मेरा नाम जसकरन है। मैं एक साधारण सा लड़का हूं, जो दिल्ली के एक कॉलेज में पढ़ता हूं। मेरी जिंदगी में सब कुछ सामान्य चल रहा था, जब तक कि मैंने रिया से मुलाकात नहीं की।
रिया मेरी क्लासमेट थी, बहुत ही खूबसूरत और आकर्षक लड़की। उसके लंबे काले बाल, चमकदार आंखें और हमेशा मुस्कुराता चेहरा किसी को भी दीवाना बना सकता था। हमारी दोस्ती धीरे-धीरे प्यार में बदल गई। हम साथ घूमते, बातें करते और एक-दूसरे के करीब आते गए।
एक दिन, रिया ने मुझे अपने घर आने का न्योता दिया। वह कहने लगी, “जसकरन, आज शाम को मेरे घर आना। मम्मी-पापा बाहर जा रहे हैं, तो हम अकेले रहेंगे।” मैंने खुशी से हामी भर ली। शाम को मैं उसके घर पहुंचा।
रिया ने दरवाजा खोला और मुझे अंदर बुलाया। वह एक छोटी सी स्कर्ट और टॉप में लग रही थी, जो उसके शरीर को और भी आकर्षक बना रही थी। हमने साथ में डिनर किया और फिर सोफे पर बैठकर फिल्म देखने लगे।
फिल्म के दौरान रिया मेरे करीब आ गई। उसका हाथ मेरे कंधे पर था और वह धीरे-धीरे मेरी ओर झुक रही थी। मैंने भी हिम्मत जुटाई और उसके होंठों पर किस कर लिया।
रिया ने भी जवाब दिया। हमारा किस गहरा होता गया। मेरे हाथ उसके शरीर पर घूमने लगे।
रिया की सांसें तेज हो गईं। तभी अचानक दरवाजे की घंटी बजी। रिया चौंक गई और बोली, “कौन आ गया? मम्मी-पापा तो कल लौटने वाले हैं।”
रिया उठी और दरवाजा खोलने गई। बाहर उसका भाई विक्रम खड़ा था। विक्रम रिया से दो साल बड़ा था, कॉलेज में ही पढ़ता था। वह लंबा, कसरती बदन वाला लड़का था, जिसके चेहरे पर हमेशा एक शरारती मुस्कान रहती थी।
रिया ने उसे अंदर आने को कहा। विक्रम ने मुझे देखा और बोला, “अरे, ये तो जसकरन है। क्या चल रहा है भाई?”
मैं थोड़ा असहज हो गया, लेकिन रिया ने कहा, “विक्रम, तुम्हें तो पता है, जसकरन मेरा बॉयफ्रेंड है। आज हम अकेले थे, लेकिन तुम आ गए।” विक्रम हंस पड़ा और बोला, “कोई बात नहीं, मैं तो बस किताबें लेने आया था।
जल्दी से ले लूंगा और चला जाऊंगा।” लेकिन विक्रम रुका नहीं। वह सोफे पर बैठ गया और हमसे बातें करने लगा।
धीरे-धीरे बातें बढ़ीं। विक्रम ने शराब की बोतल निकाली और कहा, “चलो, थोड़ा मजा करते हैं।” रिया ने मना किया, लेकिन मैंने हामी भर ली। हम तीनों ने थोड़ी-थोड़ी शराब पी। माहौल हल्का हो गया।
विक्रम ने रिया से मजाक किया, “दidi, तुम्हारा बॉयफ्रेंड तो कूल है। लेकिन देखो, अगर मैं न आता तो क्या होता?” रिया ने शरमाते हुए कहा, “चुप करो विक्रम।”
रात गहराने लगी। रिया ने कहा, “अब सो जाना चाहिए।” लेकिन विक्रम बोला, “मैं तो यहीं रुक जाऊंगा। गेस्ट रूम में।” रिया सहमत हो गई। हम सब सोने चले गए। लेकिन मुझे नींद नहीं आ रही थी।
रिया के साथ जो पल खराब हो गया, वो सोचकर परेशान था। अचानक मुझे लगा कि कोई मेरे कमरे में आ रहा है। दरवाजा खुला और विक्रम अंदर आ गया। वह सिर्फ अंडरवियर में था, उसका बदन चमक रहा था।
विक्रम बोला, “जसकरन, सो नहीं पा रहा? मैं भी नहीं। चल, बातें करते हैं।” मैं चौंका, लेकिन बोला, “हां, आ जाओ।” विक्रम बिस्तर पर लेट गया। हम बातें करने लगे।
शराब का असर था, तो बातें खुली हुईं। विक्रम ने कहा, “तुम्हें रिया बहुत पसंद है न? लेकिन कभी सोचा है, अगर कोई और…” मैंने हंसकर कहा, “क्या मतलब?”
