सेक्सी कुंवारी लौंडिया की चुदाई

(Sexy Virgin Londiya Ki Chudai)

मेरा नाम आकाश है और मैं दिल्ली के एक इलाके में रहता हूँ। मैं 28 साल का हूँ और एक प्राइवेट कंपनी में काम करता हूँ। पिछले दो सालों से मैं एक फ्लैट में अकेला रह रहा हूँ और मेरे सामने वाले फ्लैट में एक मामूली सी परिवार रहता है – एक बुजुर्ग माँ, उनका बेटा जो कहीं बाहर काम करता है, और उसकी बेटी अंजलि।

अंजलि 19 साल की है, पढ़ाई कर रही है, और इतनी सेक्सी कि देखते ही बनती है। उसका गोरा रंग, लंबे काले बाल जो कमर तक लटकते हैं, बड़ी-बड़ी काली आँखें, एक पतली कमर और एक ऐसा चेहरा जो मासूमियत और गर्माहट दोनों बिखेरता है।

वह अक्सर घर में छोटी स्कर्ट और टाइट टॉप पहनकर घूमती रहती है और मेरी नज़रें उसके शरीर पर केंद्रित हो जाती हैं। मैं रोज़ उसे देखता, उसके स्तनों के उभार, उसकी मोटी जाँघों की चिकनाहट, और उसके लंबे बालों को हवा में लहराते देखता और मेरा लंड हर बार खड़ा हो जाता।

लेकिन मैं कभी उसके पास जाने की हिम्मत नहीं कर पाया। मुझे लगता था कि वह एक मासूम कुंवारी लौंडिया है और शायद मेरे बारे में कुछ नहीं जानती।

लेकिन तीन दिन पहले कुछ ऐसा हुआ जिसने मेरी जिंदगी बदल दी।

यह एक शाम थी। मैं अपने घर पर बैठा टीवी देख रहा था तभी दरवाजे पर हल्की सी खटखट हुई। मैंने सोचा कोई डिलीवरी बॉय होगा, लेकिन जब दरवाजा खोला तो सामने मैंने अंजलि को खड़ा पाया। वह घबराई हुई लग रही थी और उसकी बड़ी-बड़ी आँखों में कुछ डर और उत्तेजना का मिश्रण था।

उसने एक बहुत ही पतला कुर्ता पहना हुआ था जिसके नीचे उसकी ब्रा की पट्टियाँ साफ दिख रही थीं और नीचे एक छोटी सी स्कर्ट जो उसकी मोटी गोल जाँघों को खुला छोड़ रही थी। मैंने एक बार उसके शरीर पर नज़र डाली और मेरा दिल जोरों से धड़कने लगा।

“आकाश भैया… क्या आप अकेले हैं?” उसने आवाज़ दी, थोड़ी काँपती हुई।

“हाँ अंजलि बेबी, मैं तो हमेशा अकेला ही रहता हूँ। आओ अंदर, क्या बात है?” मैंने उसे अंदर बुलाया। उसने झिझकते हुए कदम रखा और मैंने दरवाजा बंद कर दिया। अब कमरे में मैं और वह अकेले थे।

उसने थोड़ा इधर-उधर देखा, मेरा सोफा देखा, मेरा बेडरूम का दरवाजा देखा और फिर मुझसे बोली, “भैया… आपको पता है, आज मेरी माँ और मेरा भाई शादी में गए हैं। वे तीन दिन बाद वापस आएंगे। कल से मेरा एग्जाम भी खत्म हो गया है और मुझे घर पर बिल्कुल अकेली रहना है। और मुझे… मुझे बहुत डर लग रहा है।”

“डर? तुम इतनी बड़ी हो गई हो और डर लगता है?” मैंने हँसते हुए कहा। लेकिन मेरा मन तो चाह रहा था कि मैं उसे फौरन पकड़ लूँ और अपने बिस्तर पर फेंक दूँ।

“हाँ भैया, मुझे रात को अकेले सोने में डर लगता है। क्या मैं आपके घर पर आ सकती हूँ रात को? या आप मेरे घर आ सकते हैं? मैं आपके साथ समय बिताना चाहती हूँ। पिछले कुछ दिनों से मैं आपको देख रही हूँ और मुझे लगता है कि आप बहुत अच्छे इंसान हैं।

