रिहाना एक सुंदर मुस्लिम गृहिणी थी। उसकी उम्र करीब ३२ साल की थी। वह अपनी साड़ी में लिपटी हुई हमेशा आकर्षक लगती थी। उसके बाल काले और लंबे थे, जो उसकी कमर तक लहराते थे।
उसकी आंखें बड़ी-बड़ी और काली थीं, जो किसी को भी अपनी ओर खींच लेतीं। रिहाना का पति एक व्यापारी था, जो अक्सर बाहर रहता था। घर में वह अकेली ही रहती, अपने दो बच्चों के साथ।
लेकिन आजकल उसके मन में एक अजीब सी बेचैनी थी। शादी के कई साल हो चुके थे, लेकिन वैवाहिक जीवन में वो उत्साह कम हो गया था। रिहाना बस स्टैंड पर खड़ी थी, शहर के बाजार से कुछ सामान लेकर लौट रही थी। बस आने वाली थी, और वह थकी हुई लग रही थी।
जावेद एक युवक था, उम्र करीब २८ साल। वह लंबा, सुगठित शरीर वाला था। उसके चेहरे पर एक आकर्षक मुस्कान रहती थी। जावेद एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर था, जो रोज बस से ऑफिस जाता था।
आज वह थोड़ा जल्दी आ गया था। बस स्टैंड पर उसकी नजर रिहाना पर पड़ी। वह रिहाना को देखते ही मोहित हो गया। रिहाना की साड़ी हल्के नीले रंग की थी, जो उसके गोरे रंग पर चमक रही थी। जावेद ने सोचा, ‘क्या खूबसूरत औरत है।’ वह धीरे से उसके पास गया और बोला, ‘बहन, क्या आप भी इसी बस में जा रही हैं?’
रिहाना ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, ‘हां भाई साहब, मैं इसी बस में जा रही हूं। आज भीड़ बहुत है।’ जावेद ने कहा, ‘हां, लेकिन चिंता न करें। मैं आपकी मदद कर लूंगा। सीट मिल जाएगी।’ बस आ गई। दोनों अंदर चढ़े।
बस में जगह कम थी। जावेद ने रिहाना को अपनी सीट ऑफर की। रिहाना बैठ गई, और जावेद उसके बगल में खड़ा हो गया। बस चलने लगी। रास्ते में जावेद ने बातचीत शुरू की। ‘आप कहां रहती हैं?’
रिहाना ने कहा, ‘मैं शहर के बाहरी इलाके में रहती हूं। आप?’
जावेद ने जवाब दिया, ‘मैं भी उसी तरफ। नाम जावेद है। आपका नाम क्या है?’
‘रिहाना।’ उसने शर्माते हुए कहा। बातें बढ़ती गईं। जावेद ने रिहाना की तारीफ की, ‘आप बहुत सुंदर लग रही हैं। साड़ी बहुत अच्छी है।’ रिहाना शरमा गई, लेकिन उसे अच्छा लगा। बस में झटके लग रहे थे, और जावेद का हाथ कभी-कभी रिहाना के कंधे से छू जाता।
रिहाना को अजीब सा लगा, लेकिन वह कुछ न बोली। जावेद का दिल धड़क रहा था। वह रिहाना को अपने घर ले जाना चाहता था।
बस अपने स्टॉप पर रुकी। रिहाना उतरने लगी। जावेद ने कहा, ‘रिहाना जी, अगर आपको कोई मदद चाहिए तो मेरा नंबर ले लीजिए।’ उसने अपना नंबर दिया। रिहाना ने भी अपना नंबर शेयर किया।
घर पहुंचकर रिहाना ने सोचा, ‘वह लड़का अच्छा था।’ शाम को जावेद का मैसेज आया, ‘हैलो रिहाना जी, कैसी हैं आप?’ रिहाना ने रिप्लाई किया, ‘मैं ठीक हूं। आप?’
