रोहतक के राज हूडा ने अक्टूबर की एक सच्ची घटना सुनाने का फैसला किया। राज ने गाँव में एक छोटा सा कमरा किराए पर लिया था।
ठीक सामने 8 फुट की गली के उस पार रहती थीं उनकी पचास साल की विधवा पड़ोसन रेखा।
रेखा अकेली नहीं थीं, उनके साथ उनका बीस साल का बेटा भी रहता था जो दिल्ली में पढ़ाई करता था और सिर्फ़ हफ्ते के आखिर में गाँव आता था।
राज को हमेशा से शादीशुदा औरतों और बड़ी उम्र की औरतों का शौक था। रेखा को देखते ही उनकी निगाहें उन पर अटक गईं।
रोज शाम को रेखा खेतों की तरफ या गाँव की सड़क पर टहलने निकलतीं, राज पीछे-पीछे चलता। बार-बार वही एक जिद: “रेखा darling, मुझे एक बार दे दो।”
रेखा पहले तो नजरअंदाज करतीं, फिर गालियाँ देतीं, फिर धमकियाँ। लेकिन राज हार नहीं मानता था। उसने दस दिन की छुट्टी ली और पूरा फोकस रेखा पर कर दिया।
एक दोपहर रेखा धान के खेत में गईं। राज भी पीछे-पीछे पहुँच गया। जैसे ही रेखा अकेली खड़ी हुईं, राज ने अपने पैंट का बटन खोला और खड़ा लंड निकालकर हिलाने लगा। रेखा चौंक गईं।
राज उनकी तरफ बढ़ा, लंड को और जोर से मसलने लगा। कुछ ही सेकंड में उसका गरम-गरम पानी खेत की मिट्टी पर गिर पड़ा।
रेखा ने तमाचा मार दिया। “हरामी कुत्ता, बेशर्म! दूर हट, वरना पुलिस बुला लूँगी!” राज हँसता हुआ भाग गया।
सात दिन बाद रेखा को रोहतक के PGIMS जाना था। उनकी बेटी की ननद को प्रसव पीड़ा हो रही थी। राज ने तुरंत ऑफर कर दिया, “मैं बाइक पर ले चलूँगा।”
रेखा पहले तो मना करती रहीं, लेकिन समय कम था। आखिरकार वे राज की बाइक पर सवार हो गईं।
वापसी की राह में रेखा ने सीधा सवाल किया, “तुम इतने बेशर्म कैसे हो? उम्र का लिहाज नहीं?”
राज ने जवाब दिया, “उम्र से क्या फर्क पड़ता है? असली चीज तो लंड और चूत है।” रेखा हँस पड़ीं। फिर गंभीर हो गईं।
ठीक है। आज रात नौ बजे आना। अगर मुझे मजा आया तो जितना चाहे चोद लेना, वरना फिर कभी मेरे सामने मत दिखना।” राज का दिल जोर-जोर से धड़कने लगा।
रात ठीक नौ बजे राज रेखा के घर पहुँचा। रेखा ने नहा लिया था। बाल अभी भी गीले थे। उन्होंने गेट बंद किया, पेशाब करके आईं और सीधे राज पर टूट पड़ीं।
दोनों का गहरा किस शुरू हो गया। राज ने रेखा की साड़ी उतारी, उनकी ढीली-ढीली छातियाँ चूसने लगा।
रेखा की साँसें तेज हो गईं। राज ने दो उँगलियाँ उनकी सूखी चूत में डालीं। रेखा ने कबूल किया, “आठ साल से कोई छुआ तक नहीं।”
राज घुटनों के बल बैठ गया। उसने रेखा की जांघें खोलीं और जीभ से उनकी चूत चाटने लगा। रेखा पहली बार किसी के मुँह से चाटवाती थीं।
उनका शरीर काँपने लगा। अचानक उनकी चूत से पानी की फुहार निकली और राज के मुँह में समा गई। रेखा चीख पड़ीं, “आह्ह्ह… क्या कर दिया तूने!”
राज ने अपना लंड रेखा के मुँह के पास ले जाकर कहा, “चूसो ना।” रेखा ने मना कर दिया, “मैंने कभी नहीं किया।” राज ने हार नहीं मानी।
उन्होंने रेखा की छातियाँ फिर चूसनी शुरू कर दीं। रेखा फिर से गीली हो गईं।
राज ने रेखा को बिस्तर के किनारे लिटाया। धीरे-धीरे अपना लंड उनकी चूत में घुसाने लगा। रेखा दर्द से सिकुड़ गईं। “धीरे… धीरे…” राज ने पहले हल्के-हल्के झटके मारे।
फिर एक जोरदार धक्का मारा और पूरा लंड अंदर तक घुसा दिया।
रेखा की साँस रुक गई। राज ने उनके मुँह पर अपना मुँह रखकर जोर-जोर से चूमना शुरू कर दिया।
थोड़ी देर बाद रेखा ने राज को पीछे धकेला और खुद ऊपर चढ़ गईं।
वे राज के लंड पर बैठकर तेजी से कूल्हे हिलाने लगीं। “आह्ह्ह… गयी मैं तो!” उनकी चीख के साथ ही उनका शरीर काँप उठा। वे राज की छाती पर गिर पड़ीं।
राज अभी भी खड़ा था। रेखा ने खुद को चारों हाथ-पैरों पर टिका लिया। “कुत्तिया बन जाऊँ?” राज ने उनकी कमर पकड़ी और पीछे से जोर-जोर से धक्के मारने लगा।
बीस-पच्चीस जोरदार झटकों के बाद राज ने रेखा की चूत में अपना सारा पानी छोड़ दिया।
उस रात के बाद रेखा राज को हर हफ्ते बुलाने लगीं। अब वे खुद राज के लंड को चूसने लगीं और अपनी गांड भी देने लगीं।
राज आज भी रेखा को नियमित रूप से चोदता है—चाहे चूत हो या गांड।