शादी का मौसम चल रहा था। मेरे दोस्त की शादी थी बरेली में। मैं वहाँ पहुँचा तो देखा कि सब कुछ धूमधाम से हो रहा है। मेरे दोस्त का नाम राज था और उसकी साली माया थी।
माया को देखते ही मेरी नजरें उसकी बड़ी-बड़ी चूचियों पर टिक गईं। वो साड़ी पहने हुए थी जो उसके कर्व्स को और भी हाइलाइट कर रही थी। माया की उम्र करीब २५ साल की होगी, शादीशुदा थी लेकिन उसके चेहरे पर एक अजीब सी उदासी झलक रही थी। मैंने सोचा कि शायद उसका वैवाहिक जीवन ज्यादा रोमांचक नहीं है।
शादी की रस्में चल रही थीं। मैं राज के साथ खड़ा था और माया बार-बार मेरी तरफ देख रही थी। एक बार तो वो मेरे पास आई और बोली, ‘भैया, आप राज के दोस्त हो ना? मैं माया हूँ।’
मैंने मुस्कुराते हुए कहा, ‘हाँ माया, मैं आकाश हूँ। तुम्हें देखकर लग रहा है जैसे कोई फिल्म स्टार हो।’ वो शरमाई और बोली, ‘अरे भैया, आप मजाक मत करो।’ लेकिन उसकी आँखों में एक चमक थी।
रस्में खत्म होने के बाद सब लोग खाने लगे। मैंने माया को एक तरफ बुलाया और कहा, ‘माया, तुम्हारा पति कहाँ है? वो तो आया ही नहीं।’ माया ने उदास होकर कहा, ‘भैया, वो बाहर नौकरी करता है, आ नहीं पाया।
लेकिन आप बताओ, शादी का मजा कैसा लग रहा है?’ मैंने हँसते हुए कहा, ‘मजा तो तभी आएगा जब कोई खास मिले। जैसे तुम।’ वो हँसी और बोली, ‘भैया, आप तो फ्लर्ट करने वाले लगते हो।’
धीरे-धीरे हमारी बातें बढ़ीं। मैंने महसूस किया कि माया भी इंटरेस्टेड है। शादी की रस्में पूरी हो गईं तो मैंने सोचा कि मौका है। मैंने माया से कहा, ‘चलो जानेमन, आज की रात हमारे लंड का भी मजा ले लो।
अभी तक तो तुमने अपने पति के लंड का ही मजा लिया होगा।’ माया थोड़ा चौंकी लेकिन फिर मुस्कुराई और बोली, ‘भैया, आप क्या कह रहे हो? लेकिन हाँ, बाहर चलो, हम आते हैं।’
पाँच मिनट में ही माया बाहर आ गई। हम दोनों एक ऑटो में बैठकर पास के होटल पहुँच गए। रास्ते में मैंने उसके हाथ को पकड़ा और कहा, ‘माया, तुम्हारी चूचियाँ कितनी सॉफ्ट लग रही हैं। इन्हें छूना चाहता हूँ।’ वो शरमाई लेकिन बोली, ‘आकाश, होटल पहुँचकर देखना।’
होटल के कमरे में आते ही मैंने टीवी चालू कर दिया। रात के करीब १ बज रहे थे। चैनल बदलते हुए एक चैनल पर ब्लू फिल्म चल रही थी। माया ने पूछा, ‘ये क्या है आकाश?’ मैंने कहा, ‘ब्लू फिल्म माया।
रात में डिश वाले अक्सर लगा देते हैं। तुमने कभी देखी नहीं?’ माया ने ना में सिर हिलाया और बोली, ‘नहीं आकाश, हमने तो कभी देखी ही नहीं। लेकिन देखते हैं।’
मैंने कहा, ‘बड़े मौके से आ रही है, देख लो!’ और टीवी पर फिल्म चलने दी। फिर मैं बाथरूम में चला गया। दरवाजा अंदर से बंद नहीं किया और नंगा होकर नहाने लगा। उधर माया ब्लू फिल्म देख रही थी।
फिल्म में एक लड़की को पाँच आदमी चोद रहे थे। एक आदमी उसकी चूत में लंड डाले हुए था, दूसरा गांड में लंड डाल रहा था। तीसरा उसके मुँह में लंड ठूंस रहा था और दो आदमी उसकी चूचियों को दबा रहे थे। वो लड़की उन दोनों आदमियों का लंड अपने हाथों में लेकर मुठ मार रही थी।
ये सीन देखकर माया बहुत गरम हो गई। उसने अपनी साड़ी खुद ही उतार दी। अब वो ब्लाउज और पेटीकोट में थी। उसकी बड़ी चूचियाँ ब्लाउज से बाहर आने को बेताब लग रही थीं।
मैंने नहाना खत्म किया और तौलिया लपेटकर बाहर आया। मेरा लंड तौलिये को फाड़कर बाहर आने को तैयार था। माया को देखकर मेरा लंड और भी सख्त हो गया।
मैंने कहा, ‘माया, क्या हो गया? इतनी जल्दी साड़ी उतार दी?’ माया ने शरमाते हुए कहा, ‘आकाश, ये फिल्म देखकर शरीर में आग लग गई। तुम्हारा लंड भी तो तौलिए से बाहर झाँक रहा है।