उसने कहा और उसकी आँखों में एक चमक आ गई। उसके होंठ चमक रहे थे और लग रहा था कि वह शराब या किसी नशे में नहीं थी बल्कि पूरी तरह से होश में थी।

मैंने उसे सोफे पर बैठाया और मैं भी उसके बगल में बैठ गया। तभी मेरा हाथ गलती से उसकी जाँघ से छू गया और उसने झटका सा खाया लेकिन फिर उसने मेरी तरफ देखा और मुस्कुराई।

उसकी मुस्कुराहट ने मुझे और बेचैन कर दिया। मैंने सीधा सवाल पूछा, “अंजलि, क्या तुम कभी किसी लड़के के साथ रही हो? मैं मतलब… सेक्स के बारे में पूछ रहा हूँ।”

उसने शरमाते हुए अपनी आँखें नीचे कर लीं और फिर धीरे से बोली, “नहीं भैया… मैं तो… अभी तक कुंवारी हूँ। किसी ने मुझे छुआ तक नहीं है। मुझे डर लगता है। लेकिन मैं चाहती हूँ… आपके साथ रहना चाहती हूँ।

मैंने आपको रोज़ देखा है। आपका शरीर, आपकी मांसपेशियाँ जब आप शर्ट उतारते हैं तो दिखती हैं, और मेरा मन करता है कि मैं आपको छूँ। मैंने कभी किसी लड़के का लंड भी नहीं देखा… लेकिन मैं देखना चाहती हूँ।”

उसकी इस बात ने मेरी कामुकता को चरम पर पहुँचा दिया। मैंने उसके चेहरे के पास जाकर पूछा, “तो तुम मेरे साथ सेक्स करना चाहती हो?”

“हाँ भैया… मैं चाहती हूँ कि आप मेरा पहला आदमी बने। मुझे डर है लेकिन मैं तैयार हूँ। बस धीरे-धीरे करना… मुझे बहुत दर्द होने का डर है।” वह फुसफुसाई और मेरे कंधे पर सिर टिका दिया।

मैं जल्दी से उठा और अपने बेडरूम में गया। वह भी मेरे पीछे-पीछे आई। बेडरूम में मैंने लाइट मंद की और हल्की सुगंध वाली एक मोमबत्ती जलाई। बिस्तर पर एक मखमली चादर बिछी हुई थी।

मैंने अंजलि को बिस्तर पर बैठाया और उसके सामने घुटनों के बल बैठ गया। उसकी बड़ी-बड़ी आँखें मुझे देख रही थीं और उसके होंठ काँप रहे थे। मैंने धीरे-धीरे उसका कुर्ता ऊपर उठाना शुरू किया।

उसने मेरी मदद की और अपने हाथ ऊपर कर लिए। कुर्ता उतरते ही उसका सफेद ब्रा दिखाई दिया जो उसके मध्यम आकार के स्तनों को उभार रहा था। मैंने ब्रा का हुक खोला और वह फर्श पर गिर गई।

अब उसके स्तन मेरे सामने नग्न थे – गोल, सख्त, हल्के गुलाबी निप्पल के साथ। मैंने उसके स्तनों को धीरे-धीरे सहलाना शुरू किया और वह काँपने लगी। उसके निप्पल मेरे स्पर्श से सख्त हो गए और उसने आँखें बंद कर लीं।

“भैया… यह बहुत अच्छा लग रहा है… पहले कभी किसी ने मेरे यहाँ हाथ नहीं लगाया…” वह फुसफुसाई।

मैंने उसके दोनों स्तनों को अपने हाथों में लिया और धीरे-धीरे निप्पल को घुमाने लगा। फिर मैंने अपना सिर झुकाया और एक निप्पल को अपने मुँह में ले लिया। मैंने चूसना शुरू किया और मेरी जीभ उसके निप्पल पर घूमने लगी।

वह पीड़ा और आनंद के मिले-जुले अहसास से कराह उठी। “आह… भैया… यह क्या कर रहे हैं… बहुत अच्छा लग रहा है लेकिन डर भी लग रहा है…”