धीरे-धीरे उनकी बातें बढ़ीं। जावेद रिहाना को इम्प्रेस करने की कोशिश करता। वह उसके लिए शायरी भेजता, ‘तुम्हारी आंखें समंदर हैं, मैं डूब जाऊं तो क्या।’ रिहाना को पसंद आता।
कुछ दिनों बाद जावेद ने कहा, ‘रिहाना, क्या हम मिल सकते हैं? बस स्टैंड पर ही।’ रिहाना ने हिचकिचाते हुए हां कह दिया। अगले दिन वे मिले। जावेद ने रिहाना को एक छोटा सा गिफ्ट दिया, एक स्कार्फ। रिहाना खुश हो गई।
जावेद ने कहा, ‘रिहाना, तुम बहुत खास हो। मैं तुमसे प्यार करने लगा हूं।’ रिहाना चौंक गई, ‘जावेद, मैं शादीशुदा हूं। यह सही नहीं।’ लेकिन जावेद ने उसके हाथ पकड़े, ‘प्यार तो हो गया है।
बस एक बार मिलो मेरे घर।’ रिहाना का मन डगमगा गया। वह जानती थी कि यह गलत है, लेकिन जावेद की आंखों में कुछ था जो उसे खींच रहा था। आखिरकार वह मान गई।
जावेद का घर शहर के एक शांत इलाके में था। रिहाना वहां पहुंची। जावेद ने दरवाजा खोला और उसे अंदर ले गया। कमरे में हल्की रोशनी थी। जावेद ने कहा, ‘बैठो रिहाना। चाय बनाता हूं।
रिहाना सोफे पर बैठ गई। जावेद चाय लेकर आया। दोनों ने बातें कीं। जावेद धीरे से उसके पास आया और उसके कंधे पर हाथ रखा। रिहाना ने कहा, ‘जावेद, यह क्या कर रहे हो?’
जावेद ने कहा, ‘रिहाना, मैं तुम्हें चाहता हूं।’ वह उसके होंठों पर किस करने लगा। रिहाना ने पहले विरोध किया, लेकिन फिर खुद को रोक न सकी। दोनों किस करने लगे। जावेद के हाथ रिहाना की साड़ी पर घूमने लगे।
उसने साड़ी का पल्लू सरका दिया। रिहाना की ब्लाउज दिखा। उसके स्तन भरे हुए थे। जावेद ने ब्लाउज के हुक खोले। रिहाना की ब्रा नजर आई। वह काली रंग की थी। जावेद ने ब्रा भी उतार दी। रिहाना के स्तन बाहर आ गए। वे गोल और सख्त थे। जावेद ने उन्हें दबाया। रिहाना सिसकारी भरने लगी, ‘आह जावेद।’
जावेद ने उसके निप्पल चूसे। रिहाना का शरीर कांप रहा था। वह बोली, ‘जावेद, रुको। यह गलत है।’ लेकिन जावेद रुका नहीं। उसने रिहाना की साड़ी पूरी खोल दी। अब रिहाना पेटीकोट में थी।
जावेद ने पेटीकोट का नाड़ा खींचा। रिहाना की चूत नजर आई। वह गीली हो चुकी थी। जावेद ने अपनी उंगली डाली। रिहाना चीखी, ‘ओह जावेद, क्या कर रहे हो।’ जावेद ने कहा, ‘तुम्हारी चूत बहुत रसीली है।’
वह रिहाना को बेड पर ले गया। रिहाना नंगी लेट गई। जावेद ने अपना कपड़ा उतारा। उसका लंड बाहर आ गया। वह मोटा और लंबा था। रिहाना ने देखा और शर्मा गई। जावेद ने कहा, ‘चूसो इसे रिहाना।
रिहाना ने पहले मना किया, लेकिन जावेद ने जोर दिया। आखिरकार रिहाना ने लंड मुंह में लिया। वह चूसने लगी। जावेद आनंद में चिल्लाया, ‘हां रिहाना, ऐसे ही।’ रिहाना का मुंह लंड से भरा था। वह जीभ घुमाती रही। जावेद ने उसके सिर को पकड़कर धक्के दिए। लंड गले तक गया। रिहाना खांसने लगी, लेकिन जारी रखा।
