मेरा नाम विकास है। मैं बिहार में रहता हूँ। मेरी शादी हो चुकी है। मैं एक किसान हूँ। अभी मेरी उम्र 30 की है। मैं अपनी बीबी को रोज रात में नंगा करके चोदता हूँ। पर दोस्तों आज आपको अपनी साली की दास्तान सुना रहा हूँ।
पिछले महीने की बात है मेरे खेतों में गन्ने की फसल कटनी थी। अब फसल पूरी तरह से पक गयी थी और एक एक गन्ना 6 फुट से लम्बा हो गया था। अब फसल को काटना था। इसलिए मेरी बीबी ने अपने भाई राजेश और बहन मोनिका को मेरे घर पर बुला लिया।
राजेश 25 साल का था, मजबूत बदन वाला लड़का, जो शहर में मजदूरी करता था। लेकिन मोनिका, वाह रे मोनिका! वो तो 22 साल की जवान औरत थी, जिसकी शादी अभी नहीं हुई थी। दिखने में एकदम गोरी चिट्टी, लंबे काले बाल, और फिगर ऐसा कि देखते ही लंड खड़ा हो जाए। 36-28-38 का माल, चूचियां भरी हुईं, गांड गोल मटोल।
वो गांव में ही रहती थी, लेकिन कभी कभार शहर आ जाती। जब वो घर आई, तो मैंने उसे देखा और मन ही मन सोचा, ‘ये साली की भोसड़ी तो चखनी पड़ेगी।’
बीबी ने कहा, ‘विकास जी, कल से फसल कटाई शुरू करो। राजेश मदद करेगा, और मोनिका भी खेतों में पानी देगी।’ मैंने हामी भरी, लेकिन आंखें मोनिका पर टिक गईं। रात को सोते समय बीबी को चोदा, लेकिन दिमाग में मोनिका घूम रही थी। मेरा लंड बीबी की चूत में घुसाते हुए भी मोनिका की कल्पना कर रहा था।
अगली सुबह, हम सब खेत की ओर निकले। गन्ने के खेत हरे-भरे, घने, जहां अंदर घुस जाओ तो कोई न देख सके। राजेश कटाई का काम संभाल रहा था, बीबी घर पर रह गई। मोनिका पानी की बाल्टी लेकर आई, साड़ी पहने, जो उसके बदन से चिपकी हुई थी। पसीने से गीली, चूचियां नजर आ रही थीं। मैंने उसे बुलाया, ‘मोनिका, यहां आ, पानी दे।’
वो नजदीक आई, बाल्टी नीचे रखी। मैंने जानबूझकर हाथ छुआ उसके हाथ से। वो शर्मा गई, लेकिन कुछ बोली नहीं। ‘ उसने कहा जीजा जी, गर्मी बहुत है,’ मैंने कहा, ‘हां री, लेकिन तू तो और भी गर्म लग रही है।’ वो हंस पड़ी, ‘क्या कह रहे हो?’ मैंने मौका देखा और कहा, ‘चल, खेत के अंदर चलें, वहां छांव है।’
हम गन्नों के बीच चले गए। वहां अंधेरा सा था, हवा चल रही थी। मैंने उसे दीवार की तरह सटा लिया। ‘मोनिका, तू कितनी हसीन है। तेरी भोसड़ी चख लूं?’ वो चौंकी, ‘जीजा जी, क्या बकवास कर रहे हो? दीदी को पता चला तो?’ लेकिन उसकी आंखों में चमक थी।
मैंने साड़ी का आंचल खींचा, ब्लाउज खोला। उसके भूरे निप्पल्स बाहर आ गए। मैंने मुंह लगाया, चूसने लगा जोर-जोर से। मोनिका सिसकी, ‘आह… जीजा जी… मत करो…’
लेकिन वो रुकी नहीं। मेरा हाथ साड़ी के अंदर गया, पेटीकोट में। चूत पर हाथ फेरा, गीली थी। ‘साली, तू तो तैयार है।’ मैंने पेटीकोट ऊपर किया, पैंटी उतारी। उसकी भोसड़ी गुलाबी, बाल कटे हुए। मैंने घुटनों पर बैठकर जीभ लगाई। चाटा क्लिट को, उंगलियां अंदर डाली। मोनिका की टांगें कांपने लगीं, ‘ओह भैया… कितना अच्छा… चोदो मुझे…’
मैंने पैंट खोली, मेरा 7 इंच का मोटा लंड बाहर निकला। सीधा खड़ा। मोनिका ने देखा, ‘भैया, इतना बड़ा? दर्द होगा।’ मैंने कहा, ‘चल, झुक।’ वो गन्ने पकड़कर झुकी, गांड ऊपर की। मैंने लंड का सिरा भोसड़ी पर रगड़ा। एक धक्का मारा, आधा अंदर। वो चीखी, ‘आह! धीरे…’ मैंने पूरा घुसेड़ दिया।
टाइट चूत, चाप-चाप आवाज आने लगी। मैंने कमर पकड़कर जोर-जोर से ठोका। मोनिका की चीखें गूंज रही थीं, ‘हां जीजा जी… चोदो साली की भोसड़ी… फाड़ दो…’
