नमस्कार दोस्तो, मैं राज मल्होत्रा! आपका गरम किस्से की सैक्स कहानी पर स्वागत है।
दोस्तो, जैसा कि आप मेरी कहानी जान चुके हो कि मैं अपनी बुआ को चोदता हूं। वो मेरी पापा की चचेरी बहन हैं, नाम है राधा।
उम्र करीब 42 साल, लेकिन फिगर ऐसा कि कोई जवान लड़की भी शर्मा जाए। विधवा होकर भी उनकी चूत हमेशा गीली रहती है, और मैंने उन्हें कई बार संतुष्ट किया है।
आज की ये कहानी उनके जन्मदिन की है, जब उन्होंने मुझे बुलाया और रातभर चुदाई का मजा लिया।
सबसे पहले तो मैं बता दूं कि राधा बुआ का घर शहर से थोड़ा बाहर है, एक छोटा सा बंगला जहां वो अकेली रहती हैं।
पति की मौत के बाद उन्होंने कभी दूसरी शादी नहीं की, लेकिन उनकी सेक्स की भूख कभी कम नहीं हुई। मैं कॉलेज में पढ़ता हूं, और छुट्टियों में उनके पास आता रहता हूं। पहली बार जब मैंने उन्हें चोदा था, वो रात थी जब बारिश हो रही थी और हम दोनों भीग चुके थे। तब से हमारा रिश्ता बदल गया।
वो मुझे फोन करतीं, कहतीं ‘राज, आ जा बेटा, बुआ को तेरी जरूरत है।’ और मैं पहुंच जाता हूं, उनकी चूत को लंड से भरने के लिए।
अब जन्मदिन की बात। एक हफ्ते पहले उनका फोन आया। ‘राज, 15 तारीख को मेरा बर्थडे है। तू आना, अकेले कैसे कटेगा।’
उनकी आवाज में वो वही लालसा थी जो मुझे पागल कर देती है। मैंने हां कह दी। 14 तारीख की शाम को मैं उनके घर पहुंचा। दरवाजा खोला तो वो लाल साड़ी में सजी हुईं, मेकअप करके।
‘आ गया मेरा राज!’ कहकर उन्होंने मुझे गले लगा लिया। उनकी चूचियां मेरे सीने से दब गईं, और मैंने महसूस किया कि ब्रा नहीं पहनी। साड़ी के नीचे उनकी गांड गोल-गोल हिल रही थी।
‘बुआ, आप कितनी हॉट लग रही हो!’ मैंने कहा और उन्हें किस करने लगा। वो हंस पड़ीं, ‘पहले अंदर आ, फिर देखेंगे।
घर में घुसते ही मैंने बैग रखा और उन्हें दीवार से सटा दिया। मेरे हाथ उनकी साड़ी के ब्लाउज पर चले गए। चूचियां नरम थीं, निप्पल्स सख्त हो चुके थे। मैंने ब्लाउज खींचा, ब्रा नहीं थी, सीधे मुंह में निप्पल ले लिया। चूसने लगा जोर-जोर से।
राधा बुआ सिसकारी भरने लगीं, ‘आह राज, धीरे… अभी तो बर्थडे भी नहीं आया।’ लेकिन उनकी चूत मेरी जांघ से रगड़ रही थी।
मैंने उन्हें छोड़ा, ‘सॉरी बुआ, बस देखते ही कंट्रोल नहीं हुआ।’ वो मुस्कुराईं, ‘चल, डिनर बना है। खा ले।’ हमने साथ खाना खाया।
टेबल पर बैठे-बैठे मेरा हाथ उनकी जांघ पर था, साड़ी ऊपर सरका रहा था। पैंटी भी नहीं, चूत के बाल महसूस हो रहे थे। वो शरमाईं, लेकिन रुकने नहीं दीं। ‘राज, आज रात तू मेरा गिफ्ट है। रातभर मुझे चोदना।’ मैंने सिर हिलाया, लंड खड़ा हो चुका था।
रात के 10 बजे हो गए। बुआ ने केक काटा, लेकिन काटते ही मैंने उन्हें बेडरूम में खींच लिया। लाइट्स डिम कर दीं। वो बेड पर लेटीं, साड़ी अभी भी पहने।
मैंने धीरे से साड़ी खींची, पेटीकोट खोल दिया। नंगी चूत सामने थी, गीली चमक रही। ‘बुआ, आपकी चूत कितनी सुंदर है।’ मैंने कहा और चूत पर जीभ रख दी। चाटने लगा, क्लिट को चूसा।
राधा बुआ चीखीं, ‘ओह राज! हां, ऐसे ही चाट… आह!’ उनकी टांगें फैल गईं, हाथ मेरे सिर पर दबा रही। मैंने जीभ अंदर डाली, चूत का रस चखा। स्वाद खट्टा-मीठा, पागल कर देने वाला।
10 मिनट तक चाटा, फिर उठा। पैंट उतारी, लंड बाहर आ गया। 7 इंच का मोटा लंड, सुपारा लाल। बुआ ने देखा, ‘वाह राज, कितना बड़ा हो गया तेरा लंड!’ वो उठीं, घुटनों पर बैठ गईं।