विक्रम करीब आया और बोला, “मैं मतलब ये कि… लड़के भी अच्छे हो सकते हैं।” मेरा दिल धड़कने लगा। विक्रम का हाथ मेरे कंधे पर रखा। मैंने कुछ नहीं कहा। वह और करीब आया। उसके होंठ मेरे कान के पास थे।
जसकरन, ट्राय करो न।” मैंने पीछे हटने की कोशिश की, लेकिन उसकी मजबूत पकड़ थी। विक्रम ने मुझे किस कर लिया। मैं स्तब्ध था। लेकिन शराब और उत्तेजना ने मुझे रोक लिया।
विक्रम के किस में एक अजीब सी मस्ती थी। उसके हाथ मेरे शरीर पर घूमने लगे। उसने मेरी शर्ट उतार दी। मेरा बदन नंगा हो गया। विक्रम ने मेरी छाती पर किस किया। मैं सिहर उठा। “विक्रम, ये क्या कर रहे हो?” मैंने धीरे से कहा।
वह बोला, “शशश, चुप रहो। मजा आ रहा है न?” उसके हाथ नीचे सरक गए। मेरी पैंट खोल दी। मेरा लंड बाहर आ गया, जो पहले से ही खड़ा था।
विक्रम ने उसे पकड़ा और सहलाने लगा। “वाह, अच्छा साइज है।” वह बोला। फिर वह नीचे झुका और चूसने लगा। उसकी जीभ मेरे लंड पर घूम रही थी। मैं कराह उठा। “आह विक्रम…”
रिया का भाई मेरे लंड को चूस रहा था। ये सोचकर और उत्तेजित हो गया। विक्रम ने जोर-जोर से चूसा। मैं झटके खा रहा था।
फिर विक्रम उठा और बोला, “अब मेरी बारी।” उसने अपनी अंडरवियर उतारी। उसका लंड बहुत बड़ा था, मोटा और लंबा। वह मेरे सामने लटक रहा था। “चूसो इसे।” विक्रम ने कहा। मैं हिचकिचाया, लेकिन उत्सुकता थी।
मैंने हाथ में लिया। गर्म था। मैंने मुंह में डाला। विक्रम ने सिर पकड़ लिया और अंदर-बाहर करने लगा। “हां, ऐसे ही। अच्छा लग रहा है।” वह बोला।
कुछ देर बाद विक्रम बोला, “अब असली मजा।” वह मुझे उल्टा लेटा दिया। मेरी गांड ऊपर। उसने थूक लगाया और उंगली डाली। “आह!” मैं चिल्लाया। दर्द हो रहा था।
लेकिन विक्रम बोला, “आराम से, खुलेगा।” वह उंगली अंदर-बाहर करने लगा। धीरे-धीरे मजा आने लगा। फिर उसने दूसरी उंगली डाली। मैं कराह रहा था।
अब विक्रम ने अपना लंड मेरी गांड पर रगड़ा। “तैयार हो?” वह बोला। मैंने सिर हिलाया। वह धीरे से अंदर डालने लगा। दर्द हुआ, लेकिन मैं सह गया। विक्रम पूरा अंदर कर दिया।
“फक! कितनी टाइट है।” वह बोला। फिर चोदना शुरू कर दिया। जोर-जोर से धक्के। मैं चीख रहा था, “आह विक्रम… जोर से…” रिया का भाई मुझे चोद रहा था।
हमारी चुदाई तेज हो गई। विक्रम के पसीने टपक रहे थे। उसके लंड की गर्मी मेरी गांड में। मैं अपना लंड सहला रहा था। विक्रम ने मेरी पीठ पर हाथ मारा। “कुतिया जैसे चोद रहा हूं।”
वह बोला। मैं बोला, “हां, चोदो मुझे।” चुदाई चरम पर पहुंची। विक्रम बोला, “आ रहा हूं।” और झटके के साथ स्पर्म छोड़ दिया। मैं भी झड़ गया।
