मेरा नाम रमेश है। मैं एक 25 साल का युवक हूं, जो दिल्ली में अपने भाई और भाभी के साथ रहता हूं। मेरा भाई अजय एक बिजनेस मैन है, जो अक्सर बाहर घूमता रहता है।
भाभी का नाम प्रिया है। वह 28 साल की है, बेहद खूबसूरत, गोरी चिट, लंबे काले बाल, और फिगर ऐसा कि कोई भी देखकर मदहोश हो जाए।
उनकी स्माइल में जादू है, और घर में हमेशा साड़ी या सलवार कमीज पहनती हैं जो उनके कर्व्स को हाइलाइट करती है।
मैं उनके साथ रहता हूं क्योंकि मेरा जॉब अभी शुरू हुआ है, और घर का खर्चा शेयर करता हूं। लेकिन दिल में एक छिपी हुई चाहत थी प्रिया भाभी के लिए।
वह मेरी भाभी थीं, लेकिन उनकी हर अदा मुझे आकर्षित करती।
होली का त्योहार आया। दिल्ली में होली का मजा कुछ और ही होता है। रंग, गुलाल, ठंडाई और भांग।
अजय भैया बाहर थे, मुंबई में मीटिंग पर। घर पर सिर्फ मैं और प्रिया भाभी। सुबह से ही होली की तैयारी।
प्रिया भाभी किचन में ठंडाई बना रही थीं। मैं गया मदद के लिए। ‘भाभी, क्या मदद करूं?’ मैंने पूछा।
उन्होंने मुस्कुराकर कहा, ‘रमेश, बस भांग मिला दो। मैंने तैयार कर ली है।’ उनकी साड़ी में पसीना आ गया था, जो उनकी कमर पर चिपक गया था।
मैंने भांग का पाउडर मिलाया। लेकिन मन में शरारत आई। मैंने थोड़ा ज्यादा भांग डाल दिया। सोचा, मजा आएगा।
ठंडाई तैयार। हम दोनों बालकनी में बैठे। होली का रंग खेला। मैंने प्रिया भाभी पर गुलाल मारा। वे हंसने लगीं, ‘अरे रमेश, धीरे।
मेरी साड़ी खराब हो जाएगी।’ मैंने कहा, ‘भाभी, होली है, मजा लो।’ फिर ठंडाई सर्व की। ‘पियो भाभी, ये स्पेशल है।’ प्रिया ने एक गिलास पी लिया।
‘वाह रमेश, स्वादिष्ट है।’ धीरे-धीरे भांग का असर होने लगा। प्रिया भाभी की आंखें लाल हो गईं, वे हंसने लगीं बेवजह।
‘रमेश, सब कुछ घूम रहा है। क्या मिलाया तूने?’ मैंने कहा, ‘भांग भाभी, होली का मजा।’ वे मेरे कंधे पर सिर रख दिया। ‘तू अच्छा है रमेश। अजय तो हमेशा बाहर।’
असफल बढ़ा। प्रिया भाभी उठीं, नाचने लगीं। उनकी साड़ी सरकने लगी, पेट दिखा। मैं घूरने लगा। ‘भाभी, थक गईं?’ ‘नहीं, डांस कर।’ मैंने उनका हाथ पकड़ा।
करीब आ गए। उनकी सांसें तेज। भांग ने उन्हें बेकाबू कर दिया। ‘रमेश, गर्मी लग रही है।’ उन्होंने साड़ी का आंचल हटा दिया। ब्लाउज में उनके स्तन उभरे हुए। मैंने कहा, ‘भाभी, अंदर चलो।’ कमरे में ले गया।
प्रिया भाभी बेड पर लेट गईं। ‘पानी दो।’ मैंने दिया। लेकिन वे उठीं और मेरे गले लग गईं। ‘रमेश, तू कितना हैंडसम है।’ उनके होंठ मेरे गाल पर।
मेरा दिल धड़क गया। ‘भाभी, ये क्या?’ ‘शश, चुप। भांग का असर है।’ लेकिन मैं रुका नहीं। उनके होंठ चूम लिए। नरम, गर्म। जीभ अंदर। प्रिया ने जवाब दिया।
हाथ मेरी शर्ट में। ‘तुम्हारा बॉडी स्ट्रॉन्ग है।’ शर्ट उतार दी। मेरी छाती चूमने लगीं।
मैंने उनकी साड़ी खींची। पेटीकोट दिखा। ब्लाउज खोला। ब्रा में बड़े स्तन। ‘भाभी, कितने सुंदर।’ ब्रा खोली। गुलाबी निप्पल्स।
मुंह में लिया। चूसा। प्रिया कराहीं, ‘आह रमेश, अच्छा लग रहा है। चूसो जोर से।’ उनके हाथ मेरी पैंट पर। जीप खोली। लंड बाहर। ‘वाह, इतना बड़ा।
अजय का इतना नहीं।’ सहलाने लगीं। ‘चूसूंगी।’ नीचे झुकीं। मुंह में लिया। जीभ घुमाई। चूषा। मैं सिहर उठा। ‘भाभी, आह, कमाल है।’
कुछ देर बाद प्रिया उठीं। ‘अब मेरी बारी। मेरी चूत चाटो।’ पेटीकोट ऊपर। पैंटी खींची। चूत गीली, बाल कम। जीभ लगाई। चाटा।
क्लिटोरिस पर। प्रिया की जांघें कांपने लगीं। ‘हां रमेश, ऐसे ही। जीभ अंदर। आह, कमिंग।’ रस बहा। मीठा।
फिर प्रिया बेड पर लेटीं। ‘चोदो मुझे रमेश। कंडोम लगाओ।’ मैंने ड्रॉअर से लिया। लंड पर चढ़ाया। चूत पर रगड़ा। अंदर धकेला। टाइट, गर्म। ‘
आह भाभी, कितनी टाइट है।’ धक्के मारे। प्रिया ने कमर उठाई। ‘जोर से रमेश। फक मी हार्ड।’ चुदाई तेज। बेड हिल रहा। उनके स्तन उछल रहे। मैंने चूसे। ‘
बाइट करो रमेश। आह।’ चरम पर। मैं झड़ा। प्रिया भी। ‘गुड बॉय।’
उसके बाद हम नंगे लेटे। प्रिया बोलीं, ‘रमेश, ये गलत था लेकिन मजा आया। भांग का कमाल।’
मैंने कहा, ‘भाभी, सीक्रेट रहेगा।’ लेकिन रात हो गई। भांग का असर अभी था। दोबारा शुरू। डॉगी स्टाइल। प्रिया की गांड ऊपर। लंड चूत में। ‘
आह, गहरा। स्पैंक करो।’ स्लैप मारा। ‘हां, पेन प्लेजर।’ जोर-जोर से चोदा। पसीना बहा। प्रिया चिल्लाईं, ‘रमेश, आई एम कमिंग अगेन।’
सुबह हुई। प्रिया शर्मा गईं। ‘रमेश, कल की बात भूल जाओ।’ लेकिन मैं जानता था, ये शुरुआत है। अजय भैया आने वाले थे, लेकिन हमारी नजरें मिलतीं।