शाम के सात बजे थे। मोहन साहू, इक्कीस साल का छह फुट का मांसल जिम वाला लड़का, जौनपुर से शहर आकर पीसीएस की तैयारी कर रहा था। किराया देने के लिए वह मालकिन के कमरे की ओर बढ़ा।
दरवाजा अधखुला था। अंदर से तेज़ सिसकियाँ और चीखें आ रही थीं। मोहन ने झाँका। बिस्तर पर मालकिन पूरी तरह नंगी लेटी थी। उसकी उम्र अट्ठाईस-तीस के बीच थी, गोरी चमड़ी, मोटे-मोटे स्तन, काली-काली चूचियाँ।
तीन उँगलियाँ उसकी गीली चूत में तेज़ी से घुस-घुसकर निकल रही थीं। हर धक्के के साथ उसकी चूत से मोटी सफेद मलाई जैसा रस निकलकर चादर पर फैल रहा था।
मोहन का लंड तुरंत खड़ा हो गया। उसने छिपकर देखा। मालकिन की आँखें बंद थीं, मुँह खुला था, जीभ बाहर निकली हुई थी। वह जोर-जोर से चीख रही थी, “आह्ह्ह… हाँ… और गहरा… चोदो मुझे…” तीनों उँगलियाँ पूरी तरह अंदर घुस चुकी थीं।
उसकी चूत फूलकर बाहर निकल आई थी। अचानक उसका शरीर काँप उठा। मोटा सफेद रस फव्वारे की तरह उछलकर बाहर निकला। वह चीखती रही, “आह्ह्ह… निकल गया… मेरा पानी…”
मोहन ने देखा कि मालकिन की चूत अब भी फड़क रही थी। वह खुद को संभाल नहीं पा रहा था। लंड इतना सख्त हो चुका था कि पैंट फटने लगी।
मालकिन ने आँखें खोलीं। मोहन तुरंत हट गया। उसने बाहर से आवाज़ लगाई, “मालकिन जी, मैं किराया देने आया हूँ।”
अंदर हड़बड़ी मची। मालकिन ने जल्दी से साड़ी पहनी, बाल संवारे और दरवाजा खोला। चेहरा लाल था। मोहन अंदर आया। मालकिन ने पूछा, “कितना समय से खड़े हो?”
मोहन ने सीधा जवाब दिया, “मैंने सब देख लिया।”
मालकिन की साँस रुक गई। वह शरमा गई। आँखों में आँसू आ गए। मोहन ने उसके कंधे पर हाथ रखा। “मालकिन जी, कोई बात नहीं।”
मालकिन अचानक उसके सीने से लग गई। रोने लगी। “मेरा पति सऊदी में है। वहाँ दूसरी औरत से निकाह कर लिया। मुझे सालों से असली लंड नहीं मिला।”
मोहन ने उसे और कसकर पकड़ा। “मैं हूँ ना।”
मालकिन ने सिर उठाया। आँखों में भूख साफ दिख रही थी। “तुम मुझे चोदोगे?”
“हाँ।”
मालकिन ने दरवाजा बंद किया। ताला लगा दिया। दोनों ने कपड़े उतार दिए। मोहन का आठ इंच का मोटा लंड खड़ा हो चुका था। मालकिन ने उसे देखकर आँखें फाड़ दीं। “इतना बड़ा…”
मोहन ने मालकिन को बिस्तर पर लिटाया। उसके मोटे स्तनों को दोनों हाथों से दबाया। मुँह में लेकर चूसा। जीभ से काली चूची को चाटा। मालकिन चीख उठी, “आह्ह्ह… चूसो… और जोर से…”
मोहन ने एक-एक करके दोनों स्तनों को चूसा। दाँतों से काली चूची को काटा। मालकिन की चूत से फिर पानी निकलने लगा।
मालकिन ने एक शेल्फ खोली। अंदर से दो मैन्फोर्स कंडोम और एक बड़ा काला डिल्डो निकाला। साथ में वियाग्रा की गोली भी थी। उसने मोहन को कंडोम थमाए। “पहले डिल्डो से चोदो।”
मोहन ने डिल्डो लिया। मालकिन की मोटी जाँघें खोलीं। डिल्डो की मोटी नोक उसकी चूत के होठों पर रगड़ी। मालकिन काँप गई। “आह्ह्ह… अंदर डालो…”
