मुस्कान की साड़ी की चमकदार रेशमी परत उसके गोरे कंधों पर लहरा रही थी। जब मैंने उसके घर की घंटी बजाई तो उसने दरवाजा खोला और मुस्कुराते हुए अंदर बुलाया।
उसकी शादी को छह महीने बीत चुके थे और उसका पति शहर से बाहर गया हुआ था। मुस्कान अकेली थी। उसका गोरा रंग, 36-28-36 का सेक्सी फिगर और शरारती आँखें मुझे पहले से ही खींच रही थीं।
हमने साथ खाना खाया। फिल्म देखने का प्रस्ताव रखा। लेकिन मुस्कान की नजरें मेरी तरफ ज्यादा देर टिक रही थीं। खाने के बाद वह पास आकर बोली, “आज रात मुझे अकेले नहीं सोना है।” उसकी आवाज में साफ आकर्षण था।
मैंने उसे पास खींचा और उसके होठों पर अपना मुँह रख दिया। मुस्कान ने भी जोर से जवाब दिया। हम दोनों एक-दूसरे को चूमने लगे। उसकी जीभ मेरी जीभ से उलझी।
मैंने उसकी साड़ी का पल्लू खींचा। साड़ी फर्श पर गिर गई। उसके नीचे ब्लाउज और पेटीकोट दिखे। ब्लाउज के बटन खोलते हुए मैंने उसकी गोरी छाती को छुआ। ब्रा के नीचे उसके स्तन कड़े हो चुके थे।
मैंने ब्रा का हुक खोला और उसे उतार दिया। मुस्कान की नंगी छाती मेरे सामने थी। मैंने उसके एक स्तन को मुँह में लिया और चूसने लगा। मुस्कान सिसकारियाँ लेने लगी।
मैंने उसका पेटीकोट भी खोल दिया। अब वह सिर्फ पैंटी में थी। मैंने पैंटी का इलास्टिक पकड़ा और उसे नीचे खिसकाया। मुस्कान की चिकनी चूत सामने आ गई। मैंने उसे बिस्तर पर लिटाया और उसके पैर फैलाए।
उसके जांघों के बीच चूमते हुए मैं नीचे उतरा। मुस्कान की चूत पर अपनी जीभ फेरने लगा। वह काँपने लगी। मैंने उसकी चूत के होठों को चाटा, फिर अंदर जीभ डाली। मुस्कान की साँसें तेज हो गईं।
कुछ देर बाद मैंने अपना लंड बाहर निकाला। मुस्कान ने उसे देखा और हाथ में लिया। वह उसे सहलाने लगी। मैंने उसे घुटनों के बल बैठाया। मुस्कान ने मेरा लंड मुँह में लिया और चूसने लगी। उसकी गर्म साँसें मेरे लंड पर पड़ रही थीं। वह जोर-जोर से लंड चूस रही थी। मैंने उसके बाल पकड़कर लंड को उसके मुँह में आगे-पीछे किया। मुस्कान गले तक ले रही थी।
फिर मैंने उसे पीठ के बल लिटाया। उसके पैरों को कंधों पर रखा। मेरा लंड उसकी चूत के पास था। मैंने सिरा रगड़ा। मुस्कान की आँखें बंद थीं। मैंने धीरे से दबाव डाला। लंड का सिरा अंदर घुसा।
मुस्कान दर्द से चीख पड़ी। लेकिन मैं रुका नहीं। धीरे-धीरे पूरा लंड अंदर डाल दिया। मुस्कान की चूत कसी हुई थी। मैंने धीरे-धीरे धक्के मारने शुरू किए।
मुस्कान दर्द और मजे दोनों से कराह रही थी। “थोड़ा धीरे…” वह बोली। लेकिन कुछ देर बाद वह खुद कहने लगी, “और जोर से… और गहरा।” मैंने रफ्तार बढ़ा दी। लंड उसकी चूत में पूरी तरह घुसता और निकलता।
मुस्कान के स्तन उछल रहे थे। मैंने उन्हें हाथों में लिया और दबाया। मुस्कान की चूत से चिकनाहट निकल रही थी।
मैंने उसे उल्टा कर दिया। अब उसकी गांड ऊपर थी। मैंने उसकी गांड के छेद पर उंगली फेरी। मुस्कान काँपी। मैंने थूक लगाया और उंगली अंदर डाली। मुस्कान चीखी। फिर मैंने अपना लंड उसकी गांड में डालने की कोशिश की।
पहले सिरा घुसा। मुस्कान दर्द से चीख रही थी। लेकिन मैंने धीरे-धीरे पूरा लंड अंदर डाल दिया। मुस्कान की गांड कसी हुई थी। मैंने धक्के मारने शुरू किए। मुस्कान दर्द और आनंद दोनों महसूस कर रही थी।
कुछ देर बाद मैंने लंड निकाला और फिर चूत में डाल दिया। मुस्कान राहत की साँस ले रही थी। मैंने जोर-जोर से चोदना शुरू किया। मुस्कान चीख-चीख कर मजे ले रही थी।
