किरायेदार आंटी की पूरी रात धकापेल चुदाई

(Kirayedar Aunty Ki Puri Raat Dhakapel Chudayi)

नमस्कार दोस्तो, गरम किस्से की गर्मागर्म कहांनियो में आपका स्वागत है। मैं राजा रंगीला, उत्तर प्रदेश का निवासी हूँ। मेरी उम्र 22वर्ष है, लंबाई 5 फीट 8 इंच है। भाभियों और लड़कियों के लिए बताना चाहूँगा कि मेरे हथियार की लंबाई 6 इंच है तथा इसकी मोटाई 3 इंच है।

मेरा लंड जब किसी चुत में जाता है तो वह अपनी पावर से उस चुत को इस बात के लिए मजबूर कर देता है कि वह बार बार मेरे लौड़े से ही चुदे।

आज मैं आपको अपनी एक सच्ची कहानी सुनाता हूँ जो मेरी पड़ोस की किरायेदार आंटी के साथ हुई। आंटी का नाम रीता था, उम्र लगभग 32 साल, पति बाहर नौकरी पर था और वो अकेली ही पड़ोस के एक छोटे से घर में रहती थी।

वो खूबसूरत थी, गोरी चिट्टी, भरी हुई छाती और मोटी गांड वाली। मैंने उसे पहली बार देखा तो मेरा लंड ही खड़ा हो गया। एक दिन शाम को मेरी मम्मी ने बताया कि आंटी ने कहा है, आज रात को राजा को उनके घर सुला दो, डर लगता है अकेले। मम्मी ने मुझे भेज दिया।

मैं आंटी के घर पहुँचा। दरवाजा खुला था, अंदर लाइट जल रही थी। घर छोटा सा था, एक कमरा, एक किचन और बाथरूम। आंटी ने साड़ी पहनी हुई थी, जो उसके बदन से चिपकी हुई लग रही थी। वो अकेलेपन से परेशान लग रही थी, लेकिन उसकी आँखों में एक गंदी चमक थी। ‘आ जा राजा, आज तू ही मेरी रक्षा करेगा,’ उसने मुस्कुराते हुए कहा।

मैं अंदर गया, दरवाजा बंद किया। कमरे में हल्की गर्मी थी, पंखा घूम रहा था लेकिन हवा ठंडी नहीं लग रही। हम दोनों बिस्तर पर बैठ गए। आंटी ने चाय दी, बातें करने लगे। उसके पति के बारे में, अकेलेपन के बारे में। मैंने देखा वो बार बार अपनी साड़ी ठीक कर रही थी, जैसे जानबूझकर अपनी चूचियाँ दिखा रही हो।

धीरे-धीरे बातें गहरी होने लगीं। ‘राजा, तू जवान हो गया है, कोई गर्लफ्रेंड है?’ आंटी ने पूछा, उसकी आवाज में एक कामुक कंपन था। मैंने हँसकर कहा, ‘आंटी, मैं तो आप जैसी औरतों को ही पसंद करता हूँ।’ वो शरमा गई लेकिन आँखें नीची नहीं कीं।

मैंने अपना हाथ उसके कंधे पर रख दिया। वो काँप गई लेकिन हटाया नहीं। अकेलेपन का माहौल इतना गर्म हो गया कि साँसें तेज चलने लगीं।

मैंने उसे पास खींच लिया, उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए। वो पहले तो रुकी, लेकिन फिर जवाब देने लगी। हमारा चुंबन गहरा हो गया, जीभें लड़ने लगीं।

मेरे हाथ उसकी साड़ी में घुस गए, चूचियों को मसलने लगा। ‘आह… राजा… ये क्या कर रहा है…’ वो बोली लेकिन शरीर आगे बढ़ा रही थी।

मैंने उसे पटक दिया बिस्तर पर। साड़ी खींच ली, ब्लाउज फाड़ दिया। उसकी बड़ी-बड़ी चूचियाँ बाहर आ गईं, निप्पल्स सख्त हो चुके थे। मैंने एक को मुँह में लिया, जोर से चूसा। ‘ओह्ह… मार डालेगा तू…’ वो चीखी। मेरी पैंट उतार दी, मेरा 6 इंच का मोटा लंड बाहर कूद पड़ा।

