रज्जू एक 28 साल का युवक था जो हाल ही में एक हादसे में घायल हो गया था। उसे अस्पताल में भर्ती किया गया था और डॉक्टरों ने कहा था कि उसे कम से कम दस दिनों तक यहाँ रहना पड़ेगा।
रज्जू का शरीर मजबूत था लेकिन चोट के कारण वह बिस्तर पर लेटा रहता। अस्पताल का वातावरण शांत था लेकिन रज्जू की नजरें हमेशा नर्सों पर टिकी रहतीं।
एक शाम जब नर्स कुशुम ड्यूटी पर आई तो रज्जू की आँखें चमक उठीं। कुशुम 22 साल की कुंवारी लड़की थी जो नर्सिंग कॉलेज से अभी पास हुई थी।
उसकी त्वचा गोरी थी लंबे काले बाल और आकर्षक फिगर जो सफेद यूनिफॉर्म में और भी उभरकर आता। वह शर्मीली थी और मरीजों से ज्यादा बात नहीं करती।
कुशुम रज्जू के बेड पर आई और उसका तापमान चेक करने लगी। रज्जू ने मुस्कुराते हुए कहा, “नर्स जी आपका नाम क्या है? आप तो बहुत सुंदर लग रही हैं।”
कुशुम शरमा गई और बोली, “सर मेरा नाम कुशुम है। आप आराम करें। तापमान चेक कर रही हूँ।”
रज्जू ने उसके हाथ को हल्के से छुआ और कहा, “कुशुम जी आपकी आँखें बहुत खूबसूरत हैं। क्या आप सिंगल हैं?”
कुशुम ने जल्दी से हाथ हटाया और बोली, “सर प्लीज ऐसे सवाल न पूछें। मैं सिर्फ अपना काम कर रही हूँ।”
रज्जू हँसा और बोला, “ठीक है लेकिन आप रोज आया करना। आपकी मुस्कान से मेरा दर्द कम हो जाता है।”
कुशुम चली गई लेकिन रज्जू के मन में उसके लिए एक योजना बनने लगी। वह जानता था कि कुशुम कुंवारी है क्योंकि उसकी सहेलियाँ बातें करतीं। रज्जू ने सोचा कि उसे धीरे धीरे अपने जाल में फँसाना है।
रात को जब कुशुम फिर आई तो रज्जू ने दर्द का बहाना किया। “कुशुम जी मेरा पैर बहुत दर्द कर रहा है। प्लीज मालिश कर दो।”
कुशुम ने हिचकिचाते हुए पैर पर हाथ फेरा। रज्जू ने कहा, “थोड़ा ऊपर की तरफ। हाँ वहीँ। आपकी हाथों की नरमी तो कमाल है।”
कुशुम ने जल्दी से काम खत्म किया और चली गई। लेकिन रज्जू को लगा कि वह थोड़ा प्रभावित हुई है।
अगले दिन सुबह कुशुम फिर आई। रज्जू ने उसे चाय का ऑफर दिया जो उसका दोस्त बाहर से लाया था। “कुशुम जी एक कप पी लो। थक गई होगी।”
कुशुम ने मना किया लेकिन रज्जू ने जिद की। आखिरकार वह बैठ गई और चाय पीने लगी। रज्जू ने अपनी जिंदगी की कहानी सुनाई। “मैं एक छोटे शहर से हूँ। फैक्ट्री में काम करता था लेकिन हादसे में घायल हो गया। अब अकेला हूँ।”
कुशुम की सहानुभूति जागी। वह बोली, “सर सब ठीक हो जाएगा। आप जल्दी स्वस्थ हो जाओगे।”
रज्जू ने कहा, “तुम्हारी तरह कोई साथ हो तो जिंदगी अच्छी लगे। तुम्हारा बॉयफ्रेंड खुशकिस्मत होगा।”
