देवर ने बेदर्दी से भाभी को चोदा

(Dewar Ne Bedardi Se Bhabhi Ko Choda)

नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम मधुलेखा साहू है। मैं बैंगलोर की रहने वाली एक हॉट और सेक्सी औरत हूँ, लेकिन फिलहाल अपने ससुराल के गाँव में रहती हूँ। मेरी उम्र २५ साल है, और मेरी बॉडी इतनी कमाल की है कि हर आदमी मुझे देखकर पागल हो जाता है।

मेरे बड़े-बड़े गोल और कसे हुए स्तन, गोल गाँड, मोटी जाँघें, पतली कमर, गोरी चमड़ी, लंबी हाइट और चौड़ी कमर—ये सब मिलकर मुझे एक परफेक्ट सेक्स क्वीन बनाते हैं। जब मैं सामने से चलती हूँ, तो आदमी मेरे स्तनों को घूरते हैं, और पीछे से मेरी गोल गाँड को देखकर उनके मन में गंदे ख्याल आते हैं।

वो अपनी बीवियों के साथ सेक्स करते समय भी मुझे ही सोचते हैं। हाँ, मैं ही सेक्स की रानी हूँ।

मैंने दो साल पहले शादी की थी, लेकिन पिछले एक साल से मेरे पति का कोई पता नहीं। वो आर्मी ऑफिसर हैं और चीन बॉर्डर पर पोस्टेड हैं। इसलिए मैं अपने ससुराल में अकेली रहती हूँ। ससुर-साास नीचे के फ्लोर पर रहते हैं, और ऊपर का फ्लोर मेरा है।

मेरा देवर, यानी मेरे पति का छोटा भाई, मुंबई में पढ़ाई करता है। लेकिन इस दशहरा पर वो घर आया था। दशहरा का त्योहार था, दूर्गा मधुलेखा का दिन। पूरा गाँव उत्सव में डूबा हुआ था।

उस दिन मैंने व्रत रखा था। शाम को व्रत तोड़ा, खाना खाया, लेकिन अचानक मेरे पैरों में, शरीर में और सिर में तेज दर्द होने लगा। शायद थकान और भूख की वजह से। मैं ऊपर अपने कमरे में चली गई। बेड पर लेट गई और आँखें बंद कर लीं।

ससुर-साास सो चुके थे। रात के करीब ११ बजे का समय था। तभी दरवाजे पर खटखटाहट हुई। मैंने आँखें खोलीं तो देखा, मेरा देवर अंदर आ रहा था। वो किसी दोस्त के पास गया था, अब लौट रहा था।

“भाभी, आप ठीक तो हैं?” उसने पूछा, जबकि कमरे की लाइट कम थी। मैं पिंक नाइटि पहने लेटी थी, बिना ब्रा के। मेरे बड़े स्तन नाइटि के ऊपर से साफ दिख रहे थे, निप्पल्स भी उभरे हुए।

“हाँ राजू, बस सिर दर्द कर रहा है। पैर भी दुख रहे हैं,” मैंने थककर कहा। राजू मेरा देवर था, २२ साल का जवान लड़का। लंबा, हैंडसम, और बॉडी भी फिट।

वो मेरे पास आया और बेड के किनारे बैठ गया। “भाभी, मैं बाम लगा दूँ? दर्द कम हो जाएगा।” उसकी आवाज में चिंता थी, लेकिन आँखों में कुछ और चमक रही थी।

“नहीं राजू, तुम थक गए होगे। जाओ सो जाओ,” मैंने मना किया, लेकिन वो नहीं माना। अलमारी से बाम निकाला और मेरे सिर पर मलने लगा। मैं लेटी रही, आँखें बंद। धीरे-धीरे दर्द कम होने लगा।

मैंने अपनी टाँगें फैला लीं, हाथ-पैर खोल दिए। वो सिर से नीचे आया, कंधों पर मालिश करने लगा।

अचानक उसके हाथ मेरे स्तनों के पास पहुँचे। जानबूझकर छू रहा था। मैंने महसूस किया। मेरी साँसें तेज हो गईं। फिर अनजाने में मेरा हाथ उसके लंड पर लग गया। वो कड़ा हो चुका था, टाइट पैंट में उभरा हुआ।

मैं चौंक गई, लेकिन अंदर से एक उत्तेजना महसूस हुई। एक साल से सेक्स नहीं हुआ था, मेरी चूत तरस रही थी।

“राजू, सिर का दर्द तो चला गया, लेकिन शरीर में अभी भी दर्द है,” मैंने कहा, आवाज में हल्की काँप।

