मेरा नाम अकाश है। उम्र 36 साल। मैं शादीशुदा हूं और एक बेटे का पिता हूं।
मेरी जिंदगी बाहर से तो परफेक्ट लगती है, लेकिन अंदर से सब कुछ अधूरा सा है।
मेरी पत्नी रीता के साथ हमारा रिश्ता अब सिर्फ औपचारिक रह गया है।
शादी को दस साल हो चुके हैं, लेकिन हमारी सेक्स लाइफ बिल्कुल ठंडी पड़ चुकी है।
रीता को बच्चों की परवरिश में इतना व्यस्त रहना है कि वो मेरी जरूरतों को भूल ही गई है।
रातें बीतती हैं, और मैं अकेले बिस्तर पर लेटा पोर्न वीडियो देखता हूं। हाथ से काम चलाता हूं, लेकिन ये सब मेरी कुंठा को और बढ़ा देता है।
मैं चाहता हूं कुछ असली, कुछ जुनूनी, जो मेरी रगों में आग लगा दे।
एक दिन पुरानी कॉलेज फ्रेंडशिप की वजह से मेरी मुलाकात रोहन से हुई। रोहन मेरा पुराना दोस्त है, और वो अपनी पत्नी नेहा के साथ शहर में आया था।
हम तीनों मिले एक कैफे में। रोहन वैसा ही था जैसा कॉलेज में – हंसमुख, लेकिन थोड़ा लापरवाह।
नेहा की पहली नजर में ही मैं कैद हो गया। वो 32 साल की थी, लंबे काले बाल, गोरी त्वचा, और ऐसा फिगर जो किसी को भी दीवाना बना दे।
उसकी कमर पतली, स्तन भरे हुए, और गांड गोल-मटोल। लेकिन उसकी आंखों में एक उदासी थी, जो छिपाने की कोशिश कर रही थी।
‘अरे अकाश, कितने साल हो गए!’ रोहन ने गले लगाते हुए कहा। ‘नेहा, ये मेरा पुराना यार है।
नेहा ने मुस्कुराते हुए हाथ मिलाया। ‘हैलो अकाश जी। रोहन आपका बहुत नाम लेता है।
हम बातें करने लगे। रोहन ने बताया कि वो बिजनेस के सिलसिले में शहर आया है।
नेहा घर संभालती है, लेकिन उनके कोई बच्चा नहीं है। शादी को पांच साल हो गए, लेकिन नेहा की आंखों में वो दर्द साफ झलक रहा था। मैंने महसूस किया कि कुछ तो गड़बड़ है।
कुछ दिनों बाद रोहन ने मुझे फोन किया। ‘अकाश, कल रात को डिनर पर आना। नेहा भी इंतजार कर रही है।’
मैं पहुंचा उनके होटल रूम में। रोहन ने वाइन सर्व की। बातें चलती रहीं। नेहा थोड़ी शर्मीली लग रही थी, लेकिन धीरे-धीरे खुलने लगी। रोहन ने बताया कि वो अगले दिन सुबह ही शहर छोड़ रहा है, बिजनेस मीटिंग के लिए।
‘नेहा अकेली रहेगी। तुम्हें कोई प्रॉब्लम तो नहीं अकाश, अगर वो तुम्हारे साथ थोड़ा घूम ले?’ रोहन ने मजाक में कहा।
‘बिल्कुल, क्यों नहीं। नेहा, कल मैं तुम्हें घुमाने ले जाऊंगा।’ मैंने कहा।
नेहा ने हामी भरी। अगले दिन हम मिले। मैंने उसे शहर के आसपास घुमाया – पार्क, मॉल, सब जगह। बातें करते-करते नेहा ने अपना दर्द बयां किया। ‘अकाश जी, रोहन बहुत अच्छा इंसान है, लेकिन…
हमारा वैवाहिक जीवन पूरा नहीं है। बच्चा नहीं हो रहा। डॉक्टर कहते हैं रोहन की प्रॉब्लम है – स्पर्म काउंट कम है, और… वो आकार में भी छोटा है।’
मैं स्तब्ध रह गया। नेहा की आंखें नम हो गईं। ‘मैं मां बनना चाहती हूं, लेकिन ये सब संभव नहीं लगता।’
मैंने उसका हाथ थामा। ‘नेहा, तुम्हारी ये इच्छा बहुत पवित्र है। अगर मैं मदद कर सकूं…’
वो चौंकी। ‘क्या मतलब?’
