पहली बार जीजा जी से चुदी

(First Time Jija Ji Se Chudi)

नमस्कार, मेरा नाम शिल्पा है। उम्र सिर्फ़ १९ साल। घर में सब कहते हैं कि मैं बेहद खूबसूरत हूँ और मेरी काया बिल्कुल परफेक्ट है—नाज़ुक कमर, भरे हुए स्तन, गोल-गोल कूल्हे और लंबी टाँगें।

मेरी बड़ी बहन अनामिका की शादी कबीर जीजा से हुई थी। जीजा जी उम्र में ३० के थे, कद-काठी में तगड़े और चेहरे पर हमेशा एक रहस्यमयी मुस्कान।

बहन जब से ससुराल से लौटी थी, घर में तनाव बढ़ गया था।

जीजा जी अक्सर हमारे घर आते। एक दिन उन्होंने मुझे शॉपिंग के लिए बुलाया।

मार्केट में उन्होंने मेरे लिए कई कपड़े और अंदर की चीज़ें खरीदीं। कार में लौटते हुए उन्होंने अचानक मेरा हाथ थामा और कहा, “शिल्पा, तुम्हें देखकर मेरा मन नहीं मानता।”

इससे पहले कि मैं कुछ बोलती, उन्होंने मुझे खींचकर अपने सीने से लगा लिया और होंठों पर ज़ोरदार चुम्बन कर दिया।

मैं घबरा गई, हाथ-पैर मारकर बाहर निकल आई।

कुछ दिन बाद परीक्षा के लिए मुझे दूसरे शहर जाना था। कोई साथ देने वाला नहीं था, इसलिए बहन ने कबीर जीजा को मेरे साथ भेजने का फैसला किया।

शाम के ६ बजे हम ट्रेन में सवार हुए। डिब्बा लगभग खाली था। रात होते ही जीजा जी मेरी बर्थ पर आ गए।

उन्होंने मेरी चादर के अंदर घुसकर मेरी गर्दन पर चुम्बन किए और मेरी छाती को दोनों हाथों से दबाना शुरू कर दिया। मैं डर के मारे चुप रही।

सुबह पहुँचकर उन्होंने होटल में सिर्फ़ एक कमरा बुक कर लिया। कमरे में घुसते ही उन्होंने दरवाज़ा बंद किया और मुझे दीवार से टिका दिया।

उनके होंठ मेरे होंठों से टकराए, जीभ मेरे मुँह के अंदर घुस गई। मैंने विरोध किया, पर वे और ज़ोर से दबाने लगे। उन्होंने मेरी कमीज़ फाड़ दी।

मेरे स्तन बाहर निकल आए। उन्होंने एक को मुँह में लेकर चूसना शुरू कर दिया और दूसरे को जोर-जोर से निचोड़ने लगे।

पाँच मिनट तक उन्होंने मेरे स्तनों पर अपना मुँह फिराया। धीरे-धीरे मेरे मुँह से कराह निकलने लगी।

उन्होंने मेरी पैंट उतारी और मेरी जांघों के बीच हाथ फेरा। मेरी चूत पहले से ही गीली हो चुकी थी। दो उँगलियाँ अंदर डालकर उन्होंने अंदर-बाहर करना शुरू कर दिया।

फिर उन्होंने घुटनों के बल बैठकर मेरी चूत को चाटना शुरू कर दिया।

उनकी जीभ मेरी चूत के होठों को चीरती हुई अंदर तक पहुँच रही थी। मैंने उनकी बालों में उँगलियाँ उलझा दीं।

कुछ देर बाद उन्होंने अपना मोटा लंड निकाला। वह मेरी चूत के सामने रखकर हिलाने लगे।

मैंने हाथ जोड़कर कहा, “जीजा जी, दर्द होगा, मत कीजिए।” उन्होंने मेरी बात अनसुनी कर दी।

एक ज़ोरदार झटके में उन्होंने अपना पूरा लंड मेरी चूत में घुसा दिया। हymen टूटने का दर्द इतना तेज़ था कि मैं चीख पड़ी।

उन्होंने मुझे कसकर पकड़ लिया जैसे कोई कसाई बकरे को पकड़ता है। धीरे-धीरे वे अंदर-बाहर करने लगे। दर्द धीरे-धीरे मज़े में बदलने लगा।

उन्होंने मुझे कई पोज़िशन में लिया—मिशनरी, डॉगी स्टाइल, 69 पोजीशन और अंत में मैं उनकी गोद में बैठकर चुदाई कर रही थी।

हर बार जब वे जोर से धक्का मारते, मेरा शरीर काँप उठता। दो बार मुझे चरम सुख मिला।

आखिरकार वे भी जोर से चीखे और मेरी चूत के अंदर अपना गरम-गरम वीर्य भर दिया।

उस रात मैंने महसूस किया कि मैं अब औरत बन चुकी हूँ।

सुबह होते ही मुझे अपनी बहन की खुशी याद आई।

मैंने दोबारा इस हरकत को दोहराने का ख्याल मन से निकाल दिया।

यह मेरी सच्ची कहानी है— अगर आपको पसंद आई तो कमेंट ज़रूर कीजिए।