मैंने तौलिया हटाया और नंगा हो गया। मेरा लंड सीधा खड़ा था। माया की आँखें फैल गईं। वो बोली, ‘वाह आकाश, कितना बड़ा और मोटा लंड है। मेरे पति का तो आधा भी नहीं।’
मैं उसके पास गया और उसके ब्लाउज के हुक खोल दिए। उसकी बड़ी चूचियाँ बाहर आ गईं। काले रंग के ब्रा में बंद थीं लेकिन फिर भी कितनी आकर्षक। मैंने ब्रा खींचकर उतार दी।
अब माया की नंगी चूचियाँ मेरे सामने थीं। गुलाबी निप्पल्स सख्त हो चुके थे। मैंने दोनों चूचियों को हाथों में भरा और दबाने लगा। माया सिसकारी भरने लगी, ‘आह आकाश, कितना अच्छा लग रहा है। दबाओ जोर से।’
मैंने एक चूची मुँह में ली और चूसने लगा। जीभ से निप्पल को चाटा। माया ने मेरे सिर को दबाया और बोली, ‘हाँ आकाश, चूसो मेरी चूचियाँ। कितने दिनों से कोई छुआ तक नहीं।’ मैं दूसरी चूची को भी चूसा।
फिर मैंने माया को बेड पर लिटा दिया। उसके पेटीकोट ऊपर किया और पैंटी उतार दी। माया की चूत साफ-सुथरी थी, गीली हो चुकी थी। मैंने उंगली डाली और बोला, ‘माया, कितनी गीली हो गई हो। ब्लू फिल्म ने असर किया।’
माया बोली, ‘हाँ आकाश, अब अपना लंड डालो मेरी चूत में। चोदो मुझे।’ लेकिन मैंने कहा, ‘पहले मुँह से चूसो मेरा लंड।’ माया उठी और मेरे लंड को हाथ में लिया। वो बोली, ‘कितना गर्म है।
फिर मुँह में लिया और चूसने लगी। उसकी जीभ लंड के सिरे पर घूम रही थी। मैंने उसके बाल पकड़े और लंड को गले तक ठूंस दिया। माया खाँसी लेकिन चूसती रही। ‘हम्म, स्वादिष्ट है आकाश।’
कुछ मिनट बाद मैंने कहा, ‘अब चूत में डालता हूँ।’ माया लेट गई और टाँगें फैला दीं। मैंने लंड को चूत पर रगड़ा। फिर धक्का मारा। पूरा लंड अंदर चला गया। माया चीखी, ‘आह, कितना मोटा है।
फाड़ दिया’ मैंने धीरे-धीरे पेलना शुरू किया। ‘चोदो आकाश, जोर से।’ मैंने स्पीड बढ़ाई। कमरा चुदाई की आवाजों से गूँज रहा था। पच-पच की आवाज। माया की चूचियाँ उछल रही थीं।
मैंने पोजीशन बदली। माया को डॉगी स्टाइल में किया। उसकी गांड ऊपर की। मैंने गांड पर थप्पड़ मारा। ‘माया, गांड भी चोदूँगा।’ माया बोली, ‘हाँ आकाश, सब कुछ करो। आज रात मेरी है।
पहले चूत में और पेला। फिर लंड निकाला और गांड के छेद पर रखा। थोड़ा सलाइवा लगाया और धक्का दिया। माया दर्द से चीखी, ‘आह, धीरे। पहली बार गांड मरवा रही हूँ।’ मैं धीरे-धीरे अंदर किया। फिर पूरी तरह चोदने लगा।
गांड चोदते हुए मैंने चूचियाँ पकड़ लीं। माया चिल्ला रही थी, ‘मजा आ रहा है आकाश। कभी सोचा नहीं था।’ हम दोनों पसीने से तर थे। फिर मैंने लंड निकाला और वापस चूत में डाला। वैकल्पिक रूप से चोदता रहा। माया के orgasms आ रहे थे। वो बोली, ‘आकाश, मैं झड़ रही हूँ। आह!’ उसकी चूत सिकुड़ गई।
अंत में मैंने कहा, ‘माया, मेरा पानी आने वाला है। कहाँ डालूँ?’ माया बोली, ‘मुँह में डालो, पी लूँगी।’ मैंने लंड बाहर निकाला और उसके मुँह के पास रखा। माया ने मुँह खोला। मैंने झड़ दिया। गर्म वीर्य उसके मुँह में गिरा। माया ने सब पी लिया और लंड चाटकर साफ किया। ‘मजा आ गया आकाश।
उस रात हमने चार बार चुदाई की। पहली बार वैसी ही। दूसरी बार माया ऊपर बैठी। वो मेरे लंड पर उछल रही थी। चूचियाँ मेरे चेहरे पर लटक रही थीं। मैं चूसता रहा। तीसरी बार एनल फोकस। मैंने गांड को लंबे समय तक चोदा। माया दर्द और मजा दोनों में थी। चौथी बार ओरल और वैजाइनल मिक्स।
सुबह होते-होते माया बोली, ‘आकाश, जिंदगी में पहली बार ऐसा चुदाई का मजा आया। अब हम बरेली तुमसे मिलने जरूर आएँगे।’ मैंने कहा, ‘कभी भी आना माया। तुम्हारी ये बड़ी चूचियाँ और टाइट चूत भूल नहीं सकता……………….