मनीषा एक 30 साल की खूबसूरत औरत थी जो गुडगांव में अपने पति प्रवीण के साथ रहती थी। उनकी शादी को एक साल हो चुका था लेकिन मनीषा की जिंदगी में वो संतुष्टि नहीं थी जो उसे हमेशा चाहिए थी।
प्रवीण होटल व्यवसाय में व्यस्त रहता था। उनके पास ठाणे और नागपुर में होटल और रिसॉर्ट थे। प्रवीण का काम इतना व्यस्त था कि वो अक्सर घर से बाहर रहता और जब भी साथ होता तो उनकी निजी जिंदगी में वो उत्साह नहीं दिखता जो मनीषा की चाहत थी।
मनीषा एक सॉफ्टवेयर कंपनी में काम करती थी लेकिन उसके मन में हमेशा एक खालीपन सा रहता। वो चाहती थी कि कोई उसे पूरी तरह से समझे और उसकी हर इच्छा को पूरा करे।
प्रवीण का एक करीबी दोस्त था पंकज। पंकज कॉलेज के दिनों से उनका दोस्त था और अभी शादीशुदा नहीं था। नवंबर में उसकी शादी तय हो चुकी थी लेकिन तब तक वो सिंगल था।
पंकज लंबा कद काठी वाला, हैंडसम और हमेशा हंसमुख रहने वाला लड़का था। वो अक्सर प्रवीण के साथ पार्टी करता और मनीषा को भी पसंद करता था। मनीषा को भी पंकज की कंपनी अच्छी लगती लेकिन कभी उसने कुछ सोचा नहीं था।
एक शुक्रवार की शाम को तीनों ने ठाणे के अपने रिसॉर्ट में पार्टी का प्लान बनाया। प्रवीण ने कहा कि वीकेंड को रिलैक्स करेंगे। मनीषा उत्साहित थी। वो सोच रही थी कि शायद इस ट्रिप से उनकी जिंदगी में कुछ नयापन आए।
वो एक सेक्सी रेड स्विमसूट पैक करके आई थी जो उसके कर्व्स को हाइलाइट करता था। प्रवीण ने ब्लू ट्रंक पहना और पंकज ने ब्लैक स्विमसूट। तीनों रिसॉर्ट पहुँचे और सीधे पूल साइड चले गए।
पूल के किनारे पर म्यूजिक बज रहा था। सूरज ढल रहा था और हल्की ठंडी हवा चल रही थी। प्रवीण ने शराब की बोतलें खोलीं। “मनीषा तू भी जॉइन कर ले। आज मस्ती करेंगे।” प्रवीण ने कहा।
मनीषा मुस्कुराई और बोली, “हाँ प्रवीण। लंबे समय बाद ऐसा मजा। पंकज तू भी पी।”
पंकज ने ग्लास उठाया और बोला, “बिल्कुल मनीषा भाभी । आज तो रात भर पार्टी।”
तीनों ने पूल में कूद पड़े। पानी ठंडा था लेकिन मजा आ रहा था। मनीषा का स्विमसूट गीला हो गया और उसके बॉडी के कर्व्स साफ दिखने लगे। पंकज की नजरें बार बार मनीषा पर जा रही थीं।
वो उसके ब्रेस्ट्स और हिप्स को घूर रहा था। मनीषा को ये एहसास हो गया लेकिन उसे अच्छा लगा। प्रवीण व्यस्त था शराब पीने में।
दो घंटे तक उन्होंने पानी में छींटे मारे, हँसे और शराब पी। पंकज ने मनीषा से कहा, “मनीषा भाभी तू तो कमाल लग रही है। स्विमिंग सूट सूट करता है।”
मनीषा शरमाई लेकिन बोली, “थैंक यू पंकज। तू भी फिट लग रहा है। जिम जाता है क्या?”
पंकज हँसा और बोला, “हाँ भाभी । रोज जिम। प्रवीण भाई को भी बोलता हूँ लेकिन वो व्यस्त रहते हैं।”
प्रवीण ने बीच में कहा, “अरे पंकज तू तो मनीषा को फ्लर्ट कर रहा है। सावधान रहना।”
सब हँसे। लेकिन मनीषा के मन में पंकज की तारीफ गूँज रही थी। पूल से निकलने के बाद उन्होंने टॉवल लपेते हुए डिनर के लिए कमरे की तरफ बढ़े। रिसॉर्ट का खाना शानदार था। ग्रिल्ड फिश, सलाद और वाइन।
डिनर के दौरान प्रवीण का फोन बजा। नागपुर से कॉल था। “मनीषा मैं तो जाना पड़ेगा। कल शूटिंग के लिए बड़े लोग आ रहे हैं। इमरजेंसी है।” प्रवीण ने कहा।
मनीषा निराश हुई लेकिन बोली, “ठीक है प्रवीण। जा ले। हम यहाँ रुक जाएँगे।”
पंकज ने कहा, “भाई तू चिंता मत कर। मैं मनीषा भाभी का ख्याल रखूँगा।”
प्रवीण ने जल्दी से सामान पैक किया और रात के 10 बजे निकल गया। अब मनीषा और पंकज अकेले थे। रिसॉर्ट शांत हो चुका था।
प्रवीण के जाने के बाद मनीषा और पंकज ने बालकनी में बैठकर शराब पीना शुरू किया। सिगरेट भी जला ली। चाँदनी रात थी और समुद्र की लहरें सुनाई दे रही थीं। नशा चढ़ने लगा।
पंकज ने कहा, “मनीषा भाभी अब तू बता। प्रवीण भाई के साथ सब ठीक है न?”