कुशुम शरमाई और बोली, “मेरा कोई बॉयफ्रेंड नहीं है। मैं पढ़ाई में व्यस्त रहती हूँ।”
रज्जू ने मौका लपका, “तो फिर मैं तुम्हारा पहला दोस्त बन सकता हूँ। रोज बातें करेंगे।”
दोपहर में जब कुशुम दवा देने आई तो रज्जू ने उसका हाथ पकड़ा। “कुशुम तुम्हारी स्किन कितनी सॉफ्ट है।”
कुशुम ने हाथ छुड़ाया लेकिन मुस्कुराई। रज्जू को पता चल गया कि वह पिघल रही है। शाम को वह उसे अपने फोन पर गाने सुनाने लगा। कुशुम थोड़ी देर रुकी और सुनती रही।
रात को रज्जू ने कहा, “कुशुम कल आना। मैं तुम्हारे लिए चॉकलेट लाऊँगा।”
कुशुम बोली, “ठीक है सर। गुड नाइट।”
तीसरे दिन रज्जू ने चॉकलेट दी। कुशुम खुश हुई। वह बोली, “थैंक यू सर।”
रज्जू ने कहा, “कुशुम अब सर मत बोलो। रज्जू बोलो।”
कुशुम हँसी और बोली, “ठीक है रज्जू भैया।”
रज्जू ने विरोध किया, “भैया नहीं। बस रज्जू।”
बातों बातों में रज्जू ने उसके कंधे पर हाथ रखा। कुशुम ने हटाया नहीं। दोपहर में मालिश के बहाने उसने उसके हाथों को सहलाया। “तुम्हारे हाथ कितने नाजुक हैं।”
कुशुम बोली, “रज्जू आप शरारती हो।”
रज्जू ने कहा, “शरारत तो अभी शुरू हुई है।”
शाम को जब अस्पताल शांत हो गया तो रज्जू ने उसे बेड पर बिठाया और बालों में हाथ फेरा। कुशुम की साँसें तेज हो गईं। वह बोली, “रज्जू यहाँ कोई देख लेगा।”
रज्जू ने कहा, “कोई नहीं आएगा। बस थोड़ी देर।”
उसने कुशुम के गाल पर चुंबन कर दिया। कुशुम चौंक गई लेकिन भागी नहीं। वह बोली, “रज्जू यह गलत है। मैं कुंवारी हूँ।”
रज्जू ने कहा, “प्यार गलत नहीं होता। तुम्हें अच्छा लग रहा है न?”
कुशुम सिर झुका ली। रज्जू ने उसे गले लगा लिया।
चौथे दिन कुशुम खुद रज्जू के पास आई। वह बोली, “रज्जू कल रात मुझे नींद नहीं आई। तुम्हारी बातें याद आ रही थीं।”
रज्जू मुस्कुराया और उसे किस किया। इस बार कुशुम ने जवाब दिया। उनके होंठ मिले और जीभें लड़ने लगीं। रज्जू का हाथ उसके स्तनों पर गया। कुशुम सिहर उठी। “रज्जू ना।”
लेकिन रज्जू ने दबाया। कुशुम की सिसकियाँ निकलने लगीं। वह बोली, “यह पहली बार है। डर लग रहा है।”
रज्जू ने कहा, “मैं धीरे करूँगा। तुम्हें मजा आएगा।”
वह उसके यूनिफॉर्म के बटन खोलने लगा। कुशुम के स्तन बाहर आ गए। रज्जू ने चूसे। कुशुम चीखी, “आह रज्जू।”
रज्जू ने कहा, “शशश। चुप।”
उसने कुशुम की स्कर्ट ऊपर की और चूत पर हाथ फेरा। कुशुम गीली हो गई। वह बोली, “रज्जू मुझे अजीब लग रहा है।”
रज्जू ने उंगली डाली। कुशुम दर्द से कराह उठी। “दर्द हो रहा है।”
रज्जू ने रोका और कहा, “कल और करेंगे। अभी बस छूना।”
रात को कुशुम सोचती रही।