“डरो मत अंजलि, मैं तुम्हें बहुत अच्छा महसूस कराऊँगा। बस अपनी आँखें बंद करो और महसूस करो।” मैंने एक स्तन चूसा, फिर दूसरा, फिर उसकी गर्दन पर अपने होंठ रखे और वहाँ भी चूमा। उसकी गर्दन बहुत ही संवेदनशील थी – जहाँ भी मैंने छुआ, वह सिकुड़ने लगती थी।

फिर मैं नीचे की ओर बढ़ा। उसकी स्कर्ट मैंने धीरे-धीरे उतारी और उसके पैरों के बीच एक छोटी सी सफेद पैंटी दिखी जिसमें पहले से ही गीलापन दिख रहा था। उसकी चूत गीली हो चुकी थी, मुझे वहाँ से एक मीठी सी गंध आ रही थी।

मैंने पैंटी के ऊपर से ही उसकी चूत को सहलाना शुरू किया तो वह पैर फैलाकर बिस्तर पर लेट गई और उसके मुँह से हल्की कराह निकली।

“भैया… मेरी जान… अब और मत तड़पाओ… मैं आपको अपनी पूरी चूत दिखाना चाहती हूँ।” उसने खुद ही अपनी पैंटी उतारी और अपने पाँव फैला दिए। मेरे सामने उसकी कुंवारी चूत पूरी तरह नग्न पड़ी थी – दो मोटे-मोटे बाहरी होंठ, अंदर से गुलाबी नर्म त्वचा और ऊपर एक छोटी सी भींगी हुई चूची।

उसकी चूत इतनी भीगी हुई थी कि उसके रस की बूंदें बिस्तर पर टपक रही थीं।

मैंने उसकी चूत को सहलाया और फिर धीरे-धीरे अपनी जीभ उसकी चूची पर रखी। उसने जोर से कराह मारी, “आह! हे भगवान… आप मेरी चूत चाट रहे हैं… यह क्या कर रहे हैं… मैं पागल हो रही हूँ…”

मैंने अपनी जीभ से उसकी चूची को गोल-गोल घुमाया और फिर उसके बाहरी होंठों को चाटने लगा। उसकी चूत का स्वाद बहुत मीठा था, उसमें कहीं कोई बदबू नहीं थी बल्कि एक अजीब सी मिठास थी जो मुझे और उत्तेजित कर रही थी।

मैंने उसकी चूत में दो उंगलियाँ डालीं – वह अभी भी बहुत टाइट थी, कुंवारी होने के कारण अंदर की नली संकरी थी। उसने दर्द से कराहा लेकिन मैंने उसे धीरे-धीरे खोलना शुरू किया। उसकी चूत बहुत गर्म थी और मेरी उंगलियाँ आसानी से अंदर चली गईं।

“भैया… आपकी उंगलियाँ… अंदर… बहुत अजीब लग रहा है… लेकिन अच्छा… मैं और चाहती हूँ…” वह बड़बड़ाने लगी और मैंने उसके साथ फोरप्ले किया – उसकी चूत चाटी, उंगलियाँ डाली, उसके स्तन चूसे और उसकी गर्दन पर किस किया।

लगभग पंद्रह मिनट तक मैंने उसे तैयार किया और अब वह मेरे अंदर आने के लिए तैयार थी।

“अब मैं तुम्हारे अंदर अपना लंड डालूँगा अंजलि। डर लग रहा है?” मैंने पूछा।

“थोड़ा डर है और बहुत उत्सुकता भी है। बस आप ध्यान से रखना… मेरी चूत छोटी है… और आपका लंड मैंने देखा है… बहुत बड़ा है भैया… मैंने कभी इतना बड़ा नहीं देखा था।” उसने मेरे लंड की तरफ इशारा किया।

सच कहूँ तो मेरा लंड रोज़ाना व्यायाम और हस्तमैथुन से काफी बड़ा हो गया था – 8 इंच लंबा, लगभग 6 इंच मोटा और एकदम सीधा। उसे देखकर अंजलि की आँखें चमक उठीं और वह उसे छूना चाहती थी।

मैंने उसे पीठ के बल लिटाया और उसकी टाँगें मेरे कंधों पर रख दीं। मैंने अपने लंड की नोक उसकी चूत के छेद पर रखी और धीरे-धीरे अंदर घुसाने लगा। पहला इंच अंदर जाते ही वह चीख पड़ी – “आह! रुको… बहुत दर्द हो रहा है!

