मेरा नाम रानी है। मैं झारखंड के एक छोटे से गांव से हूं। वहां की जिंदगी सरल थी लेकिन सीमित। पढ़ाई के लिए मैं शहर आई। डेंटल कॉलेज में एडमिशन मिला तो खुशी की लहर दौड़ गई।
कॉलेज का पहला दिन याद है। सीनियर्स ने रैगिंग की। लड़के-लड़कियां सब इकट्ठे थे। एक सीनियर ने कहा, ‘नई आई हो? नाम क्या है?’ मैंने जवाब दिया, ‘रानी।’ वह हंसा, ‘वाह, नाम तो अच्छा है।
फिगर भी कमाल का। घूमो जरा।’ मैं शर्मा गई लेकिन इग्नोर किया। दूसरे ने कहा, ‘ब्रा पहनी है या नहीं? चेक करो।’ सब हंस पड़े। मैं चुपचाप चली गई। मन में सोचा, ये सब बकवास है। मुझे डॉक्टर बनना है, ये सब भूल जाना है।
समय बीता। पहला साल खत्म होने को था। प्रैक्टिकल एग्जाम के लिए प्रोजेक्ट असाइन हुआ। एक मरीज को ट्रीट करना था। क्लिनिक में सीनियर्स और टीचर्स थे। तभी दरवाजा खुला और एक लड़का अंदर आया।
कद 6 फुट का, चेहरा साफ-सुथरा, बाल स्टाइलिश। आंखें ऐसी कि दिल छू लें। वह मुस्कुराया, ‘हैलो, मेरा टाइम है ना?’ टीचर ने कहा, ‘हां, रानी तुम्हें असाइन कर रही हूं।’ मेरा दिल जोर से धड़का।
नाम पूछा तो बोला, ‘राज शर्मा।’ मैंने फाइल ली और उसे चेयर पर बिठाया। उसके दांत चेक किए। बीच-बीच में नजरें मिलतीं। वह घूर रहा था। मैं भी। ट्रीटमेंट प्लान बनाया। फीलिंग थी कि कुछ स्पेशल है।
पहले ट्रीटमेंट के दिन, उसके दांत भरने का काम था। हम ज्यादा बात नहीं कर पाए। वह चुपचाप बैठा रहा, और मैंने अपना काम किया। लेकिन अगले विजिट पर, वह मेरे लिए एक गिफ्ट लेकर आया। एक छोटा-सा बॉक्स, रैप्ड। ‘
ये आपके लिए, रानी मैम,’ उसने कहा। मैं शर्मा गई। फिर बातें होने लगीं। उसने पूछा, ‘आप कहां से हैं? फैमिली के बारे में बताइए।’ मैंने बताया कि मैं झारखंड से हूं, मां-बाप गांव में हैं, और मैं यहां पढ़ाई के लिए आई हूं।
उसने अपनी बातें शेयर कीं। वह इंजीनियरिंग करता है, शहर में रहता है। आखिर में, उसने मेरा फोन नंबर मांगा। मैंने दे दिया।
उस रात 11 बजे, मैं बिस्तर पर करवटें बदल रही थी। नींद नहीं आ रही थी। तभी उसका कॉल आया। ‘हैलो रानी, सो गईं क्या?’ उसकी आवाज में एक गर्माहट थी। ‘नहीं राज, बस आराम कर रही हूं,’ मैंने कहा। हम बातें करने लगे।
वह बोला, ‘मैं आपको बहुत पसंद करता हूं। पहली नजर में ही दिल चुरा लिया आपने।’ मेरा चेहरा लाल हो गया। ‘मैं भी आपको पसंद करती हूं राज। शायद प्यार ही हो गया,’ मैंने कबूल किया। फिर कैजुअल चैट हुई। मौसम, कॉलेज, उसकी जॉब के बारे में।
अचानक उसने कहा, ‘रानी, आप चल रही हैं क्या? आवाज से लग रहा है थकान है। बैठ जाइए, पैर थक जाएंगे।’ मैं हंस पड़ी। लेकिन फिर वह बोला, ‘आपकी सांसें तेज हैं, और… ब्रेस्ट्स उछल रहे हैं क्या? ब्रा नहीं पहनी?’ मैं शॉक्ड हो गई।
‘राज! क्या कह रहे हो?’ लेकिन अंदर से एक उत्तेजना महसूस हुई। वह हंसा, ‘सॉरी, लेकिन कल आ रहा हूं अगले सेशन के लिए। कोई गिफ्ट लाऊं?’ मैंने कहा, ‘जो मन करे।’
अगले दिन हॉस्पिटल में, वह फिर आया। गिफ्ट बॉक्स हाथ में। ट्रीटमेंट के दौरान, अचानक उसने मेरी ब्रेस्ट्स दबा दीं। ‘आह!’ मैं चीख पड़ी। अटेंडेंट ने दरवाजा खटखटाया, ‘क्या हुआ मैम?’ मैंने झूठ बोला, ‘कुछ नहीं, इंस्ट्रूमेंट गिर गया।’
फिर कमरे को लॉक कर दिया। मुड़कर देखा, तो वह खड़ा था। उसने मुझे खींच लिया, गले लगा लिया और जोर से किस करने लगा। मेरी टांगें कांपने लगीं। ‘राज, रुको… यहां नहीं,’ मैंने कहा, लेकिन वह नहीं माना।
