हाय… मेरा नाम रेशमी है और मेरी उम्र 21 साल है। मेरे घर में मम्मी, पापा, मेरी दादी और एक छोटा भाई है। हमारा घर गांव के किनारे पर है, जहां नदी बहती है। वो नदी का किनारा मेरी जिंदगी का हिस्सा बन चुका है। बचपन से ही मैं वहां जाकर अकेले समय बिताती हूं। लेकिन अब, 21 साल की उम्र में, वो जगह मेरे लिए कुछ और ही मायने रखती है। मेरी हाइट 5 फीट 3 इंच है, मेरी चूचियों का नाप 32 है, कमर 28 है और मेरी गांड का नाप 35 है।
पहले मेरी गांड 32 की हुआ करती थी, पर चुदाई के कारण मेरी गांड फैल गई है। हां, मैंने कई बार चुदाई की है। गांव में लड़के मुझे देखते ही ललचाते हैं। मेरी चूचियां भरी हुई हैं, गोल और सख्त, जो ब्लाउज में से बाहर झांकने को बेताब रहती हैं। कमर पतली है, लेकिन गांड इतनी चौड़ी हो गई है कि साड़ी पहनते वक्त भी वो लहराती रहती है।
आज का दिन भी वैसा ही था। सुबह उठी तो घर में सब व्यस्त थे। मम्मी रसोई में खाना बना रही थीं, पापा खेत की ओर जा रहे थे। दादी पूजा कर रही थीं और भाई स्कूल के लिए तैयार हो रहा था। मैंने एक साधारण सलवार कमीज पहनी। ऊपर से देखने में सादी लगती हूं, लेकिन अंदर से सब कुछ उत्तेजित था।
मेरी चूत सुबह से ही गीली हो रही थी। कल रात मैंने एक सपना देखा था, जिसमें तीन मजबूत आदमी मुझे नदी किनारे घेर लेते थे। वो सपना इतना जीवंत था कि आज भी मेरी चूत में सनसनाहट हो रही थी।
मैंने घर से निकलते वक्त मम्मी से कहा, “मम्मी, मैं नदी किनारे घूमने जा रही हूं। थोड़ी देर में लौट आऊंगी।” वो मुस्कुराईं और बोलीं, “सावधान रहना बेटी।” लेकिन वो नहीं जानतीं कि मैं क्या करने जा रही हूं। नदी का किनारा सुनसान होता है दोपहर के समय।
पेड़ों की छांव में, पानी की आवाज के बीच, वहां कोई नहीं आता। मैं तेज कदमों से चल पड़ी। रास्ते में हवा मेरी कमीज को उड़ा रही थी, मेरी गांड की हर लहर पर वो जोर दे रही थी।
जैसे ही नदी किनारे पहुंची, मैंने जूते उतार दिए। नंगे पैर घास पर चलना अच्छा लग रहा था। पानी साफ था, छोटी-छोटी लहरें किनारे को चूम रही थीं। मैंने कमीज का बटन खोल दिया। गर्मी थी, और अकेली थी तो कोई हर्ज नहीं।
मेरी चूचियां अब आजाद हो गईं। 32 साइज की वो गोलाकार चूचियां, भूरे रंग के निप्पल्स के साथ, हवा में थिरक रही थीं। मैंने आंखें बंद कीं और पानी की ओर बढ़ी। चूत में खुजली हो रही थी। मैंने हाथ नीचे किया और सलवार के ऊपर से अपनी चूत को दबाया। “आह…” एक हल्की सिसकी निकल गई।
अचानक, पीछे से आवाज आई। “क्या कर रही हो यहां?” मैं घबरा गई और पलटी। तीन आदमी खड़े थे। मजबूत कद-काठी वाले, शायद पास के गांव से मछुआरे। एक का नाम था रामू, दूसरा श्याम और तीसरा गोविंद। वो हंस रहे थे। रामू ने कहा, “देखो, ये लड़की तो नंगी हो रही है।”