‘मेरा मतलब है, अगर तुम्हें कोई दिक्कत न हो, तो मैं… मैं तुम्हें प्रेग्नेंट करने में मदद कर सकता हूं। गोपनीय रखेंगे। रोहन को पता नहीं चलेगा।’
नेहा ने कुछ पल सोचा, फिर सिर हिला दिया। ‘अकाश, ये पागलपन है। लेकिन… मैं तैयार हूं।’
उस शाम हम मेरे फ्लैट पर पहुंचे। रीता बच्चे के साथ मायके गई हुई थी, घर खाली था। नेहा घबरा रही थी। मैंने उसे गले लगाया। ‘डरो मत नेहा। सब ठीक होगा।’
हम बेडरूम में गए। मैंने नेहा की साड़ी धीरे-धीरे खोली। उसकी गोरी त्वचा चांदनी रात की तरह चमक रही थी।
ब्लाउज खोला तो उसके भरे हुए स्तन बाहर आ गए।
मैंने उन्हें सहलाया, फिर होंठों से चूमा। नेहा सिहर उठी। ‘अकाश… ये पहली बार है किसी और के साथ।’
‘मैं धीरे करूंगा।’ मैंने कहा।
मैंने नेहा को बिस्तर पर लिटाया। उसकी सलवार उतारी। उसकी चूत साफ-सुथरी, गीली हो चुकी थी। मैंने जीभ से चाटना शुरू किया। नेहा चीखी, ‘आह… अकाश, क्या कर रहे हो?’
‘तेरी चूत चाट रहा हूं, नेहा। स्वादिष्ट है।’ मैंने कहा।
मेरी जीभ ने उसके क्लिट को चूसा, उंगली अंदर डाली। नेहा का शरीर कांप रहा था।
फिर मैंने उसे पलटा, उसकी गांड ऊपर की।
उंगली से गुदा सहलाया, फिर अंदर डाल दी। ‘नेहा, तेरी गांड भी टाइट है।’
‘आह… दर्द हो रहा है, लेकिन अच्छा लग रहा।’ नेहा बोली।
फिर मैंने अपना लंड बाहर निकाला। मेरा लंड मोटा और लंबा था, रोहन से कहीं बेहतर। नेहा ने देखा तो आंखें फैल गईं। ‘इतना बड़ा?’
‘हां, अब इसे तेरी चूत में डालूंगा।’ मैंने कहा।
मैंने नेहा की टांगें फैलाईं और लंड को चूत पर रगड़ा। फिर धीरे से अंदर धकेला। नेहा चीखी, ‘आह! दर्द… लेकिन जारी रखो।’
मैंने जोर से धक्का मारा। पूरा लंड अंदर चला गया। नेहा की चूत गीली और गर्म थी। मैंने पम्पिंग शुरू की – धीरे-धीरे, फिर तेज। नेहा के स्तन उछल रहे थे। ‘फक मी हार्डर, अकाश!’
मैंने स्पीड बढ़ाई। हमारा पसीना मिल रहा था। नेहा के नाखून मेरी पीठ पर खरोंच रहे थे। ‘कम इनसाइड मी! मुझे प्रेग्नेंट कर दो!’
मैंने चरम पर पहुंचकर अपना स्पर्म नेहा की चूत में झड़ दिया। गर्म वीर्य भर गया अंदर। नेहा भी ऑर्गेज्म से कांप उठी।
ये पहला राउंड था। हम थके, लेकिन रुके नहीं। नेहा ने कहा, ‘अकाश, एक बार काफी नहीं। मुझे बच्चा चाहिए।’
दूसरा राउंड डॉगी स्टाइल में। नेहा घुटनों पर, गांड ऊपर। मैंने पीछे से लंड डाला। उसकी गांड थपथपाई। ‘तेरी गांड कितनी सॉफ्ट है।’
‘चोदो मुझे, अकाश। जोर से।’ नेहा बोली।
मैंने तेज धक्के मारे। नेहा की चीखें कमरे में गूंज रही थीं। फिर मैंने गुदा में उंगली डाली, डबल पेनिट्रेशन जैसा। नेहा पागल हो गई। ‘आह… हां, ऐसे ही!’
दूसरा कम नेहा की चूत में ही किया। स्पर्म फिर भर दिया।
तीसरा राउंड मिशनरी में। नेहा नीचे, मैं ऊपर। उसके स्तनों को चूसा, निप्पल्स काटे। नेहा ने मेरे लंड को हाथ से सहलाया। ‘तेरा लंड कितना हार्ड है। रोहन का तो…’
‘भूल जा उसे। अब मैं तेरा हू हूं।’ मैंने कहा।
हमने घंटों चुदाई की। नेहा ने ब्लोजॉब दिया – मेरे लंड को मुंह में लिया, चूसा। ‘गुड बॉय, ऐसे ही चूस।’ मैं बोला।
चौथा राउंड साइड बाय साइड। हम सटे हुए, मैं पीछे से डाला।
नेहा की चूत अब ढीली हो चुकी थी, लेकिन मजा दोगुना।
रात भर हमने सेक्स किया। सुबह तक नेहा की चूत स्पर्म से भरी हुई थी।
‘अकाश, लगता है मैं प्रेग्नेंट हो जाऊंगी।’ नेहा ने कहा।
‘हां, नेहा। ये हमारा राज रहेगा।’ मैंने वादा किया।
अगले दिन रोहन लौटा। नेहा ने उसे कहा, ‘सब ठीक है।’
लेकिन हमारा अफेयर जारी रहा। हर मौके पर मिलते, चुदाई करते। नेहा प्रेग्नेंट हो गई। हम खुश थे।