“भाभी, तो तेल से मालिश कर दूँ? पैरों से शुरू करता हूँ,” उसने काँपती आवाज में कहा।

“नहीं राजू, अगर किसी ने देख लिया तो?” मैंने झिझकते हुए कहा।

“कोई नहीं देखेगा भाभी। दरवाजा लॉक कर दूँ?” वो उठा और दरवाजा लॉक कर दिया। फिर तेल की बोतल लाया। मेरे पैरों पर मालिश करने लगा। धीरे-धीरे ऊपर आया, जाँघों पर। नाइटि को ऊपर सरका दिया। मेरी जाँघें नंगी हो गईं।

तेल लगाते हुए उसके हाथ मेरी चूत के पास पहुँचे। मैं गीली हो गई, चूत से रस टपकने लगा।

“भाभी, पीठ पर भी मालिश कर दूँ?” उसने पूछा, साँसें तेज।

“हाँ राजू, कर दो,” मैंने पलटकर लेटते हुए कहा। नाइटि ऊपर सरक गई, मेरी बड़ी गोल गाँड नंगी हो गई। पैंटी में कैद। उसके हाथ काँप रहे थे। पीठ पर तेल लगाया, लेकिन जल्दी ही हाथ पैंटी के अंदर घुस गया।

गाँड की गांठें दबाने लगा, सहलाने लगा। मैं सिहर उठी।

“राजू… क्या कर रहे हो?” मैंने पलटकर कहा, लेकिन स्तन नंगे हो गए। बड़े-बड़े, गोल, निप्पल्स सख्त।

“भाभी, आप इतनी हॉट भाभी हो… मैं काबू नहीं कर पा रहा,” उसने कहा और मेरे स्तनों पर तेल लगाने लगा। निप्पल्स को मसलने लगा। मेरे होंठ लाल हो गए, आँखें वासना से भरीं। मैंने उसे खींच लिया, बाल पकड़े और जोर से चूमा।

हमारे होंठ मिल गए। जंगली किसिंग शुरू हो गई। वो मेरे स्तनों को जोर-जोर से दबा रहा था। मैंने उसका लंड पकड़ लिया, पैंट के ऊपर से सहलाया। “राजू, तेरा लंड कितना मोटा है… भैया से भी बड़ा,” मैंने सिसकी ली।

वो जल्दी से कपड़े उतार फेंका। उसका लंड बाहर आ गया—मोटा, लंबा, सख्त। मैंने पैंटी और नाइटि उतार दी। नंगी हो गई। वो मेरे ऊपर चढ़ गया। कान चाटने लगा, गर्दन, होंठ, स्तन, निप्पल्स चूसे।

नाभि, चूत, चूत के बालों को चाटा। जाँघें, घुटने, पैर की उँगलियाँ तक चाट लीं।

“आह राजू… कितना अच्छा लग रहा है… चाटते रहो,” मैं कराह रही थी।

फिर मैंने उसका लंड मुँह में लिया। चूसा, चाटा। जीभ से घुमाया। वो 69 पोजीशन में आ गया। मेरी चूत चाटने लगा, उँगलियाँ डालकर। जीभ अंदर घुसाकर खोदने लगा, खाने लगा। मेरी चूत से सफेद क्रीम निकलने लगी।

भाभी, तेरी चूत कितनी स्वादिष्ट है… रस निकल रहा है,” वो बोला। मैं उसके लंड को चूस रही थी।

“राजू, अब और इंतजार मत कर… चोद मुझे,” मैंने गिड़गिड़ाया। टाँगें फैलाईं। वो मेरी जाँघों के बीच आया। लंड का सिरा चूत पर रखा और धक्का मारा। पूरा अंदर। “आह… आह… ओह… ओह…” मैं चीखी।

वो जोर-जोर से धक्के मारने लगा। मेरे स्तन उछल रहे थे, शरीर ऊपर उठ रहा था। कभी होंठ चूसता, कभी स्तनों का दूध पीता, कभी गाँड में उँगली डालता, कभी बगलें चाटता।

भाभी, तेरी चूत कितनी टाइट है… मजा आ रहा है,” वो हाँफ रहा था।

मैंने उसे धक्का दिया और ऊपर चढ़ गई। लंड को चूत में घुसाया और सवारी करने लगी। ऊपर-नीचे। फिर अलग-अलग पोजीशन—मिशनरी, काउगर्ल, लेटकर, बैठकर। रात भर चुदाई चली। सुबह ५ बजे तक मेरी चूत की गर्मी शांत हुई।

अगले दिन भी दिन में चोदा। और रात का इंतजार है………………