ऑफिस बॉय ने मुझे जमकर चोदा

(Office Boy Ne Mujhe Jamkar Choda)

मधुलेखा 37 साल की शादीशुदा औरत थी। दिल्ली की एक छोटी कंपनी में अकाउंटेंट के पद पर काम करती थी। पति के साथ 15 साल की शादी हो चुकी थी, दो बच्चे भी थे, लेकिन बिस्तर पर संतुष्टि बिल्कुल नहीं मिलती थी।

पति की उम्र बढ़ने के साथ उनकी यौन इच्छा कम हो गई थी। कभी-कभी महीने में एक बार भी सेक्स नहीं होता था। मधुलेखा को लगता था कि उसकी जिंदगी सिर्फ बच्चों और ऑफिस के कामों तक सीमित हो गई है।

कंपनी में एक सीनियर मैनेजर नवीन भी काम करता था। मधुलेखा की उससे दो साल से चल रही थी, लेकिन नवीन का लिंग छोटा था और वे जल्दी झड़ जाते थे। मधुलेखा को उनसे कभी पूरा मज़ा नहीं आता था। वह सिर्फ़ इसलिए उनके साथ रहती थी क्योंकि ऑफिस में उनकी पोज़ीशन अच्छी थी और वे मधुलेखा को कुछ खास सुविधाएँ दे देते थे।

एक दिन कंपनी में नया क्लर्क शामिल हुआ। उसका नाम संजीव था। उम्र सिर्फ़ 24 साल। कद-काठी अच्छी, कंधे चौड़े, और आँखों में एक अलग ही चमक। मधुलेखा ने पहली नज़र में ही देख लिया कि संजीव उसकी मोटी गांड की तरफ़ देख रहा था।

मधुलेखा की फिगर 36-28-36 थी। भारी-भरी छातियाँ, पतली कमर और गोल-गोल बड़ी गांड। वह अक्सर टाइट कुर्ते पहनती थी, जिससे उसकी गांड और भी उभर कर दिखती थी।

संजीव का नज़र अक्सर मधुलेखा की गांड पर टिक जाता। मधुलेखा को यह पसंद आने लगा। वह जान-बूझकर उसके सामने झुककर फाइलें निकालती, या चलते समय कूल्हों को ज़्यादा झुलाती। शाम के समय डुपट्टा उतार देती ताकि संजीव उसकी भारी छातियों को देख सके। संजीव भी पीछे नहीं रहता। वह मधुलेखा को चाय पिलाने जाता, या कोई छोटा-मोटा काम करने लगता। दोनों के बीच धीरे-धीरे बातें बढ़ने लगीं।

रात के समय जब ऑफिस खाली होता, दोनों देर तक बातें करते। संजीव ने एक दिन साफ़ कहा, “मैडम, आप इतनी खूबसूरत हो कि मैं रात को सो नहीं पाता।” मधुलेखा ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, “और तुम्हें क्या लगता है, मैं तुम्हें देखकर क्या सोचती हूँ?” संजीव ने सीधा सवाल किया, “क्या आप मेरे साथ सेक्स करना चाहेंगी?” मधुलेखा ने बिना हिचकिचाए कहा, “हाँ, बहुत दिनों से मन कर रहा था।”

कंपनी की तरफ़ से ऋषिकेश का ट्रिप रखा गया। बस में संजीव मधुलेखा के पास बैठा। रास्ते में नवीन का मधुलेखा से फोन आया। नवीन ने कहा, “मधुलेखा, तुम्हारी गांड देखकर मन करता है कि अभी चोद दूँ।” संजीव ने यह बात सुनी और चुप हो गया।

मधुलेखा ने उसे समझाया, “वो सिर्फ़ बातें करता है, असल में कुछ कर नहीं पाता।” बस में संजीव ने मधुलेखा का हाथ पकड़ लिया और कहा, “मैं आपको पूरी रात चोदना चाहता हूँ।” मधुलेखा ने सर हिलाकर हाँ कर दी।

ट्रिप खत्म होने के बाद संजीव मधुलेखा को अपने मेरठ वाले कमरे में ले गया। कमरा छोटा था, लेकिन बिस्तर साफ़ था। मधुलेखा ने एक सेक्सी नाइटी पहन रखी थी, जिसके अंदर से उसके निप्पल साफ़ दिख रहे थे। संजीव ने उसे दीवार से लगाकर चूमा।