मोहन ने डिल्डो को जोर से धकेला। पूरा डिल्डो मालकिन की चूत में घुस गया। मालकिन चीख पड़ी, “आह्ह्ह… फट गई…”
मोहन ने डिल्डो को तेज़ी से अंदर-बाहर करना शुरू किया। हर धक्के से मालकिन की चूत से सफेद रस निकलता रहा। मालकिन की जाँघें काँप रही थीं। वह चीख रही थी, “और जोर से… फाड़ दो मेरी चूत…”
मोहन ने डिल्डो निकाला। मालकिन की चूत खुली हुई थी। रस टपक रहा था। मोहन ने मैन्फोर्स कंडोम पहना। आठ इंच का मोटा लंड चमक रहा था।
मालकिन ने अपनी दोनों जाँघें उठाकर मुर्गी की तरह फैला दीं। “अब असली लंड डालो।”
मोहन ने लंड की नोक मालकिन की चूत पर रखी। जोर से धकेला। आधा लंड अंदर घुस गया। मालकिन चीख उठी, “आह्ह्ह… मर गई…”
मोहन ने पूरा लंड अंदर घुसा दिया। मालकिन की चूत कसकर लंड को पकड़ रही थी। मोहन ने तेज़ी से धक्के मारने शुरू किए। मालकिन की मोटी जाँघें हवा में लटक रही थीं। हर धक्के से बिस्तर हिल रहा था। मालकिन चीख रही थी, “आह्ह्ह… चोदो… और गहरा… फाड़ दो…”
मोहन ने मालकिन के स्तनों को दबाते हुए लंड को और तेज़ी से चलाया। मालकिन का शरीर काँप रहा था। अचानक उसकी चूत ने लंड को और कस लिया। मालकिन चीख पड़ी, “आह्ह्ह… निकल रहा है…”
मोटा सफेद रस मोहन के लंड पर बहने लगा। मोहन ने और जोर से धक्के मारे। मालकिन की चूत से रस छलकता रहा।
मोहन का लंड भी फड़क उठा। उसने जोर से एक अंतिम धक्का मारा। कंडोम के अंदर गरम माल निकल गया। मोहन ने लंड निकाला। कंडोम में मोटा माल भरा था। उसने कंडोम उतारा और फेंक दिया।
मालकिन की चूत अभी भी फड़क रही थी। मोहन ने अपना मुँह मालकिन की चूत पर रखा। जीभ से चूत के होठों को चाटा। मालकिन की जाँघें काँप गईं। “आह्ह्ह… चाटो…”
मोहन ने मालकिन की चूत को चूसा। जीभ अंदर डाली। मालकिन की चूत से फिर पानी निकलने लगा। मालकिन चीख रही थी, “आह्ह्ह… और चूसो…”
मोहन का लंड फिर खड़ा हो गया। मालकिन ने उसे देखा। “अब बिना कंडोम के चोदो।”
मालकिन ने मोहन को लिटाया। वह उसके ऊपर चढ़ गई। उसकी चूत मोहन के लंड पर रगड़ने लगी। मोहन ने मालकिन की कमर पकड़ी। मालकिन ने लंड को अपनी चूत में उतारा। पूरा लंड अंदर घुस गया।
मालकिन ने कमर घुमाकर लंड को अंदर-बाहर करना शुरू किया। मोहन ने मालकिन के स्तनों को दबाया। मालकिन की चूत गर्म और गीली थी। वह घंटे भर तक मोहन के लंड पर चढ़ती-उतरती रही।
मालकिन की चूत से बार-बार रस निकलता रहा। मोहन का लंड भी फड़क रहा था। मालकिन ने गति बढ़ा दी। मोहन ने मालकिन की कमर को कसकर पकड़ा। मालकिन चीख रही थी, “आह्ह्ह… निकल रहा है…”
मोहन का लंड भी फटने लगा। मालकिन ने अंतिम बार जोर से कमर घुमाई। मोहन का गरम माल मालकिन की चूत में भर गया। मालकिन ने लंड को कसकर पकड़ा। दोनों काँपते रहे।
उस दिन के बाद मालकिन हर रात मोहन के कमरे में आती। दोनों घंटों तक चोदते। मालकिन ने मोहन का किराया माफ कर दिया। मोहन अब मुफ्त में चोदता और मालकिन मुफ्त में चुदती।