखा। उसका लंड सख्त हो चुका था। बहुत बड़ा लग रहा था। मैंने जिपर खोला और अंदर हाथ डाल दिया। लंड गर्म और मोटा था। “कितना बड़ा है तेरा,” मैंने फुसफुसाया। रवि हंस पड़ा और बोला, “मैडम, इसे आजमाइए ना।
मैंने घुटनों पर बैठकर उसके लंड को बाहर निकाला। सिरा चमक रहा था। मैंने जीभ से चाटा। नमकीन स्वाद। फिर मुंह में ले लिया। चूसने लगी। रवि के हाथ मेरे बालों में थे। “हां मैडम, ऐसे ही चूसो।”
मैंने जोर-जोर से चूसा। लंड मुंह में पूरा घुसा लिया। गले तक। रवि सिसकार रहा था। “बस मैडम, अब चोद दूं?” मैंने सिर हिलाया। वो मुझे उठाया और किचन काउंटर पर बिठा दिया। साड़ी ऊपर चढ़ाई और पैंटी उतार दी। मेरी चूत रस से भीगी हुई थी। रवि ने उंगली डाली। “कितनी गीली है,” बोला। फिर अपना लंड चूत पर रगड़ने लगा।
“डाल ना रवि,” मैंने बेताब होकर कहा। वो एक झटके में लंड अंदर घुसा दिया। “आह्ह्ह…” दर्द और मजा दोनों। बहुत मोटा था। रवि ने कमर पकड़कर धक्के मारने शुरू कर दिए। तेज-तेज। किचन में चपचप की आवाज। मेरे बूब्स उछल रहे थे। मैंने उसके गले में हाथ डाल दिए। “चोद रवि, जोर से चोद।”
रवि ने स्पीड बढ़ा दी। लंड चूत के अंदर बाहर हो रहा था। मेरी चूत कस रही थी। “मैडम, तुम्हारी चूत कितनी टाइट है,” वो बोला। मैं सिसकार रही थी। अचानक राज का खर्राटा सुनाई दिया। हम दोनों रुक गए। लेकिन एक्साइटमेंट और बढ़ गया। रवि ने फिर धक्के मारे। मैंने अपना मुंह उसके मुंह पर रख लिया ताकि आवाज न निकले।
करीब दस मिनट चुदाई चली। रवि बोला, “मैडम, आने वाला हूं।” मैंने कहा, “अंदर ही झड़ जा।” वो जोर का धक्का मारा और स्पर्म चूत में छोड़ दिया। गर्म गर्म। मैं भी झड़ गई। चूत सिकुड़ रही थी। हम दोनों हांफ रहे थे। रवि ने लंड बाहर निकाला। स्पर्म मेरी जांघों पर बह रहा था।
मैंने जल्दी से कपड़े ठीक किए। रवि ने भी। “मैडम, ये तो कमाल था,” बोला। मैं मुस्कुराई। “हां, लेकिन दोबारा मत आना।” वो हंस पड़ा और चला गया। बारिश रुक चुकी थी। मैं किचन साफ करने लगी। राज उठा तो मैंने चाय दी। वो कुछ नहीं जानता। लेकिन मेरी चूत में अभी भी रवि का स्पर्म था।
ये था मेरा सुबह का क्विक सेक्स। फ्रेंड्स, कैसी लगी कहानी? कमेंट्स में बताइए।