आंटी ने देखा तो आँखें फैल गईं। ‘इतना बड़ा… पति का तो आधा भी नहीं।’ मैंने कहा, ‘अब ये तेरी चूत और गांड की मालिक बनेगा।’ मैं डॉमिनेंट था, उसे कोई मौका नहीं दिया। उसके पैंटी उतार दी, चूत गीली थी, बालों से भरी।

मैंने उंगली डाली, वो चिल्लाई। फिर मैंने अपना लंड उसके मुँह पर रगड़ा। ‘चूस आंटी, अपना लंड चख।’ वो झिझकी लेकिन मुँह खोल लिया। मैंने जोर से धक्का दिया, लंड गले तक चला गया। वो गग करने लगी, लेकिन मैंने सिर पकड़कर चुदवाया। उसके मुँह से लार टपक रही थी।

अब मैंने उसे उल्टा कर दिया। उसकी मोटी गांड ऊपर की। ‘वो बोली नहीं राजा, गांड मत मार… दर्द होगा।’ लेकिन मैंने सुना नहीं। थूक लगाया उसके गांड के छेद पर, फिर अपना मोटा लंड सिरा डाला। जोर से धक्का मारा।

‘आआआह्ह्ह…

वो चीखी, फट गई मैं…’ आँसू आ गए। लेकिन मैं रुका नहीं। पूरा लंड अंदर घुसा दिया, 3 इंच मोटाई से उसकी गांड फूल गई।

मैंने जोर-जोर से चोदना शुरू किया। पेल-धक्के मारते हुए, ‘मैं गरजा कैसी लग रही है तेरी गंदी गांड मेरे लंड से?’ कमरे में उसकी चीखें गूँज रही थीं, ‘चोद… मार डाल… तेरी रंडी बन गई हूँ।’ हम दोनों पागल हो चुके थे। पसीना बह रहा था, बदन चिपक रहे थे। मैंने स्पीड बढ़ाई, गांड चोदते हुए चूचियाँ मारीं।

फिर मैंने उसे सीधा किया, चूत पर लंड रखा। ‘अब तेरी चूत को फाड़ूँगा।’ वो गिड़गिड़ाई, ‘हाँ राजा, चोद अपनी आंटी को।’ मैंने एक झटके में पूरा लंड चूत में घुसेड़ दिया। वो कूद गई, ‘ओह्ह फक… इतना मोटा…’ रफ सेक्स शुरू हो गया। मैं ऊपर से पेल रहा था, उसके पैर कंधों पर रखे।

हर धक्के से चूत के रस बाहर आ रहे थे। ‘ मैं बोला तेरी चूत मेरे लंड की गुलाम है, बार-बार चुदेगी।’ वो मोअन कर रही थी, ‘हाँ… तेरे लौड़े का दीवाना बना दे… चोद मजबूती से।’

मैंने उसे डॉगी स्टाइल में किया, पीछे से चोदा। गांड पर थप्पड़ मारे, चूचियाँ खींची। उसकी चीखें तेज हो गईं, ‘आह… बस… और जोर से।’ मैंने स्पीड बढ़ाई, लंड चूत में अंदर-बाहर हो रहा था।

हम घंटों चुदते रहे। मैंने उसे मजबूर किया, ‘अभी रुका नहीं, रात भर चुदेगी।’ उसकी देह मेरी मर्जी से झूम रही थी, थकान के बावजूद चूत गीली बनी रही।

आखिर में मैंने लंड बाहर निकाला, उसके मुँह में डाल दिया। ‘पी ले अपना रस।’ वो चाटने लगी। लेकिन रात अभी बाकी थी, मेरा लंड फिर खड़ा हो रहा था…

इस कहानी का आगे का भाग मैं आपके सामने जल्दी ही प्रस्तुत करूंगा।

धन्यबाद !