मैंने उसे चूमा और धीरे-धीरे आगे बढ़ता रहा। दूसरा इंच जाते ही मुझे एक रुकावट महसूस हुई – उसकी कुंवारी झिल्ली।

“अंजलि, अब तुम सिर्फ एक बार तकलीफ सह लो। मैं तुम्हारी कुंवारी झिल्ली फाड़ने वाला हूँ। यह एक पल का दर्द है।” मैंने उसकी आँखों में देखा और धीरे से अपने कूल्हों को आगे बढ़ाया।

उसने अपने नाखून मेरी पीठ में गड़ा दिए और जोर से चीखी – “आह! भगवान… कट गया… दर्द…” लेकिन उसी पल मेरा लंड पूरी तरह उसकी कोख में समा गया। उसकी चूत मेरे लंड को ऐसे निचोड़ रही थी जैसे उसने जीवन भर इसी पल का इंतजार किया हो। खून की छोटी सी लकीर मेरे लंड पर लगी थी और उसके पाँव काँप रहे थे।

“दर्द हो रहा है… लेकिन मैं सह सकती हूँ… आप हिलिए मत… मुझे आदत डालने दो…” वह धीरे-धीरे साँस ले रही थी और मैंने पूरी तरह रुककर उसका माथा चूमा। करीब एक मिनट बाद उसने कहा, “अब आप हिल सकते हैं… लेकिन धीरे-धीरे…”

मैंने धीमी गति से उसे चोदना शुरू किया – पहले धीमा फिर थोड़ा तेज। हर बार जब मैं बाहर निकलता तो उसकी चूत से हवा बाहर आने की आवाज आती और मैं फिर अंदर घुसता।

उसके निप्पल सख्त हो चुके थे और मैं उन्हें दबाता जा रहा था। वह चिल्लाने लगी – “भैया… आपकी चोद… बहुत अच्छी लग रही है… मैं तो पागल हो गई… यह स्वर्ग से भी बढ़कर है…”

मैंने उसे मिशनरी पोजीशन में चोदा, फिर उसे उलटकर डॉगी स्टाइल में ले लिया। उसकी गांड बहुत गोल थी और मैंने उसके गालों पर तेल मलते हुए उसे पीछे से चोदा। उसने अपने बाल हवा में फैलाए और चीखने लगी – “भैया… बहुत गहराई तक जा रहा है… मैं मर जाऊँगी… आह… आह…”

उसकी चूत से पानी बह रहा था और मैंने देखा कि वह पहली बार चरम सीमा पर पहुँच रही है – उसके पैर काँप गए, उसकी चूत ने मेरे लंड को जोर से दबाया और वह जोर-जोर से चिल्लाने लगी, “आह! मैं… मैं… मुझे कुछ हो रहा है… यह बहुत अच्छा है… मैं फट जाऊँगी… ओह… ओह… आह…”

उसने अपनी पहली कामोन्माद का अनुभव किया और उसकी चूत का रस मेरे लंड पर बहने लगा। लेकिन मैं रुका नहीं। मैंने उसके ऊपर चढ़ाई की और उसे उलटा करके पश्चिमी पोजीशन में ले लिया। उसकी टाँगें मेरे गले पर और मैं उसकी चूत पर झुककर उसे चोदता रहा।

रात की चुप्पी में सिर्फ हमारी हाँफने की आवाज, चूत पर लंड के घर्षण की आवाज और उसकी चीखें गूँज रही थीं। उसने मुझसे तीन बार और पूछा – “भैया… मैं फिर से आने वाली हूँ… और तेज चोदो… मुझे पागल कर दो…”

मैंने उसे चार बार चरम सीमा पर पहुँचा दिया। हर बार उसके शरीर में एक अलग सा स्पंदन उठता, हर बार वह एक नई पोजीशन में और अधिक गर्म हो जाती। फिर मैंने देखा कि मेरा लंड अब उसकी चूत में पूरी तरह गर्म है और मैं भी निकलने के लिए तैयार हूँ।

