मोहन और सविता भाभी की चुदाई

(Mohan and Savita Bhabhi's Fucking)

मेरा नाम मोहन है। मैं दिल्ली का रहने वाला हूं। उम्र 23 साल। दो साल पहले की बात है जब मैं 11वीं क्लास में पढ़ता था। तब मेरी जिंदगी में पहली बार असली सेक्स का अनुभव हुआ। मेरी उम्र उस वक्त करीब 18 साल थी।

मेरा लंड 8 इंच लंबा है और मोटा भी। मुझे सेक्स बहुत पसंद है। आज मैं अपनी वो पहली रियल सेक्स स्टोरी शेयर करने जा रहा हूं जो मेरी पड़ोसन सविता भाभी के साथ हुई। सविता भाभी 30 साल की हैं।

उनका फिगर 34-28-36 का है। कमाल का बॉडी है उनका। बड़े-बड़े स्तन जो हमेशा हिलते रहते हैं। कमर पतली और गांड गोल-मटोल। वो अपने पति और 2 साल के बेटे के साथ रहती हैं।

मैं अक्सर उनके घर जाता रहता था। कभी पानी मांगने तो कभी कोई छोटा-मोटा काम। लेकिन असल में मैं उनके घर इसलिए जाता था क्योंकि सविता भाभी का शरीर देखकर मेरा मन डोल जाता था। खासकर उनके बड़े स्तन।

वो आधी बाजू वाली ब्लाउज पहनती थीं जिसमें से उनके स्तन बाहर झांकते रहते थे। मैं चुपके से घूरता रहता। रात को उनके बारे में सोचकर हस्तमैथुन करता। कल्पना करता कि उनके स्तनों को दबाऊंगा। उनकी चूत में अपना लंड डालूंगा। लेकिन ये सब सिर्फ ख्याल ही थे।

एक दिन सविता भाभी मेरे घर आईं। मेरी मां से मिलने। वो साड़ी पहने हुए थीं। बात करते-करते उनका पल्लू सरक गया। वो झुककर पल्लू ठीक करने लगीं। तभी उनके स्तन लगभग बाहर निकल आए।

ब्लाउज इतना टाइट था कि निप्पल्स तक दिख रहे थे। मैं घूरता रह गया। मेरी आंखें उनकी छाती पर टिक गईं। सविता भाभी ने नोटिस किया। वो मुस्कुराईं हल्के से। शायद उन्हें पता था कि मैं चुपके से उन्हें देखता हूं।

उसके बाद से उन्होंने जानबूझकर ऐसा किया। कभी पल्लू सरकने देते। कभी झुककर काम करते समय छाती दिखाते। मैं घर आकर उनके बारे में सोचकर मुठ मारता। उनके बड़े स्तनों और गोल गांड की कल्पना करता।

एक दिन मैं उनके घर गया। मां ने कुछ सामान देने को कहा था। घर पर कोई नहीं था। सविता भाभी नहाकर निकली थीं। वो सिर्फ ब्रा और पैंटी में थीं। गीले बाल। शरीर चमक रहा था। मैंने देखा तो मेरी आंखें फटी की फटी रह गईं।

उनके स्तन ब्रा में उभरे हुए। निप्पल्स साफ दिख रहे। पैंटी में उनकी चूत की शक्ल तक। मैं घूरता रहा। वो नोटिस कर रही थीं लेकिन कुछ बोलीं नहीं। मैं जल्दी से सामान देकर भाग आया। उसके बाद कुछ दिनों तक उनके घर जाने से कतराने लगा। डर लगता था।

फिर एक दिन सविता भाभी ने मुझे फोन किया। ‘मोहन, तुम्हारा घर क्यों नहीं आते ये दिनों?’ उन्होंने पूछा। मैंने हिचकिचाते हुए कहा, ‘भाभी, वो दिन जब मैं आया था… आप ब्रा पैंटी में… मैं डर गया।’ वो हंस पड़ीं।

अरे बाबा, किसी को मत बताना बस। आ जाओ ना।’ मैं फिर से जाना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे हमारी नजदीकी बढ़ी। वो सेक्सी मुस्कान देतीं। कभी जानबूझकर स्तन दिखातीं। एक दिन तो उन्होंने ब्लाउज का हुक खोल दिया।

उनके स्तन आधे बाहर। ‘कैसा लगता है मोहन?’ उन्होंने पूछा। मैं लजा गया लेकिन अंदर से खुश। समझ गया कि वो भी मुझसे चुदना चाहती हैं।

एक और दिन मां ने मुझे उनके घर कुछ सामान देने भेजा। दरवाजा खुला था। अंदर कोई नहीं। सविता भाभी बाथरूम में थीं। मैं सोफे पर बैठ गया। टेबल के नीचे एक किताब पड़ी मिली। उठाकर देखा तो हैरान।

किताब में नंगी मर्दों की फोटो। बड़े-बड़े लंडों वाली। समझ गया कि सविता भाभी को बड़े लंड पसंद हैं। सोचा मेरा 8 इंच का तो फिट बैठेगा। उत्साहित हो गया।

फिर चुपके से बाथरूम की तरफ गया। दरवाजा थोड़ा खुला था। झांका तो सविता भाभी पूरी नंगी। साबुन लगाए शरीर रगड़ रही थीं। अपने स्तनों को जोर-जोर से मला रही। फिर हाथ नीचे। चूत पर। उंगली डालकर रगड़ने लगीं।