मुंह में लंड ले लिया। चूसने लगीं, जीभ से सुपारे को घुमाया। मैंने उनके बाल पकड़े, मुंह में धक्के मारने लगा। ‘हां बुआ, ब्लोजॉब दे… चूस ले पूरा।’ गले तक लंड गया, आंसू आ गए उनके, लेकिन रुकीं नहीं। 5 मिनट चूसीं, लंड चमक गया लार से।
अब मैंने उन्हें बेड पर लिटाया। टांगें फैलाईं, लंड चूत पर रगड़ा। ‘बुआ, चोदूं?’ ‘हां राज, चोद अपनी बुआ को। जन्मदिन का तोहफा दे।’
मैंने धक्का मारा, लंड आधा अंदर। चूत टाइट थी, लेकिन गीली। पूरा डाला, कमर हिला दी। ‘आह! मोटा है तेरा… फाड़ देगा।’ वो चीखीं। मैंने जोरदार धक्के मारे।
चोदने लगा तेज-तेज। चूत से आवाज आ रही थी, चपचप। चूचियां उछल रही थीं, मैंने पकड़ लीं, मसलने लगा। ‘बुआ, तेरी चूत कितनी गरम है… पकड़ रही लंड को।’ 15 मिनट चोदा, पोजिशन बदली। डॉगी स्टाइल में। गांड ऊपर की, लंड पीछे से डाला। गांड पर थप्पड़ मारा। ‘हां, मार… चोद जोर से!’ वो चिल्लाईं।
रात के 12 बज चुके थे, लेकिन चुदाई जारी। मैंने कंडोम नहीं लगाया, सीधे अंदर। स्पीड बढ़ाई, पसीना बह रहा था।
बुआ के मुंह से गंदी गालियां निकल रही थीं, ‘चोद मादरचोद… फाड़ चूत को!’ मैं हंसा, ‘हां रंडी बुआ, तेरी चूत मेरी है।’ आखिरकार, मैं झड़ने वाला था। ‘बुआ, कमिंग!’ ‘अंदर ही झाड़ राज, भर दे चूत।’ मैंने लंड दबाया, गर्म वीर्य चूत में डाला। वो भी ऑर्गेजम पर थी, चूत सिकुड़ रही। हम दोनों गिर पड़े, हांफते हुए।
लेकिन रातभर चोदना था। 15 मिनट रेस्ट लिया, फिर से शुरू। इस बार बुआ ऊपर आईं। काउगर्ल पोजिशन। लंड पर बैठ गईं, ऊपर-नीचे होने लगीं।
चूचियां मेरे मुंह के पास, मैं चूसा। ‘आह राज, तेरा लंड कितना कड़ा है… चूत खुश हो गई।’ 20 मिनट राइड किया, फिर मैंने पलटा, मिशनरी में चोदा। पैर कंधे पर रखे, गहराई से धक्के। चूत लाल हो गई, लेकिन वो मांग रही थीं और। ‘मत रुक, रात भर चोद।’
सुबह के 2 बजे तक तीन राउंड हो चुके। हम नंगे लेटे थे, बुआ की चूत से मेरा वीर्य बह रहा। ‘राज, तू मेरा सबसे अच्छा तोहफा है।’ उन्होंने कहा।
मैंने किस किया, ‘बुआ, अभी रात बाकी है।’ फिर से लंड खड़ा किया, चूसवाया। इस बार एनल ट्राई किया। बुआ की गांड टाइट थी, लेकिन उन्होंने सहमति दी। तेल लगाया, उंगली से ढीला किया। लंड धीरे डाला।
आह! दर्द हो रहा… लेकिन चोद।’ पीछे से गांड मारी, धीरे-धीरे स्पीड बढ़ाई। गांड की टाइटनेस पागल कर रही। 10 मिनट में झड़ गया अंदर।
फिर ब्रेक। चाय बनाई, नंगे होकर पिया। बातें कीं पुरानी चुदाइयों की। बुआ बोलीं ‘पहली बार जब तूने चोदा, तब से सोचती हूं बस तेरे लंड की। मैंने हंसकर कहा, ‘बुआ, आपकी चूत का तो मैं दीवाना हूं।
सुबह 4 बजे फिर चुदाई। इस बार शावर में। बाथरूम में खड़े होकर चोदा। पानी गिर रहा, साबुन लगाया चूचियों पर। लंड चूत में, दीवार से सटाकर। ‘हां राज, ऐसे ही… वॉश करके चोद।’ चीखें गूंजीं।
सुबह 6 बजे तक पांच राउंड। बुआ थक गईं, लेकिन मुस्कुरा रही थीं। ‘जन्मदिन कभी इतना अच्छा नहीं बीता।’ मैंने उन्हें गले लगाया, ‘हर साल आऊंगा बुआ।’ फिर सो गए हम। दोपहर उठे, ब्रेकफास्ट किया। लेकिन चुदाई की यादें ताजा रही।
दोस्तो, ये थी मेरी बुआ के जन्मदिन की रात। कहानी अच्छी लगी हो तो आप लोग कमेंट कर सकते है।