“अंजलि, मैं तुम्हारे अंदर ही अपना वीर्य डालूँगा, ठीक है?” मैंने उससे पूछा।

उसने मेरी तरफ देखा और मुस्कुराते हुए कहा, “हाँ भैया… मेरी चूत में ही डालो… मैं चाहती हूँ कि आपका पानी मेरे अंदर जाए… मैं आपकी हो गई हूँ…”

मैंने जोर-जोर से उसे चोदा और कुछ ही पलों में मेरा वीर्य उसकी कोख में फूट पड़ा – गरम गरम मेरा पानी उसके अंदर भर गया। मैंने अपना सिर उसकी गर्दन पर रखा और दोनों ने गहरी साँस ली।

लेकिन कहानी यहाँ खत्म नहीं हुई। मैंने उसे आराम दिया, पानी पिलाया, और फिर पंद्रह मिनट बाद जब वह थोड़ी ठीक हुई, तो मैंने उसे फिर से अपने ऊपर बैठा लिया। अब वह सवारी करने लगी

उसने मेरे लंड को अपनी चूत में डाला और ऊपर-नीचे होने लगी। उसके स्तन मेरे मुँह के पास झूल रहे थे और मैंने उन्हें चूस लिया। दूसरी बार, तीसरी बार मैंने उसकी चूत में लंड डाला और उसे कई पोजीशन में चोदा।

पूरी रात चलता रहा यह सिलसिला। लगभग चार घंटे लगातार चोदाई चली। हमने बिस्तर का हर कोना इस्तेमाल किया, फर्श पर भी, शॉवर में भी। सुबह तक उसकी चूत लाल हो गई थी, सूजी हुई थी, लेकिन वह और चाहती थी। मैंने फिर से उसमें लंड डाला और उसे एक बार और चरम सीमा पर पहुँचाया।

जब सुबह हुई, हम दोनों नग्न बिस्तर पर एक-दूसरे से लिपटे पड़े थे। उसने मेरे सिर को सहलाया और कहा, “भैया… मैंने तो जीवन में कभी सोचा भी नहीं था कि इस तरह आप मेरी चूत को अपना लेंगे। लेकिन मुझे बहुत खुशी है। आपने मुझे सिखाया कि असली मजा क्या होता है।”

लेकिन अगले तीन दिनों में वह और कुछ किया नहीं। तीसरे दिन वह मेरे पास आई, बिना कुछ बोले, और फिर से बिस्तर पर लेट गई। मैंने उससे पूछा, “क्या हुआ? क्यों चुप हो?” उसने मेरी तरफ देखा और आँखों में आँसू लिए बोली,

भैया… हम यह सब गलत कर रहे हैं। मैं तो शादी से पहले कुंवारी रहना चाहती थी लेकिन आपने मेरा सब बर्बाद कर दिया।” मैंने उसे समझाने की कोशिश की कि मैं ऐसा थोड़ी चाहता था, यह तो दोनों की मर्जी से हुआ, लेकिन वह अपनी बात पर अड़ी रही।

फिर वह चली गई और अब एक सप्ताह से मैंने उसे नहीं देखा। कल उसकी माँ और भाई वापस आ गए, लेकिन वह मेरी तरफ आँख उठाकर भी नहीं देखती। उसके चेहरे पर एक उदासी और शर्मिंदगी छाई रहती है। मुझे लगता है कि वह मुझसे नाराज है या शायद शर्मिंदा।

लेकिन मैं नहीं मानने वाला। उसकी चूत का स्वाद अब मैं भूल नहीं सकता। वह अब भी कुंवारी नहीं रही, लेकिन उसकी गर्म चूत मेरी सबसे अच्छी याद बनकर रह गई है। मैं उस रात को कभी नहीं भूलूँगा जब एक मासूम कुंवारी लौंडिया मेरे लंड की कठोरता से परिचित हुई और मैंने उसकी कोख में अपना बीज बोया।

अब हर रात मैं उसे अपने पास बुलाने की कोशिश करता हूँ। लेकिन वह आती नहीं। फिर भी मैं इंतजार करूँगा। क्योंकि यह चुदाई अधूरी है और मैं उसे फिर से चोदूँगा – कभी भी और कहीं भी।