“तुम्हारा लंड मेरे पति से ज्यादा अच्छा लगता है,” वह बोली। “वह इतना गहरा नहीं चोद पाता।” मैंने और जोर लगाया। मुस्कान का शरीर काँप रहा था।
मैंने मुस्कान को घुमाया। वह अब मेरे ऊपर बैठी थी। उसने खुद लंड को चूत में डाला। वह ऊपर-नीचे होने लगी। उसके स्तन मेरे मुँह के पास आ रहे थे। मैंने एक स्तन चूसा। मुस्कान तेजी से कूद रही थी। उसकी चूत मेरा लंड निगल रही थी।
हमने कई पोजीशन आजमाईं। कुर्सी पर, दीवार से टिककर, फर्श पर। हर बार मुस्कान की चीखें और तेज होती गईं। मैंने उसकी चूत में दो बार वीर्य छोड़ा। मुस्कान की चूत से मेरा वीर्य बह रहा था। वह थकी हुई थी लेकिन संतुष्ट।
रात के दौरान हम तीन बार और संबंध बनाए। हर बार मुस्कान दर्द सहती और फिर मजे लेती। उसकी चूत लाल हो गई थी। लेकिन वह बार-बार माँग रही थी। “फिर से डालो,” वह कहती। मैंने उसकी चूत चाटी, उसके स्तन दबाए, और उसे चूमा। मुस्कान हर बार नई उत्तेजना महसूस कर रही थी।
सुबह होने तक हम थक चुके थे। मुस्कान मेरे सीने पर सिर रखकर लेटी थी। “आज पहली बार मुझे इतना सुख मिला,” वह बोली। “मेरे पति को इतना आनंद नहीं आता।” मैंने उसे फिर से चूमा। मुस्कान की नंगी शरीर मेरे शरीर से सटी हुई थी।
अगली सुबह भी हमने दो बार संबंध बनाए। मुस्कान की चूत अब मेरे लंड की आदी हो चुकी थी। वह खुद आगे बढ़कर लंड पकड़ती और अंदर डालती। हम दोनों थक चुके थे लेकिन आनंद से भरपूर। मुस्कान ने कहा, “जब तक मेरा पति वापस नहीं आता, तुम रोज आना।” मैंने हाँ कहा।
मुस्कान की गोरी त्वचा पर पसीने की बूँदें चमक रही थीं। उसकी साँसें अभी भी तेज थीं। मैंने उसे फिर से लिटाया और उसके पैरों के बीच बैठ गया। मेरे लंड का सिरा उसकी चूत के होठों पर रगड़ रहा था।
मुस्कान ने आँखें बंद कर लीं और कमर उठा दी। लंड धीरे-धीरे अंदर घुसने लगा। मुस्कान की चूत गर्म और गीली थी। मैंने पूरे लंड को एक ही धक्के में अंदर डाल दिया। मुस्कान जोर से चीखी।
मैंने लंबे-लंबे धक्के मारने शुरू किए। हर धक्के के साथ मुस्कान की चूत कसती और फिर ढीली होती। उसकी जांघें मेरे कूल्हों को जकड़ रही थीं।
मैंने उसके स्तनों को दोनों हाथों से दबाया। मुस्कान के निप्पल कड़े हो चुके थे। मैंने एक निप्पल को मुँह में लिया और चूसा। मुस्कान की उँगलियाँ मेरे बालों में उलझ गईं।
कुछ देर बाद मैंने लंड निकाला और मुस्कान को घुमाकर उल्टा कर दिया। उसकी गांड मेरे सामने थी। मैंने गांड के दोनों गालों को हाथों से फैलाया। मुस्कान की गांड का छेद छोटा और गुलाबी था। मैंने थूक लगाया और उंगली अंदर डाली। मुस्कान काँपी। मैंने दो उँगलियाँ डालीं और घुमाईं। मुस्कान की साँसें भारी हो गईं।
फिर मैंने लंड का सिरा गांड के छेद पर रखा। धीरे-धीरे दबाव डाला। लंड का सिरा अंदर घुसा। मुस्कान दर्द से कराह उठी। “दर्द हो रहा है…” वह बोली। लेकिन मैं रुका नहीं। थोड़ा-थोड़ा करके पूरा लंड अंदर डाल दिया।
मुस्कान की गांड कसी हुई थी। मैंने धीरे-धीरे धक्के शुरू किए। मुस्कान दर्द और मजे के मिश्रण से चीख रही थी।
कुछ देर बाद मुस्कान खुद कहने लगी, “और जोर से…” मैंने रफ्तार बढ़ा दी। लंड उसकी गांड में घुसता और निकलता। मुस्कान का शरीर आगे-पीछे हो रहा था। मैंने उसके बाल पकड़कर खींचे। मुस्कान की चीखें और तेज हो गईं।