हल्के-हल्के सिसकारियां ले रही थीं। ‘आह… उफ्फ…’ फिर तेज। उंगली अंदर-बाहर। चूत से पानी निकल रहा। वो चरम पर पहुंची। ‘ओह्ह… आ गया…’ चिल्लाईं और शरीर कांप गया। मैंने सब देख लिया। घर आकर मुठ मारा। सोचा अब मौका है। उसे चोदना है।

कुछ दिनों बाद फिर मौका मिला। मैं उनके घर गया। दरवाजा बंद था लेकिन आवाज आ रही थी। बाथरूम से। फिर से झांका। सविता भाभी उंगली कर रही थीं। तेज। मैं सहन न कर सका। अंदर घुस गया।

वो चौंकीं लेकिन मुझे खींचकर अंदर ले आईं। दरवाजा बंद किया। ‘मोहन, क्या कर रहे हो?’ लेकिन उनकी आंखों में वासना। मैंने कहा, ‘भाभी, मैं सब देख रहा हूं। आपकी ये हालत।’ वो पास आईं।

होंठ मेरे होंठों पर रख दिए। जोरदार किस। जीभ अंदर। ‘मोहन, मुझे तुम्हारी जरूरत है। मुझे चोदो।’ उन्होंने कहा।

मैंने भी किस किया। जोर से। हाथ उनकी चूत पर। गीली थी उंगली डाली। ‘आह… हां मोहन…’ वो सिसकी। मैंने उन्हें गोद में उठाया। बेडरूम ले गया। बेड पर लिटाया। कपड़े उतारे नंगा हो गया।

मेरा लंड सीधा खड़ा। 8 इंच का। वो देखकर बोलीं, ‘वाह मोहन। कितना लंबा और मोटा। कोई भी औरत इसे अपनी चूत में लेना चाहेगी।’

मैंने पूछा, ‘भाभी, क्या आप चाहती हैं कि मैं अपना लंड आपकी चूत में डालूं?’ वो मुस्कुराईं, ‘हां मोहन। जब से तुमने मुझे ब्रा पैंटी में देखा, तब से चाहती हूं। मेरी चूत में आग लगी हुई है। चोदो मुझे।

उन्होंने मेरा लंड पकड़ा। सहलाया। ‘कितना सख्त।’ मैंने एक स्तन मुंह में लिया। जैसे बच्चा दूध पीता है। चूसा। दूसरे को दबाया। वो पूरी गर्म हो गईं। ‘आह… सक्शन करो मोहन।’

फिर वो मुझे बेड पर धकेल दिया। मेरा लंड देखा। ‘सेक्सी लंड है तेरा। मेरी चूत को मजा आएगा। पहले मैं तेरा रस चखूं।’ हम 69 पोजीशन में आ गए। वो मेरे लंड के सिरे पर किस किया। चाटा। जीभ घुमाई।

लॉलीपॉप की तरह चूसा। मैंने उनके बाल पकड़े। मुंह में धक्का दिया। गहरा। ‘हां मोहन, जोर से। बाद में मेरी प्यासी चूत में भी ऐसा ही करना।’

मैंने उनके पैर फैलाए। चूत गुलाबी। बालों वाली खुली हुई। गीली उंगली डाली आसानी से चली। ‘अब मेरा मोटा लंड चाहिए भाभी। उंगली नहीं पहले जीभ से चोदो।’ मैंने कहा। वो बोलीं, ‘चखो मेरी चूत का रस। मीठा है।’ मैंने जीभ डाली।

चूत के होंठ खुल-बंद। रस टपक रहा। जीभ अंदर। वो चिल्लाईं, ‘आह… चूसो जोर से। क्लिट चाटो।’ मैंने क्लिट चाटा। वो झड़ गईं। गर्म रस बाहर। मैंने चाटा। पिया सब।

इधर वो मेरा लंड चूस रही। मैं झड़ गया। मुंह में। सब निगल लिया। उनका चेहरा चमक रहा। ‘अब असली चुदाई। लंड डालो।’ मैंने उन्हें पीठ के बल लिटाया। पैर उठाए घुटनों तक मोड़े। लंड का सिरा चूत पर रगड़ा।

चोदो मोहन फाड़ दो चूत गंदा कर दो।’ वो चिल्लाईं। मैंने पूरा 8 इंच अंदर ठूंस दिया। गीली थी तो आसानी से। मां बनी हुई थीं तो ढीली लेकिन टाइट ग्रिप। ‘आह… कमाल जोर से चोदो चूत निचोड़ लो।’

मैंने तेज धक्के मारे। जोर-जोर से वो ऊपर चढ़ गईं। लंड पर उछलीं। ‘मैं रंडी हूं। तेरे लंड की प्यासी चूत।’ करीब 45 मिनट चुदाई। फिर मैं झड़ा चूत में।

हम गिर पड़े। लंड अंदर ही फिर बाथरूम गया। साफ हुआ वो बेड पर लेटी उंगली कर रही। साफ हुईं उस दिन दो बार और चोदा।

उसके बाद जब मौका मिला तो रोज चुदाई…………………………………………..