उसकी जीभ मधुलेखा के मुँह में घुस गई। दोनों की साँसें तेज़ हो गईं। संजीव ने नाइटी का फीता खोला और मधुलेखा की भारी छातियाँ बाहर निकाल लीं। उसने एक निप्पल को मुँह में लेकर चूसना शुरू कर दिया। मधुलेखा की साँसें और तेज़ हो गईं।

संजीव ने मधुलेखा को बिस्तर पर लिटा दिया। उसने उसकी सलवार का नाड़ा खोला और हाथ अंदर डालकर उसकी गीली चूत को छुआ। उँगलियाँ अंदर घुसा दीं। मधुलेखा की चूत इतनी गीली थी कि उँगलियाँ आसानी से फिसल रही थीं।

संजीव ने कहा, “तुम्हारी चूत तो पानी छोड़ रही है।” मधुलेखा ने जवाब दिया, “तुम्हारे लंड को देखकर ही हो रहा है।”

संजीव ने अपनी पैंट उतारी। उसका लंड मोटा और लंबा था। मधुलेखा ने उसे हाथ में लिया और मुँह में डाल लिया। उसने 10 मिनट तक जोर-जोर से चूसा।

संजीव का लंड पूरी तरह खड़ा हो गया। मधुलेखा की जीभ उसके लंड के सिरे पर घूम रही थी। संजीव ने मधुलेखा के बाल पकड़कर उसका मुँह और गहराई तक धकेला।

फिर संजीव ने मधुलेखा को 69 पोज़ीशन में लिटाया। उसने अपना मोटा लंड मधुलेखा की चूत के अंदर धकेला। शुरू में मधुलेखा को दर्द हुआ क्योंकि संजीव का लंड नवीन से कहीं ज़्यादा मोटा था।

लेकिन धीरे-धीरे दर्द मज़े में बदल गया। संजीव जोर-जोर से चोदने लगा। मधुलेखा की छातियाँ ऊपर-नीचे हो रही थीं। वह चीख रही थी, “और जोर से चोदो, मेरी चूत फाड़ दो।”

संजीव ने मधुलेखा को कुत्ते वाली पोज़ीशन में कर दिया। उसकी मोटी गांड ऊपर उठ गई। संजीव ने एक हाथ से गांड पर थप्पड़ मारा और कहा, “तुम्हारी मोटी गांड देखकर मन करता है कि रोज़ चोदूँ।” मधुलेखा ने जवाब दिया, “मैं तुम्हारी रंडी हूँ, जितना चाहो चोदो।

संजीव ने और ज़ोर से चोदना शुरू कर दिया। उसकी गांड पर लाल निशान पड़ गए।

दो घंटे तक लगातार चुदाई चली। मधुलेखा को पाँच बार चरमसुख आया। उसकी चूत सूज गई थी। संजीव ने आखिर में अंदर ही झड़कर मधुलेखा की चूत भर दी। दोनों थककर बिस्तर पर गिर गए। मधुलेखा ने संजीव को गले लगाया और कहा, “आज के बाद मैं तुम्हारी हो गई।”

उस रात के बाद दोनों का गुप्त रिश्ता शुरू हो गया। ऑफिस में दोनों नज़रों से ही बातें करते। शाम को संजीव मधुलेखा को अपने कमरे में बुलाता। मधुलेखा आती और पूरी रात चुदवाती।

संजीव उसे अलग-अलग पोज़ीशन में चोदता। कभी दीवार से टिका कर, कभी बाथरूम में, कभी फर्श पर। मधुलेखा हर बार नई-नई चीखें निकालती।

एक दिन संजीव ने मधुलेखा को ऑफिस की टेबल पर ही लिटा दिया। उसने उसकी साड़ी ऊपर चढ़ाई और अंदर से चोदना शुरू कर दिया। मधुलेखा डर रही थी कि कोई आ जाएगा, लेकिन मज़ा इतना था कि वह रुक नहीं पा रही थी।

संजीव ने कहा, “अगर कोई आ गया तो उसे भी दिखा देंगे कि तुम्हारी चूत कैसे चुदती है।” मधुलेखा ने और ज़ोर से चीख मारी।

संजीव की उम्र कम थी, लेकिन उसकी ताकत और स्टैमिना बहुत ज़्यादा थी। वह घंटों तक चोद सकता था। मधुलेखा को पहली बार ऐसा मज़ा मिल रहा था। वह हर रात नई-नई बातें सीख रही थी।

संजीव उसे “रंडी”, “चूत की भूखी औरत” जैसे शब्दों से पुकारता। मधुलेखा को यह गंदी बातें सुनकर और भी मज़ा आता।

