दोस्तो, आज मैं पहली बार किसी ऐसे मंच पर अपनी पहली सेक्स की कहानी साझा कर रहा हूँ। यह गरम किस्से की गर्मागर्म कहानी बिल्कुल सच्ची घटनाओं पर आधारित है, तो कृपया इसे किसी कल्पना की दुनिया न समझें। तो बात है सर्दियों की कड़कती ठंड की। मैं लाइब्रेरी में बैठा पढ़ रहा था, तभी एक लड़की लाइब्रेरी में आई। देखने में वह एकदम बला की खूबसूरत थी… चेहरा एकदम गोरा, साइज़ शायद 30-32-38 रहा होगा और फिगर एकदम सेक्सी लग रहा था।
मेरा नाम राहुल है, और मैं एक सामान्य कॉलेज स्टूडेंट था। उस समय मैं बीए थर्ड ईयर में था, और कॉलेज की लाइब्रेरी मेरा फेवरेट स्पॉट था। सर्दी का मौसम था, दिसंबर का महीना, बाहर बर्फीली हवा चल रही थी, और लाइब्रेरी के अंदर हीटिंग सिस्टम चल रहा था, लेकिन फिर भी ठंड का अहसास हो रहा था। मैं किताबों के बीच में बैठा था, नोट्स बना रहा था, जब दरवाजा खुला और वो अंदर आई।
वो लड़की कोट पहने हुए थी, लेकिन उसके चेहरे की चमक और आंखों की चमक ने मुझे तुरंत आकर्षित कर लिया। उसके बाल लंबे, काले और घने थे, जो कंधों पर लहरा रहे थे। वो लाइब्रेरी के काउंटर पर गई, किताबें लीं और एक कोने की टेबल पर बैठ गई। मैंने चुपके से उसे देखा। उसके होंठ गुलाबी थे, नाक सीधी, और आंखें बड़ी-बड़ी काली।
उसके कोट के नीचे से उसकी बॉडी का आउटलाइन साफ दिख रहा था – ब्रेस्ट्स फुल और राउंड, कमर पतली, और हिप्स चौड़े। साइज़ 30-32-38 का अनुमान लगाया, जो बिल्कुल परफेक्ट था।
मैंने सोचा, क्यों न बात करने की कोशिश करूं। दिल धड़क रहा था, लेकिन मौका था। मैंने अपनी किताब उठाई और उसके पास वाली शेल्फ पर चला गया। फिर नाटकीय तरीके से एक किताब गिरा दी, जो उसके पास गिरी। वो झुकी और किताब उठाई। ‘एक्सक्यूज मी, ये आपकी लग रही है?’ उसने मुस्कुराते हुए कहा।
‘हां, थैंक यू। सॉरी, हाथ फिसल गया,’ मैंने शर्माते हुए कहा।
‘कोई बात नहीं। मैं नेहा हूं, आप?’ उसने हाथ बढ़ाया।
मै यहां रेगुलर आता हूं। आप नई लग रही हो।
हमारी बात शुरू हो गई। नेहा भी उसी कॉलेज में थी, लेकिन जूनियर ईयर में। वो लिटरेचर पढ़ रही थी। हमने किताबों के बारे में बात की, फिर कॉलेज लाइफ के बारे में। ठंड के कारण लाइब्रेरी में कम लोग थे, तो हम फ्रीली बात कर सके। एक घंटे में हम अच्छे फ्रेंड्स हो गए।
अगले दिन फिर मिले। सर्दी और तेज हो गई थी, बाहर बर्फ गिर रही थी। नेहा ने एक टाइट स्वेटर पहना था, जो उसके फिगर को और हाइलाइट कर रहा था। उसके ब्रेस्ट्स स्वेटर पर तना हुआ था, और जब वो हंसती तो वो हल्के से हिलते। मैंने नोटिस किया, लेकिन कंट्रोल किया। हमने कॉफी मशीन से गर्म कॉफी ली और साथ बैठे।
‘राहुल, ये ठंड बहुत है। घर जाना मुश्किल हो रहा,’ नेहा ने कहा, अपने हाथ रगड़ते हुए।
‘हां, लेकिन लाइब्रेरी ही सेफ है। चलो, मैं तुम्हें कुछ पढ़ाई के टिप्स दूं ,’ मैंने ऑफर किया।
दिन बीतते गए। हम रोज मिलने लगे। नेहा बहुत ओपन माइंडेड थी। वो अपनी फैमिली के बारे में बताती, मैं अपनी। धीरे-धीरे हमारी दोस्ती गहरी हो गई। एक दिन, लाइब्रेरी क्लोज होने का टाइम हो गया। बाहर अंधेरा और ठंडा था।
नेहा ने कहा, राहुल, मुझे होस्टल तक ड्रॉप कर दो ना? अकेले डर लगता है,’
मैंने अपनी बाइक ली और उसे बैकसीट पर बिठाया। सर्द हवा में उसके बाल मेरे चेहरे पर लग रहे थे। होस्टल पहुंचे तो वो बोली, ‘थैंक यू। कल मिलते हैं।’
लेकिन अगले दिन, वो थोड़ी उदास लग रही थी। मैंने पूछा ‘क्या हुआ?’
