मैं रमेश हूं, अब 30 साल का हो चुका हूं, लेकिन आज भी वो सुनहरी यादें ताजा हैं जो मेरी जिंदगी की सबसे उत्तेजक कहानी हैं। ये कहानी मेरी खूबसूरत भाभी के साथ है, जो मेरे बड़े भाई की पत्नी बनीं और मुझे उनकी जवानी का स्वाद चखने का मौका दिया।
ये सब तब हुआ जब मैं सिर्फ 18 साल का था, स्कूल और कॉलेज के बीच की उम्र में, जब हॉर्मोनस चरम पर थे और हर लड़की की तरफ नजरें घूमती रहतीं। लेकिन भाभी का आना तो जैसे मेरी दुनिया ही बदल गया।
मेरा रंग गोरा है, लंबाई 5 फुट 11 इंच, शरीर आकर्षक जो लड़कियों को अपनी तरफ खींचता है। मैं हमेशा से ही लड़कियों को इम्प्रेस करने में माहिर रहा हूं। घर में नीचे मां, बड़ा भाई और मैं रहते थे।
ऊपर दूसरे भाई की पत्नी और बड़ा भाई की बीवी। फिर मेरे बड़े भाई की शादी हुई और घर में एक नई भाभी आईं। वाह, क्या खूबसूरती थी उनकी! गोरी चिट्टी, बेदाग त्वचा, फिगर 34-28-30 का परफेक्ट, जैसे किसी मूर्तिकार ने तराशा हो।
मेरे भाई का रंग थोड़ा सांवला था, लेकिन भाभी की चमक तो जैसे सितारों से टकरा रही थी। शादी के बाद से ही मेरे दिल में अजीब सी हलचल मच गई। मैं सुबह स्कूल जाता, दिन में भाई के ऑफिस, लेकिन अब घर ही मन में घूमने लगा।
मेरा कमरा भाई और भाभी के कमरे से सटा हुआ था। रात को जब वो दोनों प्यार की भूख मिटाते, तो भाभी की सिसकारियां और भाई की भारी सांसें मेरे कानों में गूंजतीं। वो आवाजें मेरे शरीर को आग लगा देतीं, सपनों में भाभी का चेहरा घूमता।
मैं लड़कियों को पटाने में एक्सपर्ट था, लेकिन अब टारगेट भाभी पर था। शादी के 15 दिन बाद मैंने भाभी से मजाक शुरू किया, नॉन-वेज जोक्स शेयर किए। वो मुस्कुरातीं, और मुझे लगा ये ग्रीन सिग्नल है। 20-22 दिन बाद तो मैं कन्फर्म हो गया कि अगर ट्राई करूं तो वो मान जाएंगी।
एक दिन मैंने स्कूल और ऑफिस स्किप कर दिया। भाई को फोन पर कहा कि पेट दर्द हो रहा है। दोपहर 1 बजे घर पहुंचा। मां बाहर के कमरे में सो रही थीं, भाभी अपने कमरे में। मैंने खाना खाया और सो गया। 3 बजे उठा तो भाभी जाग चुकी थीं। उन्होंने पूछा, “रमेश, क्या हुआ? तुम्हें दर्द तो नहीं हो रहा?”
मैंने कहा, “हां भाभी, पेट में थोड़ा दर्द है। लेकिन अब ठीक लग रहा है।”
मां को अपनी रूटीन याद आई, 3:30 बजे मंदिर जाना और 6:30-7 बजे दूध लेकर लौटना। ऊपर वाली बड़ी भाभी बच्चे के साथ व्यस्त रहतीं, नीचे कम ही आतीं। घर में अब सिर्फ मैं और भाभी। मेरे दिमाग में शरारतें घूमने लगीं। मैंने कहा, “भाभी, चलिए कोई मूवी देखते हैं।”
वो बोलीं, “नहीं रमेश, मूवी नहीं।”
फिर मैंने कहा, “तो कार्ड्स खेलते हैं। रमी का गेम।”
भाभी मुस्कुराईं, “ठीक है, खेलते हैं।”
हमने रमी शुरू की। मैंने जानबूझकर ऐसा प्ले किया कि मेरी क्वीन उनके जैक पर आ गई। मैंने मजाक में कहा, “भाभी, बेगम गुलाम पर आ गई। मतलब मैं आप पर हूं।” और उनके गाल पर एक चुंबन दे दिया।
भाभी चौंक गईं, “अरे रमेश, ये क्या?”