मैंने लंड निकाला और फिर चूत में डाल दिया। मुस्कान राहत भरी साँस ले रही थी। मैंने जोर-जोर से चोदना शुरू किया। मुस्कान की चूत से चिकनाहट की आवाजें आ रही थीं। मैंने मुस्कान को उठाया और दीवार से टिका दिया। उसकी एक टाँग मेरे कंधे पर थी। लंड गहराई तक घुस रहा था। मुस्कान चीख-चीख कर मजे ले रही थी।
हमने फर्श पर भी चोदा। मुस्कान मेरे ऊपर बैठी थी। वह ऊपर-नीचे कूद रही थी। उसके स्तन उछल रहे थे। मैंने उन्हें हाथों में लिया और दबाया। मुस्कान की चूत मेरा लंड निगल रही थी। कुछ देर बाद मुस्कान का शरीर काँपने लगा। वह जोर से चीखी और मेरे लंड पर झड़ गई।
मैंने भी अपना वीर्य उसकी चूत में छोड़ा। मुस्कान की चूत से वीर्य बह रहा था। वह थकी हुई लेट गई। मैंने उसे चूमा और उसके शरीर को सहलाया। मुस्कान मुस्कुरा रही थी। “तुम्हारा लंड सच में बहुत अच्छा है,” वह बोली।
दोपहर तक हमने दो बार और संबंध बनाए। मुस्कान की चूत अब लाल और सूजी हुई थी। लेकिन वह बार-बार माँग रही थी। मैंने उसकी चूत चाटी। मुस्कान की जांघें काँप रही थीं। मैंने उसकी चूत के होठों को चूसा और अंदर जीभ डाली। मुस्कान चीख रही थी।
शाम को भी हमने एक बार और चोदा। मुस्कान अब पूरी तरह थक चुकी थी। लेकिन उसकी आँखों में संतुष्टि थी। “आज मैंने पहली बार इतना सुख पाया,” वह बार-बार कह रही थी। “मेरे पति को इतना आनंद नहीं आता।” मैंने उसे फिर से चूमा।
रात को सोने से पहले मुस्कान ने मेरे लंड को फिर से मुँह में लिया। वह जोर-जोर से चूस रही थी। मैंने उसके बाल पकड़कर लंड को उसके मुँह में आगे-पीछे किया। मुस्कान गले तक ले रही थी। कुछ देर बाद मैंने उसके मुँह में वीर्य छोड़ा। मुस्कान ने सब कुछ निगल लिया।
अगली सुबह मुस्कान ने मुझे जगाया। वह नंगी मेरे बगल में लेटी थी। उसने मेरे लंड को हाथ में लिया और सहलाने लगी। लंड खड़ा हो गया। मुस्कान ने खुद लंड को चूत में डाला और ऊपर-नीचे होने लगी। हमने सुबह की शुरुआत सेक्स से की।
मुस्कान की चूत अब मेरे लंड की आदी हो चुकी थी। वह खुद आगे बढ़कर लंड पकड़ती और अंदर डालती। हम दोनों थक चुके थे लेकिन आनंद से भरपूर। मुस्कान ने कहा, “जब तक मेरा पति वापस नहीं आता, तुम रोज आना।” मैंने हाँ कहा।
मुस्कान की गोरी त्वचा पर पसीने की बूँदें चमक रही थीं। उसकी साँसें अभी भी तेज थीं। मैंने उसे फिर से लिटाया और उसके पैरों के बीच बैठ गया। मेरे लंड का सिरा उसकी चूत के होठों पर रगड़ रहा था।
मुस्कान ने आँखें बंद कर लीं और कमर उठा दी। लंड धीरे-धीरे अंदर घुसने लगा। मुस्कान की चूत गर्म और गीली थी। मैंने पूरे लंड को एक ही धक्के में अंदर डाल दिया। मुस्कान जोर से चीखी।
हमने पूरे दिन कई बार संबंध बनाए। मुस्कान दर्द सहती और फिर मजे लेती। उसकी चूत लाल हो गई थी। लेकिन वह बार-बार माँग रही थी।
हर बार मुस्कान की चीखें और तेज होती गईं। मैंने उसकी चूत में कई बार वीर्य छोड़ा। मुस्कान की चूत से मेरा वीर्य बह रहा था। वह थकी हुई थी लेकिन संतुष्ट।
मुस्कान ने कहा, “आज पहली बार मुझे इतना सुख मिला।” मैंने उसे चूमा। मुस्कान की नंगी शरीर मेरे शरीर से सटी हुई थी।
दोनों लगातार कई बार संबंध बनाते रहे। मुस्कान हर बार दर्द और आनंद दोनों का अनुभव करती। वह अपने पति से तुलना करती कि उसके पति को इतना आनंद नहीं मिलता।
कहानी का अंत मुस्कान की खुशी और संतुष्टि के साथ होता है। दोनों लगातार कई बार संबंध बनाते हैं। मुस्कान दर्द सहती और आनंद लेती।
वह अपने पति से तुलना करती कि उसे मेरा लंड ज्यादा अच्छा लगता है।