‘बॉयफ्रेंड से ब्रेकअप हो गया। वो चीट कर रहा था,’ नेहा ने आंसू पोछते हुए कहा।
मैंने उसे कंसोल किया। ‘तुम जैसी खूबसूरत लड़की को कोई धोखा दे, वो बेवकूफ है।’
नेहा मुस्कुराई। ‘तुम बहुत अच्छे हो राहुल।’
उस दिन हम लंबे समय तक बात की। मैंने उसे हग किया, जो पहली बार था। उसके बॉडी का गर्माहट महसूस हुआ। उसके ब्रेस्ट्स मेरे चेस्ट से दबे, और मुझे एक्साइटमेंट हुआ। लेकिन मैंने कंट्रोल किया।
कुछ दिनों बाद, वैलेंटाइन वीक था। सर्दी अभी भी थी, लेकिन हमारा रिश्ता रोमांटिक हो गया। नेहा ने मुझे एक गिफ्ट दिया – एक स्कार्फ। ‘ये तुम्हारे लिए, ठंड से बचना।’
मैंने उसे चॉकलेट दी। शाम को हम लाइब्रेरी के बाहर पार्क में घूमे। ठंड में उसके गाल लाल हो गए थे। मैंने उसका हाथ पकड़ा। ‘नेहा, मैं तुमसे प्यार करता हूं।’
वो शर्मा गई। ‘और मैं भी।’
हमने पहला किस किया। उसके होंठ नरम थे, ठंडे लेकिन गर्माहट देने वाले। मेरी जीभ उसके मुंह में गई, और वो रिस्पॉन्ड की। किस लंबा चला, मेरे हाथ उसकी कमर पर थे।
फिर धीरे-धीरे हमारी क्लोजनेस बढ़ी। एक दिन लाइब्रेरी में, जब कोई नहीं था, नेहा ने कहा, ‘राहुल, मुझे तुम्हारी कमी महसूस होती है।’
मैंने उसे किस किया, लेकिन इस बार ज्यादा पैशियनेट। मेरा हाथ उसके ब्रेस्ट पर गया। वो 30 इंच के राउंड ब्रेस्ट्स, निप्पल्स हार्ड हो गए थे। नेहा सिहर गई। ‘राहुल, यहां नहीं।’
लेकिन एक्साइटमेंट बढ़ गया। अगले दिन, हमने फैसला किया कि होस्टल में मिलें। नेहा का रूममेट बाहर गया था। सर्द शाम थी, हम उसके रूम में थे। हीटर ऑन था।
नेहा ने डोर लॉक किया। ‘राहुल, आज रात मेरी हो।’
मैंने उसे बेड पर खींचा। उसके कपड़े उतारे। ऊपर से स्वेटर, फिर टी-शर्ट। उसके ब्रा में ब्रेस्ट्स उभरे हुए। 30-32-38 का फिगर नंगी आंखों से देखा – गोरा शरीर, पिंक निप्पल्स। मैंने ब्रा खोली और चूसा। नेहा कराही, ‘आह राहुल।’
मेरा मुंह उसके निप्पल्स पर था, चूस रहा, काट रहा। हाथ नीचे गया, जींस खोली। उसकी पैंटी गीली थी। मैंने फिंगर डाली, वो चीखी। ‘राहुल, धीरे।’
लेकिन वो वर्जिन थी। मैंने धीरे-धीरे फिंगरिंग की। नेहा का चेहरा लाल, सांस तेज। फिर मैंने अपनी पैंट उतारी। मेरा लंड हार्ड था, 7 इंच का। नेहा ने देखा और शर्मा गई। ‘ये इतना बड़ा।’
मैंने कहा, ‘डरो मत, मैं संभाल लूंगा।’
नेहा ने मेरा लंड पकड़ा, सहलाया। फिर मुंह में लिया। ब्लोजॉब देना शुरू किया। उसकी जीभ लंड पर घूम रही, चूस रही। मैं कराहा, ‘नेहा, कमाल है।’
फिर मैंने उसे लिटाया। पैंटी उतारी। उसकी चूत गीली, पिंक लिप्स। मैंने चाटा। नेहा चिल्लाई, ‘आह, राहुल, क्या कर रहे हो।’
मेरी जीभ अंदर-बाहर। क्लिटोरिस चूसा। नेहा का शरीर कांप रहा। फिर मैंने कंडोम पहना और लंड चूत पर रगड़ा। ‘नेहा, तैयार हो?’