मैं हंसते हुए बोला, “भाभी, देवर का हक है। गुलाम पर बेगम का राज।”
वो हंस पड़ीं, लेकिन आंखों में शरारत चमक रही थी। गर्मी लग रही थी, मैंने कहा, “भाभी, यहां गर्मी बहुत है। आपके एसी वाले कमरे में चलें?”
“हां, चलो।” वो सहमत हो गईं।
उनके कमरे में भाई की परफ्यूम की खुशबू फैली थी। मैंने उनका वार्डरोब खोला, अंदर नाइटीज, ब्रा, पैंटीज दिखीं। मैंने एक रेड ब्रा निकाली और कहा, “भाभी, ये ट्राई करके दिखाओ ना। कितनी सेक्सी लगेगी।”
भाभी शरमा गईं, “नहीं रमेश, ये क्या बकवास।” और वार्डरोब बंद करने लगीं।
मैंने उन्हें गोद में उठा लिया, उनके मुलायम होंठों पर किस कर दिया। वो छटपटाईं, “छोड़ो रमेश, ये गलत है।”
लेकिन मैंने उनकी कमर कसकर पकड़ ली, होंठ चूसने लगा। उनकी हिचकिचाहट कम हो गई, सांसें तेज हो गईं। मैंने उन्हें बिस्तर पर लिटा दिया। वो बोलीं, “नहीं रमेश, मत करो।”
उनकी आंखों में प्यास झलक रही थी। मैंने कहा, “भाभी, सिर्फ किस ही करूंगा, कुछ और नहीं।”
मैं उनके ऊपर झुका, साड़ी का पल्लू सरक गया। मैंने फिर होंठ चूसे, अब वो भी जवाब देने लगीं। मेरा 7 इंच का लंड पैंट में सख्त हो गया, उनकी जांघों से दबा।
उनकी सांसें रुकने लगीं। मैंने साड़ी ऊपर चढ़ाई, कपड़े वाले लंड से उनकी रेशमी जांघें रगड़ीं। फिर आधी पैंट और अंडरवियर उतार दिया, अब नंगा लंड उनकी जांघों को छू रहा था।
मैं नीचे सरका, उनकी पैंटी पर किस किया। भाभी खुद अपने स्तनों को मसल रही थीं, सिसकीं, “रमेश, मैं बर्दाश्त नहीं कर पा रही।”
मैंने पैंटी खींच ली, उनकी चूत गीली और गर्म थी। मैंने लंड से रगड़ा, वो पागल हो गईं। ब्लाउज के बटन खोले, ब्रा उतारी, गुलाबी निप्पल्स देखकर मैं पागल हो गया, ब्लू फिल्मों से भी बेहतर।
मैंने स्तन चूसे, जीभ निप्पल्स पर नाची। वो सिसकीं, “आह रमेश।”
फिर चिल्लाईं, “चोदो मुझे, लंड डालो।”
मैंने लंड चूत पर रखा, हल्का धक्का दिया। वो चीखीं, “आह, बहुत मोटा है, दर्द हो रहा।”
उनके रस से आसानी हुई, जोरदार धक्का मारा, 5 इंच अंदर। किस करके चीखें दबीं। मैं रुका नहीं, तेजी से चोदा, पूरा 7 इंच अंदर। दर्द और सुख में वो तड़प रही थीं। 10 मिनट बाद दूसरी बार झड़ीं, पूरी तरह आनंद में।
वो बोलीं, “मैं चूसना चाहती हूं।” साड़ी और पेटीकोट उतार दिया। दोनों नंगे। पहली बार भाभी को पूरी नंगी देखा, मखमली शरीर, अप्सरा जैसी, गोरी त्वचा, पतली कमर, भरे स्तन, माधुरी या श्रीदेवी से बेहतर।
वो बिस्तर पर बैठीं, मुझे लिटाया, लंड मुंह में लिया। “अगर पता होता तेरा लंड इतना कमाल का है, तो शादी के दो दिन बाद ही चुदवा लेती।”
मैंने चूत में उंगली डाली, स्तन मसले, होंठ से चूत तक किस किया, शरीर क्रीम जैसा। वो बोलीं, “अब डालो।” जोरदार धक्का, चीखीं लेकिन जल्दी रिदम मैच किया, कूल्हे उठाकर स्वागत किया। 25 मिनट चोदा, बोलीं, “अंदर झाड़ो।” गर्म वीर्य चूत में डाला।
मां आने वाली थीं, जल्दी कपड़े पहने। उसके बाद कई मौके लपके, वो कहानियां बाद में बताऊँगा………..