हेलो दोस्तों मेरा नाम आकाश है। और मैं सविता भाभी का पड़ोसी हूँ। आज मै आपको सविता जी की पहली चुदाई की दास्तां बताने जा रहा हूँ।
सविता एक साधारण सी 18 साल की लड़की थी। गाँव के छोटे से घर में रहने वाली यह किशोरी अभी कॉलेज में दाखिला लेने वाली थी।
उसका शरीर अब जवानी की दहलीज पर था – गोल-गोल स्तन, पतली कमर और नरम-नरम कूल्हे जो हर लड़के की नजरें खींचते थे।
लेकिन सविता अब तक कुंवारी थी। उसके मन में कभी-कभी अजीब सी हलचल होती, पर वह शर्म से कुछ कह नहीं पाती।
माँ-बाप सख्त थे, और गाँव की रूढ़िवादी सोच उसे बाँधे रखती।
एक दिन गर्मियों की छुट्टियों में सविता का चचेरा भाई राजू गाँव आया। राजू शहर से था, 22 साल का जवान लड़का, जिसके पास हमेशा नई-नई कहानियाँ होतीं।
वह सविता को अपना छोटा भाई-बहन मानता था, लेकिन राजू की नजरें सविता के बदलते शरीर पर ठहर जातीं।
सविता को राजू की बातें मजेदार लगतीं – शहर की चकाचौंध, फिल्में, और लड़कियों-लड़कों के बीच होने वाली मस्ती।
एक शाम, जब माँ-बाप खेत पर गए थे, राजू ने सविता को बुलाया। “अरे सविता, आ ना, मैं तुझे कुछ दिखाता हूँ।”
सविता हिचकिचाते हुए उसके कमरे में पहुँची। राजू के पास एक पुराना मोबाइल था, जिसमें कुछ वीडियो थे। “ये देख, शहर में लड़के-लड़कियाँ ऐसे ही मजे करते हैं।
उसने वीडियो चलाया। स्क्रीन पर एक लड़की और लड़के के बीच किसिंग हो रही थी, फिर कपड़े उतरने लगे। सविता की आँखें फैल गईं। वह कभी ऐसी चीजें नहीं देखा था। उसका चेहरा लाल हो गया, लेकिन वह वीडियो से नजरें न हटा पाई।
“कैसा लगा?” राजू ने हँसते हुए पूछा। सविता कुछ न बोल सकी। उसके शरीर में एक अजीब सी गर्मी फैल गई। राजू ने उसका हाथ पकड़ा। ”
डर मत, ये नॉर्मल है। तू भी तो बड़ी हो रही है।” सविता ने हाथ छुड़ाने की कोशिश की, लेकिन राजू ने उसे अपनी ओर खींच लिया। “भैया, ये क्या कर रहे हो?” सविता ने धीमी आवाज में कहा।
राजू ने उसके गाल पर हाथ फेरा। “सिर्फ मजा ले रहे हैं, जैसे वीडियो में।” फिर उसने सविता के होंठों पर अपने होंठ रख दिए।
सविता चौंक गई। राजू का चुंबन गर्म और नरम था। पहले तो वह विरोध करने लगी, लेकिन राजू के हाथ उसके कंधों पर दबाव डाल रहे थे।
धीरे-धीरे सविता का शरीर ढीला पड़ गया। राजू की जीभ उसके मुँह में घुस गई, और वह चूसने लगा। सविता को अजीब सा मजा आने लगा।
उसके स्तन सख्त हो गए, और नीचे गीला महसूस हो रहा था। राजू ने सविता की साड़ी का आँचल सरका दिया। उसके ब्लाउज के अंदर सफेद ब्रा दिख रही थी।
“वाह, कितने सुंदर हैं तेरे बूब्स।” राजू ने कहा और ब्रा के ऊपर से दबा दिया।
सविता सिहर उठी। “भैया, मत करो…” लेकिन उसकी आवाज कमजोर थी। राजू ने ब्लाउज के हुक खोल दिए और ब्रा ऊपर सरका दी। सविता के गुलाबी निप्पल बाहर आ गए। राजू ने एक को मुँह में भर लिया और चूसने लगा।
सविता की साँसें तेज हो गईं। वह कभी महसूस नहीं किया था ऐसा।
राजू का दूसरा हाथ सविता की साड़ी के अंदर घुस गया, पेट पर सहला रहा था। फिर नीचे की ओर। सविता ने पैर सिकोड़ लिए, लेकिन राजू ने जबरदस्ती हाथ पहुँचा दिया।
उसकी पैंटी गीली थी। राजू ने उंगली से छुआ तो सविता चीख पड़ी। “आह… भैया…” राजू ने पैंटी के किनारे से अंदर उंगली डाल दी। सविता की चूत तंग थी, कुंवारी सील अभी बरकरार।
“तू तो पूरी तरह तैयार है,” राजू ने फुसफुसाया। वह उंगली अंदर-बाहर करने लगा। सविता का शरीर काँप रहा था। दर्द और मजा दोनों हो रहे थे।
राजू ने अपनी शर्ट उतार दी। उसकी छाती मजबूत थी। फिर पैंट खोली। उसका लंड बाहर आ गया – मोटा, लंबा, सीधा खड़ा। सविता ने पहली बार ऐसा देखा। वह डर गई। “ये… ये क्या है?”