मैंने जल्दी से कमीज बंद की, लेकिन देर हो चुकी थी। मेरी चूचियां उन्होंने देख ली थीं। श्याम आगे आया, “भाई, ये तो अकेली है। क्या कहो, थोड़ा मजा करें?” मेरी चूत में एक अजीब सी उत्तेजना हुई। डर था, लेकिन कहीं न कहीं ये सपने जैसा लग रहा था।
गोविंद ने मेरी बांह पकड़ ली। “चल, पानी में उतर।” वो मुझे घसीटते हुए नदी की ओर ले गए। मैं विरोध करने की कोशिश की, लेकिन उनकी पकड़ मजबूत थी। पानी में घुसते ही ठंडक ने मेरी चूत को और गीला कर दिया। रामू ने पीछे से मेरी कमीज फाड़ दी।
अब मैं ऊपर से नंगी थी। मेरी चूचियां पानी में तैर रही थीं। श्याम ने मेरी सलवार खींची। “वाह, क्या गांड है! 35 इंच की कमाल।” वो मेरी गांड पर थप्पड़ मारे। दर्द और सुख का मिश्रण।
अब मैं पूरी तरह नंगी थी। तीनों ने अपने कपड़े उतार दिए। उनके लंड बाहर आ गए। रामू का लंड मोटा और लंबा था, कम से कम 8 इंच का। श्याम का थोड़ा पतला लेकिन सख्त, और गोविंद का काला और मोटा। तीनों लंड मेरी ओर इशारा कर रहे थे। मैंने देखा तो चूत से रस टपकने लगा। “क्या करोगे मेरा?” मैंने हल्के से पूछा। रामू हंसा, “तेरी चूत और गांड को चोदेंगे। अकेली चूत को तीन लंड मिलेंगे।”
उन्होंने मुझे घेर लिया। रामू ने आगे से मेरी चूचियां पकड़ीं। उसके हाथों में मेरी चूचियां दब रही थीं। वो निप्पल्स को चूसा। “उम्म… स्वादिष्ट।” श्याम पीछे से आया और मेरी गांड पर अपना लंड रगड़ने लगा। गोविंद ने मेरे होंठों पर अपना लंड रख दिया। “चूस इसे।” मैंने मुंह खोला और चूसना शुरू किया। गोविंद का लंड मुंह में घुसा, गला तक। मैं खांस रही थी, लेकिन रोक नहीं पाई।
रामू ने मेरी चूत में उंगली डाली। “गीली हो गई है। तैयार है चुदाई के लिए।” वो अपनी उंगली अंदर-बाहर करने लगा। मेरी चूत की दीवारें सिकुड़ रही थीं। श्याम ने मेरी गांड पर थूक लगाया और अपना लंड सिरे से दबाया। “अंदर जाएगा।” दर्द हुआ जब वो घुसा।
मेरी गांड पहले से फैली हुई थी, लेकिन फिर भी तंग लग रही थी। वो धीरे-धीरे अंदर बढ़ा। अब तीनों छेद भरे हुए थे। मुंह में गोविंद का लंड, चूत में रामू का, और गांड में श्याम का।
वो मुझे चोदने लगे। रामू का लंड मेरी चूत की गहराई छू रहा था। हर धक्के के साथ पानी छलक रहा था। श्याम पीछे से जोर-जोर से मार रहा था, मेरी गांड लाल हो रही थी। गोविंद मेरे बाल पकड़कर मुंह में लंड ठोक रहा था। “चूस जोर से।” मैं चूस रही थी, लार टपक रही थी। मेरी चूचियां रामू के सीने से रगड़ खा रही थीं। सांसें तेज हो गईं। “आह… आह… चोदो मुझे।” मैं चिल्लाई।
कुछ मिनट बाद, गोविंद ने अपना लंड बाहर निकाला। “अब चूत में डालूंगा।” रामू ने जगह दी। अब गोविंद मेरी चूत में घुसा। उसका काला लंड मेरी गुलाबी चूत को चीर रहा था। रामू अब मेरे मुंह में। श्याम गांड में ही था। तीनों ने रोटेशन शुरू किया। हर कोई हर छेद आजमा रहा था। मेरी चूत रस से भरी हुई थी, गांड ढीली पड़ रही थी। चूचियां काटी जा रही थीं, निप्पल्स पर दांत लगे।