10 मिनट तक पेला, फिर झड़ गया। गर्म माल उसकी चूत में भर दिया। वो भी कांपकर ऑर्गेज्म पर पहुंची। हम हांफते रहे। ‘मोनिका ने कहा, जीजा जी, ये गलत था, लेकिन मजा आया।’ मैंने कहा, ‘रोज करेंगे।’
शाम को घर लौटे, किसी को शक न हुआ। रात को बीबी को चोदा, लेकिन मोनिका याद आ रही थी। अगले दिन फिर खेत गए। राजेश आगे काट रहा था, हम पीछे। मैंने मोनिका को खींचा गन्नों में। इस बार साड़ी पूरी उतार दी। नंगी मोनिका, बदन चमक रहा। मैंने उसे जमीन पर लिटाया।
मिशनरी में लंड डाला। जोरदार धक्के मारे। उसके पैर मेरे कंधों पर। चूत गीली, फिसलन भरी हो रही थी। ‘जीजा जी… और गहरा… तेरी साली की चूत तेरे लंड की भूखी है…’
मैंने चूचियां दबाईं, निप्पल्स काटे। मोनिका तड़पी। फिर डॉगी पोजिशन में गांड पकड़कर ठोका। हाथ से भोसड़ी मली। वो चिल्लाई, ‘हां… गांड भी मार लो जीजा…’ मैंने लूब के लिए थूक लगाया, उंगली डाली गांड में। फिर लंड घुसाया। टाइट सेंक, दर्द से मोनिका रोई, लेकिन सह गई। ‘चोदो… फाड़ दो गांड…’
हमने दो राउंड किए। पहला चूत में, दूसरा गांड में। मेरा माल बाहर निकाला, उसके मुंह पर गिराया। मोनिका ने चाटा। ‘स्वादिष्ट जीजा जी।’ धीरे-धीरे ये रोज का रूटीन बन गया। सुबह खेत में चुदाई, शाम को घर पर बीबी के साथ। लेकिन मोनिका की भोसड़ी का स्वाद अलग था।
एक दिन बारिश हुई। खेत में कीचड़ भर गया था। राजेश घर चला गया, लेकिन मोनिका रुकी। ‘जीजा जी, पानी में चुदाई करें?’ मैंने हां कहा। गन्नों के बीच, बारिश में नंगे हो गए। मैंने उसे गन्ने से सटाया, लंड चूत में घुसेड़ा। पानी बह रहा, चूत फिसल रही। जोर-जोर से ठोका। बिजली चमक रही, मोनिका की चीखें निकल रही थी। ‘आह… जीजा जी… बारिश में तेरी चुदाई… कमाल…’
मैंने उसे उठाया, कमर में पैर लपेटे। खड़े होकर चोदा। उसकी चूचियां मेरे मुंह में। माल चूत में छोड़ा। फिर मुंह में लिया, ब्लोजॉब करवाया। मोनिका घुटनों पर, लंड चूस रही थी। जीभ घुमाती, गेंदें चाटती। मैंने सिर पकड़कर गला चोदा, गले में झाड़ा। वो खांसी, लेकिन निगल गई।
फसल कटाई चल रही थी, लेकिन हमारी चुदाई भी। एक रात, बीबी और राजेश सो गए। मोनिका मेरे कमरे में घुस आई। ‘जीजा जी, रात में चोदो।’ मैंने कंबल में लंड दिया। वो ऊपर चढ़ी, उछलने लगी। धीरे-धीरे, आवाज न हो। लेकिन मजा दोगुना। चूत टाइट पकड़ रही। मैंने नीचे से धक्के दिए। मोनिका का मुंह दबाया, ऑर्गेज्म आया।
मोनिका अब बिंदास हो गई। खुद आइडियाज देती थी। एक दिन खेत में, उसने कहा, ‘जीजा जी, गन्ने से बांध दो।’ मैंने उसके हाथ गन्ने से बांधे। फिर चाबुक की तरह गन्ना उसके बदन पर फेरा। चूचियां लाल हो गईं। फिर चोदा, वो तड़पी, ‘हां… दर्द और मजा… चोदो साली को…’
हमने ग्रुप जैसा कुछ सोचा, लेकिन राजेश को न बताया। एक बार बीबी शक करने लगी, ‘मोनिका कहां घूमती रहती है?’ मैंने टाल दिया। लेकिन चुदाई जारी रही, गर्मी में पसीने से तर हो जाते लेकिन चुदाई चलती रहती। सर्दी में कंबल में खूब चुदाई की। मोनिका की भोसड़ी अब मेरी हो गई थी।
फसल कट गई, लेकिन मोनिका रुक गई। ‘जीजा जी, शादी तक आऊंगी।’ मैंने कहा, ‘रोज चोदूंगा।’ उसके बर्थडे पर मैंने सरप्राइज दिया । खेत में फूल बिछाए, खूब नंगी चुदाई की, तीन राउंड लगाए: चूत, गांड, मुंह मे। मोनिका थक गई थी लेकिन बहुत खुश थी, मोनिका बोली जीजा जी, तेरी साली की भोसड़ी तेरी है अब।’
दोस्तों, ये थी मोनिका की कहानी।कमेंट्स करो और मुठ मारो। अपने दोस्तों को भी पढ़ाओ और मुठ मारने पर मजबूर करो।