‘हां, डालो।’
धीरे से डाला। वो टाइट थी। नेहा दर्द से चीखी, लेकिन फिर एंजॉय करने लगी। मैंने धीरे-धीरे पेलना शुरू किया। लंड अंदर-बाहर। नेहा के ब्रेस्ट्स उछल रहे। ‘फास्टर राहुल।’
मैंने स्पीड बढ़ाई। ठोक-ठोक। नेहा की चीखें, ‘चोदो मुझे।’
हमने मिशनरी, डॉगी, सब पोजीशन्स ट्राई की। आखिर में मैंने कंडोम में झड़ दिया। नेहा भी ऑर्गेज्म पर पहुंची।
उस रात हम तीन बार किए। सर्दी में गर्माहट मिली।
फिर हमारा रिश्ता और मजबूत हुआ। लाइब्रेरी में भी चुपके से किस करते, टच करते। एक दिन लाइब्रेरी के बैक रूम में, हमने क्विक सेक्स किया। नेहा की स्कर्ट ऊपर की, मैंने पीछे से डाला। जोर-जोर से चोदा। कोई न सुने, इसलिए मुंह दबाया।
मैंने उसे दीवार से सटा लिया। स्वेटर ऊपर किया, नेहा के निप्पल्स लाल हो गए। फिर नीचे गया, पैंटी उतारी। चूत पर जीभ फेरी। नेहा की टांगें कांप रही थी। ‘चाटो राहुल, और चाटो।’
मैंने क्लिट को सक्शन दिया। नेहा चिल्लाई। फिर मैंने लंड बाहर निकाला। नेहा घुटनों पर बैठी, ब्लोजॉब दिया। गहराई तक लिया, गैगिंग साउंड आया।
नेहा काउगर्ल पोजिशन में ऊपर बैठी, मैंने लंड चूत में डाला। नेहा ऊपर-नीचे उछली उसके ब्रेस्ट्स हिल रहे थे , 32 की कमर मटक रही थी, 38 की गांड मेरे हाथों में थी, मैंने नीचे से ठोका।
नेहा चीखी, चोदो मुझे जोर से!’ हमने घंटों किया। डॉगी पोजिशन में उसकी गांड पेली। लंड गहराई तक डाला नेहा की चूत टाइट थी। आखिर में मैंने उसके मुंह में झाड़ा। नेहा ने सब निगल लिया।
ऐसे ही दिन बीते। सर्दी खत्म हुई, लेकिन हमारा प्यार बढ़ता गया। लाइब्रेरी हमारा सीक्रेट स्पॉट बना। एक बार तो लाइब्रेरी के स्टोर रूम में लॉक हो गए। वहां अंधेरा था, लेकिन हमने फुल सेक्स किया। नेहा की चीखें किताबों में गूंजीं।
नेहा का फिगर हमेशा मुझे क्रेजी बनाता। उसके 38 की गांड को पेलने में मज़ा आता।
आज भी याद आती है वो सर्दियां। नेहा अब मेरी वाइफ है। लेकिन वो पहली मुलाकात लाइब्रेरी में, वो हमेशा स्पेशल रहेगी।
आशा करता हूँ की आपको मेरी ये कहानी बहुत पसंद आयी होगी।
धन्यबाद !