हम दोनों लेटे रहे। विक्रम बोला, “कैसा लगा?” मैंने कहा, “अद्भुत। लेकिन रिया को पता नहीं चलना चाहिए।” वह हंसा, “बिल्कुल। ये हमारा राज रहेगा।”
अगले दिन सुबह रिया उठी। सब सामान्य लग रहा था। लेकिन मेरी नजरें विक्रम पर थीं। रिया ने कहा, “जसकरन, आज क्या प्लान है?” मैंने कहा, “जो तुम कहो।” विक्रम मुस्कुराया।
उसके बाद की जिंदगी बदल गई। रिया के साथ रिश्ता तो था, लेकिन विक्रम के साथ एक गुप्त संबंध बन गया। हर बार जब रिया घर पर होती, विक्रम मुझे चुपके से बुलाता।
एक बार रिया के बेडरूम में ही। रिया बाहर गई थी, तो विक्रम आया। “चलो, यहां चुदाई करें।” वह बोला। मैं सहमत हो गया।
विक्रम ने मुझे बेड पर लिटाया। मेरी पैंट उतारी और लंड चूसने लगा। “तुम्हारा लंड हमेशा तैयार रहता है।” वह बोला। फिर मैंने उसके लंड को मुंह में लिया। हम 69 पोजीशन में थे। एक-दूसरे को चूस रहे थे।
विक्रम की गांड चाटी। वह बोला, “हां, चाटो।” फिर वह मेरी गांड में लंड डाला। रिया के बेड पर चुदाई। जोर-जोर से। “आह विक्रम, रिया का बेड हिल रहा है।” मैं बोला। वह हंसा, “कोई बात नहीं।”
चुदाई के बाद हम नहाने चले गए। बाथरूम में फिर से। विक्रम ने शावर के नीचे मुझे चोदा। पानी बह रहा था, हमारे शरीर गीले। उसका लंड फिसलन भरा। “फक, कितना मजा।” वह बोला।
धीरे-धीरे ये आदत बन गई। रिया को शक होने लगा। एक दिन वह बोली, “जसकरन, तुम विक्रम से ज्यादा बातें क्यों करते हो?” मैंने कहा, “अरे, बस दोस्ती है।” लेकिन अंदर ही अंदर डर लग रहा था।
फिर एक रात, तीनों साथ थे। रिया ने कहा, “चलो, पार्टी करते हैं।” शराब पी। माहौल गरम हो गया। रिया ने मुझे किस किया। विक्रम देख रहा था।
तभी रिया बोली, “विक्रम, तुम भी जॉइन करो।” हम चौंके। रिया हंसकर बोली, “मैं जानती हूं सब। मैंने देख लिया था।”
मैं स्तब्ध। विक्रम भी। रिया बोली, “चिंता मत करो। मुझे अच्छा लगता है। चलो, थ्रीसम करते हैं।” रिया ने मेरी शर्ट उतारी। विक्रम ने भी।
रिया के हाथ मेरे लंड पर। विक्रम ने रिया की स्कर्ट ऊपर की। हम तीनों नंगे हो गए।
रिया ने मेरे लंड को चूसा। विक्रम ने रिया की चूत चाटी। मैं विक्रम के लंड को सहला रहा था। फिर विक्रम ने रिया को चोदा। मैं रिया के मुंह में लंड डाला।
रिया कराह रही थी। “आह भाई, जोर से चोदो।” फिर मैंने विक्रम की गांड मारी। रिया देख रही थी। “वाह, क्या सीन है।”
हमने कई पोजीशन्स ट्राई की। रिया ऊपर, मैं नीचे। विक्रम पीछे से। सब मिलकर चुदाई। रात भर चली। स्पर्म इधर-उधर। रिया बोली, “ये हमारा सीक्रेट रहेगा।”
उसके बाद हम तीनों का रिश्ता मजबूत हो गया। रिया और विक्रम के साथ अलग-अलग और साथ में। जिंदगी में कभी न खत्म होने वाला मजा।