मनीषा ने एक घूँट लिया और बोली, “पंकज सच कहूँ तो नहीं। शादी को एक साल हो गया लेकिन वो मुझे वो खुशी नहीं दे पाते जो चाहिए। काम में व्यस्त रहते हैं। बेडरूम में भी जल्दी खत्म कर देते हैं। मेरी इच्छाएँ अधर में रह जाती हैं।”
पंकज ने सहानुभूति से देखा और बोला, “भाभी ऐसा मत कह। प्रवीण भाई अच्छे हैं लेकिन शायद तुझे समझ न पा रहे। तू इतनी खूबसूरत है। तुझे हर तरह का मजा मिलना चाहिए।”
मनीषा की आँखें नम हो गईं। नशे में वो खुल गई। “पंकज तू जानता है मैं कितनी अकेली महसूस करती हूँ। कोई ऐसा हो जो मुझे पूरी रात जगाए रखे। मेरी हर चाहत पूरी करे।”
पंकज का दिल धड़कने लगा। वो पास आया और बोला, “भाभी अगर तू चाहे तो मैं तेरी वो कमी पूरी कर सकता हूँ। आज रात के लिए। कोई नहीं जानेगा।”
मनीषा चौंकी लेकिन नशे और इच्छा ने उसे रोक नहीं पाया। वो बोली, “पंकज यह गलत है। प्रवीण मेरा पति है।”
पंकज ने उसका हाथ पकड़ा और कहा, “गलत नहीं भाभी । बस एक रात का राज। तुझे जो चाहिए वो दूँगा। देख मैं कितना बड़ा हूँ।” उसने अपना पैंट खोला और अपना लंड दिखाया। वो बहुत लंबा और मोटा था।
मनीषा की साँसें तेज हो गईं। “ओह पंकज। इतना बड़ा। प्रवीण का आधा भी नहीं।”
पंकज मुस्कुराया और बोला, “तो आज ट्राई कर। मैं तुझे बच्चेदानी तक पहुँचा दूँगा।”
मनीषा ने हामी भर ली। दोनों कमरे में चले गए।
कमरे की लाइट्स डिम थीं। मनीषा ने अपना टॉप उतारा। उसके ब्रेस्ट्स बाहर आ गए। काले लेस वाले ब्रा में वो सेक्सी लग रही थी। पंकज ने उसे गले लगाया और होंठों पर किस किया।
मनीषा ने जवाब दिया। उनकी जीभें मिलीं। पंकज का हाथ उसके ब्रेस्ट्स पर गया। वो दबाने लगा।
“आह पंकज। धीरे।” मनीषा सिसकी।
पंकज ने ब्रा खोली और चूसने लगा। मनीषा के निप्पल्स सख्त हो गए। “हाँ चूसो।
पंकज ने कहा, “भाभी तेरे मम्मे कितने रसीले हैं। प्रवीण भाई खुशकिस्मत हैं।”
फिर उसने मनीषा की स्कर्ट उतारी। पैंटी गीली थी। पंकज ने उंगली डाली। “वाह भाभी कितनी वेट हो गई।”
मनीषा बोली, “हाँ पंकज। मुझे छू।”
पंकज ने पैंटी उतार दी। मनीषा की चूत साफ शेव्ड थी। गुलाबी और चमकदार वो घुटनों पर बैठा और चाटने लगा जीभ से क्लिटोरिस को सहलाया। मनीषा चीखी, “ओह गॉड पंकज कमाल कर रहे हो।”
पंकज ने कहा, “अभी तो शुरुआत है।
मनीषा ने उसका लंड मुंह में लिया। वो इतना बड़ा था कि मुश्किल से आ रहा था। वो चूसने लगी। लंड पर लार चली गई। पंकज ने उसके बाल पकड़े और मुंह में धक्के दिए। “हाँ भाभी ब्लोजॉब दे। अच्छा लग रहा है।”
मनीषा गग करने लगी लेकिन जारी रखा। “पंकज तेरा लंड कितना हार्ड है।”
अब पंकज ने उसे बेड पर लिटाया। मिशनरी पोजिशन में लंड चूत पर रगड़ा। “डालूँ भाभी ?”
मनीषा बोली, “हाँ डालो। धीरे से।”
पंकज ने धक्का दिया। लंड अंदर चला गया। मनीषा चीखी, “आह मार डाला। इतना गहरा।”
पंकज ने धीरे धीरे चोदना शुरू किया। “कैसा लग रहा है भाभी ?”
“कमाल पंकज। प्रवीण कभी इतना गहरा नहीं जाता। बच्चेदानी छू रही है।” मनीषा कराही।
पंकज ने स्पीड बढ़ाई। कमर पकड़कर जोरदार धक्के दिए। बेड हिलने लगा। मनीषा की चीखें गूँजने लगीं। “हाँ चोदो। फाड़ दो मेरी चूत।”
वे पसीने से तर हो गए। पंकज ने पोजिशन बदली। मनीषा को ऊपर किया। काउगर्ल स्टाइल। मनीषा खुद ऊपर नीचे होने लगी। “आह पंकज। तेरा लंड मेरी गर्भाशय को छू रहा है।”
पंकज नीचे से धक्के दे रहा था। “हाँ भाभी राइड कर। तू कितनी हॉट है।”
पंकज ने थप्पड़ मारे और चोदा। “तेरी गांड कितनी टाइट है।”
वे रात भर ऐसे ही चले। “पंकज तू भगवान है। रात भर चोद रहे हो।”
पंकज बोला, “भाभी तेरी चूत और गांड ने मुझे पागल कर दिया।
पंकज ने चूत में झड़ दिया। गर्म वीर्य अंदर भर गया। दोनों थककर लेट गए।
लेकिन उसके मन में पंकज का लंड और वो रातें घूम रही थीं। वो जानती थी कि अब वो अपनी इच्छाओं के अनुसार जीएगी…………………..