कुछ मिनट बाद जावेद ने लंड बाहर निकाला। वह बोला, ‘अब चूत में डालूंगा।’ रिहाना ने कहा, ‘हल्के से जावेद।’ जावेद ने लंड चूत पर रगड़ा। रिहाना गीली थी। लंड आसानी से अंदर चला गया। रिहाना चीखी, ‘आह, बहुत बड़ा है।
जावेद ने धक्के मारने शुरू किए। तेज-तेज। रिहाना के स्तन उछल रहे थे। वह बोली, ‘जावेद, और जोर से। चोदो मुझे।’ जावेद ने स्पीड बढ़ाई। कमरा उनकी चीखों से गूंज रहा था। रिहाना की चूत से रस बह रहा था। जावेद ने उसके पैर उठाए और गहराई से मारा।
रिहाना ऑर्गेज्म के करीब थी। वह बोली, ‘जावेद, मैं आ रही हूं।’ जावेद ने कहा, ‘मैं भी।’ दोनों एक साथ झड़ गए। जावेद का वीर्य रिहाना की चूत में भर गया। दोनों हांफ रहे थे। लेकिन जावेद रुका नहीं। वह बोला, ‘अब गांड मारूंगा।
रिहाना डर गई, ‘नहीं जावेद, दर्द होगा।’ जावेद ने कहा, ‘चिंता मत करो, मजा आएगा।’ उसने रिहाना को उल्टा किया। गांड ऊपर की। जावेद ने थूक लगाया। फिर लंड दबाया। रिहाना चीखी, ‘आह, दर्द हो रहा है।’
जावेद धीरे-धीरे अंदर डाला। गांड टाइट थी। लंड पूरा गया। जावेद ने धक्के मारे। रिहाना को दर्द के बाद मजा आने लगा। वह बोली, ‘हां जावेद, चोदो गांड।’ जावेद ने जोर-जोर से मारा।
रिहाना की गांड लाल हो गई। आखिरकार जावेद ने गांड में झड़ दिया। दोनों थक गए। रिहाना बोली, ‘जावेद, यह कभी मत बताना किसी को।’ जावेद ने कहा, ‘नहीं बताऊंगा। हम फिर मिलेंगे।’
लेकिन यह कहानी यहीं खत्म नहीं होती। रिहाना घर लौटी, लेकिन उसके मन में जावेद का ख्याल घूम रहा था। अगले दिन फिर मैसेज आया। जावेद ने कहा, ‘रिहाना, कल फिर आओ।’ रिहाना ने हां कह दिया।
इस बार वह और उत्साहित थी। घर से निकलते समय उसने बच्चों को कहा, ‘मां बाजार जा रही है।’ जावेद के घर पहुंची। जावेद ने दरवाजा खोला और उसे किस किया। ‘आ गई मेरी जान।’ रिहाना मुस्कुराई।
दोनों बेडरूम में गए। जावेद ने रिहाना की साड़ी उतारी। आज रिहाना ने लाल साड़ी पहनी थी। उसके अंदर काली लिंगरी थी। जावेद ने कहा, ‘बहुत सेक्सी लग रही हो।’ उसने लिंगरी भी खोल दी।
रिहाना नंगी हो गई। जावेद ने उसके शरीर को चाटना शुरू किया। पहले गर्दन, फिर स्तन, निप्पल चूसे। रिहाना सिसकार रही थी। ‘जावेद, आह।’ जावेद नीचे गया। रिहाना की चूत पर जीभ लगाई। चाटने लगा। रिहाना के पैर फैल गए। वह बोली, ‘हां, चाटो मेरी चूत।’
जावेद की जीभ चूत के अंदर घुस रही थी। रिहाना का रस बह रहा था। वह चिल्लाई, ‘जावेद, मैं झड़ रही हूं।’ जावेद ने मुंह से सब पी लिया। फिर उठा और अपना लंड बाहर निकाला। आज लंड और सख्त था।
रिहाना ने खुद से पकड़ा और चूसने लगी। गहराई से। जावेद ने उसके बाल पकड़े। ‘अच्छे से चूसो रंडी।’ रिहाना को गाली सुनकर मजा आया। वह तेज चूसी। लंड गीला हो गया।
जावेद ने रिहाना को लिटाया। चूत में लंड डाला। इस बार बिना किसी रोक-टोक के। तेज धक्के। रिहाना की चीखें, ‘चोदो जावेद, फाड़ दो चूत।’ जावेद ने पोजीशन बदली।