“ये मेरा लंड है, जो तेरी चूत में जाएगा,” राजू ने कहा। सविता ने पीछे हटने की कोशिश की, लेकिन राजू ने उसे बिस्तर पर लिटा दिया। साड़ी पूरी खोल दी। सविता नंगी लेटी थी, उसके शरीर पर पसीना चमक रहा था।
राजू ने अपनी उंगली फिर से चूत में डाली, लेकिन अब दो उंगलियाँ। सविता दर्द से कराह उठी। “नहीं भैया, दर्द हो रहा है।
थोड़ा सह, फिर मजा आएगा,” राजू ने कहा और चूसना जारी रखा। सविता की चूत से रस बहने लगा। वह खुद को रोक नहीं पा रही थी।
राजू ने कंडोम पहना – शहर से लाया था। फिर सविता के ऊपर चढ़ गया। उसका लंड चूत के द्वार पर रगड़ रहा था। सविता ने आँखें बंद कर लीं। राजू ने धक्का दिया। लंड का सिरा अंदर घुस गया।
सविता चिल्लाई, “आह! दर्द!” लेकिन राजू रुका नहीं। धीरे-धीरे और अंदर। सील टूट गई। खून निकल आया। सविता रोने लगी। राजू ने उसे चूमा, “शश… अब ठीक हो जाएगा।” फिर चुदाई शुरू हो गई। लंड अंदर-बाहर।
सविता का दर्द धीरे-धीरे कम हुआ, जगह मजा लेने लगा। वह खुद कमर हिला रही थी।
राजू तेजी से पेल रहा था। सविता की चीखें अब आहों में बदल गईं। “हाँ भैया… और जोर से…” कमरे में सिर्फ चुदाई की आवाजें गूँज रही थीं – प्लक प्लक।
राजू ने उसके स्तनों को मसलते हुए चोदा। आखिरकार राजू झड़ गया, कंडोम में। सविता भी ऑर्गेज्म के करीब पहुँच गई, लेकिन पहली बार था, तो अधूरा रह गया। राजू ने उसे गले लगाया। “अब तू औरत हो गई।”
लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। अगले दिन राजू ने फिर मौका ढूँढा। इस बार सविता कम हिचकिचाई। वह खुद राजू के लंड को छूने लगी। “ये कितना गर्म है,” उसने कहा। राजू ने उसे सिखाया – मुंह में लेना।
सविता ने बेलो जॉब दिया, कच्चा लेकिन उत्साही। लंड चूसते हुए उसकी चूत फिर गीली हो गई। राजू ने उसे डॉगी स्टाइल में चोदा। सविता के कूल्हे हिल रहे थे। “हाँ… गहरा…” दर्द अब बिल्कुल नहीं था, सिर्फ सुख।
धीरे-धीरे सविता की जिंदगी बदल गई। राजू के आने से पहले वह शर्मीली थी, अब वह अपनी कामुकता को जानने लगी। एक रात, जब राजू सो रहा था, सविता ने खुद उसके लंड पर सवार हो गई। ऊपर-नीचे उछल रही थी।
उसके स्तन लॉबी हो रहे थे। राजू जाग गया और नीचे से धक्के मारने लगा। चुदाई की रफ्तार तेज। सविता चिल्लाई और पहली बार पूरी तरह झड़ी। गर्म रस बाहर बहा।
गर्मियाँ खत्म होने लगीं। राजू शहर लौटने वाला था। आखिरी रात उन्होंने पूरी ताकत से चुदाई की। राजू ने सविता की गांड भी मारी – पहले उंगली से खोली, फिर लंड डाला।
सविता को नया दर्द, नया मजा। “आह… गांड फाड़ दी!” लेकिन वह रुकी नहीं। तीनों छेदों में राजू ने अपना माल भर दिया।
राजू चला गया, लेकिन सविता के मन में यादें रह गईं। वह अब कॉलेज जाती, लेकिन रातें अपने हाथ से चूत सहलाती।
कभी-कभी फोन पर राजू से बातें – “कब आएगा फिर चोदने?” सविता की सील टूट चुकी थी, और अब वह अपनी इच्छाओं की गुलाम थी।
दोस्तों इसके आगे की कहानी में जल्दी ही लाऊंगा और आगे की कहानियों में आपको पता चलेगा सविता भाभी की जवानी के नए नए कारनामे और चुदाई के किस्से।
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धन्यबाद!!