पाँचवें दिन कुशुम ड्यूटी पर आई तो उसके चेहरे पर शर्म थी। रज्जू ने कहा, “कुशुम आज पूरा मजा लेंगे।”
कुशुम बोली, “रज्जू मैं तैयार हूँ लेकिन डर लगता है।”
रज्जू ने उसे बेड पर लिटाया। यूनिफॉर्म उतार दी। कुशुम नंगी हो गई। उसकी चूत गुलाबी थी। रज्जू ने अपना लंड बाहर निकाला। कुशुम डर गई, “इतना बड़ा।”
रज्जू ने कहा, “चूसो पहले।”
कुशुम ने हिचकिचाते हुए चूसा। रज्जू के लंड पर लार चली गई। फिर रज्जू ने चूत पर सिरा रगड़ा। कुशुम बोली, “धीरे डालना।”
रज्जू ने धक्का दिया। कुशुम चीखी, “आह मार डाला।”
खून निकला। रज्जू ने धीरे धीरे चोदा। कुशुम का दर्द मजा में बदल गया। वह बोली, “रज्जू और जोर से।”
रज्जू ने तेज चोदा। कुशुम की चीखें गूँजने लगीं। “हाँ चोदो मुझे।”
रज्जू ने कमर पकड़ी और गहराई तक पहुँचा। आखिरकार वह झड़ गया। कुशुम भी orgasam में पहुँच गई।
कुशुम बोली, “रज्जू यह तो कमाल था।”
रज्जू ने कहा, “अभी तो शुरुआत है।”
छठे दिन कुशुम उत्सुक थी। वह बोली, “रज्जू आज फिर करना है।”
रज्जू ने कहा, “पहले तुम चूसो।”
कुशुम ने लंड मुंह में लिया और चूसा। रज्जू ने उसके बाल पकड़े और मुंह में चोदा। कुशुम गग करने लगी लेकिन जारी रखा।
फिर रज्जू ने उसे उल्टा किया और चूत में डाला। तेज धक्के दिए। कुशुम बोली, “हाँ रज्जू फाड़ दो मेरी चूत।”
रज्जू ने चोदते हुए उसके गांड पर थप्पड़ मारा। कुशुम चिल्लाई, “और मारो।”
वह कमरे में गूँज रही थी। रज्जू ने कहा, “तुम मेरी कुतिया हो।”
कुशुम बोली, “हाँ मैं तुम्हारी कुतिया हूँ। चोदो अपनी कुतिया को।”
दोनों थक गए लेकिन संतुष्ट।
सातवें दिन रज्जू ने कहा, “कुशुम आज गांड मारेंगे।”
कुशुम डर गई, “ना रज्जू दर्द होगा।”
रज्जू ने कहा, “ट्राई करो। मजा आएगा।”
उसने तेल लगाया और उंगली डाली। कुशुम सिसकी, “आह।”
धीरे धीरे लंड डाला। कुशुम रोने लगी, “निकलवा दो।”
लेकिन रज्जू ने धक्का दिया। दर्द कम हुआ तो कुशुम बोली, “चलो अब ठीक है।”
रज्जू ने गांड चोदी। कुशुम की चीखें, “हाँ गांड फाड़ दो।”
फिर योनि में भी चोदा। दिन भर सेक्स करते रहे।
आठवें दिन कुशुम ने खुद पहल की। वह बोली, “रज्जू आज तीन बार करेंगे।”
पहले ओरल, फिर योनि, फिर गुदा। रज्जू ने उसे डॉगी स्टाइल में चोदा। कुशुम की गांड लाल हो गई। वह बोली, “मारो थप्पड़।”
रज्जू ने मारा। कुशुम चिल्लाई, “मैं तुम्हारी रंडी हूँ।”
रज्जू ने कहा, “हाँ कुतिया रंडी। चोदूँगा रोज।”
वे पसीने से तर हो गए।
उन्होंने आखिरी बार तीव्र सेक्स किया। योनि, गुदा, मुंह सब भरा। कुशुम बोली, “मैं हमेशा तुम्हारी कुतिया रहूँगी।”
कहानी खत्म हुई लेकिन उनका रिश्ता जारी रहा………..