रेशमी खुद को लेडी राठौर कहती थी। उसकी शादी को दो महीने हो चुके थे। देव से शादी हुई थी जयपुर में।
अब उसकी बहन सुमन की शादी होने वाली थी। शादी के दिन रेशमी बेहद खूबसूरत लग रही थी।
पूरे परिवार वाले उसे छेड़ रहे थे कि नई नवेली दुल्हन कितना मजे ले रही होगी।
राजस्थानी रीति के अनुसार दूल्हा दुल्हन के घर रात भर रुकता था।
सुमन को कमरे में बैठा कर रेशमी ने जिजाजी को रोक लिया। “नाईक दो, तब अंदर जाने दूंगी।” जिजाजी हंस पड़े और सोने की अंगूठी दी। फिर वे अंदर गए।
रेशमी और भाभी खिड़की से झांकने लगीं। जिजाजी ने सुमन के कपड़े उतारे। दोनों बहनें देख रही थीं कि जिजाजी सुमन के स्तन दबा रहे थे, चूम रहे थे, चाट रहे थे।
रेशमी की सांसें तेज हो गईं। भाभी ने रेशमी के स्तन पर हाथ रखा। दोनों महिलाएं एक दूसरे को छूने लगीं।
जिजाजी ने अपनी मोटी सात इंच की लिंग निकाली। रेशमी की आंखें फटी की फटी रह गईं।
जिजाजी ने सुमन की जांघें खोलीं और उसकी चूत चाटने लगे। सुमन की सिसकारियां सुनकर रेशमी ने अपनी चूत में उंगली डाल ली।
जिजाजी ने सुमन को चोदा। सुमन चीख रही थी। रेशमी की चड्डी और पेटीकोट गीले हो चुके थे।
दोनों महिलाएं वहां से लौटीं। भाभी अपने देवर के साथ चली गई। रेशमी फिर से झांकने गई।
सुबह रेशमी ने जिजाजी से कहा, “सुमन कितनी जोर जोर से चीख रही थी।” जिजाजी समझ गए कि रेशमी सब देख चुकी थी।
उन्होंने कहा, “अगर मैं तुम्हें चीखा दूं तो क्या स्वीकार करोगी?” रेशमी ने कहा, “जब चीखा दोगे तब देखेंगे।”
विदाई के समय जिजाजी ने रेशमी को सोने की अंगूठी दी।
घर लौटकर रेशमी देव के साथ सोई लेकिन मन में जिजाजी की लिंग का ख्याल आ रहा था।
कुछ दिनों बाद जिजाजी आए। देव ने उनको होटल न जाकर घर पर रुकने को कहा।
अचानक देव को चार दिन का काम आ गया। वे चले गए। रेशमी और जिजाजी घर में अकेले रह गए।
रेशमी नहाकर गहरी गले वाली ब्लाउज पहनकर आई। जिजाजी उसके स्तनों को देखते रहे।
खाने के बाद जिजाजी आराम कर रहे थे। रेशमी उनके कमरे में गई। “कुछ चाहिए तो बताएं।”
जिजाजी ने शर्त याद दिलाई। रेशमी ने मुंह बनाया लेकिन अंदर से पागल हो रही थी।
जिजाजी ने उसका हाथ पकड़ लिया। बिजली सी लगी। रेशमी अपने कमरे में गई लेकिन दरवाजा खोल दिया।
जिजाजी अंदर आए। उन्होंने रेशमी को जोर से चूम लिया। उनके हाथ रेशमी के स्तनों पर घूमने लगे।
जिजाजी ने रेशमी को बिस्तर पर लिटा दिया। उन्होंने अपना कपड़ा उतारा। उनकी मोटी सात इंच की लिंग अंदरूनी में फूल रही थी।
जिजाजी ने रेशमी का ब्लाउज और ब्रा उतारा। उन्होंने उसके स्तनों को चूसा, दबाया, मरोड़ा। रेशमी की चूत से पानी बहने लगा।
जिजाजी ने उसे पूरी तरह नंगा कर दिया। उन्होंने अपनी लिंग रेशमी के हाथ में दे दी।
रेशमी ने जिजाजी की लिंग और अंडकोष को सहलाया। जिजाजी ने अपनी लिंग रेशमी के मुंह में डाल दी।
रेशमी को घुटन हुई लेकिन उन्होंने चूसना शुरू कर दिया।
जिजाजी ने रेशमी को लिटाया। उन्होंने उसकी चूत में उंगली डाली, फिर जीभ से चाटा।
रेशमी को पहली बार मुंह से चूत चाटने का मजा मिला।
जिजाजी ने अपनी लिंग रेशमी की चूत के मुंह पर रखी। जोर से धक्का मारा। सात इंच की पूरी लिंग अंदर घुस गई। रेशमी चीख पड़ी।
जिजाजी ने जोर जोर से धक्के मारे। उनकी लिंग रेशमी की गर्भाशय तक टकरा रही थी। दर्द और मजा दोनों हो रहा था।
जिजाजी ने रेशमी को कुत्ते की तरह करवट दी। कमरे में थप्पड़ की आवाजें गूंज रही थीं। रेशमी की चीखें निकल रही थीं।
आधे घंटे बाद जिजाजी ने रेशमी की चूत में अपना वीर्य छोड़ा। गर्म वीर्य रेशमी के अंदर भर गया।
जिजाजी की लिंग फिर से खड़ी हो गई। उन्होंने पूरी रात रेशमी को चोदा। हर पोजीशन में।
हर कोने में। रेशमी की चीखें पूरी रात घर में गूंजती रहीं।
सुबह जब जिजाजी गए तो रेशमी थक गई थी लेकिन खुश थी।