मैंने जल्दी से ट्रीटमेंट खत्म किया और भाग गई। नीचे पार्किंग में उसकी कार में वह इंतजार कर रहा था।
कार में बैठते ही, उसने फिर किस करना शुरू कर दिया। बार-बार होंठ चूस लिए। हाथों से मेरी ब्रेस्ट्स जोर-जोर से दबाईं।
कपड़ों के ऊपर ही, लेकिन दर्द हुआ। घर पहुंची तो आईने में देखा, ब्रेस्ट्स लाल हो गए थे, उंगलियों के निशान। मैं नहाई, खाना खाया और सो गई।
रात को फिर कॉल। ‘गिफ्ट खोला?’ ‘नहीं भूल गई,’ मैंने कहा। बॉक्स खोला तो अंदर रेड कलर का ट्रांसपेरेंट सिल्की बिकिनी। शर्म से पानी-पानी हो गई। ‘राज, ये क्या है?’ वह बोला, ‘ट्राई करो ना, फोन मत काटना।’ मैं हिचकिचाई, लेकिन कमरे में जाकर कपड़े उतार दिए।
नंगी हो गई। बिकिनी पहनी, जो बिल्कुल कुछ नहीं पहनने जैसी लगी। आईने में देखा, खुद को सेक्सी लग रही थी। ‘कैसी लग रही हूं?’ मैंने पूछा। ‘बहुत हॉट रानी, कल ट्रिप पर चलें?’ वह बोला।
मैंने फैमिली को झूठ बोला कि वर्क कॉल पर आउट ऑफ टाउन जाना है। तीन दिन का प्लान। अगली सुबह वह मुझे पिक करने आया। हम बाहर के इलाके में एक होटल पहुंचे। चेक-इन किया, रूम में फ्रेश हुए।
सुबह 9 बजे, मैं बाहर आई तो वह अंडरवियर में था। उसका शरीर कमाल का। मसल्स, चेस्ट। मैं दौड़कर गई, उसे बेड पर धकेल दिया और किस करने लगी। ‘राज, तुम कितने हॉट हो,’ मैं बोली।
वह पलट गया, मुझे नीचे दबा दिया। होंठ चूसने लगा, जीभ मुंह में डाल दी। ‘नहीं राज, धीरे,’ मैंने विरोध किया, लेकिन वह नहीं रुका। मेरी ड्रेस फाड़ दी बिना उतारे। ब्रेस्ट्स चूसने लगा, काटने लगा। थप्पड़ मारे।
दर्द हुआ बहुत, लेकिन पहली बार था, सह ली। ‘राज, दर्द हो रहा है,’ मैं बोली। ‘चुप रहो रानी, एंजॉय करो,’ उसने कहा।
फिर मैंने कहा, ‘तुम्हें नंगा देखना है।’ वह बोला, ‘तुम ही उतारो।’ मैंने अंडरवियर नीचे किया। सामने गंदा, काला लंड। शॉक हो गई। ‘ये… इतना गंदा?’ ‘चूसो इसे, जब तक न कहूं,’ उसने ऑर्डर दिया। मैंने मना किया।
वह मुझे बेड पर उठा लिया, सलवार फाड़ दी। मैंने पैंटी नहीं पहनी थी, चूत खुल गई। गीली हो चुकी थी। पहली बार किसी और ने नंगा देखा। शर्म आई, लेकिन वह किस करने लगा, चूत सहलाने लगा। मजा आ गया।
वह पैरों के बीच आया, चूत चाटने लगा। जीभ अंदर डाल दी। मैं उछल पड़ी। ‘आह राज!’ अचानक पेशाब निकल गया उसके मुंह पर। लेकिन वह रुका नहीं, पी गया। ‘अब तुम्हारी बारी,’ मैंने सोचा। घुटनों पर बैठी, लंड पकड़ा, मुंह में डाला।
चूसने लगी। वह सिसकारा, ‘अच्छा चूस रही हो मेरी स्लटी बिच।’ मैं और जोर से चूसी। लंड फूल गया, मुंह में मुश्किल से आ रहा था। फिर वह झड़ गया, सफेद माल मुंह में।
‘डॉगी पोजिशन में हो जाओ,’ उसने कहा। मैं हो गई। उसका गर्म, लोहे जैसा लंड मेरी टाइट कुंवारी चूत में डालने की कोशिश की। फिसल रहा था। हायमन सील था। मैंने खुद गाइड किया, ‘डालो राज।’ वह धक्का मारा।
दर्द से आंसू आ गए। वह रुका, फिर मुंह दबा दिया और जोर से ठोकना शुरू। सांस रुक गई। पांच मिनट बाद, धीरे-धीरे ठोकने लगा। पहले मीठा दर्द, फिर मजा। ‘और जोर से चोदो राज, मजा आ रहा है!’ मैं चिल्लाई। वह बोला, ‘हां मेरी कुत्तिया रंडी।’ 45 मिनट चुदाई के बाद, सब माल चूत में झाड़ दिया।
वह पल मैं कभी नहीं भूलूंगी। लेकिन दुख हुआ कि जिसे प्यार किया, उसने मुझे रंडी बना दिया…………..