नमस्कार दोस्तो, कैसे हो सब?
मेरा नाम रानी है। उम्र बीस साल की हो चुकी है। कॉलेज की दूसरी साल में हूँ। जब मैं उन्नीस साल की थी तो पहली बार किसी लड़के के साथ सोई थी।
वो मेरी सहेली का भाई था। हमने पूरे साल में सिर्फ तीन बार ही चुदाई की। उसके बाद से मेरी भूख बढ़ती गई। अब मुझे रोज़ किसी न किसी मर्द की ज़रूरत लगने लगी थी।
कॉलेज के ठीक सामने एक छोटा सा साइबर कैफे है। मालिक एक युवक है, नाम राहुल। क़रीब पच्चीस साल का होगा।
लंबा, साँवला, क़द काठी अच्छी। लेकिन बेहद शर्मा जाने वाला। लड़कियों से बात करने में घबराता। कभी किसी को इशारा नहीं करता। मैं रोज़ वहाँ जाती। कभी प्रिंटआउट, कभी प्रोजेक्ट, कभी सिर्फ़ उसे देखने।
एक शाम साढ़े आठ बजे मैंने देखा कैफे खाली था। शटर आधा बंद। मैं अंदर घुसी। राहुल काउंटर पर बैठा मोबाइल देख रहा था।
मैंने एक पीसी पर बैठकर आवाज़ दी, “भाई, ये वाला सिस्टम हैंग हो रहा है।”
वो आया। कुर्सी खींचकर मेरे पास बैठ गया। स्क्रीन पर कुछ क्लिक करते हुए उसकी जांघ मेरी जांघ से टकरा गई। मैंने हिलकर और ज़्यादा सटकर बैठ गई।
उसने शरमाते हुए अपनी जांघ हटाई। मैंने फिर सटा दी। इस बार उसने हिम्मत करके मेरी जांघ पर हल्के से हाथ फेरा। मैंने भी उसके घुटने पर उँगलियाँ घुमाईं।
“रोमांटिक सॉन्ग डाउनलोड करना सिखाओगे?” मैंने पूछा। वो यूट्यूब खोलने लगा। मैंने सीधे उसके लंड पर हाथ रख दिया। वो हड़बड़ा गया। “अरे क्या कर रही हो?”
“तुम्हें पसंद हूँ क्या?” मैंने पूछा।
“हम तो जानते भी नहीं एक-दूसरे को…”
मैंने उसके गाल पर चूम लिया। फिर कॉलर पकड़कर जबरदस्ती उसके होंठों पर मुँह मार दिया। जीभ अंदर डालकर चूमने लगी।
वो भी जवाब देने लगा। उसके हाथ मेरे स्तनों पर आ गए। मैंने उसका दूसरा हाथ अपनी गांड पर रख दिया। वो दोनों तरफ़ दबाने लगा। मैं सिसकारियाँ भरने लगी।
“कस्टमर आ सकते हैं,” उसने घबराकर कहा।
“तो मिलो ना प्राइवेट में। रविवार सुबह छह बजे। कोई नहीं आएगा।”
वो मान गया।
रविवार को मैं पाँच बजे उठी। चूत के बाल साफ़ कर लिए। जॉगिंग सूट पहनकर निकल पड़ी। कैफे का शटर आधा खुला था। अंदर हल्की लाइट जल रही थी। रूम फ्रेशनर की खुशबू फैली हुई थी।
राहुल ने मुझे देखते ही गले लगा लिया। दस मिनट तक हम चूमते रहे। उसने मेरे होंठ काट लिए। फिर ज़िप खोलकर ब्रा के ऊपर से मेरे स्तन दबाने लगा।
ब्रा उतार दी। मुँह में लेकर चूसने लगा। “और ज़ोर से,” मैंने कहा। वो जोर-जोर से चूसने लगा।
मैंने उसकी कमीज़ उतारी। पैंट नीचे की। अंडरवीयर उतारा। उसका लंड खड़ा था। मैं घुटनों के बल बैठ गई। मुँह में ले लिया।
वो मेरे सिर को पकड़कर आगे-पीछे करने लगा। पाँच मिनट तक मुँह चोदता रहा।
फिर मैं टेबल पर लेट गई। टाँगें फैला दीं। उसने लंड लगाया। चूत बहुत तंग थी। आधा भी नहीं गया। मैंने थूक लगाकर उँगली डाली।
फिर उसने एक ही झटके में आधा घुसा दिया। मैं चीख पड़ी। दर्द हो रहा था। आठ-दस झटके और मारे तो पूरा अंदर चला गया। दर्द कम होने लगा।
अब वो तेज़ी से चोदने लगा। मेरे स्तन निचोड़ता, होंठ चूमता। मैं भी नीचे से उठ-उठकर ले रही थी। दस मिनट बाद वो बोला, “मैं झड़ने वाला हूँ।”
“बाहर निकालो, मुँह में दूँगी,” मैंने कहा।
वो बाहर निकला। मैंने घुटनों के बल बैठकर मुँह में ले लिया। गरम-गरम पानी की तरह उसके वीर्य की धार मेरे गले में उतरी। मैंने सब पी लिया।
आधा घंटा हम नंगे लेटे रहे। चूमते रहे।
“अगली बार गांड मारूँगा,” उसने कहा।
“अभी नहीं, अगली बार,” मैंने वादा किया।
हमने कपड़े पहने। उसने मेरी गांड सहलाई और याद दिलाया, “वादा मत भूलना।”
मैं मुस्कुराई और बाहर निकल गई।