रिहाना की गांड ऊपर। लंड चूत में। जोर-जोर से। रिहाना के स्तन लटक रहे थे। जावेद ने उन्हें पकड़ लिया। धक्के जारी। दोनों पसीने से तर थे। रिहाना फिर झड़ी। जावेद ने चूत से लंड निकाला और गांड में डाल दिया। रिहाना बोली, ‘हां, गांड चोदो।’
गांड में लंड घुसा। रिहाना दर्द और मजा में चिल्लाई। आखिर में दोनों झड़े। जावेद का वीर्य गांड में। वे लेटे रहे। रिहाना बोली, ‘जावेद, तुम्हें तो चुदासी लगती है।’ जावेद हंसा, ‘तुम्हें भी तो मजा आ रहा है।’ इस तरह उनकी मुलाकातें बढ़ती गईं। रिहाना अब जावेद की भोसड़ी बन चुकी थी। हर बार नई सैर।
एक दिन जावेद ने कहा, ‘रिहाना, आज कुछ नया करेंगे।’ रिहाना उत्सुक हो गई। जावेद ने उसे बांध लिया। हाथ-पैर बेड से। रिहाना नंगी बंधी थी। जावेद ने आंखों पर पट्टी बांधी। फिर उसके शरीर पर फेदर से सहलाया।
रिहाना हंसने लगी। ‘क्या कर रहे हो?’ जावेद ने कहा, ‘चुप रहो।’ फिर उसके निप्पल पर आइस क्यूब रगड़ा। रिहाना सिहर गई। ‘आह ठंडा।’ जावेद ने चूत पर भी आइस लगाया। फिर जीभ से गर्म किया। रिहाना पागल हो गई।
जावेद ने लंड मुंह में डाला। रिहाना बंधी होने से ज्यादा चूस न सकी। लेकिन कोशिश की। जावेद ने चूत चोदी। बंधी रिहाना और उत्तेजित थी। धक्के तेज। फिर गांड। आज गांड ज्यादा ढीली हो गई थी।
जावेद ने तीनों होल भरे। मुंह, चूत, गांड। रिहाना चिल्लाती रही। आखिर में जावेद ने उसके चेहरे पर झड़ दिया। वीर्य रिहाना के मुंह और आंखों पर। रिहाना ने चाट लिया। ‘स्वादिष्ट है।’
रिहाना की जिंदगी बदल गई। वह अब रोज जावेद से मिलने को बेताब रहती। पति घर आता तो वह नॉर्मल बने रहती। लेकिन मन में जावेद का लंड घूमता। एक बार पति ने संदेह किया,
रिहाना, तुम्हें कुछ हो गया है?’ रिहाना ने कहा, ‘कुछ नहीं।’ लेकिन अंदर से डर गई। फिर भी जारी रखा। जावेद के साथ नई-नई चीजें। एक दिन बाहर पार्क में। रात के समय। जावेद ने रिहाना को बेंच पर झुकाया। साड़ी ऊपर की और चूत में डाल दिया। आसपास कोई न था। रिहाना दबे स्वर में चीखी। जोर से चोदा।
जावेद ने कहा, ‘रिहाना, तुम मेरी चुदासी हो।’ रिहाना बोली, ‘हां, मैं तुम्हारी भोसड़ी हूं। चोदो मुझे हमेशा।’ उनकी कहानी जारी रही। रिहाना की चूत और गांड जावेद के लंड की गुलाम हो गई।
हर मुलाकात में नया आनंद। जावेद कभी ऊपर से चोदता, कभी नीचे से। रिहाना कभी राइडिंग करती। लंड पर उछलती। स्तन हिलते। दोनों के बीच का बंधन मजबूत हो गया। लेकिन गुप्त। रिहाना जानती थी कि यह खतरे भरा है, लेकिन रोक न सकी।
समय बीतता गया। रिहाना गर्भवती हो गई। लेकिन पता न चला कि पति का या जावेद का। जावेद ने कहा, ‘चिंता मत करो, मैं संभाल लूंगा। आखिर में बच्चा पैदा हुआ। रिहाना की जिंदगी में अब दोहरी खुशी। पति के साथ परिवार, जावेद के साथ सेक्स। वह चुदासी रिहाना बन चुकी थी।