कई बार संजीव मधुलेखा की गांड भी मारता। शुरू में मधुलेखा को दर्द होता, लेकिन बाद में उसे आदत हो गई। संजीव धीरे-धीरे उसकी गांड में उँगली डालता, फिर पूरा लंड घुसा देता।

मधुलेखा चीखती, लेकिन रुकने का नाम नहीं लेती। उसकी गांड भी संजीव के लंड की आदि हो गई।

मधुलेखा अब नवीन से बिल्कुल दूर हो गई। नवीन को समझ नहीं आ रहा था कि मधुलेखा क्यों टाल रही है।

वह सोचता कि शायद मधुलेखा को कोई नया मिल गया है। लेकिन उसे पता नहीं था कि मधुलेखा का नया दोस्त उसका ही 24 साल का क्लर्क है।

संजीव और मधुलेखा का रिश्ता गहराता गया। दोनों ऑफिस के बाद होटल भी जाते। वहाँ पूरी रात नंगी होकर चुदाई करते।

संजीव मधुलेखा को अलग-अलग पोशाकें पहनाता। कभी नर्स का यूनिफॉर्म, कभी स्कूल गर्ल की ड्रेस। मधुलेखा हर बार नई भूमिका निभाती और संजीव को और ज़्यादा मज़ा देती।

एक बार संजीव ने मधुलेखा को कार में ही चोद दिया। पार्किंग में कार खड़ी थी। मधुलेखा ने सीट पीछे की और संजीव के ऊपर बैठकर चोदना शुरू कर दिया।

दोनों को डर था कि कोई देख लेगा, लेकिन यही डर और भी मज़ा दे रहा था। मधुलेखा चीख रही थी, “मेरी चूत फाड़ दो, लोग देख रहे हैं।”

संजीव की उम्र 24 थी, लेकिन उसका अनुभव मधुलेखा से ज़्यादा था। वह जानता था कि औरत को कहाँ छूने से मज़ा आता है।

वह मधुलेखा के क्लिटोरिस को उँगली से रगड़ता, निप्पलों को चूसता, और साथ ही जोर-जोर से चोदता। मधुलेखा को हर बार नया-नया मज़ा मिलता।

मधुलेखा अब सोचती कि उसकी जिंदगी संजीव के आने से बदल गई है। वह हर रात इंतज़ार करती कि कब संजीव उसे चोदे।

उसकी चूत अब संजीव के लंड की आदि हो गई थी। नवीन का छोटा लंड अब उसे बिल्कुल पसंद नहीं आता था।

संजीव भी मधुलेखा के बिना नहीं रह पाता था। वह ऑफिस में मधुलेखा की गांड देखकर ही उत्तेजित हो जाता। दोनों की नज़रें मिलतीं और दोनों समझ जाते कि रात को क्या होने वाला है।

इस तरह दोनों का गुप्त रिश्ता चलता रहा। मधुलेखा की चूत हर रात सूज जाती, लेकिन वह सुबह तरोताज़ा होकर ऑफिस आती।

संजीव भी हर बार नई एनर्जी के साथ चोदता। दोनों को एक-दूसरे की ज़रूरत थी।

मधुलेखा अब जानती थी कि उसकी असली संतुष्टि संजीव के मोटे लंड में है। वह हर रात नई-नई पोज़ीशन ट्राई करती।

कभी ऊपर बैठकर, कभी पीछे से, कभी खड़े होकर। संजीव भी हर बार नया मज़ा देता।

दोनों का रिश्ता अब सिर्फ़ सेक्स तक सीमित नहीं था। वे एक-दूसरे से खुलकर बातें भी करते।

संजीव मधुलेखा को अपनी जिंदगी के बारे में बताता, मधुलेखा भी अपने पति और बच्चों के बारे में। लेकिन बिस्तर पर दोनों जानवर बन जाते।

संजीव की ताकत और मधुलेखा की भूख दोनों का मेल एकदम सही था। दोनों को एक-दूसरे की ज़रूरत थी।

मधुलेखा की चूत अब संजीव के लंड के बिना सूख जाती। संजीव भी मधुलेखा की मोटी गांड और भारी छातियों के बिना शांत नहीं रह पाता।

इस तरह दोनों का रिश्ता चलता रहा। मधुलेखा हर रात नई-नई चीखें निकालती, संजीव हर बार नया मज़ा देता।

दोनों की जिंदगी बदल गई थी। मधुलेखा अब जानती थी कि उसकी असली खुशी संजीव के मोटे लंड में है।