नदी का पानी हमारे चारों ओर छलका रहा था। सूरज ऊपर चमक रहा था, लेकिन हमें फर्क नहीं पड़ रहा था। श्याम ने कहा, “तेरी गांड कितनी मस्त है। पहले से चुद चुकी है।” मैंने हां में सिर हिलाया। “हां, कई बार। लेकिन तीन लंड पहली बार।
वो हंसे और जोर से धक्का मारा। मेरी चूत में कंपन हो गया। रामू ने मेरी चूचियों को दबाते हुए कहा, “34 साइज की ये चूचियां, कितनी सॉफ्ट।” वो चूसते रहे।
अब हम पानी से बाहर आ गए। घास पर लेटा दिया मुझे। गोविंद ने मेरी टांगें उठाईं और चूत में लंड डाला। मिशनरी पोजिशन में चोदने लगा। रामू और श्याम मेरी चूचियों पर थे। एक-एक करके चूस रहे थे। मैं अपनी चूत को कस रही थी, गोविंद के लंड को। “फाड़ दो मेरी चूत।” वो तेज हो गया। पसीना बह रहा था सबका। मेरी कमर 28 इंच की, पतली, उनके हाथों में आ रही थी।
फिर उन्होंने मुझे डॉगी स्टाइल में किया। श्याम नीचे लेटा, मैं उसके ऊपर। उसका लंड मेरी चूत में। रामू पीछे से गांड में। गोविंद खड़ा होकर मुंह में। दो लंड एक साथ चूत और गांड में। दर्द और सुख का तूफान। मैं चिल्ला रही थी, “हां… और जोर से… तीनों लंड मुझे भर दो।” वो हंस रहे थे, चोद रहे थे। मेरी गांड 35 इंच की, अब और फैल रही थी।
करीब आधा घंटा चला ये। मेरी चूत में पहली बार झड़न आई। रस बाहर निकला, श्याम के लंड पर। वो बोला, “गीली हो गई।” फिर रामू ने गांड में झाड़ दिया। गर्म वीर्य मेरी गांड में भर गया। गोविंद ने मुंह में। मैंने निगल लिया। लेकिन वो रुके नहीं। फिर से शुरू। अब रामू चूत में, गोविंद गांड में, श्याम मुंह में। चक्र चलता रहा।
सूरज ढलने लगा। हम थक चुके थे। मेरी चूत लाल, गांड खुली, मुंह में स्वाद। तीनों ने मेरी चूचियां चाटीं, किस किया। रामू ने कहा “फिर आना यहां,”
घर लौटते वक्त मेरी चूत में दर्द था, लेकिन खुशी भी। नदी का किनारा अब मेरी चूत का अड्डा बन गया। रास्ते में मैं धीरे-धीरे चल रही थी। सलवार कमीज फिर से पहन ली थी, लेकिन अंदर सब कुछ गीला और चिपचिपा था। गांड से वीर्य रिस रहा था, चूत लाल और सूजी हुई।
हर कदम पर सनसनाहट हो रही थी। घर पहुंची तो मम्मी ने पूछा, “कहां थी इतनी देर?” मैंने मुस्कुराकर कहा, “नदी किनारे घूमी, थोड़ा पानी में उतरी।” वो संतुष्ट हो गईं। लेकिन मेरी चूचियां अभी भी निप्पल्स पर दांतों के निशान लिए हुए थीं। मैं कमरे में गई और दरवाजा बंद किया।
बिस्तर पर लेटी तो सारी यादें ताजा हो गईं। तीन लंडों की चुदाई, वो धक्के, वो चीखें। मेरी हाथ खुद ही चूत पर चला गया। उंगली अंदर डाली, लेकिन संतुष्टि नहीं मिली। कल रात का सपना सच हो गया था, लेकिन मन में और की चाहत हो रही थी।
अगले दिन सुबह उठी तो शरीर में थकान थी। चूचियां दुख रही थीं, गांड में हल्का दर्द था।
दोस्तों, ये थी रेशमी की कहानी।